आपका हस्तलेखन (hand writting) खराब है तो जरूरी नहीं कि आप बौद्धिक रूप से कमतर हैं। जिन लोगों ने देश का संविधान लिखा है, वे तो उच्च स्तर के बुद्धिजीवी लोग थे।
हालांकि हस्ताक्षर का राइटिंग से कोई संबंध नहीं होता, फिर भी संविधान की मूल प्रति पर किए गए इन हस्ताक्षर से उनकी राइटिंग का अनुमान लगाया ही जा सकता है।
ध्यान रहे कि 24 जनवरी, 1950 को हुई संविधान सभा की अंतिम बैठक में संविधान की 3️⃣ मूल प्रतियों (2 अंग्रेज़ी और 1 हिंदी) पर 284 सदस्यों ने हस्ताक्षर किये थे। इनमें पहले हस्ताक्षर डॉ राजेन्द्र प्रसाद के थे और अंतिम सुन्दरलाल के। हस्ताक्षर करने वाली पहली महिला अम्मू स्वामीनाथन थी।
नीचे दी गई फोटोज़ का अवलोकन करें ।👇
हालांकि हस्ताक्षर का राइटिंग से कोई संबंध नहीं होता, फिर भी संविधान की मूल प्रति पर किए गए इन हस्ताक्षर से उनकी राइटिंग का अनुमान लगाया ही जा सकता है।
ध्यान रहे कि 24 जनवरी, 1950 को हुई संविधान सभा की अंतिम बैठक में संविधान की 3️⃣ मूल प्रतियों (2 अंग्रेज़ी और 1 हिंदी) पर 284 सदस्यों ने हस्ताक्षर किये थे। इनमें पहले हस्ताक्षर डॉ राजेन्द्र प्रसाद के थे और अंतिम सुन्दरलाल के। हस्ताक्षर करने वाली पहली महिला अम्मू स्वामीनाथन थी।
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☘️🌸 ज्ञान 🌸☘️ pinned «आपका हस्तलेखन (hand writting) खराब है तो जरूरी नहीं कि आप बौद्धिक रूप से कमतर हैं। जिन लोगों ने देश का संविधान लिखा है, वे तो उच्च स्तर के बुद्धिजीवी लोग थे। हालांकि हस्ताक्षर का राइटिंग से कोई संबंध नहीं होता, फिर भी संविधान की मूल प्रति पर किए गए इन हस्ताक्षर…»
🎲 Quiz '🔰♻️करंट अफेयर्स♻️🔰'
🔰♻️करंट अफेयर्स♻️🔰 Nobody answered ❤️🙏जय सियाराम🙏❤️♻️ जितना खामोश रहो उतना ही बेहतर है, क्योंकि लोग शब्दों के गलत अर्थ, निकालने के विशेषज्ञ होते हैं।🤞👌 https://t.me/singhclasss
🖊 51 questions · ⏱ 15 sec
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यह उस समय की बात है जब भारत में अंग्रेजों का शासन था। खचाखच भरी एक रेलगाड़ी चली जा रही थी। यात्रियों में अधिकतर अंग्रेज थे। एक डिब्बे में एक भारतीय मुसाफिर गंभीर मुद्रा में बैठा था। वहां बैठे अंग्रेज उसे मूर्ख और अनपढ़ समझ रहे थे। अचानक उस व्यक्ति ने उठकर गाड़ी की जंजीर खींच दी। तेज रफ्तार में दौड़ती वह गाड़ी तत्काल रुक गई।
सभी यात्री उसे भला-बुरा कहने लगे। थोड़ी देर में गार्ड भी आ गया और उसने पूछा, ‘जंजीर किसने खींची है?’ उस व्यक्ति ने उत्तर दिया, ‘मैंने खींची है।’ कारण पूछने पर उसने बताया, ‘मेरा अनुमान है कि यहां से लगभग एक फर्लांग की दूरी पर रेल की पटरी उखड़ी हुई है।’ गार्ड ने पूछा, ‘आपको कैसे पता चला?’ वह बोला, ‘श्रीमान! मैंने अनुभव किया कि गाड़ी की स्वाभाविक गति में अंतर आ गया है। पटरी से गूंजने वाली आवाज की गति से मुझे खतरे का आभास हो रहा है।’
गार्ड उस व्यक्ति को साथ लेकर जब कुछ दूरी पर पहुंचा तो यह देखकर दंग रहा गया कि वास्तव में एक जगह से रेल की पटरी के जोड़ खुले हुए हैं और सब नट-बोल्ट अलग बिखरे पड़े हैं। दूसरे यात्री भी वहां आ पहुंचे। जब लोगों को पता चला कि उस व्यक्ति की सूझबूझ के कारण उनकी जान बच गई है तो वे उसकी प्रशंसा करने लगे। गार्ड ने पूछा, ‘आप कौन हैं?’ उस व्यक्ति ने कहा, ‘मैं एक इंजीनियर हूं और मेरा नाम है डॉ॰ एम. विश्वेश्वरैया।’ नाम सुन सब स्तब्ध रह गए। ट्रेन में बैठे सारे लोग उनसे माफी मांगने लगे। तब डॉ. विश्वेश्वरैया ने उत्तर दिया, 'आप सब ने मुझे जो कुछ भी कहा होगा, मुझे तो बिल्कुल याद नहीं है।
कृष्णराजसागर बांध, भद्रावती स्टील प्लांट, मैसूर विश्वविद्यालय, बैंक ऑफ मैसूर तथा अर्थव्यवस्था में अभूतपूर्व योगदान देने वाले, तथा 1906 में केशरेहिन्द तथा 1955 में भारत रत्न प्राप्त मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म आज ही के दिन 15 सितंबर,1860 को हुआ था... इस कारण आज का दिवस "अभियंता दिवस"के रूप में मनाया जाता है।
सभी यात्री उसे भला-बुरा कहने लगे। थोड़ी देर में गार्ड भी आ गया और उसने पूछा, ‘जंजीर किसने खींची है?’ उस व्यक्ति ने उत्तर दिया, ‘मैंने खींची है।’ कारण पूछने पर उसने बताया, ‘मेरा अनुमान है कि यहां से लगभग एक फर्लांग की दूरी पर रेल की पटरी उखड़ी हुई है।’ गार्ड ने पूछा, ‘आपको कैसे पता चला?’ वह बोला, ‘श्रीमान! मैंने अनुभव किया कि गाड़ी की स्वाभाविक गति में अंतर आ गया है। पटरी से गूंजने वाली आवाज की गति से मुझे खतरे का आभास हो रहा है।’
गार्ड उस व्यक्ति को साथ लेकर जब कुछ दूरी पर पहुंचा तो यह देखकर दंग रहा गया कि वास्तव में एक जगह से रेल की पटरी के जोड़ खुले हुए हैं और सब नट-बोल्ट अलग बिखरे पड़े हैं। दूसरे यात्री भी वहां आ पहुंचे। जब लोगों को पता चला कि उस व्यक्ति की सूझबूझ के कारण उनकी जान बच गई है तो वे उसकी प्रशंसा करने लगे। गार्ड ने पूछा, ‘आप कौन हैं?’ उस व्यक्ति ने कहा, ‘मैं एक इंजीनियर हूं और मेरा नाम है डॉ॰ एम. विश्वेश्वरैया।’ नाम सुन सब स्तब्ध रह गए। ट्रेन में बैठे सारे लोग उनसे माफी मांगने लगे। तब डॉ. विश्वेश्वरैया ने उत्तर दिया, 'आप सब ने मुझे जो कुछ भी कहा होगा, मुझे तो बिल्कुल याद नहीं है।
कृष्णराजसागर बांध, भद्रावती स्टील प्लांट, मैसूर विश्वविद्यालय, बैंक ऑफ मैसूर तथा अर्थव्यवस्था में अभूतपूर्व योगदान देने वाले, तथा 1906 में केशरेहिन्द तथा 1955 में भारत रत्न प्राप्त मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म आज ही के दिन 15 सितंबर,1860 को हुआ था... इस कारण आज का दिवस "अभियंता दिवस"के रूप में मनाया जाता है।
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🎲 Quiz '♻️2025 के पुरस्कार एवं सम्मान♻️'
♻️❤️🦚जय सियाराम🦚❤️♻️ ♻️❤️दूसरों के दोषों पर पीएचडी करने से बेहतर है कि हम खुद की मानसिकता पर ग्रेजुएशन ही कर लें।🤞🦋🩷 https://t.me/singhclasss
🖊 34 questions · ⏱ 15 sec
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🎲 Quiz '🔰प्रकाश🔰'
🔰प्रकाश🔰 Nobody answered 🔆💐 जय माता दी 💐🔆 मरने वाले को रोने वाला हजारों मिल जाएंगे मगर जो जिंदा है उसे समझने वाला यह कभीनहीं मिलेगा 🤞🔰 https://t.me/singhclasss
🖊 31 questions · ⏱ 15 sec
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🖊 31 questions · ⏱ 15 sec
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राजेश्वर सिंह होंगे राजस्थान के नए मुख्य निर्वाचन आयुक्त
मधुकर गुप्ता की सेवानिवृति के बाद राजस्थान के नए राज्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में राजेश्वर सिंह को नियुक्त किया गया है।
ध्यान रहे कि राज्य निर्वाचन आयोग का मुख्य कार्य पंचायत और नगरीय निकायों के चुनाव करवाना होता है।
संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 243ट
पद और नियुक्ति:
अनुच्छेद 243ट (1) के अनुसार पंचायतों के लिए कराए जाने वाले सभी निर्वाचनों के लिए निर्वाचक नामावली तैयार कराने का और उन सभी निर्वाचनों के संचालन का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण एक राज्य निर्वाचन आयोग में निहित होगा जिसमें एक राज्य निर्वाचन आयुक्त होगा जो राज्यपाल द्वारा नियुक्त किया जाएगा।
व्याख्या: राज्य में पंचायतों के निर्वाचन संबंधी समस्त कार्य राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा किए जाते हैं। ध्यान रहे कि अनुच्छेद 243यक के तहत नगरीय निकायों के निर्वाचन संबंधी समस्त कार्य भी राज्य निर्वाचन आयोग ही करता है। यह आयोग एक सदस्यीय होता है जिसे राज्य निर्वाचन आयुक्त कहा जाता है। राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल करता है।
सेवाशर्तें, पदावधि और पदमुक्ति:
अनुच्छेद के 243ट (2) के अनुसार किसी राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, राज्य निर्वाचन आयुक्त की सेवा की शर्ते और पदावधि ऐसी होंगी जो राज्यपाल नियम द्वारा अवधारित करे:
परंतु राज्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर ही हटाया जाएगा जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, अन्यथा नहीं और राज्य निर्वाचन आयुक्त की सेवा की शर्तों में उसकी नियुक्ति के पश्चात् उसके लिए अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
व्याख्या: राज्य निर्वाचन आयुक्त की सेवाशर्तों और पदावधि का निर्धारण राज्यपाल करता है। संविधान में आयुक्त के कार्यकाल का स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया है। राजस्थान में राज्य निर्वाचन आयुक्त के कार्यकाल हेतु 5 वर्ष की अवधि या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, का निर्धारण कर दिया गया है।
आयुक्त को उन्ही कारणों और रीतियों से पद से हटाया जा सकता है जिन कारणों और रीतियों से उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है। इसका अर्थ है कि आयुक्त को संसद के विशेष बहुमत से पारित संकल्प के आधार पर राष्ट्रपति द्वारा पद से हटाया जा सकता है। राज्यपाल इसकी नियुक्ति करता है लेकिन इसे हटा नहीं सकता।
कार्यप्रणाली और कर्मचारी:
अनुच्छेद 243ट (3) के अनुसार जब राज्य निर्वाचन आयोग ऐसा अनुरोध करे तब किसी राज्य का राज्यपाल, राज्य निर्वाचन आयोग को उतने कर्मचारिवृंद उपलब्ध कराएगा जितने खंड (1) द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग को उसे सौंपे गए कृत्यों के निर्वहन के लिए आवश्यक हों।
व्याख्या: जब भी पंचायत या नगरपालिका चुनाव होते हैं तो राज्यपाल राज्य सरकार के अधीन कर्मचारियों को निर्वाचन आयोग के अधीन होने वाले कार्य करने हेतु उन्हें पाबंद करता है जिस कारण आयोग निर्वाचन संबंधी कार्य संपन्न करवा पाता है।
निर्वाचन संबंधी अन्य प्रावधान:
अनुच्छेद 243ट (4) के अनुसार इस संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा, पंचायतों के निर्वाचनों से संबंधित या संसक्त सभी विषयों के संबंध में उपबंध कर सकेगा।
व्याख्या: पंचायतों और नगरपालिकाओं के निर्वाचन के संबंध में कोई उपबंध करने कि शक्ति राज्य विधानमंडल में निहित होती है और वह विधि बनाकर ही ऐसा उपबंध कर सकता है।
मधुकर गुप्ता की सेवानिवृति के बाद राजस्थान के नए राज्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में राजेश्वर सिंह को नियुक्त किया गया है।
ध्यान रहे कि राज्य निर्वाचन आयोग का मुख्य कार्य पंचायत और नगरीय निकायों के चुनाव करवाना होता है।
संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 243ट
पद और नियुक्ति:
अनुच्छेद 243ट (1) के अनुसार पंचायतों के लिए कराए जाने वाले सभी निर्वाचनों के लिए निर्वाचक नामावली तैयार कराने का और उन सभी निर्वाचनों के संचालन का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण एक राज्य निर्वाचन आयोग में निहित होगा जिसमें एक राज्य निर्वाचन आयुक्त होगा जो राज्यपाल द्वारा नियुक्त किया जाएगा।
व्याख्या: राज्य में पंचायतों के निर्वाचन संबंधी समस्त कार्य राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा किए जाते हैं। ध्यान रहे कि अनुच्छेद 243यक के तहत नगरीय निकायों के निर्वाचन संबंधी समस्त कार्य भी राज्य निर्वाचन आयोग ही करता है। यह आयोग एक सदस्यीय होता है जिसे राज्य निर्वाचन आयुक्त कहा जाता है। राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल करता है।
सेवाशर्तें, पदावधि और पदमुक्ति:
अनुच्छेद के 243ट (2) के अनुसार किसी राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, राज्य निर्वाचन आयुक्त की सेवा की शर्ते और पदावधि ऐसी होंगी जो राज्यपाल नियम द्वारा अवधारित करे:
परंतु राज्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर ही हटाया जाएगा जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, अन्यथा नहीं और राज्य निर्वाचन आयुक्त की सेवा की शर्तों में उसकी नियुक्ति के पश्चात् उसके लिए अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
व्याख्या: राज्य निर्वाचन आयुक्त की सेवाशर्तों और पदावधि का निर्धारण राज्यपाल करता है। संविधान में आयुक्त के कार्यकाल का स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया है। राजस्थान में राज्य निर्वाचन आयुक्त के कार्यकाल हेतु 5 वर्ष की अवधि या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, का निर्धारण कर दिया गया है।
आयुक्त को उन्ही कारणों और रीतियों से पद से हटाया जा सकता है जिन कारणों और रीतियों से उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है। इसका अर्थ है कि आयुक्त को संसद के विशेष बहुमत से पारित संकल्प के आधार पर राष्ट्रपति द्वारा पद से हटाया जा सकता है। राज्यपाल इसकी नियुक्ति करता है लेकिन इसे हटा नहीं सकता।
कार्यप्रणाली और कर्मचारी:
अनुच्छेद 243ट (3) के अनुसार जब राज्य निर्वाचन आयोग ऐसा अनुरोध करे तब किसी राज्य का राज्यपाल, राज्य निर्वाचन आयोग को उतने कर्मचारिवृंद उपलब्ध कराएगा जितने खंड (1) द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग को उसे सौंपे गए कृत्यों के निर्वहन के लिए आवश्यक हों।
व्याख्या: जब भी पंचायत या नगरपालिका चुनाव होते हैं तो राज्यपाल राज्य सरकार के अधीन कर्मचारियों को निर्वाचन आयोग के अधीन होने वाले कार्य करने हेतु उन्हें पाबंद करता है जिस कारण आयोग निर्वाचन संबंधी कार्य संपन्न करवा पाता है।
निर्वाचन संबंधी अन्य प्रावधान:
अनुच्छेद 243ट (4) के अनुसार इस संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा, पंचायतों के निर्वाचनों से संबंधित या संसक्त सभी विषयों के संबंध में उपबंध कर सकेगा।
व्याख्या: पंचायतों और नगरपालिकाओं के निर्वाचन के संबंध में कोई उपबंध करने कि शक्ति राज्य विधानमंडल में निहित होती है और वह विधि बनाकर ही ऐसा उपबंध कर सकता है।
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🎲 Quiz '📚💫⚫⚫ महत्वपूर्ण प्रश्न⚫⚫📚💫'
मुश्किल नहीं है कुछ दुनिया में, आप जरा हिम्मत तो करिए। ख्वाब बदलेंगे हकीकत में, आप जरा कोशिश तो करिए।। ➡️@SINGHCLASSS
🖊 18 questions · ⏱ 15 sec
मुश्किल नहीं है कुछ दुनिया में, आप जरा हिम्मत तो करिए। ख्वाब बदलेंगे हकीकत में, आप जरा कोशिश तो करिए।। ➡️@SINGHCLASSS
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