𝐆𝐊 𝐒𝐓𝐔𝐃𝐘 𝐏𝐎𝐈𝐍𝐓 ™
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✆𝐏𝐫𝐨𝐦𝐨𝐭𝐢𝐨𝐧 ➛ @Mychat9_bot
राजस्थान सभी भर्ती परीक्षा के No1 चैनल
प्रीवियस ईयर ऑल क्वेश्चन

किसी को किसी भी कंटेंट से प्रॉब्लम होतो डिलीट करवा दे
कॉपीराइट ना लगवाए
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ज्ञान समुद्र, बावनी, बारह अष्टक सवैया सर्वांग योग प्रदीपिका सुंदरदास जी कि प्रमुख रचनाएँ थीं (पूछा गया सवाल)

#important ❤️👍
❤5👍5😍4
𝐆𝐊 𝐒𝐓𝐔𝐃𝐘 𝐏𝐎𝐈𝐍𝐓 ™
बप्पा रावल कि राजधानी... नागदा ( उदयपुर)❤️👍🏼
मेवाड़ की राजधानियों का क्रम -

नागदा - बप्पा रावल
आहड़-अलट
चितौड़-जैत्रसिंह
उदयपुर-उदय सिंह
गोगुंदा-उदय सिंह
कुंभलगढ़-राणा प्रताप
चावंड -राणा प्रताप
चितौड़गढ़- अमर सिंह
उदयपुर-भीम सिंह


#important ❤️👍🏼
👍18❤9😍9
संथारा प्रथा :- जीवन में सभी काम पूर्ण हो जाने पर ईश्वर की शरण में मोक्ष प्राप्ति के लिए अन्न-जल छोड़कर शनैः-शनैः देह त्यागना ही संथारा है। यह जैनों में प्रचलित है जैन धर्म में संथारा को 'महाप्रस्थान का मार्ग' कहा गया है।

#important ❤️👆
❤8😍4👍3
मलागिरि (मलयगिरि) : भूरे रंग में (चंदन के रंग से)रंगा हुआ वस्त्र जो कई वर्षों तक सुगंध देता था। सिटी पैलेस (जयपुर) में सवाई रामसिंह द्वितीय की अंगरखियां आज भी सुगन्धित है।

#important ❤️☘
😍8❤7👍4
दामणी : मारवाड़ क्षेत्र में प्रचलित लाल रंग की ओढ़नी,जिस पर धागे से कशीदाकारी की होती है।

ध्यान रहे - 'दामणा' अंगुली का आभूषण है।

#important ❤️☘
❤10😍6👍5
साड़ियों के विविध रूप - चोल, निकोल/निचोल, पट, दुकुल, अंसुक, चीर, पटोरी, चोरसो,धोरावली आदि साड़ियों के विविध रूप है।

#important ❤️☘
👍8❤6
पोत, निबोरी, तिमणिया, तुलसी, जुमावली, चोकी, झालरो, गुंजमाला, गुंजा, चम्पाकली, हंसहार, कंठ साड़ी, कंठमला, हार, चन्द्रहार आदि गले के आभूषण थे।

बाजूबंद (कंगन), रामपाट, चूड़ियां, नोगरी, कंकण, गजरा, गुजरी, बरखा आदि आग्रबाहुओं हाथ की कसाइयों के आभूषण थे।

अंगूठी, विनती, मुंदरी, दामचा (दवनो), नथ-पान आदि हाथ की अंगुलियों के आभूषण थे।

#important❤️👆
👍8😍6❤4
वनफूल (प्रथम काव्य संग्रह), धरतीधोरा री, जलमभौम, लीलटांस (1976 में केन्द्रीय साहित्य अकादमी पुरुस्कार), पातल और पीथल (कविता), मायड़ रो हेलो, निग्रंथ (1988 में मूर्ति देवी पुरस्कार), मीझर, कूं-कूं, गांव, अघोरी काल, रमणीये रा सोरठा, गलगचिया, लिक-लिकोडो, सबद (1987 का सूर्यमल मिश्रण शिखर पुरुस्कार मिला) अग्निवीणा (1942 देशप्रेम और राष्ट्रीयता से ओतप्रोत काव्य संग्रह) और "कुण जमीन रो धणी" कविता से कृषक समुदाय में जागृति लाये। जबकि "सतवादी" के लिए टांटिया पुरस्कार मिला।

#important ❤️👍🏼
❤10👍8😍6
वसंतगढ़ दुर्ग - सिरोही
विजयमंदिर का किला- बयाना (भरतपुर)
शेरगढ़ (कोषवर्धन) का किला-बारां
शेरगढ़ का किला-धौलपुर
आमेर का किला - जयपुर
सोजत दुर्ग-पाली
सज्जनगढ़ दुर्ग - उदयपुर
भाद्राजूण का किला-जालौर
खंडार का किला-सवाईमाधोपुर
कांकोड़ किला-टोंक
मंडरायल दुर्ग - करौली
मचान दुर्ग-सिरोही
तवनगढ़ / त्रिभुवनगढ़ / तिमनगढ़ किला-करौली
कुचामन किला-डीडवाना-कुचामन
कांकवाड़ी
किला - सरिस्का अभ्यारण्य (अलवर)
बाला दुर्ग (कुंवारा किला) / अलवर का किला- अलवर

#important #फैक्ट #दुर्ग ❤️☘
❤9😍5👍2
स्वरूप सिंह (1842-61)

समाजसुधार कार्य-

(1) कन्यावध निषेध 1844

(2) डाकन प्रथा निषेध 1853

(3) सती प्रथा निषेध 1861

विजयस्तम्भ की 9वीं मंजिल का पुर्ननिर्माण करवाया। 1857 की क्रांति में अंग्रेजो का साथ दिया। इसकी मृत्यु पर पासवान ऐजाबाई सती हुईं, मेवाड़ की अंतिम सती।

#important ❤️☘
❤13👍8😍3🏆1
महाराणा जयसिंह (1680-98)

द्वितीय मुगल-मेवाड़ संधि-(24 जून 1681), जयसिंह v/s औरंगजेब

औरंगजेब ने जजिया कर हटा दिया।

जयसिंह ने पुर, मांडल, बदनौर औरंगजेब को दिये।

जयसमंद झील का निर्माण करवाया (1687-91)

#important ❤️☘
❤9👍7😍1😎1
पृथ्वीराज राठौड़ :-

बीकानेर शासक कल्याणमल के पुत्र व अकबर के दरवारी कवि ।

अकबर ने इन्हें गागरोन की जागीर प्रदान की।


पृथ्वीराज के प्रमुख ग्रंथ :-

(1) वेलि कृष्ण रूकमणी री
(2) दशम भागवत रा दूहा
(3) दशरथ राऊत
(4) गंगा लहरी

वेलि कृष्ण रूकमणी री ग्रंथ की शैली डिंगल है।

इसकी रचना पृथ्वीराज ने गागरोन दुर्ग में की थी।

इस ग्रंथ को एल.पी. टेस्सीटोरी प्रकाश में लाये।

दुरसा आढ़ा ने इस ग्रंथ को पांचवां वेद तथा 19 वां पुराण कहा

#important ❤️☘
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स्वरूप सिंह (1842-61)

समाजसुधार कार्य-

(1) कन्यावध निषेध 1844

(2) डाकन प्रथा निषेध 1853

(3) सती प्रथा निषेध 1861

विजयस्तम्भ की 9वीं मंजिल का पुर्ननिर्माण करवाया। 1857 की क्रांति में अंग्रेजो का साथ दिया। इसकी मृत्यु पर पासवान ऐजाबाई सती हुईं, मेवाड़ की अंतिम सती।

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हुरडा सम्मेलन : यह सम्मेलन 17 जुलाई 1734 को आयोजित हुआ था ,मराठों को राजस्थान से बाहर निकालने के उद्देश्य से जयपुर के शासक सवाई जयसिंह द्वारा 17 जुलाई 1734 को हुरड़ा (भीलवाड़ा) में सम्मेलन आयोजित करवाया गया जिसकी अध्यक्षता मेवाड़ के महाराणा जगतसिंह द्वितीय द्वारा की गई। इस सम्मेलन की योजना मूलतः संग्रामसिंह द्वितीय ने बनाई थी लेकिन यह सम्मेलन सफल नहीं हो पाया था क्योंकि तत्कालीन शासको को आपस में किसी पर भी विश्वास नहीं था।

#important #फैक्ट ❤️☘
👍12❤9😍5
जोधपुर के महाराजा जसवन्तसिंह डिंगल-पिंगल के पूर्ण ज्ञाता एवं मर्मज्ञ कवि थे और कवियों तथा विद्वानों का बहुत आदर करते थे। इनके रचे भाषा-ग्रंथों के नाम हैं-(1) भाषा-भूषण, (2) सिद्धान्तबोध, (3) सिद्धान्त सार, (4) अनुभवप्रकाश, (5) अपरोक्षसिद्धान्त, (6) आनंदविलास, (7) चंद्र-प्रबोध (नाटक), (8) पूली जसवन्त संवाद और (9) इच्छा-विवेक।

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❤14👍6😍5
1857 की क्रान्ति के समय राजस्थान में छः सैनिक छावनियाँ थी-

(1) नसीराबाद (अजमेर) : 15वीं बंगाल नेटिव इन्फन्ट्री

(2) नीमच (मध्यप्रदेश) : फर्स्ट बंगाल केवेलरी

(3) ब्यावर (ब्यावर) : मेरवाड़ा बटालियन

(4) देवली (टोंक) : कोटा कन्टिनजेन्ट

(5) एरिनपुरा (पाली) : जोधपुर लीजियन

(6) खैरवाड़ा (उदयपुर) : मेवाड़ भील कोर

नोट : 1857 की क्रान्ति के समय 6 सैनिक छावनियों में 5000 सैनिक थे, परन्तु उनमें एक भी युरोपीय नहीं था

#important ❤️👍🏼
👍20❤5😍1
मेवाड़, सिसोदिया राजवंश_:आहड़ की छतरियां,
(2) राठौड़, बीकानेर - देवी कुण्ड की छतरियां (राव कल्याणमल की छतरी सबसे पुरानी प्रसिद्ध),
(3) राठौड़, जोधपुर_:मण्डौर की छतरियां,
(4) भाटी, जैसलमेर - बड़ा बाग की छतरियां,
(5) हाड़ा चौहान, कोटा -क्षार बाग की छतरियां,
(6) हाड़ा चौहान,:_ बूंदी केसर बाग की छतरियां
(7) कच्छवाह जयपुर - गैटोर की छतरियां (प्रसिद्ध सवाई जयसिंह की छतरी)

#फैक्ट #important ❤️👍🏼
❤10👍7😍5
विशेषः-

शेखावाटी की मीरा :- करमाबाई जाट (मंदिर और जन्म कालवा,नागौर)

राजस्थान की मीरा :- मीरा बाई

मेवाड़ की मीरा संत :- भूरी बाई "अलख" (देबारी उदयपुर)

मत्स्य प्रदेश की मीरा :- समान बाई, (अलवर)

राजस्थान की दूसरी मीरा :- राना बाई, हरनावा (डीडवाना-कुचामन)

वागड़ की मीरा :- गवरी बाई, डूंगरपुर

#फैक्ट #important ❤️👍🏼
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विशेषः-

शेखावाटी की मीरा :- करमाबाई जाट (मंदिर और जन्म कालवा,नागौर)

राजस्थान की मीरा :- मीरा बाई

मेवाड़ की मीरा संत :- भूरी बाई "अलख" (देबारी उदयपुर)

मत्स्य प्रदेश की मीरा :- समान बाई, (अलवर)

राजस्थान की दूसरी मीरा :- राना बाई, हरनावा (डीडवाना-कुचामन)

वागड़ की मीरा :- गवरी बाई, डूंगरपुर

#फैक्ट #important ❤️👍🏼
❤12👍7😍3
मेवाड़, सिसोदिया राजवंश_:आहड़ की छतरियां,
(2) राठौड़, बीकानेर - देवी कुण्ड की छतरियां (राव कल्याणमल की छतरी सबसे पुरानी प्रसिद्ध),
(3) राठौड़, जोधपुर_:मण्डौर की छतरियां,
(4) भाटी, जैसलमेर - बड़ा बाग की छतरियां,
(5) हाड़ा चौहान, कोटा -क्षार बाग की छतरियां,
(6) हाड़ा चौहान,:_ बूंदी केसर बाग की छतरियां
(7) कच्छवाह जयपुर - गैटोर की छतरियां (प्रसिद्ध सवाई जयसिंह की छतरी)

#फैक्ट #important ❤️👍🏼
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