Top 5 Revision Fact🔰
1. मरू विकास कार्यक्रम 1977-78
2. मेवात क्षेत्र विकास कार्यक्रम 1986-87
3. मगरा क्षेत्र विकास कार्यक्रम 2005-06
4. अरावली विकास कार्यक्रम 1974-75
5. डांग क्षेत्र विकास कार्यक्रम 1994-95
1. मरू विकास कार्यक्रम 1977-78
2. मेवात क्षेत्र विकास कार्यक्रम 1986-87
3. मगरा क्षेत्र विकास कार्यक्रम 2005-06
4. अरावली विकास कार्यक्रम 1974-75
5. डांग क्षेत्र विकास कार्यक्रम 1994-95
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राजस्थान के चार प्रमुख पेट्रोलीफेरस बेसिन 📨
(14 जिलों में 1.5 लाख वर्ग किमी क्षेत्र) 💥
1. बाड़मेर-सांचौर बेसिन: बाड़मेर, सांचौर
2. जैसलमेर बेसिन: जैसलमेर
3. बीकानेर-नागौर बेसिन: बीकानेर, चुरू, हनुमानगढ़, गंगानगर, नागौर
4. विंध्य बेसिन: कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ (कुछ हिस्सा)
(14 जिलों में 1.5 लाख वर्ग किमी क्षेत्र) 💥
1. बाड़मेर-सांचौर बेसिन: बाड़मेर, सांचौर
2. जैसलमेर बेसिन: जैसलमेर
3. बीकानेर-नागौर बेसिन: बीकानेर, चुरू, हनुमानगढ़, गंगानगर, नागौर
4. विंध्य बेसिन: कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ (कुछ हिस्सा)
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राजस्थान की प्रमुख घासें
🍀 सेवण घास
• वानस्पतिक नाम : Lasiurus sindicus
• पश्चिमी राजस्थान (लाठी सीरीज) में पाई जाती है
• सर्वाधिक पाई जाने वाली जगह : जैसलमेर
• उपनाम : घासों का राजा
• गोडावण की शरणस्थली (अंडे देता है)
• सूखने पर : लीलोन कहलाती है
🍀 करड़, अंजन
• पश्चिमी राजस्थान की घासें
• सूखी घास
• दुधारू पशुओं के लिए उपयोगी
🍀 बूर घास
• राजस्थान की सबसे सुगंधित घास
• इससे खुशबूदार तेल प्राप्त किया जाता है
• प्रमुख क्षेत्र : बीकानेर
🍀 सुगंधित घास (खस / वेटिवर प्रकार)
• क्षेत्र : भरतपुर, डीग, सवाई माधोपुर, करौली, टोंक
• उपयोग : परदे, हाथ के पंखे बनाने में
• शरबत बनाने में प्रयोग
• कमरे को ठंडा व सुगंधित करने में उपयोग
🍀 मोथा घास
• घना पक्षी विहार, भरतपुर
• पक्षी इसे चाव से खाते हैं
🍀 एंचा घास
• घना पक्षी विहार, भरतपुर
• इसमें पक्षी उलझकर मर जाते हैं
🍀 भरूंट / गोलरू / मांसठी
• पश्चिमी राजस्थान की कांटेदार घास
• ऊँट इसे चाव से खाते हैं
🍀 कांग्रेस घास (गाजर घास)
• खरपतवार घास
• मानव एवं पशुओं के लिए नुकसानदायक
🍀 सेवण घास
• वानस्पतिक नाम : Lasiurus sindicus
• पश्चिमी राजस्थान (लाठी सीरीज) में पाई जाती है
• सर्वाधिक पाई जाने वाली जगह : जैसलमेर
• उपनाम : घासों का राजा
• गोडावण की शरणस्थली (अंडे देता है)
• सूखने पर : लीलोन कहलाती है
🍀 करड़, अंजन
• पश्चिमी राजस्थान की घासें
• सूखी घास
• दुधारू पशुओं के लिए उपयोगी
🍀 बूर घास
• राजस्थान की सबसे सुगंधित घास
• इससे खुशबूदार तेल प्राप्त किया जाता है
• प्रमुख क्षेत्र : बीकानेर
🍀 सुगंधित घास (खस / वेटिवर प्रकार)
• क्षेत्र : भरतपुर, डीग, सवाई माधोपुर, करौली, टोंक
• उपयोग : परदे, हाथ के पंखे बनाने में
• शरबत बनाने में प्रयोग
• कमरे को ठंडा व सुगंधित करने में उपयोग
🍀 मोथा घास
• घना पक्षी विहार, भरतपुर
• पक्षी इसे चाव से खाते हैं
🍀 एंचा घास
• घना पक्षी विहार, भरतपुर
• इसमें पक्षी उलझकर मर जाते हैं
🍀 भरूंट / गोलरू / मांसठी
• पश्चिमी राजस्थान की कांटेदार घास
• ऊँट इसे चाव से खाते हैं
🍀 कांग्रेस घास (गाजर घास)
• खरपतवार घास
• मानव एवं पशुओं के लिए नुकसानदायक
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