जापान में संसद में चर्चा चल रही है —
कि मुसलमानों की डेड बॉडी ज़मीन में गाड़ने नहीं दी जाए,
क्योंकि इससे पीने का पानी और खेती की मिट्टी प्रदूषित होती है।
जापानी परंपरा साफ है —
या तो स्थानीय रीति से अंतिम क्रिया,
या फिर अपनी डेड बॉडी अपने देश ले जाएँ… अपने ख़र्चे पर।
अब सवाल भारत से —
क्या यह चर्चा भारत में भी होनी चाहिए?
जहाँ लाखों एकड़ सरकारी और ग्रामसभा की ज़मीन
कब्रिस्तानों के नाम पर कब्ज़े में जाती जा रही है
और पर्यावरण, जलस्रोत, खेती पर असर बढ़ता जा रहा है?
समाधान क्या हो?
यही जापानी मॉडल?
या भारतीय सनातन परंपरा का पर्यावरण-हितैषी रास्ता?
आप क्या सोचते हैं? 🇮🇳
#CulturalDebate #IndiaFirst #LandJihad #Environment
https://x.com/schavhanke/status/1994739181097291918?s=48&t=r8TFZ2E75qiGwbGu5YDNQA
कि मुसलमानों की डेड बॉडी ज़मीन में गाड़ने नहीं दी जाए,
क्योंकि इससे पीने का पानी और खेती की मिट्टी प्रदूषित होती है।
जापानी परंपरा साफ है —
या तो स्थानीय रीति से अंतिम क्रिया,
या फिर अपनी डेड बॉडी अपने देश ले जाएँ… अपने ख़र्चे पर।
अब सवाल भारत से —
क्या यह चर्चा भारत में भी होनी चाहिए?
जहाँ लाखों एकड़ सरकारी और ग्रामसभा की ज़मीन
कब्रिस्तानों के नाम पर कब्ज़े में जाती जा रही है
और पर्यावरण, जलस्रोत, खेती पर असर बढ़ता जा रहा है?
समाधान क्या हो?
यही जापानी मॉडल?
या भारतीय सनातन परंपरा का पर्यावरण-हितैषी रास्ता?
आप क्या सोचते हैं? 🇮🇳
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जापान में संसद में चर्चा चल रही है —
कि मुसलमानों की डेड बॉडी ज़मीन में गाड़ने नहीं दी जाए,
क्योंकि इससे पीने का पानी और खेती की मिट्टी प्रदूषित होती है।
जापानी परंपरा साफ है —
या तो स्थानीय रीति से अंतिम क्रिया,
या फिर अपनी डेड बॉडी अपने देश ले जाएँ… अपने…
कि मुसलमानों की डेड बॉडी ज़मीन में गाड़ने नहीं दी जाए,
क्योंकि इससे पीने का पानी और खेती की मिट्टी प्रदूषित होती है।
जापानी परंपरा साफ है —
या तो स्थानीय रीति से अंतिम क्रिया,
या फिर अपनी डेड बॉडी अपने देश ले जाएँ… अपने…
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