जेल प्रहरी 1st shift पेपर.pdf
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✴ आज आयोजित हुई जेल प्रहरी भर्ती परीक्षा 2024 का पेपर 1st shift 👌♥️
#important
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👍8🙏2👌2😎1
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जयसिंह प्रथम (मिर्जा राजा जयसिंह)के प्रमुख अभियान...
अहमद नगर अभियान.....1623 ई.
उज़्बेक विद्रोह का दमन....1629 ई.
गोलकुंडा और बीजापुर घेरा.... 1636ई.
कंधार अभियान.......1651 ई.
मिर्ज़ा राजा जयसिंह ने 14 अप्रैल 1665 (2 माह) तक ब्रजगढ़, माँची, पुरन्दर पर घेराव के बाद शिवाजी ने संधि का प्रस्ताव भेजा था.....
11 जून 1665 को पुरंदर की संधि आखिरकार सम्पन्न होती है.....
#important ❤️👆
अहमद नगर अभियान.....1623 ई.
उज़्बेक विद्रोह का दमन....1629 ई.
गोलकुंडा और बीजापुर घेरा.... 1636ई.
कंधार अभियान.......1651 ई.
मिर्ज़ा राजा जयसिंह ने 14 अप्रैल 1665 (2 माह) तक ब्रजगढ़, माँची, पुरन्दर पर घेराव के बाद शिवाजी ने संधि का प्रस्ताव भेजा था.....
11 जून 1665 को पुरंदर की संधि आखिरकार सम्पन्न होती है.....
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👍17❤4👌1
मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार 2024
खिलाड़ी प्रतिस्पर्द्धा
1。डी गुकेशーशतरंज
2。हरमनप्रीत सिंहーहॉकी
3。प्रवीण कुमारーपैर एथलीट
4。सुश्री मनु भाकर-निशानेबाजी
#january2025
खिलाड़ी प्रतिस्पर्द्धा
1。डी गुकेशーशतरंज
2。हरमनप्रीत सिंहーहॉकी
3。प्रवीण कुमारーपैर एथलीट
4。सुश्री मनु भाकर-निशानेबाजी
#january2025
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गोरे या बन्कोठ
उदयपुर की आहड़ सभ्यता से खुदाई में प्राप्त लगभग 4 हज़ार वर्ष पुराना मृदभांड, जिसका प्रयोग अनाज रखने हेतु किया जाता था ।
💛👍
#important
उदयपुर की आहड़ सभ्यता से खुदाई में प्राप्त लगभग 4 हज़ार वर्ष पुराना मृदभांड, जिसका प्रयोग अनाज रखने हेतु किया जाता था ।
💛👍
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👍45❤6👌6
रीट का परिणाम घोषित लगभग 13.70 लाख अभ्यर्थियों का इंतजार खत्म
Level -1में 62.33 तथा Level -2 में 44.69 प्रतिशत रहा
https://t.me/Rk_study_point_99
Level -1में 62.33 तथा Level -2 में 44.69 प्रतिशत रहा
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👍9❤5💯3✍2
Pyq's विश्लेषण
• मेवाड़ में 1881 का भील विद्रोह बारापाल से शुरू हुआ।
•1881 में मामा अमन सिंह & लोनारसिंह के नेतृत्व में बारापाल विद्रोह को दबाने का काम किया गया।
• रिखबदेव में भीलो का नेतृत्व नीमा, खेमा और जोयता कर रहें थे।
• 25 अप्रैल 1881 में भीलों के साथ समझौता संपन्न हुआ, लेकिन पूर्ण शांति स्थापित नहीं हो पाई....
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पाराहेड़ा, शिव मंदिर 🛕
पाराहेड़ा एक प्रसिद्ध शिव मंदिर, बांसवाडा के गढी तहसील में स्थित है। यह 12वीं शताब्दी में राजा मंडलिक द्वारा निर्मित किया गया था जो बांसवाडा से लगभग 22 किलोमीटर दूर है।
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उस्ता कला बीकानेर
राजस्थान की एक पारंपरिक स्वर्ण मीनाकारी (गोल्ड-इनले) और नक्काशी वाली हस्तकला है। यह मुख्य रूप से ऊँट की खाल पर की जाती है, लेकिन अब लकड़ी, संगमरमर और शीशे जैसी अन्य वस्तुओं पर भी की जाती है। इस कला की एक खासियत यह है कि यह सोने की उत्कृष्ट कलाकारी के लिए प्रसिद्ध है और यह कला बहुत टिकाऊ होती है।
उत्पत्ति:
यह कला फ़ारसी-प्रेरित है और भारत में मुगल काल के दौरान बीकानेर में विकसित हुई।
मुख्य केंद्र:
बीकानेर में इस कला का प्रमुख केंद्र है।
विशेषताएं:
ऊँट की खाल पर सोने की मीनाकारी और नक्काशी की जाती है।
इस कला में जटिल डिज़ाइन, सोने के उभार और रंगीन रंग भरने का काम शामिल होता है।
इसे अक्सर "मुनव्वती" या "मुनव्वत" कला भी कहा जाता है।
आधुनिक विकास:
आज यह कला दीवारों, छतों, काँच, लकड़ी और संगमरमर पर भी की जाती है।
संरक्षण:
इस कला को संरक्षित करने के लिए बीकानेर में केमल हाई ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना की गई है।
पद्मश्री से सम्मानित स्वर्गीय हिस्सामुद्दिन उस्ता जैसे कलाकारों ने इस कला के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
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