𝐆𝐊 𝐒𝐓𝐔𝐃𝐘 𝐏𝐎𝐈𝐍𝐓 ™
30K subscribers
9.1K photos
128 videos
530 files
473 links
✆𝐏𝐫𝐨𝐦𝐨𝐭𝐢𝐨𝐧 ➛ @Mychat9_bot
राजस्थान सभी भर्ती परीक्षा के No1 चैनल
प्रीवियस ईयर ऑल क्वेश्चन

किसी को किसी भी कंटेंट से प्रॉब्लम होतो डिलीट करवा दे
कॉपीराइट ना लगवाए
#Bstc #Reet #ptet #rpse #Ras #ssc #cet #policeconstable #Indianarmy
Download Telegram
समेला/मधुपर्क :- दुल्हा-दुल्हन के घर पहुँचने पर दुल्हन का पिता अपने सम्बंधियों के साथ वर-पक्ष का स्वागत करता है, इसे समेला कहते हैं। बरातियों को सम्मान देकर बैठाया जाता है। इसे ठूमावा / आगवानी भी कहते हैं।

#important ❤️👍
❤15👍4😍4
मुगधणा :- खाना पकाने के लिए काम में ली गई लकड़ियाँ!

#important ❤️👍
👍12❤9😍4
स्वरूप सिंह (1842-61)

समाजसुधार कार्य-

(1) कन्यावध निषेध 1844

(2) डाकन प्रथा निषेध 1853

(3) सती प्रथा निषेध 1861

विजयस्तम्भ की 9वीं मंजिल का पुर्ननिर्माण करवाया। 1857 की क्रांति में अंग्रेजो का साथ दिया। इसकी मृत्यु पर पासवान ऐजाबाई सती हुईं, मेवाड़ की अंतिम सती।

#important ❤️☘
❤8😍4👍3
ज्ञान समुद्र, बावनी, बारह अष्टक सवैया सर्वांग योग प्रदीपिका सुंदरदास जी कि प्रमुख रचनाएँ थीं (पूछा गया सवाल)

#important ❤️👍
❤5👍5😍4
𝐆𝐊 𝐒𝐓𝐔𝐃𝐘 𝐏𝐎𝐈𝐍𝐓 ™
बप्पा रावल कि राजधानी... नागदा ( उदयपुर)❤️👍🏼
मेवाड़ की राजधानियों का क्रम -

नागदा - बप्पा रावल
आहड़-अलट
चितौड़-जैत्रसिंह
उदयपुर-उदय सिंह
गोगुंदा-उदय सिंह
कुंभलगढ़-राणा प्रताप
चावंड -राणा प्रताप
चितौड़गढ़- अमर सिंह
उदयपुर-भीम सिंह


#important ❤️👍🏼
👍18❤9😍9
संथारा प्रथा :- जीवन में सभी काम पूर्ण हो जाने पर ईश्वर की शरण में मोक्ष प्राप्ति के लिए अन्न-जल छोड़कर शनैः-शनैः देह त्यागना ही संथारा है। यह जैनों में प्रचलित है जैन धर्म में संथारा को 'महाप्रस्थान का मार्ग' कहा गया है।

#important ❤️👆
❤8😍4👍3
मलागिरि (मलयगिरि) : भूरे रंग में (चंदन के रंग से)रंगा हुआ वस्त्र जो कई वर्षों तक सुगंध देता था। सिटी पैलेस (जयपुर) में सवाई रामसिंह द्वितीय की अंगरखियां आज भी सुगन्धित है।

#important ❤️☘
😍8❤7👍4
दामणी : मारवाड़ क्षेत्र में प्रचलित लाल रंग की ओढ़नी,जिस पर धागे से कशीदाकारी की होती है।

ध्यान रहे - 'दामणा' अंगुली का आभूषण है।

#important ❤️☘
❤10😍6👍5
साड़ियों के विविध रूप - चोल, निकोल/निचोल, पट, दुकुल, अंसुक, चीर, पटोरी, चोरसो,धोरावली आदि साड़ियों के विविध रूप है।

#important ❤️☘
👍8❤6
पोत, निबोरी, तिमणिया, तुलसी, जुमावली, चोकी, झालरो, गुंजमाला, गुंजा, चम्पाकली, हंसहार, कंठ साड़ी, कंठमला, हार, चन्द्रहार आदि गले के आभूषण थे।

बाजूबंद (कंगन), रामपाट, चूड़ियां, नोगरी, कंकण, गजरा, गुजरी, बरखा आदि आग्रबाहुओं हाथ की कसाइयों के आभूषण थे।

अंगूठी, विनती, मुंदरी, दामचा (दवनो), नथ-पान आदि हाथ की अंगुलियों के आभूषण थे।

#important❤️👆
👍8😍6❤4