समझ नहीं आता, ये सुकून कब मिलेगा जनाब…
रातों को नींद कब आएगी, ये सवाल भी अब सताता है।
इन रातों से कह दो,
अब हमें यूँ न छेड़ा करें जनाब…
बहुत सताए हुए हैं,
थोड़ा तो हमें चैन से रहने दिया करें।
रातों को नींद कब आएगी, ये सवाल भी अब सताता है।
इन रातों से कह दो,
अब हमें यूँ न छेड़ा करें जनाब…
बहुत सताए हुए हैं,
थोड़ा तो हमें चैन से रहने दिया करें।
💐
💯8🔥3
यहाँ मन बहुत अशांत है, सुबह-सुबह ही जाने कैसी बेचैनी घेर लेती है…
ऐसा लगता है जैसे ज़िंदगी में सब कुछ धीरे-धीरे ख़त्म होता जा रहा है।
पता नहीं ये बेचैनी कब थमेगी,
कब मन को थोड़ा सुकून मिलेगा…
ख़ामोश रहना चाहती हूँ, जनाब,
मगर यही ख़ामोशी भीतर इतना शोर करती है
कि कभी-कभी अपने ही ख़यालों में घुटने लगती हूँ।
बस चाहती हूँ…
कुछ देर के लिए यह मन ठहर जाए,
और मुझे फिर से यक़ीन हो कि
यह वक़्त भी गुज़र जाएगा।
ऐसा लगता है जैसे ज़िंदगी में सब कुछ धीरे-धीरे ख़त्म होता जा रहा है।
पता नहीं ये बेचैनी कब थमेगी,
कब मन को थोड़ा सुकून मिलेगा…
ख़ामोश रहना चाहती हूँ, जनाब,
मगर यही ख़ामोशी भीतर इतना शोर करती है
कि कभी-कभी अपने ही ख़यालों में घुटने लगती हूँ।
बस चाहती हूँ…
कुछ देर के लिए यह मन ठहर जाए,
और मुझे फिर से यक़ीन हो कि
यह वक़्त भी गुज़र जाएगा।
🥺💐❤️❤️💔💔💔
❤10👍2
अब यहाँ दिल भर चुका है जनाब,
रोते-रोते थक चुका है…
अब बस थोड़ी-सी शांति चाहिए,
अपनी ख़ामोशी में सुकून चाहिए।
ऐ रातों, अब मुझे यूँ मत सताया करो,
हर बार उसकी याद दिलाया न करो…
उफ़्फ़, ये याद भी कितनी अजीब होती है,
बार-बार आकर पूछती है—
“क्या हुआ है जनाब?”
अब अपने ही मन से कैसे कहूँ,
कि बस… रुक जाओ,
थोड़ा शांत हो जाओ,
हर बात को याद करके
यूँ मुझे फिर से मत रुलाओ।
बस अब दिल को थोड़ा सुकून चाहिए…
और ख़ामोशी में खुद से मिलने का वक़्त।
रोते-रोते थक चुका है…
अब बस थोड़ी-सी शांति चाहिए,
अपनी ख़ामोशी में सुकून चाहिए।
ऐ रातों, अब मुझे यूँ मत सताया करो,
हर बार उसकी याद दिलाया न करो…
उफ़्फ़, ये याद भी कितनी अजीब होती है,
बार-बार आकर पूछती है—
“क्या हुआ है जनाब?”
अब अपने ही मन से कैसे कहूँ,
कि बस… रुक जाओ,
थोड़ा शांत हो जाओ,
हर बात को याद करके
यूँ मुझे फिर से मत रुलाओ।
बस अब दिल को थोड़ा सुकून चाहिए…
और ख़ामोशी में खुद से मिलने का वक़्त।
🥺💔😏💔💔
❤12
क्या समाज में शोक के भी
अलग-अलग पैमाने हैं?
पति के जाने पर
चूड़ियाँ तोड़ दी जाती हैं,
माथे से बिंदी मिटा दी जाती है,
हर श्रृंगार से नाता तुड़वा दिया जाता है।
रंगीन कपड़े पहनने पर रोक,
त्योहारों से दूरी—
मानो उसके जीवन से
खुशियों का अधिकार ही छीन लिया गया हो।
लेकिन जब पत्नी इस दुनिया से चली जाए,
तो कुछ समय बाद
उसकी जगह किसी और को दे दी जाती है।
तब क्यों नहीं बदलते
पुरुष के रंगीन कपड़े?
क्यों नहीं छूटते त्योहार?
क्यों नहीं उसके जीवन पर
उसी तरह की बंदिशें लगतीं?
सवाल किसी रीति-रिवाज़ को गलत ठहराने का नहीं,
सवाल उस सोच का है
जो शोक के नियम भी
औरत और मर्द के लिए
अलग-अलग तय करती है।
आख़िर दुःख का भी
क्या कोई लिंग होता है?
अलग-अलग पैमाने हैं?
पति के जाने पर
चूड़ियाँ तोड़ दी जाती हैं,
माथे से बिंदी मिटा दी जाती है,
हर श्रृंगार से नाता तुड़वा दिया जाता है।
रंगीन कपड़े पहनने पर रोक,
त्योहारों से दूरी—
मानो उसके जीवन से
खुशियों का अधिकार ही छीन लिया गया हो।
लेकिन जब पत्नी इस दुनिया से चली जाए,
तो कुछ समय बाद
उसकी जगह किसी और को दे दी जाती है।
तब क्यों नहीं बदलते
पुरुष के रंगीन कपड़े?
क्यों नहीं छूटते त्योहार?
क्यों नहीं उसके जीवन पर
उसी तरह की बंदिशें लगतीं?
सवाल किसी रीति-रिवाज़ को गलत ठहराने का नहीं,
सवाल उस सोच का है
जो शोक के नियम भी
औरत और मर्द के लिए
अलग-अलग तय करती है।
आख़िर दुःख का भी
क्या कोई लिंग होता है?
💔🥺🥺🥺🥺
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जब भी किसी लड़की के साथ दुर्व्यवहार या यौन हिंसा की घटना सामने आती है, सवाल अक्सर लड़की के कपड़ों, उसके बाहर जाने के समय और उसके व्यवहार पर उठने लगते हैं।
लेकिन सवाल यह होना चाहिए
जिसने बिना उसकी सहमति उसे छुआ, उसकी इच्छा के विरुद्ध उसके साथ गलत किया, उससे यह क्यों नहीं पूछा जाता कि उसने ऐसा क्यों किया?
अगर कोई लड़की रात में बाहर जाती है, तो क्या उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उसी की हो जाती है?
क्या रात में बाहर निकलने की आज़ादी सिर्फ लड़कों के लिए है?
हम संविधान और कानून में समानता की बात पढ़ते हैं। सहमति का अर्थ भी समझते हैं
बिना सहमति के किसी को छूना या उसके साथ कोई यौन व्यवहार करना गलत है।
तो फिर बच्चों को बचपन से यह क्यों नहीं सिखाया जाता कि—
किसी की इच्छा का सम्मान करना है,
“ना” का मतलब “ना” है,
और किसी की सीमाओं का उल्लंघन करना अपराध है?
लड़कियों को सावधान करना अपनी जगह सही हो सकता है,
लेकिन केवल लड़कियों पर पाबंदियाँ लगाना समाधान नहीं है।
सुरक्षित समाज बनाने के लिए
लड़कियों को डराकर नहीं, लड़कों को जिम्मेदारी और सम्मान सिखाकर भी काम करना होगा।
आज़ादी किसी एक लिंग की संपत्ति नहीं है।
सम्मान, सुरक्षा और अपने जीवन के फैसले लेने का अधिकार हर इंसान का अधिकार है।
सवाल लड़कियों से यह नहीं होना चाहिए कि
तुम वहाँ गई ही क्यों?
सवाल यह भी होना चाहिए कि
किसी ने तुम्हारी इच्छा के विरुद्ध ऐसा करने की हिम्मत क्यों की?
लेकिन सवाल यह होना चाहिए
जिसने बिना उसकी सहमति उसे छुआ, उसकी इच्छा के विरुद्ध उसके साथ गलत किया, उससे यह क्यों नहीं पूछा जाता कि उसने ऐसा क्यों किया?
अगर कोई लड़की रात में बाहर जाती है, तो क्या उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उसी की हो जाती है?
क्या रात में बाहर निकलने की आज़ादी सिर्फ लड़कों के लिए है?
हम संविधान और कानून में समानता की बात पढ़ते हैं। सहमति का अर्थ भी समझते हैं
बिना सहमति के किसी को छूना या उसके साथ कोई यौन व्यवहार करना गलत है।
तो फिर बच्चों को बचपन से यह क्यों नहीं सिखाया जाता कि—
किसी की इच्छा का सम्मान करना है,
“ना” का मतलब “ना” है,
और किसी की सीमाओं का उल्लंघन करना अपराध है?
लड़कियों को सावधान करना अपनी जगह सही हो सकता है,
लेकिन केवल लड़कियों पर पाबंदियाँ लगाना समाधान नहीं है।
सुरक्षित समाज बनाने के लिए
लड़कियों को डराकर नहीं, लड़कों को जिम्मेदारी और सम्मान सिखाकर भी काम करना होगा।
आज़ादी किसी एक लिंग की संपत्ति नहीं है।
सम्मान, सुरक्षा और अपने जीवन के फैसले लेने का अधिकार हर इंसान का अधिकार है।
सवाल लड़कियों से यह नहीं होना चाहिए कि
तुम वहाँ गई ही क्यों?
सवाल यह भी होना चाहिए कि
किसी ने तुम्हारी इच्छा के विरुद्ध ऐसा करने की हिम्मत क्यों की?
❤8
वो जो कहते थे कि तेरे बिना साँस भी भारी लगती है,
आज उन्होंने ही हमें अपनी यादों से रिहा कर दिया।
हम तो उनके हर लफ़्ज़ को ज़िंदगी का उसूल मान बैठे थे,
और उन्होंने एक ही झटके में हमें बेगाना कर दिया।
अजीब सी ख़ामोशी भर गई है अब इस सीने में,
जहाँ पहले सिर्फ़ उनकी बातों की धड़कन हुआ करती थी।
अब रोते भी हैं तो बस अंधेरों में तकिए भिगोकर,
क्योंकि अब कोई माथा चूम कर ये कहने वाला नहीं बचा—
"मत रोया करो, तुम्हारी आँखों में आँसू मुझसे देखे नहीं जाते।"
तकलीफ़ इस बात की नहीं कि वो चले गए,
दर्द तो इस बात का है कि वो जाते-जाते हमें भी अपने साथ ले गए...
अब जो बचा है, वो सिर्फ़ एक साँस लेता हुआ जिस्म है,
जिसमें रूह तो बहुत पहले दम तोड़ चुकी है।
आज उन्होंने ही हमें अपनी यादों से रिहा कर दिया।
हम तो उनके हर लफ़्ज़ को ज़िंदगी का उसूल मान बैठे थे,
और उन्होंने एक ही झटके में हमें बेगाना कर दिया।
अजीब सी ख़ामोशी भर गई है अब इस सीने में,
जहाँ पहले सिर्फ़ उनकी बातों की धड़कन हुआ करती थी।
अब रोते भी हैं तो बस अंधेरों में तकिए भिगोकर,
क्योंकि अब कोई माथा चूम कर ये कहने वाला नहीं बचा—
"मत रोया करो, तुम्हारी आँखों में आँसू मुझसे देखे नहीं जाते।"
तकलीफ़ इस बात की नहीं कि वो चले गए,
दर्द तो इस बात का है कि वो जाते-जाते हमें भी अपने साथ ले गए...
अब जो बचा है, वो सिर्फ़ एक साँस लेता हुआ जिस्म है,
जिसमें रूह तो बहुत पहले दम तोड़ चुकी है।
❤5🥰4
जब मैं अंतिम कविता लिखूँगी..
रिश्तों को बेड़ियां लिखूँगी..!! प्रेम.. दोस्ती को पाखंड लिखूँगी..!!! सुख को भ्रम और दुःख को सत्य लिखूँगी..!!!
और तुम्हें.... अपनी सबसे बड़ी पीड़ा लिखूँगी
रिश्तों को बेड़ियां लिखूँगी..!! प्रेम.. दोस्ती को पाखंड लिखूँगी..!!! सुख को भ्रम और दुःख को सत्य लिखूँगी..!!!
और तुम्हें.... अपनी सबसे बड़ी पीड़ा लिखूँगी
❤12
पढ़ते-पढ़ते थक जाओ,
तो एक बार Joining Letter ✉️ वाला दिन याद कर लेना…
और उन लोगों की बातें भी,
जो कहते थे—
“तुमसे नहीं होगा।”
बस फिर किताब खोल लेना,
क्योंकि एक दिन तुम्हारी मेहनत ही
उन सबका जवाब होगी।
तुमसे होगा…
ज़रूर होगा।
#@BtwAbhimanyu this for you ❤️💐
तो एक बार Joining Letter ✉️ वाला दिन याद कर लेना…
और उन लोगों की बातें भी,
जो कहते थे—
“तुमसे नहीं होगा।”
बस फिर किताब खोल लेना,
क्योंकि एक दिन तुम्हारी मेहनत ही
उन सबका जवाब होगी।
तुमसे होगा…
ज़रूर होगा।
#@BtwAbhimanyu this for you ❤️💐
❤11
मैं कभी आत्मसम्मान से सौदा नहीं करता मुझसे बिछड़े लोग मेरी दुनिया में मर जाया करते हैं।
❤️
❤🔥7❤2
“Be-wajah haath laga ke toh dekho…
फिर याद रहेगा कि औरत सिर्फ सहना नहीं, जवाब देना भी जानती है।”
फिर याद रहेगा कि औरत सिर्फ सहना नहीं, जवाब देना भी जानती है।”
❤️
❤7🥰5👍2🔥1
हर घर की अपनी कुछ उम्मीदें होती हैं…
कभी बेटे से कभी बेटी से।
माता-पिता चाहते हैं कि
बच्चे वही करें जो उनके हिसाब से सही हो
उनके सपनों को अपना सपना बना लें।
बच्चे भी चाहते हैं कि
उनकी हर उम्मीद पूरी करें
उन्हें कभी निराश न करें…
लेकिन इस सबके बीच
एक सवाल अक्सर अनकहा रह जाता है
उनकी उम्मीदों के बीच मेरा क्या?
क्या बेटे-बेटी होना इतना ही है
कि हम उनकी हर ख़्वाहिश पूरी करते रहें
भले ही अपने मन की आवाज़ दबानी पड़े?
माता-पिता की उम्मीदें ज़रूरी हैं
लेकिन बच्चों की इच्छाएँ भी तो मायने रखती हैं।
उम्मीदों का बोझ लिए चलते रहे उम्रभर
कभी अपने ख़्वाबों का भी हिसाब कर लेते।
सबकी ख़ुशी के लिए ख़ुद को भुलाते रहे
काश कोई पूछता—तुम सच में क्या चाहते रहे?
कभी बेटे से कभी बेटी से।
माता-पिता चाहते हैं कि
बच्चे वही करें जो उनके हिसाब से सही हो
उनके सपनों को अपना सपना बना लें।
बच्चे भी चाहते हैं कि
उनकी हर उम्मीद पूरी करें
उन्हें कभी निराश न करें…
लेकिन इस सबके बीच
एक सवाल अक्सर अनकहा रह जाता है
उनकी उम्मीदों के बीच मेरा क्या?
क्या बेटे-बेटी होना इतना ही है
कि हम उनकी हर ख़्वाहिश पूरी करते रहें
भले ही अपने मन की आवाज़ दबानी पड़े?
माता-पिता की उम्मीदें ज़रूरी हैं
लेकिन बच्चों की इच्छाएँ भी तो मायने रखती हैं।
उम्मीदों का बोझ लिए चलते रहे उम्रभर
कभी अपने ख़्वाबों का भी हिसाब कर लेते।
सबकी ख़ुशी के लिए ख़ुद को भुलाते रहे
काश कोई पूछता—तुम सच में क्या चाहते रहे?
❤7
महात्मा गांधी जी एवं लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती मनाई गई। 🇮🇳🙏
गांधी जी ने हमें सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाया,
वहीं शास्त्री जी ने सादगी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा दी।
इन महान व्यक्तित्वों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर
हर दिन समाज और देश के लिए कुछ अच्छा करने का प्रयास।
गांधी जी ने हमें सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाया,
वहीं शास्त्री जी ने सादगी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा दी।
इन महान व्यक्तित्वों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर
हर दिन समाज और देश के लिए कुछ अच्छा करने का प्रयास।
❤️🇮🇳
❤8
Kitaabein khuli hain, dimaag band sa hai,
Tension ke shor mein dil tang sa hai.
Naukri ki chinta, waqt ka ghera,
Aankhon mein khwab, par charo taraf andhera.
Kayi baar lagta hai sab chhod kar bhaag jaaun,
Is ghutan se nikal kar kahin so jaaun.
Par ruko, kya meri jaan itni si hai?
Kya meri kahani bas ek naukri tak ki hai?
Thaka zaroor hoon, par abhi hara nahi,
Mera wajood itna bhi bechara nahi.
Aaj ruk kar bas ek gehri saans loonga,
Main ladunga, aur khud ko thoda waqt doonga.
Tension ke shor mein dil tang sa hai.
Naukri ki chinta, waqt ka ghera,
Aankhon mein khwab, par charo taraf andhera.
Kayi baar lagta hai sab chhod kar bhaag jaaun,
Is ghutan se nikal kar kahin so jaaun.
Par ruko, kya meri jaan itni si hai?
Kya meri kahani bas ek naukri tak ki hai?
Thaka zaroor hoon, par abhi hara nahi,
Mera wajood itna bhi bechara nahi.
Aaj ruk kar bas ek gehri saans loonga,
Main ladunga, aur khud ko thoda waqt doonga.
✍️ Abhimanyu
❤9👍1
जनाब, हमने ग़म को गले लगा लिया है,
अब ग़म से भी कह दो कि हमें अपना बना ले…
क्योंकि अपनों ने तो अपनाने से इनकार कर दिया...
कम-से-कम ये ग़म ही हमें अपना मान ले।
अब ग़म से भी कह दो कि हमें अपना बना ले…
क्योंकि अपनों ने तो अपनाने से इनकार कर दिया...
कम-से-कम ये ग़म ही हमें अपना मान ले।
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🔥5❤4
ख़ामोशियों का दौर 🧿 pinned «JOIN HERE TO DOWNLOAD DIRECT ALL NEW HINDI DUBBED MOVIES https://t.me/ALL_HINDI_DUBBED_MOVIES_WORLD»
The worst regret is giving a second chance to the wrong person.
मलाल हमको भी है, जनाब…
जो बार-बार हमारे विश्वास से विश्वासघात करता रहा,
हम उसे बार-बार मौका देते रहे.....
मलाल हमको भी है, जनाब…
जो बार-बार हमारे विश्वास से विश्वासघात करता रहा,
हम उसे बार-बार मौका देते रहे.....
👏5👍4
काश ग़म दिल तक ही रहता,
आँखों तक न आता…
उफ़्फ़, ये आँखें भी ना....
हर राज़ खोल देती हैं......
आँखों तक न आता…
उफ़्फ़, ये आँखें भी ना....
हर राज़ खोल देती हैं......
❤️
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