◾️ राजस्थान डिजिफेस्ट टाई ग्लोबल समिट - 2026
• आयोजन- 4 से 6 जनवरी 2026
• स्थान - JECC, जयपुर
• विभाग - सूचना प्रौद्योगिकी की और संचार विभाग तथा टाई राजस्थान
✓ राजस्थान डिजीफेस्ट टाई ग्लोबल समिट के दौरान राजस्थान रीजनल AI इंपैक्ट कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जाएगा।
• इसका उद्देश्य - प्रदेश के आई संचालित नवाचारों को प्रदर्शित करना, हितधारकों से संवाद करना और AI संचालन से जुड़ी कार्य योजना के संबंध में सिफारिश से देना।
• आयोजन- 4 से 6 जनवरी 2026
• स्थान - JECC, जयपुर
• विभाग - सूचना प्रौद्योगिकी की और संचार विभाग तथा टाई राजस्थान
✓ राजस्थान डिजीफेस्ट टाई ग्लोबल समिट के दौरान राजस्थान रीजनल AI इंपैक्ट कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जाएगा।
• इसका उद्देश्य - प्रदेश के आई संचालित नवाचारों को प्रदर्शित करना, हितधारकों से संवाद करना और AI संचालन से जुड़ी कार्य योजना के संबंध में सिफारिश से देना।
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जालौर दुर्ग - जालौर दुर्ग को सुवर्ण गिरी तथा कनकाचल दुर्गा भी कहा जाता है जो सुकड़ी नदी के किनारे है इस दुर्ग में मलिक शाह पीर की दरगाह है
1311 ईस्वी में जालौर पर आक्रमण करने वाली खिलजी सेना का सेनापति मलिक नाईब कमालुद्दीन गुर्गथा पर प्रारंभ में उसे कोई सफलता नहीं मिली किंतु कान्हड़दे के सेनापति दहिया बीका ने कान्हड़देव के साथ विश्वासघात किया व दुर्ग की गुप्त सुरंग का रास्ता खिलजी सेना को बता दिया।
दहिया के इस विश्वासघात का पता चलने पर उसकी पत्नी हीरादे ने दहिया को मार डाला।
कान्हड़दे के नेतृत्व में चौहान सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए तथा जैतालदे के नेतृत्व में किले की स्त्रियों ने जौहर किया।
अलाउद्दीन खिलजी नेजालौर का नाम अलाउद्दीन ने जलालाबाद रख दिया( यह इस तथ्य को उल्लेखित करना प्रासंगिक होगा के अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़गढ़ दुर्ग का नाम खिज्राबाद , सिवाना दुर्ग का नाम खैराबाद तथा जालौर दुर्ग का नाम जलालाबाद कर दिया था)
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1311 ईस्वी में जालौर पर आक्रमण करने वाली खिलजी सेना का सेनापति मलिक नाईब कमालुद्दीन गुर्गथा पर प्रारंभ में उसे कोई सफलता नहीं मिली किंतु कान्हड़दे के सेनापति दहिया बीका ने कान्हड़देव के साथ विश्वासघात किया व दुर्ग की गुप्त सुरंग का रास्ता खिलजी सेना को बता दिया।
दहिया के इस विश्वासघात का पता चलने पर उसकी पत्नी हीरादे ने दहिया को मार डाला।
कान्हड़दे के नेतृत्व में चौहान सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए तथा जैतालदे के नेतृत्व में किले की स्त्रियों ने जौहर किया।
अलाउद्दीन खिलजी नेजालौर का नाम अलाउद्दीन ने जलालाबाद रख दिया( यह इस तथ्य को उल्लेखित करना प्रासंगिक होगा के अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़गढ़ दुर्ग का नाम खिज्राबाद , सिवाना दुर्ग का नाम खैराबाद तथा जालौर दुर्ग का नाम जलालाबाद कर दिया था)
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𝐆𝐊 𝐒𝐓𝐔𝐃𝐘 𝐏𝐎𝐈𝐍𝐓 ™
अलवर प्रजा मंडल...... अच्छा प्रश्न ❤️👍🏼
2 फरवरी 1946 को जब प्रजामण्डल का एक सम्मेलन खेड़ा मंगलसिंह नामक जागीर में हो रहा था, तो इसे सरकार विरोधी मानकर, प्रजामण्डल कार्यकारिणी के सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके विरोध में 8 फरवरी 1946 को अलवर के विभिन्न कस्बों और गाँवों में दमनविरोधी दिवस मनाया गया। अन्त में हीरालाल शास्त्री की मध्यस्थता में प्रजा मण्डल और महाराजा के बीच समझौता हुआ, जिसके फलस्वरूप 10 फरवरी 1946 को आन्दोलनकारी रिहा कर दिये गये❤️👍🏼
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