The Narrative
Narrative - Positive Narrative
> From Aryabhata to Gaganyaan, India’s space journey carries forward a centuries-old legacy of astronomical observation, mathematics and scientific inquiry.
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Global Narrative
> A Pakistani cleric’s 10,000-militant claim puts Hafiz Saeed’s Kashmir network and political ecosystem back under the spotlight.
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तरपा नृत्य - जनजाति जीवन, प्रकृति और सामूहिक आनंद की लय
महाराष्ट्र के वारली समाज की पारंपरिक सांस्कृतिक अभिव्यक्ति तरपा नृत्य, लोकजीवन, प्रकृति और सामाजिक एकता से गहराई से जुड़ी हुई है.
इस नृत्य में कलाकार एक-दूसरे का हाथ थामकर गोलाकार या सर्पिल आकृति में नृत्य करते हैं, जबकि बीच में ‘तरपा’ नामक पारंपरिक वाद्य बजाया जाता है.
तरपा की धुन के साथ नृत्य की गति बदलती रहती है और पूरा समुदाय एक लय में बंध जाता है. इसमें किसी एक नर्तक का प्रदर्शन नहीं, बल्कि सामूहिक सहभागिता इसका मूल भाव है.
परंपरागत रूप से यह नृत्य फसल, उत्सव और सामाजिक अवसरों से जुड़ा रहा है. इसके माध्यम से वारली समाज की प्रकृति के प्रति निकटता और अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति गहरा जुड़ाव दिखाई देता है.
मेरी संस्कृति...मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩
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महाराष्ट्र के वारली समाज की पारंपरिक सांस्कृतिक अभिव्यक्ति तरपा नृत्य, लोकजीवन, प्रकृति और सामाजिक एकता से गहराई से जुड़ी हुई है.
इस नृत्य में कलाकार एक-दूसरे का हाथ थामकर गोलाकार या सर्पिल आकृति में नृत्य करते हैं, जबकि बीच में ‘तरपा’ नामक पारंपरिक वाद्य बजाया जाता है.
तरपा की धुन के साथ नृत्य की गति बदलती रहती है और पूरा समुदाय एक लय में बंध जाता है. इसमें किसी एक नर्तक का प्रदर्शन नहीं, बल्कि सामूहिक सहभागिता इसका मूल भाव है.
परंपरागत रूप से यह नृत्य फसल, उत्सव और सामाजिक अवसरों से जुड़ा रहा है. इसके माध्यम से वारली समाज की प्रकृति के प्रति निकटता और अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति गहरा जुड़ाव दिखाई देता है.
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Bharat - Internal Security
> Who are the “Dimagi Naxals” driving ideological narratives, influencing institutions and challenging India’s sovereignty from within?
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The Narrative Graphical Document
हिमालयी क्षेत्र में चीन के द्वारा की जा रही अनैतिक गतिविधियों के विरुद्ध भारत कैसे अपनी रणनीति को जमीन पर उतार रहा है? पढ़िए द नैरेटिव की विशेष ग्राफिकल रिपोर्ट में!
> HOW INDIA IS COUNTERING CHINA IN THE HIMALAYAS.pdf
✒️ The Narrative
हिमालयी क्षेत्र में चीन के द्वारा की जा रही अनैतिक गतिविधियों के विरुद्ध भारत कैसे अपनी रणनीति को जमीन पर उतार रहा है? पढ़िए द नैरेटिव की विशेष ग्राफिकल रिपोर्ट में!
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नटराज का ब्रह्मांडीय दर्शन
भारत की परंपरा में नटराज भगवान शिव के उस दिव्य स्वरूप का प्रतीक हैं, जिसमें उनका तांडव समस्त सृष्टि की गति और परिवर्तन को अभिव्यक्त करता है.
नटराज की उठी हुई भुजाओं और गतिशील मुद्रा में सृष्टि के सृजन, संरक्षण और संहार का दर्शन देखा जाता है. उनके हाथ में स्थित डमरू सृष्टि की आदि नाद का, जबकि अग्नि परिवर्तन और संहार का प्रतीक मानी जाती है.
नटराज का एक पैर अपस्मार नामक बौने स्वरूप पर स्थित है, जिसे अज्ञान और अविद्या का प्रतीक माना जाता है. दूसरा उठा हुआ चरण मुक्ति और आध्यात्मिक उत्थान की ओर संकेत करता है.
उनके चारों ओर बनी अग्नि की प्रभामंडलाकार रचना निरंतर गतिमान ब्रह्मांड और जीवन के चक्र का प्रतीक मानी जाती है. स्थिर प्रतिमा में दिखाई देता यह नृत्य, भारतीय दर्शन की गहरी गतिशीलता को व्यक्त करता है.
मेरी संस्कृति...मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩
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भारत की परंपरा में नटराज भगवान शिव के उस दिव्य स्वरूप का प्रतीक हैं, जिसमें उनका तांडव समस्त सृष्टि की गति और परिवर्तन को अभिव्यक्त करता है.
नटराज की उठी हुई भुजाओं और गतिशील मुद्रा में सृष्टि के सृजन, संरक्षण और संहार का दर्शन देखा जाता है. उनके हाथ में स्थित डमरू सृष्टि की आदि नाद का, जबकि अग्नि परिवर्तन और संहार का प्रतीक मानी जाती है.
नटराज का एक पैर अपस्मार नामक बौने स्वरूप पर स्थित है, जिसे अज्ञान और अविद्या का प्रतीक माना जाता है. दूसरा उठा हुआ चरण मुक्ति और आध्यात्मिक उत्थान की ओर संकेत करता है.
उनके चारों ओर बनी अग्नि की प्रभामंडलाकार रचना निरंतर गतिमान ब्रह्मांड और जीवन के चक्र का प्रतीक मानी जाती है. स्थिर प्रतिमा में दिखाई देता यह नृत्य, भारतीय दर्शन की गहरी गतिशीलता को व्यक्त करता है.
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The Narrative
भारत - विचार
> चिदंबरम ने खुद को “दिमागी नक्सल” कहने पर गर्व जताया, लेकिन गृह मंत्री रहते हुए माओवादी नेटवर्क और शहरी समर्थक गतिविधियों पर क्या कहा था? पढ़िए बस्तर के प्रसिद्ध साहित्यकार राजीव रंजन प्रसाद का लेख!
https://tinyurl.com/yy2x32f5
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> चिदंबरम ने खुद को “दिमागी नक्सल” कहने पर गर्व जताया, लेकिन गृह मंत्री रहते हुए माओवादी नेटवर्क और शहरी समर्थक गतिविधियों पर क्या कहा था? पढ़िए बस्तर के प्रसिद्ध साहित्यकार राजीव रंजन प्रसाद का लेख!
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चिदंबरम और दिमागी नक्सल...क्या सच में?
“दिमागी नक्सल” शब्द पर पी. चिदंबरम की प्रतिक्रिया ने एक पुरानी बहस को फिर सामने ला दिया है। गृह मंत्री रहते हुए वे स्वयं माओवादी संगठनों, फ्रंट संगठनों, नागरिक समाज और शहरी क्षेत्रों में सक्रिय समर्थक नेटवर्क की चर्चा कर चुके थे। ऐसे में उनके वर्तमान बयान…
The Narrative
चाईना इन फोकस - चीन मुख्यभूमि
> कैसे एक शांतिपूर्ण आध्यात्मिक आंदोलन चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक खतरा बन गया? पढ़िए पूरी कहानी!
https://shorturl.at/kCwsU
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चाईना इन फोकस - चीन मुख्यभूमि
> कैसे एक शांतिपूर्ण आध्यात्मिक आंदोलन चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक खतरा बन गया? पढ़िए पूरी कहानी!
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फालुन गोंग का उदय और CCP का प्रहार
कैसे एक शांतिपूर्ण आध्यात्मिक आंदोलन चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक खतरा बन गया?
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गंगेश्वर महादेव - जहाँ समुद्र स्वयं करता है अभिषेक
> श्रावण सोमवार विशेष 🚩
दमन-दीव के समुद्र तट पर स्थित गंगेश्वर महादेव वह स्थान है जहाँ प्रकृति और आस्था एक साथ सांस लेती हैं.
वनवास के समय पांडवों ने यहाँ पाँच शिवलिंग स्थापित किए थे. इन पाँचों शिवलिंगों को “पंचलिंगेश्वर” कहा जाता है.
अद्भुत यह कि समुद्र की लहरें प्रतिदिन इन शिवलिंगों को स्पर्श करती हैं, मानो स्वयं गंगा आकर भगवान शिव का अभिषेक कर रही हो.
यह स्थान केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि संदेश है कि जहाँ जल, भूमि और आकाश एक होते हैं, वहीं शिव प्रकट होते हैं.
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> श्रावण सोमवार विशेष 🚩
दमन-दीव के समुद्र तट पर स्थित गंगेश्वर महादेव वह स्थान है जहाँ प्रकृति और आस्था एक साथ सांस लेती हैं.
वनवास के समय पांडवों ने यहाँ पाँच शिवलिंग स्थापित किए थे. इन पाँचों शिवलिंगों को “पंचलिंगेश्वर” कहा जाता है.
अद्भुत यह कि समुद्र की लहरें प्रतिदिन इन शिवलिंगों को स्पर्श करती हैं, मानो स्वयं गंगा आकर भगवान शिव का अभिषेक कर रही हो.
यह स्थान केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि संदेश है कि जहाँ जल, भूमि और आकाश एक होते हैं, वहीं शिव प्रकट होते हैं.
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Video Story by The Narrative
> CJP के ट्रैप में Gen Z : सेना को धमकी, फिर माफी!
📍Gen Z या Political Tool?
📍CJP के ट्रैप में युवा?
📍देखे पूरा वीडियो!
YouTube Link - https://youtu.be/-oThTEP48Sk
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CJP के ट्रैप में Gen Z : सेना को धमकी, फिर माफी! | The Narrative
सेना को लेकर विवादित बयान से माफी तक – CJP protest से प्रभावित हो कर सेना को धमकी देने वाली लद्दाख की वायरल युवती चर्चा में है। इस वीडियो में जानिये कैसे युवाओं को Political Tool बना कर अपने राजनीतिक एजेंडा के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
============…
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त्रिलोकीनाथ गांव – जहां शिव और अवलोकितेश्वर एक साथ पूजे जाते है🛕🏔🚩
हिमालय की शांत वादियों में स्थित त्रिलोकीनाथ गांव, आस्था और समन्वय का अद्वितीय प्रतीक माना जाता है। यहां का प्राचीन मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, पर बौद्ध परम्परा में इसे अवलोकितेश्वर का पवित्र स्थल माना जाता है।
चंद्रभागा घाटी में स्थित यह स्थान सदियों से दोनों परंपराओं को जोड़ता आया है, जहां श्रद्धा का स्वरूप सीमाओं से परे एकत्व का संदेश देता है।
आस्था है कि यहां की पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होती है, और साधक और साधक को शांति, करुणा तथा संतुलन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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हिमालय की शांत वादियों में स्थित त्रिलोकीनाथ गांव, आस्था और समन्वय का अद्वितीय प्रतीक माना जाता है। यहां का प्राचीन मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, पर बौद्ध परम्परा में इसे अवलोकितेश्वर का पवित्र स्थल माना जाता है।
चंद्रभागा घाटी में स्थित यह स्थान सदियों से दोनों परंपराओं को जोड़ता आया है, जहां श्रद्धा का स्वरूप सीमाओं से परे एकत्व का संदेश देता है।
आस्था है कि यहां की पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होती है, और साधक और साधक को शांति, करुणा तथा संतुलन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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हरिहर गढ़, महाराष्ट्र
महाराष्ट्र के नासिक में सह्याद्रि पर्वतमाला की हर्षगढ़ पहाड़ी की चोटी में स्थित है हरिहर गढ़.
इस गढ़ तक पहुँचने के लिए जो मार्ग है, उसे विश्व के सबसे खतरनाक ट्रैक में से एक माना जाता है.
170 मीटर ऊँची पहाड़ी पर स्थित इस गढ़ तक पहुंचने के लिए 117 सीढ़ियां बनी हैं जो एक मीटर चौड़ी है.
किले की लगभग 50 सीढ़ियों की चढ़ाई के बाद इस गढ़ का मुख्य द्वार (महादरवाजा) आता है जो आज भी बहुत अच्छी स्थिति में है.
गढ़ के शीर्ष से बासगढ़ और ब्रह्मा पहाड़ी का सुंदर नजारा भी देखा जा सकता है.
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महाराष्ट्र के नासिक में सह्याद्रि पर्वतमाला की हर्षगढ़ पहाड़ी की चोटी में स्थित है हरिहर गढ़.
इस गढ़ तक पहुँचने के लिए जो मार्ग है, उसे विश्व के सबसे खतरनाक ट्रैक में से एक माना जाता है.
170 मीटर ऊँची पहाड़ी पर स्थित इस गढ़ तक पहुंचने के लिए 117 सीढ़ियां बनी हैं जो एक मीटर चौड़ी है.
किले की लगभग 50 सीढ़ियों की चढ़ाई के बाद इस गढ़ का मुख्य द्वार (महादरवाजा) आता है जो आज भी बहुत अच्छी स्थिति में है.
गढ़ के शीर्ष से बासगढ़ और ब्रह्मा पहाड़ी का सुंदर नजारा भी देखा जा सकता है.
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The Narrative
जनजातीय विषय - षड्यंत्र
> बस्तर में ईसाई कन्वर्ज़न के विरुद्ध क्यों भड़का आक्रोश? कांकेर के बाद सुकमा की ग्रामसभा ने लिया बड़ा फैसला! क्या यह पूरे बस्तर में बदलते माहौल का संकेत है? पढ़िए पूरी कहानी!
https://tinyurl.com/bdhx86rp
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जनजातीय विषय - षड्यंत्र
> बस्तर में ईसाई कन्वर्ज़न के विरुद्ध क्यों भड़का आक्रोश? कांकेर के बाद सुकमा की ग्रामसभा ने लिया बड़ा फैसला! क्या यह पूरे बस्तर में बदलते माहौल का संकेत है? पढ़िए पूरी कहानी!
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बस्तर : ईसाई कन्वर्ज़न के विरुद्ध जनजाति समाज में आक्रोश, कांकेर से सुकमा तक ग्रामसभाओं ने खोला मोर्चा
सुकमा के पोलमपल्ली से लेकर कांकेर तक ईसाई कन्वर्ज़न के विरुद्ध जनजातीय समाज का आक्रोश अब ग्रामसभाओं के फैसलों में दिखाई देने लगा है। पेसा और पांचवीं अनुसूची के अधिकारों का हवाला देते हुए गांव अपनी परंपरा और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए मुखर हो रहे हैं।
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Communism - Propaganda
> A century of Indian Left politics shows how prioritising Marxist class struggle over national sentiment repeatedly created a disconnect with India’s political and cultural realities.
https://short-url.cc/1wJwN
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Video Story by The Narrative
> स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी का बलिदान | नक्सल-कन्वर्जन नेक्सस
📍हत्या के पीछे नक्सल-ईसाई नेक्सस?
📍लक्ष्मणानंद जी के बलिदान की कहानी!
📍देखे पूरा वीडियो!
YouTube Link - https://youtu.be/vkvThIZA39A
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> स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी का बलिदान | नक्सल-कन्वर्जन नेक्सस
📍हत्या के पीछे नक्सल-ईसाई नेक्सस?
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स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी का बलिदान | नक्सल-कन्वर्जन नेक्सस | The Narrative
कंधमाल में जनजातीय उत्थान से लेकर 2008 के नक्सली हमले तक, जानिये स्वामी लक्ष्मणानंद जी के संघर्ष और बलिदान की कहानी इस वीडियो में।
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The Narrative के पोस्ट अपने मोबाइल पर नियमित…
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ओणम उत्सव - समृद्धि और धर्म का पर्व 🌸🌾
भारत के केरल प्रान्त में प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास में हर्षोल्लास से मनाया जाता है ओणम उत्सव.
यह पर्व भगवान वामन के अवतरण एवं राजा महाबली तथा उनकी प्रजा-प्रेमी शासन की स्मृति में मनाया जाता है.
स्थानीय आस्था है कि इस दिन महाबली धरती पर अपनी प्रजा से मिलने आते हैं.
ओणम के अवसर पर घर-आँगन में पुष्पों से सजाए गए सुंदर पूक्कलम (फूलों की रंगोली) बनाए जाते हैं.
परिवार और समाज मिलकर विशेष भोज ओणसद्या का आनंद लेते हैं, जिसमें परंपरागत व्यंजन परोसे जाते हैं.
नौकादौड़ (वल्लमकली), नृत्य, गीत और लोककला से पूरा केरल उत्सवमय हो उठता है.
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भारत के केरल प्रान्त में प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास में हर्षोल्लास से मनाया जाता है ओणम उत्सव.
यह पर्व भगवान वामन के अवतरण एवं राजा महाबली तथा उनकी प्रजा-प्रेमी शासन की स्मृति में मनाया जाता है.
स्थानीय आस्था है कि इस दिन महाबली धरती पर अपनी प्रजा से मिलने आते हैं.
ओणम के अवसर पर घर-आँगन में पुष्पों से सजाए गए सुंदर पूक्कलम (फूलों की रंगोली) बनाए जाते हैं.
परिवार और समाज मिलकर विशेष भोज ओणसद्या का आनंद लेते हैं, जिसमें परंपरागत व्यंजन परोसे जाते हैं.
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भारत -षड्यंत्र
> क्या भारतीय परंपराओं को अब ग्लोबल मार्केट फोर्सेस और कल्चरल मार्क्सिस्ट समूह अपने अनुसार ढाल रहे हैं? पढ़िए इस नेक्सस के पीछे छिपे पूरे खेल को!
https://bit.ly/4xpvdAe
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परम्पराओं का व्यवसायीकरण: ग्लोबल मार्केट फ़ोर्सेस और कल्चरल मार्क्सिज़म का गठजोड़
आज असली लड़ाई किसी अभिनेत्री के कपड़ों पर नहीं है। असली लड़ाई इस बात पर है कि भारतीय संस्कृति का अर्थ कौन तय करेगा। परिवार तय करेगा या विज्ञापन एजेंसी? समाज तय करेगा या सोशल मीडिया? पीढ़ियों की परम्परा तय करेगी या ब्रांड की रणनीति? और आधुनिकता की परिभाषा…
The Narrative Graphical Document
रिटायर्ड जज मुरलीधर एस. ने CJP PROTEST को लेकर कुछ ऐसा कहा है, जिसने सोचने पर विवश कर दिया है कि हमारी न्यायव्यवस्था में कैसे तत्व मौजूद हैं! गौतम नवलखा से लेकर उमर खालिद तक के विषय पर वामपंथी विचारों का प्रदर्शन करने वाले पूर्व जज की पूरी कहानी! पढ़िए द नैरेटिव की विशेष ग्राफिकल रिपोर्ट में!
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रिटायर्ड जज मुरलीधर एस. ने CJP PROTEST को लेकर कुछ ऐसा कहा है, जिसने सोचने पर विवश कर दिया है कि हमारी न्यायव्यवस्था में कैसे तत्व मौजूद हैं! गौतम नवलखा से लेकर उमर खालिद तक के विषय पर वामपंथी विचारों का प्रदर्शन करने वाले पूर्व जज की पूरी कहानी! पढ़िए द नैरेटिव की विशेष ग्राफिकल रिपोर्ट में!
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