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🇮🇳 राष्ट्रपति से संबंधित भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेद
Ankit Dholiwal Sir
भारतीय संविधान के भाग 5 में संघ के अंतर्गत राष्ट्रपति से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं। राष्ट्रपति से संबंधित प्रमुख अनुच्छेद 52 से 62 तक हैं, जबकि राष्ट्रपति की शक्तियों, कार्यों और अन्य प्रावधानों का वर्णन विभिन्न अनुच्छेदों में किया गया है।
राष्ट्रपति से संबंधित महत्वपूर्ण अनुच्छेद
अनुच्छेद 52 — भारत का राष्ट्रपति
भारत में एक राष्ट्रपति होगा।
अनुच्छेद 53 — संघ की कार्यपालिका शक्ति
संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी। इसका प्रयोग संविधान के अनुसार प्रत्यक्ष रूप से या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से किया जाता है।
अनुच्छेद 54 — राष्ट्रपति का निर्वाचन
राष्ट्रपति का निर्वाचन निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है। इसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य तथा राज्यों, दिल्ली और पुडुचेरी की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।
अनुच्छेद 55 — राष्ट्रपति के निर्वाचन की रीति
राष्ट्रपति के निर्वाचन में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधित्व में एकरूपता तथा राज्यों और संघ के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रावधान है। निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा तथा गुप्त मतदान से होता है।
अनुच्छेद 56 — राष्ट्रपति की पदावधि
राष्ट्रपति का कार्यकाल पद ग्रहण करने की तारीख से पाँच वर्ष होता है। वह उपराष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लिखित त्यागपत्र दे सकता है।
अनुच्छेद 57 — पुनर्निर्वाचन की पात्रता
राष्ट्रपति पुनर्निर्वाचन के लिए पात्र होता है। संविधान में राष्ट्रपति के पुनर्निर्वाचन की संख्या पर कोई सीमा निर्धारित नहीं है।
अनुच्छेद 58 — राष्ट्रपति निर्वाचित होने की योग्यताएँ
वह भारत का नागरिक हो।
उसकी आयु कम-से-कम 35 वर्ष हो।
वह लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता रखता हो।
वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार अथवा उनके नियंत्रणाधीन किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकरण के अधीन लाभ का पद धारण न करता हो। संविधान में निर्धारित अपवाद लागू होते हैं।
अनुच्छेद 59 — राष्ट्रपति पद की शर्तें
राष्ट्रपति संसद या किसी राज्य विधानमंडल के किसी सदन का सदस्य नहीं हो सकता। यदि कोई सदस्य राष्ट्रपति निर्वाचित होता है, तो पद ग्रहण करने की तारीख से उसकी सदस्यता समाप्त मानी जाती है। राष्ट्रपति कोई अन्य लाभ का पद धारण नहीं कर सकता।
अनुच्छेद 60 — राष्ट्रपति की शपथ
राष्ट्रपति को भारत के मुख्य न्यायाधीश या उनकी अनुपस्थिति में सर्वोच्च न्यायालय के उपलब्ध वरिष्ठतम न्यायाधीश के समक्ष शपथ दिलाई जाती है।
अनुच्छेद 61 — राष्ट्रपति पर महाभियोग
संविधान के उल्लंघन के लिए राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया का प्रावधान है। संसद के किसी भी सदन में आरोप लगाया जा सकता है और निर्धारित विशेष बहुमत की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
अनुच्छेद 62 — राष्ट्रपति पद की रिक्ति भरने के लिए निर्वाचन
राष्ट्रपति का कार्यकाल समाप्त होने से पहले नया निर्वाचन पूरा किया जाना चाहिए। मृत्यु, त्यागपत्र या अन्य कारण से पद रिक्त होने पर निर्धारित अवधि के भीतर निर्वाचन कराया जाता है।
राष्ट्रपति की शक्तियों से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण अनुच्छेद
अनुच्छेद 65 — उपराष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रपति के कार्यों का निर्वहन
राष्ट्रपति पद रिक्त होने या राष्ट्रपति के कार्य करने में असमर्थ होने पर उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है या उनके कार्यों का निर्वहन करता है।
अनुच्छेद 72 — राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति
राष्ट्रपति को कुछ मामलों में दंड को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, परिहार या लघुकरण करने तथा दंडादेश के निलंबन, परिहार या रूपांतरण की शक्ति प्राप्त है। इसमें कोर्ट मार्शल के मामलों, संघ की कार्यपालिका शक्ति से संबंधित कानूनों के अंतर्गत अपराधों और मृत्युदंड के मामलों से संबंधित शक्तियाँ शामिल हैं।
अनुच्छेद 74 — राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देती है। राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद को सलाह पर पुनर्विचार करने के लिए कह सकता है, लेकिन पुनर्विचार के बाद दी गई सलाह के अनुसार कार्य करना आवश्यक है।
अनुच्छेद 75 — मंत्रियों से संबंधित प्रावधान
प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है तथा अन्य मंत्रियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है। मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
Ankit Dholiwal Sir
भारतीय संविधान के भाग 5 में संघ के अंतर्गत राष्ट्रपति से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं। राष्ट्रपति से संबंधित प्रमुख अनुच्छेद 52 से 62 तक हैं, जबकि राष्ट्रपति की शक्तियों, कार्यों और अन्य प्रावधानों का वर्णन विभिन्न अनुच्छेदों में किया गया है।
राष्ट्रपति से संबंधित महत्वपूर्ण अनुच्छेद
अनुच्छेद 52 — भारत का राष्ट्रपति
भारत में एक राष्ट्रपति होगा।
अनुच्छेद 53 — संघ की कार्यपालिका शक्ति
संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी। इसका प्रयोग संविधान के अनुसार प्रत्यक्ष रूप से या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से किया जाता है।
अनुच्छेद 54 — राष्ट्रपति का निर्वाचन
राष्ट्रपति का निर्वाचन निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है। इसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य तथा राज्यों, दिल्ली और पुडुचेरी की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।
अनुच्छेद 55 — राष्ट्रपति के निर्वाचन की रीति
राष्ट्रपति के निर्वाचन में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधित्व में एकरूपता तथा राज्यों और संघ के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रावधान है। निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा तथा गुप्त मतदान से होता है।
अनुच्छेद 56 — राष्ट्रपति की पदावधि
राष्ट्रपति का कार्यकाल पद ग्रहण करने की तारीख से पाँच वर्ष होता है। वह उपराष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लिखित त्यागपत्र दे सकता है।
अनुच्छेद 57 — पुनर्निर्वाचन की पात्रता
राष्ट्रपति पुनर्निर्वाचन के लिए पात्र होता है। संविधान में राष्ट्रपति के पुनर्निर्वाचन की संख्या पर कोई सीमा निर्धारित नहीं है।
अनुच्छेद 58 — राष्ट्रपति निर्वाचित होने की योग्यताएँ
वह भारत का नागरिक हो।
उसकी आयु कम-से-कम 35 वर्ष हो।
वह लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता रखता हो।
वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार अथवा उनके नियंत्रणाधीन किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकरण के अधीन लाभ का पद धारण न करता हो। संविधान में निर्धारित अपवाद लागू होते हैं।
अनुच्छेद 59 — राष्ट्रपति पद की शर्तें
राष्ट्रपति संसद या किसी राज्य विधानमंडल के किसी सदन का सदस्य नहीं हो सकता। यदि कोई सदस्य राष्ट्रपति निर्वाचित होता है, तो पद ग्रहण करने की तारीख से उसकी सदस्यता समाप्त मानी जाती है। राष्ट्रपति कोई अन्य लाभ का पद धारण नहीं कर सकता।
अनुच्छेद 60 — राष्ट्रपति की शपथ
राष्ट्रपति को भारत के मुख्य न्यायाधीश या उनकी अनुपस्थिति में सर्वोच्च न्यायालय के उपलब्ध वरिष्ठतम न्यायाधीश के समक्ष शपथ दिलाई जाती है।
अनुच्छेद 61 — राष्ट्रपति पर महाभियोग
संविधान के उल्लंघन के लिए राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया का प्रावधान है। संसद के किसी भी सदन में आरोप लगाया जा सकता है और निर्धारित विशेष बहुमत की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
अनुच्छेद 62 — राष्ट्रपति पद की रिक्ति भरने के लिए निर्वाचन
राष्ट्रपति का कार्यकाल समाप्त होने से पहले नया निर्वाचन पूरा किया जाना चाहिए। मृत्यु, त्यागपत्र या अन्य कारण से पद रिक्त होने पर निर्धारित अवधि के भीतर निर्वाचन कराया जाता है।
राष्ट्रपति की शक्तियों से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण अनुच्छेद
अनुच्छेद 65 — उपराष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रपति के कार्यों का निर्वहन
राष्ट्रपति पद रिक्त होने या राष्ट्रपति के कार्य करने में असमर्थ होने पर उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है या उनके कार्यों का निर्वहन करता है।
अनुच्छेद 72 — राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति
राष्ट्रपति को कुछ मामलों में दंड को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, परिहार या लघुकरण करने तथा दंडादेश के निलंबन, परिहार या रूपांतरण की शक्ति प्राप्त है। इसमें कोर्ट मार्शल के मामलों, संघ की कार्यपालिका शक्ति से संबंधित कानूनों के अंतर्गत अपराधों और मृत्युदंड के मामलों से संबंधित शक्तियाँ शामिल हैं।
अनुच्छेद 74 — राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देती है। राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद को सलाह पर पुनर्विचार करने के लिए कह सकता है, लेकिन पुनर्विचार के बाद दी गई सलाह के अनुसार कार्य करना आवश्यक है।
अनुच्छेद 75 — मंत्रियों से संबंधित प्रावधान
प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है तथा अन्य मंत्रियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है। मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
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अनुच्छेद 76 — भारत का महान्यायवादी
राष्ट्रपति भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति करता है।
अनुच्छेद 77 — भारत सरकार के कार्यों का संचालन
भारत सरकार की सभी कार्यपालिका कार्रवाइयाँ राष्ट्रपति के नाम से की जाती हैं।
अनुच्छेद 78 — प्रधानमंत्री के राष्ट्रपति के प्रति कर्तव्य
प्रधानमंत्री का कर्तव्य है कि वह मंत्रिपरिषद के निर्णयों और प्रशासन से संबंधित आवश्यक जानकारी राष्ट्रपति को दे।
अनुच्छेद 85 — संसद के सत्र, सत्रावसान और लोकसभा का विघटन
राष्ट्रपति संसद के सदनों को आहूत करता है, सत्रावसान करता है तथा लोकसभा को विघटित कर सकता है। संविधान में निर्धारित शर्तों के अनुसार संसद के दो सत्रों के बीच छह महीने से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए।
अनुच्छेद 87 — राष्ट्रपति का विशेष अभिभाषण
राष्ट्रपति प्रत्येक आम चुनाव के बाद लोकसभा के प्रथम सत्र के प्रारंभ में तथा प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के प्रारंभ में संसद के दोनों सदनों को एक साथ संबोधित करता है।
अनुच्छेद 111 — विधेयकों पर राष्ट्रपति की अनुमति
संसद द्वारा पारित विधेयक राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किए जाते हैं। राष्ट्रपति अनुमति दे सकता है, अनुमति रोक सकता है या धन विधेयक से भिन्न विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है। पुनः पारित विधेयक पर राष्ट्रपति अनुमति रोक नहीं सकता।
अनुच्छेद 123 — राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति
जब संसद के दोनों सदन एक साथ सत्र में नहीं होते और तत्काल कार्रवाई आवश्यक होती है, तब संविधान में निर्धारित शर्तों के अधीन राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकता है।
अनुच्छेद 143 — सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श
राष्ट्रपति किसी महत्वपूर्ण विधिक या तथ्यात्मक प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय से सलाह मांग सकता है।
आपातकाल से संबंधित राष्ट्रपति के महत्वपूर्ण अनुच्छेद
अनुच्छेद 352 — राष्ट्रीय आपातकाल
युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा की जा सकती है। इसके लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल का लिखित निर्णय आवश्यक है।
अनुच्छेद 356 — राज्यों में राष्ट्रपति शासन
जब किसी राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल हो जाता है, तब संविधान में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।
अनुच्छेद 360 — वित्तीय आपातकाल
यदि भारत या उसके किसी भाग की वित्तीय स्थिरता या साख को खतरा उत्पन्न होता है, तो राष्ट्रपति वित्तीय आपातकाल की उद्घोषणा कर सकता है।
अन्य परीक्षा उपयोगी अनुच्छेद
अनुच्छेद 80 — राज्यसभा की संरचना: राष्ट्रपति साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले 12 व्यक्तियों को राज्यसभा के लिए नामनिर्देशित करता है।
अनुच्छेद 103 — सांसदों की अयोग्यता पर निर्णय: संसद सदस्य की अयोग्यता के कुछ प्रश्नों पर राष्ट्रपति निर्वाचन आयोग की राय प्राप्त करके और उसके अनुसार कार्य करते हुए निर्णय करता है।
अनुच्छेद 217 — उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।
अनुच्छेद 222 — उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का स्थानांतरण: राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद किसी न्यायाधीश का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में स्थानांतरण कर सकता है।
अनुच्छेद 280 — वित्त आयोग: राष्ट्रपति प्रत्येक पाँच वर्ष की समाप्ति पर या उससे पहले आवश्यकतानुसार वित्त आयोग का गठन करता है।
अनुच्छेद 316 — संघ एवं राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्ति और पदावधि: संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।
अनुच्छेद 324 — निर्वाचन आयोग: राष्ट्रपति मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति करता है, जो संविधान तथा लागू कानूनों के अधीन होती है।
अनुच्छेद 338 — राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग: राष्ट्रपति राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति करता है।
अनुच्छेद 338A — राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग: राष्ट्रपति राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति करता है।
अनुच्छेद 338B — राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग: राष्ट्रपति राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति करता है।
अनुच्छेद 356 — राष्ट्रपति शासन: राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल होने पर लागू होने वाला प्रमुख अनुच्छेद।
अनुच्छेद 360 — वित्तीय आपातकाल: वित्तीय स्थिरता या साख को खतरा होने पर लागू होने वाला प्रावधान।
परीक्षा के लिए त्वरित पुनरावृत्ति
52 — राष्ट्रपति का पद
53 — संघ की कार्यपालिका शक्ति
54 — राष्ट्रपति का निर्वाचन
55 — निर्वाचन की रीति
56 — पदावधि
57 — पुनर्निर्वाचन
58 — योग्यताएँ
59 — पद की शर्तें
60 — शपथ
61 — महाभियोग
राष्ट्रपति भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति करता है।
अनुच्छेद 77 — भारत सरकार के कार्यों का संचालन
भारत सरकार की सभी कार्यपालिका कार्रवाइयाँ राष्ट्रपति के नाम से की जाती हैं।
अनुच्छेद 78 — प्रधानमंत्री के राष्ट्रपति के प्रति कर्तव्य
प्रधानमंत्री का कर्तव्य है कि वह मंत्रिपरिषद के निर्णयों और प्रशासन से संबंधित आवश्यक जानकारी राष्ट्रपति को दे।
अनुच्छेद 85 — संसद के सत्र, सत्रावसान और लोकसभा का विघटन
राष्ट्रपति संसद के सदनों को आहूत करता है, सत्रावसान करता है तथा लोकसभा को विघटित कर सकता है। संविधान में निर्धारित शर्तों के अनुसार संसद के दो सत्रों के बीच छह महीने से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए।
अनुच्छेद 87 — राष्ट्रपति का विशेष अभिभाषण
राष्ट्रपति प्रत्येक आम चुनाव के बाद लोकसभा के प्रथम सत्र के प्रारंभ में तथा प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के प्रारंभ में संसद के दोनों सदनों को एक साथ संबोधित करता है।
अनुच्छेद 111 — विधेयकों पर राष्ट्रपति की अनुमति
संसद द्वारा पारित विधेयक राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किए जाते हैं। राष्ट्रपति अनुमति दे सकता है, अनुमति रोक सकता है या धन विधेयक से भिन्न विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है। पुनः पारित विधेयक पर राष्ट्रपति अनुमति रोक नहीं सकता।
अनुच्छेद 123 — राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति
जब संसद के दोनों सदन एक साथ सत्र में नहीं होते और तत्काल कार्रवाई आवश्यक होती है, तब संविधान में निर्धारित शर्तों के अधीन राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकता है।
अनुच्छेद 143 — सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श
राष्ट्रपति किसी महत्वपूर्ण विधिक या तथ्यात्मक प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय से सलाह मांग सकता है।
आपातकाल से संबंधित राष्ट्रपति के महत्वपूर्ण अनुच्छेद
अनुच्छेद 352 — राष्ट्रीय आपातकाल
युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा की जा सकती है। इसके लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल का लिखित निर्णय आवश्यक है।
अनुच्छेद 356 — राज्यों में राष्ट्रपति शासन
जब किसी राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल हो जाता है, तब संविधान में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।
अनुच्छेद 360 — वित्तीय आपातकाल
यदि भारत या उसके किसी भाग की वित्तीय स्थिरता या साख को खतरा उत्पन्न होता है, तो राष्ट्रपति वित्तीय आपातकाल की उद्घोषणा कर सकता है।
अन्य परीक्षा उपयोगी अनुच्छेद
अनुच्छेद 80 — राज्यसभा की संरचना: राष्ट्रपति साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले 12 व्यक्तियों को राज्यसभा के लिए नामनिर्देशित करता है।
अनुच्छेद 103 — सांसदों की अयोग्यता पर निर्णय: संसद सदस्य की अयोग्यता के कुछ प्रश्नों पर राष्ट्रपति निर्वाचन आयोग की राय प्राप्त करके और उसके अनुसार कार्य करते हुए निर्णय करता है।
अनुच्छेद 217 — उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।
अनुच्छेद 222 — उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का स्थानांतरण: राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद किसी न्यायाधीश का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में स्थानांतरण कर सकता है।
अनुच्छेद 280 — वित्त आयोग: राष्ट्रपति प्रत्येक पाँच वर्ष की समाप्ति पर या उससे पहले आवश्यकतानुसार वित्त आयोग का गठन करता है।
अनुच्छेद 316 — संघ एवं राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्ति और पदावधि: संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।
अनुच्छेद 324 — निर्वाचन आयोग: राष्ट्रपति मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति करता है, जो संविधान तथा लागू कानूनों के अधीन होती है।
अनुच्छेद 338 — राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग: राष्ट्रपति राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति करता है।
अनुच्छेद 338A — राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग: राष्ट्रपति राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति करता है।
अनुच्छेद 338B — राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग: राष्ट्रपति राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति करता है।
अनुच्छेद 356 — राष्ट्रपति शासन: राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल होने पर लागू होने वाला प्रमुख अनुच्छेद।
अनुच्छेद 360 — वित्तीय आपातकाल: वित्तीय स्थिरता या साख को खतरा होने पर लागू होने वाला प्रावधान।
परीक्षा के लिए त्वरित पुनरावृत्ति
52 — राष्ट्रपति का पद
53 — संघ की कार्यपालिका शक्ति
54 — राष्ट्रपति का निर्वाचन
55 — निर्वाचन की रीति
56 — पदावधि
57 — पुनर्निर्वाचन
58 — योग्यताएँ
59 — पद की शर्तें
60 — शपथ
61 — महाभियोग
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62 — पद रिक्त होने पर निर्वाचन
72 — क्षमादान शक्ति
74 — मंत्रिपरिषद की सलाह
75 — प्रधानमंत्री और मंत्री
85 — संसद के सत्र
111 — विधेयकों पर अनुमति
123 — अध्यादेश
143 — सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श
352 — राष्ट्रीय आपातकाल
356 — राष्ट्रपति शासन
360 — वित्तीय आपातकाल
POLITY BY ANKIT DHOLIWAL SIR
टेलीग्राम चैनल: https://t.me/politybyankitdholiwalsir
72 — क्षमादान शक्ति
74 — मंत्रिपरिषद की सलाह
75 — प्रधानमंत्री और मंत्री
85 — संसद के सत्र
111 — विधेयकों पर अनुमति
123 — अध्यादेश
143 — सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श
352 — राष्ट्रीय आपातकाल
356 — राष्ट्रपति शासन
360 — वित्तीय आपातकाल
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पंचायत राज चुनाव का पहला चरण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ...
राजस्थान को 3314 नए संरपच मिले ❤️
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