𓊿⃝❤️रिश्ता❤️दिलों❤️का❂𒉜
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कभी-कभी मन के भीतर यह प्रश्न गहराता है क्या सचमुच कोई किसी से प्रेम करता है? यदि प्रेम इतना ही सहज और सच्चा होता, तो क्यों माता-पिता अपने ही बच्चों में प्रिय और अप्रिय का भेद करते? क्यों संतानों को अलग-अलग हिस्सों में बाँटकर देखते?

यदि प्रेम का अस्तित्व सचमुच होता तो विश्वासघाती मित्र और पीठ पीछे वार करने वाले रिश्तेदार कौन होते?
क्या वे किसी और लोक से उतरे जीव हैं? नहीं वे भी हमारे ही संसार का हिस्सा हैं।

अगर प्रेम सच होता, तो प्रेम में धोखा क्यों होता? क्यों बार-बार टूटकर बिखर जाने के बाद,जब कोई व्यक्ति अकेले जीना सीख लेता है,ठीक उसी क्षण कोई और आकर सस्ते अभिनय से उसका विश्वास फिर तोड़ देता है?

और यह केवल प्रेम में ही नहीं.. कभी-कभी तो प्रेमविहीन विवाह भी होते हैं। जिन्हें समाज लव मैरिज कहकर स्वीकार कर लेता है। परंतु वर्षों बाद सच सामने आता है वही व्यक्ति जिसने “आई लव यू फॉरएवर” कहकर नींद भरी रातें दी थीं, वह किसी और के इनबॉक्स में मोहब्बत के इज़हार लिख रहा था। तब वे सारे वादे, सारी स्मृतियाँ,सब एक ही झटके में धुंधली नहीं पड़ जातीं?

समाज कहेगा “मान्यता मिल गई है, और क्या चाहिए?”
पर प्रेम इतना आसान नहीं कि सिंदूर की एक लकीर खींच देने से पूरा हो जाए। प्रेम की नींव है सम्मान और जहाँ सम्मान नहीं, वहाँ प्रेम केवल एक अभिनय है।
सम्मान महँगे वस्त्रों, आभूषणों या सामाजिक प्रमाणों से नहीं तौला जा सकता। वे सब तो केवल दिखावे के आवरण हैं।

अगर प्रेम सच होता,तो अस्सी वर्ष पार कर चुके किसी वृद्ध को कभी यह कटु वाक्य न सुनना पड़ता “यह बूढ़ा अब तक मरा क्यों नहीं?” अगर प्रेम सच होता, तो भाई-भाई, भाई-बहन संपत्ति के लिए एक-दूसरे के शत्रु न बनते। माता-पिता अपने जीवन के अंत से पहले
वसीयत लिखकर न जाते। वे ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें मालूम होता है प्रेम का आवरण है, पर सार कहीं खो गया है।

सच यही है दुनिया में कोई किसी से सच्चा प्रेम नहीं करता। प्रेम इतना सस्ता नहीं…यह बेहद दुर्लभ, बेहद अनमोल और शायद… बेहद महँगा है।

#Prem🥀
#Maahiya❤️
❤17👍1
जब भी जाऊंगी,पूर्णविराम लगा के जाऊंगी...

क्योंकि...प्रेम में अर्द्ध विराम नहीं आता प्रिय..!!❣️

#Maahiya ❤️🥀
#Dedicated✨
❤12🔥2❤‍🔥1
अगर मैं किसी दिन अपना प्रेम चुनूंगी तो
चुन लूंगी
उस लड़के को
जिसे प्रेम के नाम पर छल लिया होगा
किसी लड़की ने
या
छोड़ दिया होगा उसकी प्रेमिका ने
किसी सुखमय जीवन के लालच में।
बेहतर लड़के को ब्याहने के लिए।

तुम भी जब चुनना अपनी प्रेमिका,
तो अपना लेना प्रेम में विरह काटती
उस लड़की को, जिसके प्रेमी ने
छोड़ दिया होगा उसे
किसी बेहतर सौंदर्य की लालसा के लिए ,
..
इसलिए नहीं कि टूटे लोग हृदय से प्रेम करते हैं,
बल्कि इसलिए कि
इससे दुनिया में कम से कम दो लोगों का दुःख कम हो जाएगा..

❤️🥀
❤12
कोई समझने लगे जो तुम्हें अपनी दुनियां,

उसके लिए कभी दुनियां सा न होना तुम...!

#Maahiya ❤️😒
❤15
दिल को तो आज भी इनकार है फ़ासलों से,

दूर हो तुम ये बात बस मेरी आँखें जानती है..!

#Maahiya🖤😶
❤16
सैकड़ों बार रूठी पार्वती को महादेव ने हजार बार मनाया होगा,

रूठना रस है प्रेम का, और मना लेना प्रेम का आनंद...

#sanatani_ishq🩷🤎
❤24👍2🥰2
कुछ रिश्ते बहुत गहरे बन जाते हैं अनायास ही दूर तक साथ चलकर।
जानबूझ कर भी हम नहीं समझना चाहते हैं उनके अर्थ,,,
क्योंकि अर्थ की सार्थकता हम्हें डराती है
नहीं करने देती अपने आप को व्यक्त।

रिश्ते जो समय से परे हैं जिनके नहीं दिये हैं कोई नाम,
हाँ हम जानते हैं उनसे बेहतर जिन्हें हम पुकारते हैं नाम देकर।
अनाम होकर भी हैं नाम के रिश्तों हैं बेहतर, क्योंकि उन्हें जीते हैं हम हर साँस में विश्वास भरकर ,
नहीं जीते हैं केवल नाम को भर |

अधूरे ख़्वावों और और ज़्यादातर पूरी न हो सकने वाली ख्वाहिशों को दिल में बसाये ये रिश्ते किसी भी शोर से परे ,डरे सहमे रूहानी दौर में ही जी लेते हैं एक पूरी उम्र को उम्र भर.!

#sanatani_ishq 💖🥀
❤12👏2🔥1
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सब Log मानते hai उनका भगवान is ब्रह्मांड में सबसे बड़ा है

पर इश्क़ करने wale अपने महबूब me ही ईश्वर का अक्स देख लेते हैं is kadar chah h use 🥺
❤22😢4👍2
जिस तरह से मैं पोस्ट वगैरह चोरी करती हूँ ना

एक दिन इंटरनेशनल चोर घोषित कर दी जाऊंगी 🤣😛🙈

फिर भी करुंगी ढीठ हु ढीठ🙂

@smiling_on💖
😁6❤4👍2
प्यार लफ्ज़ों में पिरोकर...
तुम्हें एक ख़त लिखा है...
चन्द लम्हों की ख्वाहिश नहीं...
तुम्हें अपनी सांसों सी जरूरत लिखा है...
यकीं मानों!..
तुम्हारे साथ को अपनी ज़िंदगी से..
ज्यादा खूबसूरत लिखा है,..
प्यार लफ्ज़ों में पिरोकर
तुम्हें एक ख़त लिखा है।

#Maahiya❤️🥀
❤10
कभी-कभी हम.. किसी के इतने करीब हो जाते हैं.. कि.. उसकी गैरमौजूदगी हमें अकेलेपन का एहसास कराने लगती है..
जैसे मेरी जिंदगी में तुम्हारा मौजूद न होना.. मेरे दिल को बहुत तकलीफ दे जाता है..
कभी कभी.. अकेले में तुम्हारी बातें.. तुम्हारी हंसी.. तुम्हारी यादें.. और तुम्हारे साथ बिताये पल.... तुम्हारे साथ गुजारे वो शाम जिसमें एक दूसरे से कभी ना बिछड़ने के वादे किया करते थे...
तुम्हारा वो 7th feb को मुझे praopose करना,,,
तुम्हारा वो होली दिवाली के दिन सब काम छोड़ के मुझसे मिलने आना....खुशी में हो या गम में तुम्हारा वो हरपल मेरा साथ देना,... तुम्हारा वो सर्द दिनों में मुझे lko महोत्सव घूमाना....
मुझे सब याद आने लगते हैं..
तब दिल से बस एक यही आवाज़ निकलती है.. कि..
"तुम कहाँ चले गए?"

तुम्हारे बगैर सब अधूरा सा लगता है.. जिन बातों से.. मुझे कभी फर्क नहीं पड़ता था.. अब तुम्हारी वही बातें.. रह रह कर याद आती हैं.. तुम्हारी यादें दिल में बस सी गई हैं.. और.. तुम्हारा चेहरा.. बार-बार मेरी आँखों के सामने आ जाता है.. यूं लगता है.. मानो तुम मेरे सामने ही बैठे हो.. और अभी मुझसे बात करोगे.. तुम्हारे जाने के बाद.. बस तुम्हारी यादें ही तो हैं.. जिन्होंने मुझे जिंदा रखा है आज तक.. कभी कभी तो लगता है.. जैसे.. तुमसे ज्यादा तुम्हारी यादें.. बावफा हैं मेरे साथ.. तभी तो मैं.. आज भी खुश रह लेती हूं.. वरना तुम्हारे न होने के एहसास ने तो.. मुझे कब का मार दिया होता..!!

#Maahiya❤️❤️
❤11
किसी ने ये ना पूछा, दर्द की वजह
क्या है..

लोग आते रहे, इलाज़ ही बताते
रहे..
# शुभ रात्रि मित्रो 🌆✨
❤8😢7
❤2
लिखना है मुझे कुछ अपना सा...
कोई आधी अधूरी बात नही...
कोई सहमी हुई सी रात नही...
वो पल जो हम ठुकराए थे...
हम तन्हा तन्हा आए थे...
हां उन्ही खूबसूरत आंखो से....
आंसू बड़े बरसाए थे...
यूँ टूटे थे इश्क में जैसे कोई दफना सा...
लिखना है मुझे कुछ अपना सा....

रूह भी रोयी थी उस दिन...
तू मुझसे खोया था जिस दिन..
मैं जागी सारी रात थी...
तू चैन से सोया था उस दिन...
जिस्म को था एहसास हुआ होता क्या तड़पना सा..
लिखना है मुझे कुछ अपना सा...

गर लिख पाती इन हाथो से...
अपनी चाहत के किस्सों को...
चुन चुन के सुनाती दुनिया को..
अपने इश्क के हिस्सों को...
जाना दिल तोड़ने पर...
कोई माफी नही होती...
हम क्या करे माशूका है..
हमसे वादा खिलाफी नही होती...
तुझको ही देखे आंख मेरी है भले तू है सपना सा...
लिखना है मुझे कुछ अपना सा...
लिखना है मुझे कुछ अपना सा...
#sanatani_ishq💔💔🥀
#Maahiya😢🥀
❤5
लफ़्ज़ों का भी तापमान🌞 होता है,

जो कभी सुकून देते हैं..🥰

या कभी जला देते है...❤️‍🔥

#Maahiya💖💯
❤4
कभी तो खर्च करो तुम खुद को मुझ पर..!!

तसल्ली तो रहे की मामूली नहीं है हम..!!....

#Mààhiya ❤️🥀
❤2
➴➵➶➴➵➶➴➵➶➴➵➶➴

तेरा जाना भी लाजिमी था
वरना कैसे समझ पाती कि इश्क की हकीकत क्या है ।
तेरे बिछड़ने पर मालूम हुआ
कि मोहब्बत तो मुझे तेरे नाम से आज भी है ।

# अधूरी ख्वाहिशें 🥀

#Maahiya 💖🥀
➴➵➶➴➵➶➴➵➶➴➵➶➴
❤10
कभी उदास बैठोगे कभी मुस्कराओगे...
मैं जब याद आऊंगी बताओ कैसे छूपाओगे..
ये न सोचना मुझे आंखो से बहा दोगे...
मैं रहती हूं तेरे दिल में बताओ कैसे दुखाओगे...
जानती हूं खुद को रख लोगे कैद करके तन्हाई में..
जानती हूं रजामंद कर लोगे दिल को मेरे खिलाफ गवाही में...
सजा मेरी जान भला मुझे कैसे सुनाओगे..
कभी उदास बैठोगे कभी मुस्कराओगे...

मोहब्बत ये दर्द दवा दुआ कब जानती है...
पर ये भी सच है तुझे मुजरिम तो मानती हैं...
तेरी रातों का भी मूझपे इल्जाम रहा होगा...
नफरत से ही सही तेरे होंटो पे मेरा नाम रहा होगा...
आखिरी ख्वाइश में लो फैला दी बाहें..
तुम कोन सा आके भला गले से लगाओगे..
मेरी याद में जब उदास बैठोगे...
माहिया की शायरी से तुम भी अपना दिल बहलाओगे...

#Foryou ❤️😢
#sanatani_ishq💖🥀
❤7
क्या फायदा अलमारी भर भर साड़ियों का जब...

AI की बताई साड़ी पहनकर ही घूमना है तो।

🤣🤣🤣🤣🤣
@smiling_on💖
❤3😁3🤣2
वो जब हँसता था..तो जी उठती थी.. मैं.. एक पल के लिए भी उसकी उदासी देखी नहीं जाती थी.. मैंने अपनी नींदें.. अपने सपने.. अपनी सारी ख्वाहिशें.. उस पर ही लुटा दी थीं.. उसकी खामोशी भी पढ़ सकती थी मैं.. इस अंदाज से चाहा था उसे मैने.. कि.. जान भी मांग लेता मुझसे.. तो इंकार नहीं करती.. लेकिन वो तो.. बस नाम का ही अच्छा निकला.. दूसरों की आंखों में आंखे डाल कर.. ठीक वैसा ही सच बोला करता था.. जैसा मुझसे बोलता था.. उसके वादों की उम्र बहुत कम निकली.. और.. उसके इरादों की गहराई.. बारिश की एक बूँद जितनी भी न थी.. मैंने उसे अपना सब कुछ समझा.. और.. वो मेरे सिवा भी किसी का.. सबकुछ बनने को तैयार रहता था.. झूठा था वो.. मगर.. इतने खूबसूरत झूठ बोलता था.. कि.. न चाहते हुए भी.. यकीन करना ही पड़ता था.. मुझे उससे कभी कोई शिकायत नहीं थी.. बस अफ़सोस था.. इस बात का.. कि.. जिसे मैं अपनी रूह समझती रही.. उसके पास तो रूह भी न थी.. मैं टूट रही थी.. बिखरती जा रही थी.. मगर कुछ कर नहीं पा रही थी.. मेरी बेबसी मुझे मुंह चिड़ा रही थी.. और.. मेरी मोहब्बत कमजोर पड़ती जा रही थी.. अब तक मुझे समझ आ गया था.. कि.. किसी को कितना भी चाह लो.. वो तुम्हारा तब तक नहीं बन सकता.. जब तक वो खुद न चाहे.. और तब मैने अपना मन मजबूत कर.. ये फैसला लिया.. कि.. खुद के सिवा.. अब किसी से मोहब्बत नहीं करूंगी.. और.. न ही भरोसा करूंगी किसी पर.. क्योंकि.. ये मतलब की दुनिया है.. यहां सच्चे प्रेम की किसी को कद्र नहीं.. यहां कद्र है.. तो.. बस नकली और दिखावटी बाते.. करने वालों की.. वैसे तो.. वो भी एक दिखावा पसंद.. नकली आदमी ही था.. मगर.. जाते जाते.. मेरे दिल को.. कभी न भरने वाले.. असली ज़ख्म दे गया..!!

अर्चना श्रीवास्तव ✍✍
17/09/2025
❤14😭2👍1