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धागे लौटा दो, माधव... 🦚💙
धागे लौटा दो, माधव, मेरी हर ख़्वाहिश अधूरी रह गई।
धागे लौटा दो, माधव, मेरी हर ख़्वाहिश अधूरी रह गई।
❤9👏3
कभी कपड़े बदलता है कभी लहजा बदलता है
मगर इन कोशिशों से क्या कहीं शजरा बदलता है
तुम्हारे बाद अब जिस का भी जी चाहे मुझे रख ले
जनाज़ा अपनी मर्ज़ी से कहाँ कांधा बदलता है
रिहाई मिल तो जाती है परिंदे को मगर इतनी
सफ़ाई की ग़रज़ से जब कभी पिंजरा बदलता है
मिरी आँखों को पहली आख़िरी हद है तिरा चेहरा
नहीं मैं वो नहीं जो रोज़ आईना बदलता है
अजब ज़िद्दी मुसव्विर है ज़रा पहचान की ख़ातिर
मिरी तस्वीर का हर रोज़ वो चेहरा बदलता है...
वसीम नादिर ✍
@Husain_Writes
मगर इन कोशिशों से क्या कहीं शजरा बदलता है
तुम्हारे बाद अब जिस का भी जी चाहे मुझे रख ले
जनाज़ा अपनी मर्ज़ी से कहाँ कांधा बदलता है
रिहाई मिल तो जाती है परिंदे को मगर इतनी
सफ़ाई की ग़रज़ से जब कभी पिंजरा बदलता है
मिरी आँखों को पहली आख़िरी हद है तिरा चेहरा
नहीं मैं वो नहीं जो रोज़ आईना बदलता है
अजब ज़िद्दी मुसव्विर है ज़रा पहचान की ख़ातिर
मिरी तस्वीर का हर रोज़ वो चेहरा बदलता है...
वसीम नादिर ✍
@Husain_Writes
❤7
हर रचना में कृष्ण का ही आभास लिखती हूँ,
प्रेम को अपना सबसे सच्चा विश्वास लिखती हूँ।
रुक्मिणी का पत्र इसलिए शब्दों में उतरता है,
क्योंकि जानती हूँ, श्याम प्रेम की हर पुकार सुनते हैं।
कुरुक्षेत्र का प्रसंग इसलिए बार-बार लिखती हूँ,
क्योंकि धर्म की रक्षा को कृष्ण स्वयं सारथी बनते हैं।
द्रौपदी की पुकार इसलिए मेरी कलम में बसती है,
क्योंकि जब सब मौन हो जाएँ, तब कृष्ण ही सम्मान बचाते हैं।
मेरी हर पंक्ति का आरंभ भी वही हैं, अंत भी वही,
मैं जो भी लिखती हूँ, हर अक्षर में बस श्याम लिखती हूँ।
जय श्री कृष्ण। 🌿🙏
प्रेम को अपना सबसे सच्चा विश्वास लिखती हूँ।
रुक्मिणी का पत्र इसलिए शब्दों में उतरता है,
क्योंकि जानती हूँ, श्याम प्रेम की हर पुकार सुनते हैं।
कुरुक्षेत्र का प्रसंग इसलिए बार-बार लिखती हूँ,
क्योंकि धर्म की रक्षा को कृष्ण स्वयं सारथी बनते हैं।
द्रौपदी की पुकार इसलिए मेरी कलम में बसती है,
क्योंकि जब सब मौन हो जाएँ, तब कृष्ण ही सम्मान बचाते हैं।
मेरी हर पंक्ति का आरंभ भी वही हैं, अंत भी वही,
मैं जो भी लिखती हूँ, हर अक्षर में बस श्याम लिखती हूँ।
जय श्री कृष्ण। 🌿🙏
❤15🥰1
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जिस्म को चाहने वाले हजार मिल जायेगे
कोई तुम्हारी रूह , से प्यार करे तो बताना
कोई तुम्हारी रूह , से प्यार करे तो बताना
❤13👍2
🦋 Titli kabhi aasman maangkar nahi udti...
Woh pehle khud ko badalti hai, phir apni udaan likhti hai.
Cocoon ke andhere se nikalne wali har titli yeh sikhati hai ki
sangharsh kabhi kamzori nahi hota, wahi asli taakat ban jaata hai.
Log tumhari aaj ki haalat dekhenge,
par kal tumhari udaan ko salaam karenge.
Isliye kabhi apni raftaar se shikayat mat karna...
Har titli ko udne se pehle khud se ladna padta hai.
✨ Badlav se mat daro...
Titli bhi tabhi khoobsurat bani, jab usne khud ko badalne ka hausla kiya. 🦋🌸
#titli
Woh pehle khud ko badalti hai, phir apni udaan likhti hai.
Cocoon ke andhere se nikalne wali har titli yeh sikhati hai ki
sangharsh kabhi kamzori nahi hota, wahi asli taakat ban jaata hai.
Log tumhari aaj ki haalat dekhenge,
par kal tumhari udaan ko salaam karenge.
Isliye kabhi apni raftaar se shikayat mat karna...
Har titli ko udne se pehle khud se ladna padta hai.
✨ Badlav se mat daro...
Titli bhi tabhi khoobsurat bani, jab usne khud ko badalne ka hausla kiya. 🦋🌸
#titli
❤7
बिन माँगे मिल रहा हो तो ख़्वाहिश फ़ुज़ूल है
सूरज से रौशनी की गुज़ारिश फ़ुज़ूल है
किस ने कहा था टूटी हुई नाव में चलो
दरिया के साथ आप की रंजिश फ़ुज़ूल है
नाबूद के सुराग़ की सूरत निकालिए
मौजूद की नुमूद ओ नुमाइश फ़ुज़ूल है
मैं आप अपनी मौत की तय्यारियों में हूँ
मेरे ख़िलाफ़ आप की साज़िश फ़ुज़ूल है
ऐ आसमान तेरी इनायत बजा मगर
फ़सलें पकी हुई हों तो बारिश फ़ुज़ूल है
जी चाहता है कह दूँ ज़मीन ओ ज़माँ से मैं
मंज़िल अगर नहीं है तो गर्दिश फ़ुज़ूल है
शाहिद ज़की
@Husain_Writes
सूरज से रौशनी की गुज़ारिश फ़ुज़ूल है
किस ने कहा था टूटी हुई नाव में चलो
दरिया के साथ आप की रंजिश फ़ुज़ूल है
नाबूद के सुराग़ की सूरत निकालिए
मौजूद की नुमूद ओ नुमाइश फ़ुज़ूल है
मैं आप अपनी मौत की तय्यारियों में हूँ
मेरे ख़िलाफ़ आप की साज़िश फ़ुज़ूल है
ऐ आसमान तेरी इनायत बजा मगर
फ़सलें पकी हुई हों तो बारिश फ़ुज़ूल है
जी चाहता है कह दूँ ज़मीन ओ ज़माँ से मैं
मंज़िल अगर नहीं है तो गर्दिश फ़ुज़ूल है
शाहिद ज़की
@Husain_Writes
❤10
वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता,
तिरंगे से बेहतर कोई कफ़न नहीं होता।
जान हथेली पर रखते हैं ये देश चाहने वाले,
देशभक्ति से कोई बड़ा धर्म नहीं होता। 🇮🇳
तिरंगे से बेहतर कोई कफ़न नहीं होता।
जान हथेली पर रखते हैं ये देश चाहने वाले,
देशभक्ति से कोई बड़ा धर्म नहीं होता। 🇮🇳
❤19
कभी रुक्मिणी का पत्र लिखती हूँ, कभी राधा का इंतज़ार लिखती हूँ,
मैं अपनी हर रचना में केवल कान्हा का प्यार लिखती हूँ।
जानती हूँ, प्रेम सच्चा हो तो कृष्ण स्वयं चले आते हैं,
इसलिए हर शब्द में उनका ही सत्कार लिखती हूँ।
जब धर्म पर संकट आए, वे रणभूमि में भी उतरते हैं,
इसी विश्वास के साथ मैं गीता का सार लिखती हूँ।
जब द्रौपदी ने पुकारा, पूरी सभा मौन खड़ी रह गई,
तब मैंने जाना—सच्ची पुकार पर कृष्ण ही उद्धार लिखते हैं।
मेरी कलम का हर अक्षर उन्हीं के चरणों को समर्पित है,
मैं कविता नहीं लिखती, अपने श्याम का संसार लिखती हूँ।
जय श्री कृष्ण। 🦚🙏
मैं अपनी हर रचना में केवल कान्हा का प्यार लिखती हूँ।
जानती हूँ, प्रेम सच्चा हो तो कृष्ण स्वयं चले आते हैं,
इसलिए हर शब्द में उनका ही सत्कार लिखती हूँ।
जब धर्म पर संकट आए, वे रणभूमि में भी उतरते हैं,
इसी विश्वास के साथ मैं गीता का सार लिखती हूँ।
जब द्रौपदी ने पुकारा, पूरी सभा मौन खड़ी रह गई,
तब मैंने जाना—सच्ची पुकार पर कृष्ण ही उद्धार लिखते हैं।
मेरी कलम का हर अक्षर उन्हीं के चरणों को समर्पित है,
मैं कविता नहीं लिखती, अपने श्याम का संसार लिखती हूँ।
जय श्री कृष्ण। 🦚🙏
❤7
इश्क़-ए-जुनून को संभाल के रख
अपने ख़्वाबों को ख़्याल में रख
हम अपनों के सताए हुए लोग है
तू हमें अपनी ही देख भाल में रख
Mohd_Husain ✍
@Husain_Writes
अपने ख़्वाबों को ख़्याल में रख
हम अपनों के सताए हुए लोग है
तू हमें अपनी ही देख भाल में रख
Mohd_Husain ✍
@Husain_Writes
❤9
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मैं विधाता होकर भी
विधि का विधान न बदल सका।
चाहा था राधा को,
और राधा ने भी मुझे चाहा।
विधि का विधान न बदल सका।
चाहा था राधा को,
और राधा ने भी मुझे चाहा।
❤10
🦋 "Meri Udaan" 🦋
Main titli jaise udna chahti hoon,
khule aasman mein kho jana chahti hoon,
apne pankhon se apni kahani likhna chahti hoon,
par kuch adhoori chhatein hain,
jo har baar mujhe rok leti hain…
Kabhi sapno ka bojh hota hai,
kabhi apno ki umeedein,
kabhi kuch yaadein jo dil mein reh jaati hain,
aur meri udaan ko thoda sa tham leti hain…
Phir bhi dil ke kisi kone mein,
ek chhoti si roshni jalti hai,
jo kehti hai —
"Tu bani hi udne ke liye hai,
sirf waqt ka intezar kar…"
Main gir kar bhi uthna chahti hoon,
toot kar bhi muskurana chahti hoon,
jo khwab adhure reh gaye hain,
unhe phir se sajana chahti hoon…
Mujhe koi rok na sake,
meri himmat ko koi tod na sake,
main apni pehchaan khud banana chahti hoon,
apni mehnat se apna aasman paana chahti hoon…
Ek din main bhi udungi,
apni saari bandishon se door,
jaise subah ki pehli kiran,
jaise hawa mein nachti ek titli…
Aur us din main khud se kahungi —
"Tu ruki thi, par haari nahi thi,
tere pankh thake the,
par teri udaan kabhi khatam nahi hui thi." 🦋✨
Main titli jaise udna chahti hoon,
khule aasman mein kho jana chahti hoon,
apne pankhon se apni kahani likhna chahti hoon,
par kuch adhoori chhatein hain,
jo har baar mujhe rok leti hain…
Kabhi sapno ka bojh hota hai,
kabhi apno ki umeedein,
kabhi kuch yaadein jo dil mein reh jaati hain,
aur meri udaan ko thoda sa tham leti hain…
Phir bhi dil ke kisi kone mein,
ek chhoti si roshni jalti hai,
jo kehti hai —
"Tu bani hi udne ke liye hai,
sirf waqt ka intezar kar…"
Main gir kar bhi uthna chahti hoon,
toot kar bhi muskurana chahti hoon,
jo khwab adhure reh gaye hain,
unhe phir se sajana chahti hoon…
Mujhe koi rok na sake,
meri himmat ko koi tod na sake,
main apni pehchaan khud banana chahti hoon,
apni mehnat se apna aasman paana chahti hoon…
Ek din main bhi udungi,
apni saari bandishon se door,
jaise subah ki pehli kiran,
jaise hawa mein nachti ek titli…
Aur us din main khud se kahungi —
"Tu ruki thi, par haari nahi thi,
tere pankh thake the,
par teri udaan kabhi khatam nahi hui thi." 🦋✨
❤5
उन्होंने कभी हमें चाहा ही नहीं,
उन्होंने कभी हमें समझा ही नहीं।
फिर भी न जाने क्यों
मेरी ज़िंदगी में आकर इतना असर छोड़ गए।
कहते थे—"हमें तुम पसंद नहीं।"
आज भी यही सवाल दिल से उठता है—
अगर पसंद नहीं थी मैं,
तो फिर तुम्हारी ज़िंदगी में मेरी जगह क्या थी?
यह कैसी मोहब्बत थी,
जिसमें अपनापन भी था और इंकार भी,
उम्मीदें भी थीं और दूरी भी।
कुछ रिश्ते शायद जवाब नहीं देते,
बस उम्रभर सवाल छोड़ जाते हैं।
उन्होंने कभी हमें समझा ही नहीं।
फिर भी न जाने क्यों
मेरी ज़िंदगी में आकर इतना असर छोड़ गए।
कहते थे—"हमें तुम पसंद नहीं।"
आज भी यही सवाल दिल से उठता है—
अगर पसंद नहीं थी मैं,
तो फिर तुम्हारी ज़िंदगी में मेरी जगह क्या थी?
यह कैसी मोहब्बत थी,
जिसमें अपनापन भी था और इंकार भी,
उम्मीदें भी थीं और दूरी भी।
कुछ रिश्ते शायद जवाब नहीं देते,
बस उम्रभर सवाल छोड़ जाते हैं।
❤11💔2💯1
सखी और माधव का संवाद 🦚💙
मैंने कहा—
"माधव, मैं हार चुकी हूँ। अब मुझे अपने चरणों में बुला लीजिए। मुझसे अब यह जीवन नहीं जिया जाता।"
माधव मुस्कुराए और बोले—
"सखी, मैंने तुम्हें हारना कभी सिखाया ही नहीं। यह कलियुग है, यहाँ तुम्हें साहस के साथ जीना होगा। तुम्हें परिस्थितियों से लड़ना होगा, कभी अपनों के विरुद्ध भी खड़ा होना पड़ेगा और सबसे बड़ा युद्ध अपने ही मन से लड़ना होगा।"
मैंने अश्रुपूर्ण आँखों से कहा—
"कान्हा, अब मुझसे नहीं हो पा रहा। यह दुःख, यह पीड़ा मेरे धैर्य और सहनशक्ति से बाहर हो चुकी है।"
माधव ने स्नेह से कहा—
"सखी, जब भी मन टूटने लगे, राधा का नाम लेना और आगे बढ़ते रहना। मैं और राधा हर कदम पर तुम्हारे साथ हैं। जब भी तुम्हारा मन घबराए, बस इतना याद रखना कि तुम्हारा माधव तुम्हारे साथ खड़ा है। यदि तुम्हारे कर्म सच्चे हैं और तुम्हारा हृदय निर्मल है, तो निडर होकर आगे बढ़ो।"
"जीवन में परिवर्तन अवश्य आते हैं। कुछ अपने साथ छोड़ जाते हैं, कुछ रिश्ते समय की धूल में खो जाते हैं। लेकिन हर कठिन परिस्थिति तुम्हें कुछ न कुछ सिखाने आती है। उन सीखों को अपने जीवन का प्रकाश बनाना, पर वही भूल दोबारा कभी मत दोहराना।"
"सखी, तुम्हारी हर परीक्षा तुम्हें तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि तुम्हें पहले से अधिक दृढ़, साहसी और परिपक्व बनाने के लिए है। इसलिए उठो, मुस्कुराओ, राधे-राधे का स्मरण करो और विश्वास रखो—अंधेरी रात के बाद नया सवेरा अवश्य आता है। मैं हर पल तुम्हारे साथ हूँ।"
मैंने कहा—
"माधव, मैं हार चुकी हूँ। अब मुझे अपने चरणों में बुला लीजिए। मुझसे अब यह जीवन नहीं जिया जाता।"
माधव मुस्कुराए और बोले—
"सखी, मैंने तुम्हें हारना कभी सिखाया ही नहीं। यह कलियुग है, यहाँ तुम्हें साहस के साथ जीना होगा। तुम्हें परिस्थितियों से लड़ना होगा, कभी अपनों के विरुद्ध भी खड़ा होना पड़ेगा और सबसे बड़ा युद्ध अपने ही मन से लड़ना होगा।"
मैंने अश्रुपूर्ण आँखों से कहा—
"कान्हा, अब मुझसे नहीं हो पा रहा। यह दुःख, यह पीड़ा मेरे धैर्य और सहनशक्ति से बाहर हो चुकी है।"
माधव ने स्नेह से कहा—
"सखी, जब भी मन टूटने लगे, राधा का नाम लेना और आगे बढ़ते रहना। मैं और राधा हर कदम पर तुम्हारे साथ हैं। जब भी तुम्हारा मन घबराए, बस इतना याद रखना कि तुम्हारा माधव तुम्हारे साथ खड़ा है। यदि तुम्हारे कर्म सच्चे हैं और तुम्हारा हृदय निर्मल है, तो निडर होकर आगे बढ़ो।"
"जीवन में परिवर्तन अवश्य आते हैं। कुछ अपने साथ छोड़ जाते हैं, कुछ रिश्ते समय की धूल में खो जाते हैं। लेकिन हर कठिन परिस्थिति तुम्हें कुछ न कुछ सिखाने आती है। उन सीखों को अपने जीवन का प्रकाश बनाना, पर वही भूल दोबारा कभी मत दोहराना।"
"सखी, तुम्हारी हर परीक्षा तुम्हें तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि तुम्हें पहले से अधिक दृढ़, साहसी और परिपक्व बनाने के लिए है। इसलिए उठो, मुस्कुराओ, राधे-राधे का स्मरण करो और विश्वास रखो—अंधेरी रात के बाद नया सवेरा अवश्य आता है। मैं हर पल तुम्हारे साथ हूँ।"
❤9
पीर लिखे तो मीरा जैसी,
मिलन लिखे तो राधा जैसा,
और जीवन की रचना लिखे तो रुक्मिणी जैसी।
तीनों ने प्रेम को अलग-अलग रूप दिया—
मीरा ने भक्ति में,
राधा ने समर्पण में,
और रुक्मिणी ने दाम्पत्य में।
मिलन लिखे तो राधा जैसा,
और जीवन की रचना लिखे तो रुक्मिणी जैसी।
तीनों ने प्रेम को अलग-अलग रूप दिया—
मीरा ने भक्ति में,
राधा ने समर्पण में,
और रुक्मिणी ने दाम्पत्य में।
❤11
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🦋
"Meri Udaan" 🦋
Main titli jaise udna chahti hoon,
khule aasman mein kho jana chahti hoon,
apne pankhon se apni kahani likhna chahti hoon,
par kuch adhoori chhatein hain,
jo har baar mujhe rok leti hain…
❤3🔥3
जाने कैसे सब मेरी "मुखालिफत" पे उतर आए
मैने तो महफिल में अपने दोस्तों को बुलाया था
हर एक दोस्त में मुझे दिख रहा था नया दुश्मन
मैने तो अपनी "तरक्की का किस्सा सुनाया था
#Mohd_Husain ✍
@Husain_Writes
मैने तो महफिल में अपने दोस्तों को बुलाया था
हर एक दोस्त में मुझे दिख रहा था नया दुश्मन
मैने तो अपनी "तरक्की का किस्सा सुनाया था
#Mohd_Husain ✍
@Husain_Writes
❤8
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गोकुल में करे बात कन्हैया,
जिनकी मैया हैं यशोदा।
नटखट हैं हमारे लाल कन्हैया,
माखन-चोरी जिनकी अदा।
❤4👌2