The Narrative
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काकोरी ट्रेन एक्शन

> भारत की स्वाधीनता के लिए किए गए संघर्षों की गाथा

वर्ष 1925 के अगस्त माह में हुई काकोरी ट्रेन एक्शन की घटना स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों से अंकित ऐसी घटना थी, जिसने तत्कालीन ब्रिटिश ईसाई सत्ता की जड़ों को हिला दिया था.

इस एक्शन में भारत को पराधीनता के जंजीरों से मुक्त कराने के उद्देश्य से गठित किए गए एचआरए (HRA) के क्रांतिकारियों ने लखनऊ जा रहे अंग्रेजी सरकार के खजाने पर काकोरी में हमला बोला था.

इस अभियान का नेतृत्व पंडित रामप्रसाद बिस्मिल ने किया, जिसमें उनके साथ असफाकउल्लाह खां, राजेन्द्र लाहिड़ी एवं चंद्रशेखर आजाद जैसे साथी भी थे.

काकोरी केवल एक रेलगाड़ी की घटना नहीं थी. यह उस काल के उन युवाओं के संकल्प का प्रतीक बन गई, जिन्होंने अपने जीवन को भारत की स्वाधीनता के लिए समर्पित कर दिया.

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भारत - विचार

> 9 अगस्त का ‘विश्व मूलनिवासी दिवस’ आखिर किस इतिहास की देन है? क्या भारत के जनजातीय समाज पर एक विदेशी नैरेटिव थोपा जा रहा है? पढ़िए इतिहास, पहचान और विचार से जुड़े सवालों पर यह महत्वपूर्ण विमर्श।

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1857 की क्रांति: भारतीय स्वातंत्र्य समर

> भारत की स्वाधीनता के लिए किए गए संघर्षों की गाथा

ब्रिटिश ईसाई सत्ता की विभिन्न कुनीतियों के कारण वर्षों तक अपने भीतर आक्रोश लिए बैठे भारतीयों को क्रांति के लिए एक चिंगारी मिल गई थी. 'गाय की चर्बी' लगे कारतूस का विरोध करते हुए 10 मई 1857 को मेरठ से इसकी शुरुआत हुई.

इस क्रांति का विस्तार बंगाल से होते हुए लखनऊ, मेरठ से दिल्ली पहुंचा. इसके बाद राजस्थान से लेकर बिहार और मध्यप्रदेश तक क्रांतिकारियों की बाढ़ सी आ गई, जिसने ब्रिटिश ईसाई सत्ता की जड़ें हिला दी.

नाना साहेब, तात्या टोपे, रानी लक्ष्मीबाई, बाबू कुंवर सिंह, मंगल पांडे ने प्रमुख रूप से इस स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों एवं क्रांतिकारी घटनाओं का नेतृत्व किया.

स्वाधीनता के इस महान संग्राम को 'वीर सावरकर' ने भारतीय स्वाधीनता का पहला संग्राम कहा था.

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आजाद हिंद फौज: स्वाधीनता संग्राम में शामिल भारतीय क्रांतिकारियों की सेना

> भारत की स्वाधीनता के लिए किए गए संघर्षों की गाथा

ब्रिटिश ईसाइयों से भारत को स्वतंत्र कराने के लिए अक्टूबर 1943 में 'आजाद हिंद फौज' का गठन किया गया था, जिसमें कैप्टन मोहन सिंह, रासबिहारी बोस एवं निरंजन सिंह गिल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

तत्पश्चात नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने इसकी कमान संभाली और ब्रिटिश ईसाई सत्ता के विरुद्ध संघर्ष किया. जापान द्वारा युद्धबंदी बनाए गए भारतीय सैनिकों की सहायता से नेताजी ने फौज को आगे बढ़ाया और भारत को स्वतंत्र कराने के लिए क्रांतिकारी गतिविधियों को अंजाम दिया.

आजाद हिंद फौज का मुख्यालय सिंगापुर एवं रंगून में बनाया गया. 30 दिसंबर 1943 को अंडमान-निकोबार द्वीप पर स्वतंत्र भारत का ध्वज लहराकर आजाद हिंद फौज ने स्वाधीनता की ओर पहला कदम रखा.

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China in Focus - Mainland China

> China’s intelligence laws, surveillance system, and opaque state-corporate ties raise serious concerns over data security and digital sovereignty. Read the full story.

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Bharat - Internal Security

> New FCRA rules exclude proselytisation from permitted religious activities, tightening India’s oversight of foreign funding and its utilisation by registered organisations.

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☘️ हरेली तिहार – छत्तीसगढ़ का लोक पर्व

श्रावण अमावस्या को मनाया जाने वाला हरेली तिहार केवल पर्व नहीं, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का उत्सव है.

‘हरेली’ यानी हरियाली , यही जीवन है, यही प्रकृति की आत्मा.

किसान इस दिन अपने कृषि उपकरणों की पूजा कर मिट्टी और परिश्रम दोनों को प्रणाम करते हैं.

गेड़ी खेल, उपकरणों की आरती, और नैसर्गिक प्रसाद, हर परंपरा में छिपा है लोक जीवन का विज्ञान.

यह छत्तीसगढ़ का पहला पर्व माना जाता है, जहाँ खेत भी पूज्य हैं, और खलिहान भी.

जहाँ हर हरियाली में ईश्वर है, वही है हरेली…

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श्रावण मास में कांवड़ यात्रा

प्रत्येक वर्ष श्रावण मास में लाखों शिवभक्त गंगा जल लेकर पवित्र तीर्थों से पैदल चलकर शिवलिंग पर जल अर्पण करते हैं, यही है कांवड़ यात्रा.

इस यात्रा में भक्तगण कंधे पर कांवड़ उठाकर, नंगे पाँव चलते हैं और “बोल बम!” के जयघोष से वातावरण को गुंजायमान कर देते हैं.

पौराणिक आख्यानों के अनुसार भगवान श्रीराम एवं लक्ष्मण जी ने भी कांवड़ में गंगाजल चढ़ाकर भगवान शिव की आराधना की थी.

कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, यह भारतीय जनमानस में महादेव से जुड़ने की जीवंत परंपरा है, जहाँ भक्ति और कठोर तप एक साथ चलते हैं.

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कम्युनिज़्म - प्रोपेगेंडा

> जनजातीय अधिकारों के नाम पर खड़ा हुआ संगठन, जिसके पीछे है ईसाइयों की Liberation Theology और वामपंथी नेटवर्क! पीटर उर्फ प्रदीप के पुराने कनेक्शन और नेटवर्क की पूरी कहानी, पढ़िए इस लेख में!

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भारत की स्वाधीनता के समय कम्युनिस्टों ने इसे "झूठा" बता दिया था, क्योंकि भारत में कम्युनिस्ट तानाशाही की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक सरकार स्थापित हुई. आखिर क्या चाहते थे कम्युनिस्ट? पढ़िए द नैरेटिव की विशेष ग्राफिकल रिपोर्ट में!

> YE AZADI JHOOTHI HAI - THE COMMUNIST BETRAYAL

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