ज्ञात_से_मुक्ति_by_J_Krishnamurti_Krishnamurti_Foundation_Varanasi.pdf
67.7 MB
ज्ञात से मुक्ति by J. Krishnamurti - Krishnamurti Foundation Varanasi
@Aadhyatmik_Sahitya
#Jkrishnmurti
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#Jkrishnmurti
जीवन_भाष्य_खण्ड_1_जेo_कृष्णमूर्ति.pdf
134 MB
Commentaries on living(1) का हिन्दी अनुवाद
जीवन के विस्तृत फलक को समेटती हुई कृष्णमूर्ति की यह अद्भुत पुस्तक–श्रृंखला है। इनमें जीवन का हर पहलू आ जाता है।इसका गद्य, पद्य का–सा आभास देता है। प्रत्येक अध्याय प्रकृति के वर्णन से आरम्भ होता है। इसके बाद अज्ञात व्यक्तियों या उनके समूह का चित्रण होता है जो कि कृष्णमूर्ति के पास तमाम समस्याओं से जूझते हुए आते हैं, और मानव कल्याण, सामाजिक न्याय एवं संबोधि की तलाश करते हैं। इनके साथ जो संवाद होता है वह पाठकों के सम्मुख एक दर्पण का कार्य करता है। #Jkrishnmurti
@Aadhyatmik_Sahitya
जीवन के विस्तृत फलक को समेटती हुई कृष्णमूर्ति की यह अद्भुत पुस्तक–श्रृंखला है। इनमें जीवन का हर पहलू आ जाता है।इसका गद्य, पद्य का–सा आभास देता है। प्रत्येक अध्याय प्रकृति के वर्णन से आरम्भ होता है। इसके बाद अज्ञात व्यक्तियों या उनके समूह का चित्रण होता है जो कि कृष्णमूर्ति के पास तमाम समस्याओं से जूझते हुए आते हैं, और मानव कल्याण, सामाजिक न्याय एवं संबोधि की तलाश करते हैं। इनके साथ जो संवाद होता है वह पाठकों के सम्मुख एक दर्पण का कार्य करता है। #Jkrishnmurti
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जीवन_भाष्य–खंड_2–जिद्दू_कृष्णमूर्ति_Sarva_Seva_Sangha_Publication.pdf
108.9 MB
प्रत्येक मनुष्य का जीवन अपने में समुद्र-सा गहन और हिमालय-सा विशाल है। किसी भी परंपरा या लीक पर चलकर मनुष्य स्वतंत्र और सुखी कैसे रह सकता है?
इस कृति के पृष्ठों में झांकिए और आप पाएंगे कि यह पुस्तक आप ही के लिए है।
'जीवन-भाष्य' जिद्दू कृष्णमूर्ति कृत Commentaries on Living का हिन्दी रूपांतर है। यह पुस्तक इस पुस्तक-श्रृंखला का दूसरा खंड है।
जीवन-भाष्य (खंड- 1) पहले ही प्रेषित किया जा चुका है। https://t.me/Aadhyatmik_Sahitya/528
जिद्दू कृष्णमूर्ति की अन्य पुस्तकें – #Jkrishnmurti
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इस कृति के पृष्ठों में झांकिए और आप पाएंगे कि यह पुस्तक आप ही के लिए है।
'जीवन-भाष्य' जिद्दू कृष्णमूर्ति कृत Commentaries on Living का हिन्दी रूपांतर है। यह पुस्तक इस पुस्तक-श्रृंखला का दूसरा खंड है।
जीवन-भाष्य (खंड- 1) पहले ही प्रेषित किया जा चुका है। https://t.me/Aadhyatmik_Sahitya/528
जिद्दू कृष्णमूर्ति की अन्य पुस्तकें – #Jkrishnmurti
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Jiddu Krishnamurti - A Biography - Pupul Jayakar.pdf
4.4 MB
Jiddu Krishnamurti - A Biography - Pupul Jayakar #Jkrishnmurti
जिद्दू कृष्णमूर्ति की जीवनी हिन्दी में—
https://t.me/Aadhyatmik_Sahitya/76
जिद्दू कृष्णमूर्ति की जीवनी हिन्दी में—
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गरुड़_की_उड़ान–जिद्दू_कृष्णमुर्ति—@Aadhyatmik_Sahitya.pdf
61.5 MB
उड़ान भरता हुआ गरुड़ अपने पीछे कोई चिह्न नहीं छोड़ता, परंतु वैज्ञानिक अपने हर प्रयास के पीछे एक चिन्ह छोड़ जाता है। स्वतंत्रता और मुक्ति के प्रश्न की छानबीन करने के लिए न केवल वैज्ञानिक जैसा अवलोकन होना चाहिए बल्कि गरुड़ जैसी उड़ान भी होनी चाहिए— गरुड़ जो अपने पीछे कोई चिह्न नहीं छोड़ता।
@Aadhyatmik_Sahitya
यह पुस्तक कृष्णमूर्ति की पुस्तक “The Flight of the Eagle” का हिन्दी रूपांतर है।
कृष्णमूर्ति की अन्य पुस्तकें— #Jkrishnmurti
@Aadhyatmik_Sahitya
यह पुस्तक कृष्णमूर्ति की पुस्तक “The Flight of the Eagle” का हिन्दी रूपांतर है।
कृष्णमूर्ति की अन्य पुस्तकें— #Jkrishnmurti
At the feet of the master.pdf
3.3 MB
At the feet of the master by J. Krishnamurti (Alcyone) #Jkrishnmurti
Aamula_Kranti_Ki_Avashyakata_of_J_Krishnamurti_by_Kumuda_Ramananda.pdf
77 MB
#Jkrishnmurti
प्रस्तुत दोनों पुस्तकें जिद्दू कृष्णमूर्ति की अंग्रेज़ी पुस्तक ‘The urgency of change’ के ही अलग-अलग हिन्दी रूपांतर हैं— आमूल क्रांति की चुनौती, आमूल क्रांति की आवश्यकता।
@Aadhyatmik_Sahitya
प्रस्तुत दोनों पुस्तकें जिद्दू कृष्णमूर्ति की अंग्रेज़ी पुस्तक ‘The urgency of change’ के ही अलग-अलग हिन्दी रूपांतर हैं— आमूल क्रांति की चुनौती, आमूल क्रांति की आवश्यकता।
@Aadhyatmik_Sahitya
Introduction-to-Krishnamurti-2024.pdf
577.8 KB
Krishnamurti: An Introduction
#Jkrishnmurti
#Jkrishnmurti
Pari_Samvada_63_64_After_the_Death_J_Krishnamurti_Foundation_Varanasi.pdf
20.4 MB
मृत्यु और उसके बाद — जिद्दू कृष्णमूर्ति
#Jkrishnmurti
अगर आपके पास सिर्फ़ एक घंटा हो जीने के लिए तो आप क्या करेंगे? क्या आप अपने बाहरी मामलों, अपनी वसीयत आदि को नहीं निपटायेंगे? क्या आप अपने सगे-सम्बन्धियों और मित्रों को नहीं बुलाएँगे? और उनसे माफ़ी नहीं माँगेंगे या उनको माफ़ नहीं करेंगे, जाने-अनजाने अतीत में हो चुकी ग़लतियों के लिए? क्या आप अपने मन में समायी चीज़ों के प्रति, अपनी इच्छाओं-वासनाओं के प्रति और इस संसार के प्रति मर नहीं जाएँगे? और अगर यह एक घंटे के लिए किया जा सकता है तो फिर बाकी बचे दिनों, महीनों और सालों के लिए क्यों नहीं...
—जे. कृष्णमूर्ति
#Jkrishnmurti
अगर आपके पास सिर्फ़ एक घंटा हो जीने के लिए तो आप क्या करेंगे? क्या आप अपने बाहरी मामलों, अपनी वसीयत आदि को नहीं निपटायेंगे? क्या आप अपने सगे-सम्बन्धियों और मित्रों को नहीं बुलाएँगे? और उनसे माफ़ी नहीं माँगेंगे या उनको माफ़ नहीं करेंगे, जाने-अनजाने अतीत में हो चुकी ग़लतियों के लिए? क्या आप अपने मन में समायी चीज़ों के प्रति, अपनी इच्छाओं-वासनाओं के प्रति और इस संसार के प्रति मर नहीं जाएँगे? और अगर यह एक घंटे के लिए किया जा सकता है तो फिर बाकी बचे दिनों, महीनों और सालों के लिए क्यों नहीं...
—जे. कृष्णमूर्ति
Pari Samvada 67-68 - J. Krishnamurti Foundation Varanasi.pdf
20.8 MB
मानवता का भविष्य
(जिद्दू कृष्णमूर्ति और डेविड बोह्म के ब्रॉकवुड पार्क, इंग्लैंड में हुए दो संवादों का हिन्दी अनुवाद)
#Jkrishnmurti
आज मानवता के सम्मुख जो भी समस्याएँ हैं, मनोवैज्ञानिक स्तर पर अथवा अन्य कोई भी, वे सब विचार का परिणाम हैं। और हम विचारों के उसी ढाँचे का पीछा किए जा रहे हैं। विचार कभी भी इनमें से कोई समस्या हल नहीं करेगा। अब बस एक ही किस्म का उपकरण है, वह है प्रज्ञा....
बिना प्रेम और करुणा के प्रज्ञा नहीं हो सकती। और आप में करुणा नहीं हो सकती यदि आप किसी धर्म से चिपके हैं, यदि आप किसी खूंटे से बँधे हैं, किसी जानवर की तरह...
— जिद्दू कृष्णमूर्ति
(जिद्दू कृष्णमूर्ति और डेविड बोह्म के ब्रॉकवुड पार्क, इंग्लैंड में हुए दो संवादों का हिन्दी अनुवाद)
#Jkrishnmurti
आज मानवता के सम्मुख जो भी समस्याएँ हैं, मनोवैज्ञानिक स्तर पर अथवा अन्य कोई भी, वे सब विचार का परिणाम हैं। और हम विचारों के उसी ढाँचे का पीछा किए जा रहे हैं। विचार कभी भी इनमें से कोई समस्या हल नहीं करेगा। अब बस एक ही किस्म का उपकरण है, वह है प्रज्ञा....
बिना प्रेम और करुणा के प्रज्ञा नहीं हो सकती। और आप में करुणा नहीं हो सकती यदि आप किसी धर्म से चिपके हैं, यदि आप किसी खूंटे से बँधे हैं, किसी जानवर की तरह...
— जिद्दू कृष्णमूर्ति
Talk_with_Teachers_Part_2_Hindi_Translation_by_J_Krishnamurti_Krishnamurti.pdf
42.1 MB
शिक्षकों से वार्ता — जिद्दू कृष्णमूर्ति
#Jkrishnmurti
#Jkrishnmurti
J Krishnamurti - The Real Crisis - KFI -Hindi - 11-11-20.pdf
4.9 MB
असल संकट — जिद्दू कृष्णमूर्ति
#Jkrishnmurti
"संकट बिलकुल सामने है। यह संकट कहीं संसार में नहीं है, यह परमाणु युद्ध का नहीं है, आसपास चल रही बेरहमी और बंटवारे में नहीं है। संकट हमारी चेतना में है, उसमें है जो हम हो गए हैं।"
#Jkrishnmurti
"संकट बिलकुल सामने है। यह संकट कहीं संसार में नहीं है, यह परमाणु युद्ध का नहीं है, आसपास चल रही बेरहमी और बंटवारे में नहीं है। संकट हमारी चेतना में है, उसमें है जो हम हो गए हैं।"
The future of humanity in the age of AI - JK.pdf
8.9 MB
The future of humanity in the age of AI - Jiddu Krishnamurti
#Jkrishnmurti
“If the machine can take over everything man can do, and do it still better than us, then what is a human being, what are you?... So, what is the future of man when the computer can outdo everything that man has done or will do?”
Words such as computer, robot, and artificial intelligence were not in vogue when Krishnamurti spoke in the late '50s and early '60s about man's technological progress; instead, he used words such as electronic brains, cybernetics, machines, and mechanical intelligence. But the prophetic vision of the sage saw, much ahead of time, the challenges that humanity is facing today from its own creations. This digital booklet brings together some of the compelling statements on the subject he made over the decades and their relevance in this age of artificial intelligence.
– Editor
#Jkrishnmurti
“If the machine can take over everything man can do, and do it still better than us, then what is a human being, what are you?... So, what is the future of man when the computer can outdo everything that man has done or will do?”
Words such as computer, robot, and artificial intelligence were not in vogue when Krishnamurti spoke in the late '50s and early '60s about man's technological progress; instead, he used words such as electronic brains, cybernetics, machines, and mechanical intelligence. But the prophetic vision of the sage saw, much ahead of time, the challenges that humanity is facing today from its own creations. This digital booklet brings together some of the compelling statements on the subject he made over the decades and their relevance in this age of artificial intelligence.
– Editor
Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत ⛳)
आज़ादी की ख़ोज.pdf
1.7 MB