⭐ राजस्थानी साहित्य के विभिन्न वर्गीकरण (Exam important)
✍️ प्रवृत्ति के आधार पर चार काल खंड है :
1️⃣ प्राचीन काल (वीरगाथा काल) :
👉1050 से 1450 ईस्वी
👉इस साहित्य को 3 भागों में बांटा है : जैन, चारण और लौकिक साहित्य
2️⃣ पूर्व मध्यकाल (भक्तिकाल) :
👉1450 से 1650 ईस्वी
3️⃣ उत्तर मध्यकाल (श्रृंगार, रीति और नीति परक काल) :
👉1650 से 1850 ईस्वी
📌मध्यकाल साहित्य के 5 भाग : चारण, जैन, लौकिक, आख्यान और संत काव्य
4️⃣ आधुनिक काल (विविध विषय पर) : 1850 से अब तक
👉यह काल भी 3 भागो में बांटा हुआ है जिसमे
✅ जागरण काल (1850 – 1947)
✅ आजादी के बाद (1947 – 1965)
✅ नवलेखन काल (1965 – अब तक)
✍️ प्रवृत्ति के आधार पर चार काल खंड है :
1️⃣ प्राचीन काल (वीरगाथा काल) :
👉1050 से 1450 ईस्वी
👉इस साहित्य को 3 भागों में बांटा है : जैन, चारण और लौकिक साहित्य
2️⃣ पूर्व मध्यकाल (भक्तिकाल) :
👉1450 से 1650 ईस्वी
3️⃣ उत्तर मध्यकाल (श्रृंगार, रीति और नीति परक काल) :
👉1650 से 1850 ईस्वी
📌मध्यकाल साहित्य के 5 भाग : चारण, जैन, लौकिक, आख्यान और संत काव्य
4️⃣ आधुनिक काल (विविध विषय पर) : 1850 से अब तक
👉यह काल भी 3 भागो में बांटा हुआ है जिसमे
✅ जागरण काल (1850 – 1947)
✅ आजादी के बाद (1947 – 1965)
✅ नवलेखन काल (1965 – अब तक)
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◾️ आर्मी डे परेड का आयोजन राजस्थान में
• 15 जनवरी 2026 को 78वे आर्मी डे परेड का आयोजन जयपुर में किया जाएगा।
• आर्मी डे परेड का आयोजन पहली बार राजस्थान में किया जाएगा।
• परेड का आयोजन जगतपुरा महल रोड पर आम नागरिकों के बीच किया जाएगा।
• 8 से 12 जनवरी को नो योर आर्मी प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा।
• 15 जनवरी 2026 को 78वे आर्मी डे परेड का आयोजन जयपुर में किया जाएगा।
• आर्मी डे परेड का आयोजन पहली बार राजस्थान में किया जाएगा।
• परेड का आयोजन जगतपुरा महल रोड पर आम नागरिकों के बीच किया जाएगा।
• 8 से 12 जनवरी को नो योर आर्मी प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा।
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अरावली पर्वतमाला भारत की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक है।
इसका विस्तार इस प्रकार है—
उद्गम (आरंभ): गुजरात के पालनपुर (पालनपुर/पालनपुर के पास)
अंत: दिल्ली तक
कुल लंबाई: लगभग 800 किमी
राज्यों के अनुसार विस्तार:
1. गुजरात
2. राजस्थान (सबसे अधिक भाग)
3. हरियाणा
4. दिल्ली (दिल्ली रिज)
राजस्थान में प्रमुख जिले जहाँ अरावली फैली है।
सिरोही → उदयपुर → राजसमंद → भीलवाड़ा → अजमेर → जयपुर → अलवर
महत्वपूर्ण तथ्य:
• अरावली उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा में फैली है।
• इसका सबसे ऊंचा शिखर गुरु शिखर (1722 मीटर) है, जो माउंट आबू (राजस्थान) में स्थित है।
• यह मरुस्थल के प्रसार को रोकने में सहायक है और राजस्थान की जलवायु पर प्रभाव डालती है।
इसका विस्तार इस प्रकार है—
उद्गम (आरंभ): गुजरात के पालनपुर (पालनपुर/पालनपुर के पास)
अंत: दिल्ली तक
कुल लंबाई: लगभग 800 किमी
राज्यों के अनुसार विस्तार:
1. गुजरात
2. राजस्थान (सबसे अधिक भाग)
3. हरियाणा
4. दिल्ली (दिल्ली रिज)
राजस्थान में प्रमुख जिले जहाँ अरावली फैली है।
सिरोही → उदयपुर → राजसमंद → भीलवाड़ा → अजमेर → जयपुर → अलवर
महत्वपूर्ण तथ्य:
• अरावली उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा में फैली है।
• इसका सबसे ऊंचा शिखर गुरु शिखर (1722 मीटर) है, जो माउंट आबू (राजस्थान) में स्थित है।
• यह मरुस्थल के प्रसार को रोकने में सहायक है और राजस्थान की जलवायु पर प्रभाव डालती है।
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रणनीति की जीत – एक प्रेरणादायक कहानी 🔥
एक समय की बात है। एक बहुत बड़े साम्राज्य में एक शक्तिशाली राजा राज करता था। राजा के अस्तबल में एक बेहद फुर्तीला और तेज़ दौड़ने वाला घोड़ा था, जिस पर पूरे राज्य को गर्व था। उस घोड़े को हर समय बढ़िया खाना, आराम और देखभाल मिलती थी।
उसी राज्य में एक गरीब किसान भी रहता था। उसके पास भी एक घोड़ा था, लेकिन उसकी हालत अच्छी नहीं थी। किसान इतना निर्धन था कि कई बार उसके घोड़े को भरपेट खाना भी नहीं मिल पाता था। अभावों में पला-बढ़ा वह घोड़ा कठिन परिस्थितियों का आदी था।
एक दिन राजा ने पूरे राज्य में एक भव्य घुड़दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन कराया। राजा के घोड़े के साथ-साथ किसान के घोड़े को भी आमंत्रित किया गया।
राजा के घोड़े के लिए कोई कमी नहीं थी—खाना, पानी, देखभाल सब कुछ उत्तम।
लेकिन किसान के घोड़े को रोज़ की तरह सीमित भोजन ही मिल सका।
दौड़ से एक दिन पहले राजा के घोड़े को खूब खिलाया गया ताकि वह पूरी ताकत के साथ दौड़े।
किसान ने सोचा—
“अगर मैं भी अपने घोड़े को ज़्यादा खिला दूँ, तो वह भारी हो जाएगा। खाली पेट दौड़ना ज़्यादा बेहतर होता है। ताकत सिर्फ खाने से नहीं, समझ से भी आती है।”
दौड़ के दिन राजा का घोड़ा पूरी तरह तृप्त होकर मैदान में उतरा। शुरुआत में वह तेज़ दौड़ा, लेकिन कुछ दूरी के बाद उसकी रफ्तार कम होने लगी।
वहीं किसान का घोड़ा, जो संघर्षों का अभ्यस्त था, संतुलित ऊर्जा और सही रणनीति के साथ अंत तक पूरी ताकत से दौड़ा और दौड़ जीत गया।
राजा को यह समझने में देर नहीं लगी कि
सुविधाएँ हमेशा जीत नहीं दिलातीं, बल्कि अनुभव और सही रणनीति दिलाती है।
कहानी से सीख
यह कहानी हमें सिखाती है कि अंतिम समय में रणनीति सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण होती है।
जैसे घुड़दौड़ में आख़िरी तैयारी ने जीत दिलाई, वैसे ही—
एग्ज़ाम के अंतिम दिनों में नए-नए कोर्स जॉइन करना, नई किताबें पढ़ना,नई चीज़ें शुरू करना फायदे की जगह नुकसान कर सकता है।
अंतिम समय में ध्यान होना चाहिए:
• सिर्फ रिवीजन पर
• टेस्ट सीरीज़ देने पर
• अपनी कमज़ोरियों को सुधारने पर
पहले से पढ़े हुए नोट्स को बार-बार दोहराने पर
याद रखिए—
जीत आख़िरी समय की समझदारी से मिलती है, न कि आख़िरी समय की भागदौड़ से। 🔥
एक समय की बात है। एक बहुत बड़े साम्राज्य में एक शक्तिशाली राजा राज करता था। राजा के अस्तबल में एक बेहद फुर्तीला और तेज़ दौड़ने वाला घोड़ा था, जिस पर पूरे राज्य को गर्व था। उस घोड़े को हर समय बढ़िया खाना, आराम और देखभाल मिलती थी।
उसी राज्य में एक गरीब किसान भी रहता था। उसके पास भी एक घोड़ा था, लेकिन उसकी हालत अच्छी नहीं थी। किसान इतना निर्धन था कि कई बार उसके घोड़े को भरपेट खाना भी नहीं मिल पाता था। अभावों में पला-बढ़ा वह घोड़ा कठिन परिस्थितियों का आदी था।
एक दिन राजा ने पूरे राज्य में एक भव्य घुड़दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन कराया। राजा के घोड़े के साथ-साथ किसान के घोड़े को भी आमंत्रित किया गया।
राजा के घोड़े के लिए कोई कमी नहीं थी—खाना, पानी, देखभाल सब कुछ उत्तम।
लेकिन किसान के घोड़े को रोज़ की तरह सीमित भोजन ही मिल सका।
दौड़ से एक दिन पहले राजा के घोड़े को खूब खिलाया गया ताकि वह पूरी ताकत के साथ दौड़े।
किसान ने सोचा—
“अगर मैं भी अपने घोड़े को ज़्यादा खिला दूँ, तो वह भारी हो जाएगा। खाली पेट दौड़ना ज़्यादा बेहतर होता है। ताकत सिर्फ खाने से नहीं, समझ से भी आती है।”
दौड़ के दिन राजा का घोड़ा पूरी तरह तृप्त होकर मैदान में उतरा। शुरुआत में वह तेज़ दौड़ा, लेकिन कुछ दूरी के बाद उसकी रफ्तार कम होने लगी।
वहीं किसान का घोड़ा, जो संघर्षों का अभ्यस्त था, संतुलित ऊर्जा और सही रणनीति के साथ अंत तक पूरी ताकत से दौड़ा और दौड़ जीत गया।
राजा को यह समझने में देर नहीं लगी कि
सुविधाएँ हमेशा जीत नहीं दिलातीं, बल्कि अनुभव और सही रणनीति दिलाती है।
कहानी से सीख
यह कहानी हमें सिखाती है कि अंतिम समय में रणनीति सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण होती है।
जैसे घुड़दौड़ में आख़िरी तैयारी ने जीत दिलाई, वैसे ही—
एग्ज़ाम के अंतिम दिनों में नए-नए कोर्स जॉइन करना, नई किताबें पढ़ना,नई चीज़ें शुरू करना फायदे की जगह नुकसान कर सकता है।
अंतिम समय में ध्यान होना चाहिए:
• सिर्फ रिवीजन पर
• टेस्ट सीरीज़ देने पर
• अपनी कमज़ोरियों को सुधारने पर
पहले से पढ़े हुए नोट्स को बार-बार दोहराने पर
याद रखिए—
जीत आख़िरी समय की समझदारी से मिलती है, न कि आख़िरी समय की भागदौड़ से। 🔥
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✨शिल्पग्राम उत्सव, हवाला (उदयपुर)
▪️पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र (WZCC) द्वारा आयोजित।
▪️ उद्घाटन - राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े द्वारा।
🏆 डॉ. कोमल कोठारी स्मृति लाइफटाइम अचीवमेंट लोक कला पुरस्कार:
1. रामनाथ चौधरी (जयपुर, राजस्थान):
▪️विशेषता: यह नाक से अलगोजा बजाने वाले दुनिया के इकलौते कलाकार माने जाते हैं।
2. डॉ. निरंजन वल्लभभाई राज्यगुरु (राजकोट, गुजरात)
▪️योगदान: इन्होंने लोक एवं भक्ति संगीत पर फील्ड वर्क कर 700 घंटे का ध्वनि मुद्रांकन (Recording) किया है।
💰 पुरस्कार राशि: प्रत्येक कलाकार को 2.51 लाख रुपये और एक रजत पट्टिका प्रदान की गई।
▪️पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र (WZCC) द्वारा आयोजित।
▪️ उद्घाटन - राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े द्वारा।
🏆 डॉ. कोमल कोठारी स्मृति लाइफटाइम अचीवमेंट लोक कला पुरस्कार:
1. रामनाथ चौधरी (जयपुर, राजस्थान):
▪️विशेषता: यह नाक से अलगोजा बजाने वाले दुनिया के इकलौते कलाकार माने जाते हैं।
2. डॉ. निरंजन वल्लभभाई राज्यगुरु (राजकोट, गुजरात)
▪️योगदान: इन्होंने लोक एवं भक्ति संगीत पर फील्ड वर्क कर 700 घंटे का ध्वनि मुद्रांकन (Recording) किया है।
💰 पुरस्कार राशि: प्रत्येक कलाकार को 2.51 लाख रुपये और एक रजत पट्टिका प्रदान की गई।
👍16❤8😍2
प्रबंधन सिद्धान्तो का जन्मदाता माना जाता है।
Anonymous Quiz
26%
लूथर गुलिक
26%
जेम्स सिल्वर
46%
हेनरी फियोल
3%
ल. D. लार्ड
❤13👍7😍6
निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार के लिए विशेष प्रशिक्षण के लिए अधिकतम अवधि कितनी होगी ...?
Anonymous Quiz
20%
तीन मास तक की
37%
दो वर्ष तक की
29%
तीन वर्ष तक की
13%
4 वर्ष तक की
👍14❤8😍5
RTE-2011 के तहत किस धारा के तहत विद्यालयों को मान्यता दी जाती है
Anonymous Quiz
21%
धारा 12
32%
धारा 13
37%
धारा 14
10%
धारा 15
😍8❤7👍7👌2
"General and Industrial management" पुस्तक किसकी है जो 1916 में प्रकाशित हुई ...?
Anonymous Quiz
36%
सर हेनरी फेयोल
25%
w. टेलर
36%
विलियम लूईक
4%
गुलिक
😍11❤8👍7👌2😢1
❤11👍6😍4
निम्न में से प्रबंधन की प्रकृति है ...?
Anonymous Quiz
3%
प्रबंधन एक कला है।
9%
प्रबंधन एक विज्ञान है
37%
प्रबंधन एक उद्देश्यपूर्ण प्रक्रिया है
51%
उपरोक्त सभी
❤14👍6😍4😢1
✅ वन डिस्ट्रिक्ट वन डेस्टिनेशन योजना (राजस्थान)
📌 राजस्थान पर्यटन विभाग द्वारा छोटे-छोटे जिलों के अनदेखे पर्यटन स्थलों को विश्व मानचित्र पर लाने हेतु योजना शुरू की गई।
🌿 चयनित पर्यटन स्थल –
1️⃣ चुरू – तालछप्पर धाम
2️⃣ जोधपुर – मेहरानगढ़ दुर्ग
3️⃣ पाली – रणकपुर मंदिर
4️⃣ बांसवाड़ा – त्रिपुरा सुंदरी
5️⃣ बीकानेर – देशनोक धाम
6️⃣ उदयपुर – एकलिंगनाथ व प्रपात झील (झील झरना)
7️⃣ सिरोही – माउंट आबू
8️⃣ प्रतापगढ़ – सीतामाता वन्य जीव अभयारण्य
9️⃣ दौसा – भंडारेज किला
🔟 नागौर – खिंवसर दुर्ग
1️⃣1️⃣ बाड़मेर – विरात्रा मां व तिलवाड़ा मंदिर
1️⃣2️⃣ सीकर – खाटूश्यामजी मंदिर, हरसिद्ध भैरव मंदिर, जीण माता मंदिर
13 सीताबाड़ी - बारा
📌 राजस्थान पर्यटन विभाग द्वारा छोटे-छोटे जिलों के अनदेखे पर्यटन स्थलों को विश्व मानचित्र पर लाने हेतु योजना शुरू की गई।
🌿 चयनित पर्यटन स्थल –
1️⃣ चुरू – तालछप्पर धाम
2️⃣ जोधपुर – मेहरानगढ़ दुर्ग
3️⃣ पाली – रणकपुर मंदिर
4️⃣ बांसवाड़ा – त्रिपुरा सुंदरी
5️⃣ बीकानेर – देशनोक धाम
6️⃣ उदयपुर – एकलिंगनाथ व प्रपात झील (झील झरना)
7️⃣ सिरोही – माउंट आबू
8️⃣ प्रतापगढ़ – सीतामाता वन्य जीव अभयारण्य
9️⃣ दौसा – भंडारेज किला
🔟 नागौर – खिंवसर दुर्ग
1️⃣1️⃣ बाड़मेर – विरात्रा मां व तिलवाड़ा मंदिर
1️⃣2️⃣ सीकर – खाटूश्यामजी मंदिर, हरसिद्ध भैरव मंदिर, जीण माता मंदिर
13 सीताबाड़ी - बारा
❤14👍10😍4
प्रथम महायुद्ध के दौरान 23 सितंबर, 1918 ई. को मेजर दलपत सिंह शेखावत (जोधपुर) ने इजराइल के हाइफा शहर को तुर्की सेना के आधिपत्य से मुक्त करवाते हुए वीरगति प्राप्त की। मेजर दलपत सिंह 'हाइफा हीरो' के नाम से प्रसिद्ध हुए और उन्हें मरणोपरांत ब्रिटिश सेना के सर्वोच्च सम्मान 'मिल्ट्री क्रॉस' से सम्मानित किया गया।
दिल्ली में त्रिमूर्ति भवन एवं रॉयल गैलेरी लन्दन में उनकी मूर्ति लगी हुई है।
#फैक्ट ❤️☘
दिल्ली में त्रिमूर्ति भवन एवं रॉयल गैलेरी लन्दन में उनकी मूर्ति लगी हुई है।
#फैक्ट ❤️☘
❤14👍9😍6
परीक्षा में अक्सर प्रजामंडल के संस्थापक पूछे जाते हैं, इन्हें ऐसे याद रखें:
जोधपुर (मारवाड़): जय नारायण व्यास (शेर-ए-राजस्थान)।
उदयपुर (मेवाड़): माणिक्य लाल वर्मा (पंछिड़ा गीत वाले)।
जयपुर: जमनालाल बजाज और कपूरचंद पाटनी।
बीकानेर: मघाराम वैद्य (बीकानेर में 'वैद्य' की जरूरत है)।
अलवर: हरिनारायण शर्मा।
कोटा: नयनूराम शर्मा (कोटा में 'नयन' यानी आंखें)।
❤18👍9😍5