Video Story by The Narrative
> CJP का असली चेहरा!
📍 रांका से खुली पोल!
📍पक्षपात को ‘लोकतंत्र’ का नाम?
📍कहाँ गया “निष्पक्ष अभियान”?
YouTube Link - https://youtu.be/aGSOtKTxRuA
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विश्व में सबसे ऊंचाई पर स्थित आर्च पुल - चिनाब रेल पुल
जम्मू कश्मीर में बक्कल एवं कौरी के बीच निर्मित चिनाब रेल पुल विश्व में सबसे ऊंचाई पर स्थित आर्च पुल है, जो नदी से 1,178 फीट की ऊंचाई पर अवस्थित है.
1,315 मीटर लंबे इस रेल पुल को अस्किनी (चिनाब) नदी पर बनाया गया है, जिसका उद्घाटन 6 जून 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया.
कोंकण रेलवे, डीआरडीओ एवं मुम्बई स्थित एक कंपनी द्वारा इस पुल का डिजाइन तैयार किया गया, जिसके बाद 30,000 मीट्रिक टन स्टील का उपयोग कर इसका निर्माण किया गया है.
17 स्तंभों पर खड़े इस पुल की क्षमता रिक्टर स्केल 8 की तीव्रता वाले भूकंप को झेलने की भी है. इसमें 100 किलोमीटर प्रतिघन्टा की गति से रेल चल सकती है.
मेरी संस्कृति...मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩
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जम्मू कश्मीर में बक्कल एवं कौरी के बीच निर्मित चिनाब रेल पुल विश्व में सबसे ऊंचाई पर स्थित आर्च पुल है, जो नदी से 1,178 फीट की ऊंचाई पर अवस्थित है.
1,315 मीटर लंबे इस रेल पुल को अस्किनी (चिनाब) नदी पर बनाया गया है, जिसका उद्घाटन 6 जून 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया.
कोंकण रेलवे, डीआरडीओ एवं मुम्बई स्थित एक कंपनी द्वारा इस पुल का डिजाइन तैयार किया गया, जिसके बाद 30,000 मीट्रिक टन स्टील का उपयोग कर इसका निर्माण किया गया है.
17 स्तंभों पर खड़े इस पुल की क्षमता रिक्टर स्केल 8 की तीव्रता वाले भूकंप को झेलने की भी है. इसमें 100 किलोमीटर प्रतिघन्टा की गति से रेल चल सकती है.
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The Narrative
Bharat - Internal Security
> Why is CJP staging a march just a week before BRICS? A protest timed this close to a major global summit raises questions over what propaganda agenda lies behind CJP?
https://short-url.cc/1wT-3
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The Narrative
Narrative Exclusive - Positive Narrative
> Bastar was declared Naxal-free. But the forests are still giving up rifles, explosives, ammunition and crores in hidden cash. What security forces are uncovering months later reveals another side of the Maoist terrorism.
https://bit.ly/3UePVnO
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Bastar : From Red Corridor to Recovery Zone
Months after the government declared Bastar free from armed Naxalism, security forces continue to uncover hidden Maoist weapons, ammunition, explosives, cash and communication equipment across the region.
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श्रावणी पूर्णिमा, रक्षाबंधन पर्व
सनातन संस्कृति में भाई एवं बहन के संबंध को पवित्रतम माना गया है. इसी पवित्र संबंध को हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाने का पर्व है रक्षाबंधन. श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को यह पर्व मनाया जाता है.
सनातन शास्त्रों में देवराज इंद्र एवं महारानी शची, माता लक्ष्मी एवं राजा बलि, द्रौपदी एवं भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीगणेश का उल्लेख रक्षाबंधन के परिपेक्ष्य में मिलता है.
धार्मिक होने के साथ-साथ रक्षाबंधन एक सांस्कृतिक पर्व भी है, जिस दिन बहने अपने भाइयों को रक्षा सूत्र बांधती हैं और उनसे रक्षा का वचन लेती हैं.
येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वाम रक्ष बध्नामि, रक्षे माचल माचल:।।
> आपको रक्षाबंधन की अनंत शुभकामनाएं 🌸
मेरी संस्कृति…मेरा देश…मेरा अभिमान 🚩
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सनातन संस्कृति में भाई एवं बहन के संबंध को पवित्रतम माना गया है. इसी पवित्र संबंध को हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाने का पर्व है रक्षाबंधन. श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को यह पर्व मनाया जाता है.
सनातन शास्त्रों में देवराज इंद्र एवं महारानी शची, माता लक्ष्मी एवं राजा बलि, द्रौपदी एवं भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीगणेश का उल्लेख रक्षाबंधन के परिपेक्ष्य में मिलता है.
धार्मिक होने के साथ-साथ रक्षाबंधन एक सांस्कृतिक पर्व भी है, जिस दिन बहने अपने भाइयों को रक्षा सूत्र बांधती हैं और उनसे रक्षा का वचन लेती हैं.
येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः।
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माँ दंतेश्वरी मंदिर में रक्षाबंधन उत्सव
धागों में नहीं… आस्था में बंधी राखी!
बस्तर की अधिष्ठात्री देवी माँ दंतेश्वरी को बाँधी जाती है पावन डोरी, जहाँ बहनें ही नहीं, पूरा जनमानस माँ के चरणों में झुककर रक्षा, धर्म और समाज की अखंड शांति की कामना करता है.
13वीं शताब्दी में निर्मित यह प्राचीन मंदिर दंतेवाड़ा में स्थित है और शक्तिपीठों में से एक है. यहाँ माँ का स्वरूप शिला विग्रह में विराजमान है.
स्थानीय जनजातीय समाज में इस मंदिर को लेकर अनन्य आस्था है. रक्षाबंधन के दिन यहाँ धूप, दीप, ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक नृत्य के साथ माँ के चरणों में राखी बाँधने की परंपरा है.
यह केवल पर्व नहीं है, यह है सनातन का संकल्प, माँ की रक्षा, धर्म की रक्षा और जन्मभूमि की रक्षा का व्रत का!
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धागों में नहीं… आस्था में बंधी राखी!
बस्तर की अधिष्ठात्री देवी माँ दंतेश्वरी को बाँधी जाती है पावन डोरी, जहाँ बहनें ही नहीं, पूरा जनमानस माँ के चरणों में झुककर रक्षा, धर्म और समाज की अखंड शांति की कामना करता है.
13वीं शताब्दी में निर्मित यह प्राचीन मंदिर दंतेवाड़ा में स्थित है और शक्तिपीठों में से एक है. यहाँ माँ का स्वरूप शिला विग्रह में विराजमान है.
स्थानीय जनजातीय समाज में इस मंदिर को लेकर अनन्य आस्था है. रक्षाबंधन के दिन यहाँ धूप, दीप, ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक नृत्य के साथ माँ के चरणों में राखी बाँधने की परंपरा है.
यह केवल पर्व नहीं है, यह है सनातन का संकल्प, माँ की रक्षा, धर्म की रक्षा और जन्मभूमि की रक्षा का व्रत का!
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The Narrative Podacst
> कैलेंडर का भारतीय दर्शन | The Decolonisation of Time | Hindu Panchang
📍 कालगणना का डिकोलोनाइजेशन?
📍हमारा समय-बोध भी औपनिवेशिक है?
📍एक पर्व दो दिन कैसे?
YouTube Link - https://tinyurl.com/5h3a9zwk
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कैलेंडर का भारतीय दर्शन | The Decolonisation of Time | Hindu Panchang
क्या समय को देखने का हमारा तरीका भी औपनिवेशिक विरासत का हिस्सा है?
पंचांग केवल तारीखों और त्योहारों की सूची नहीं, बल्कि समय, खगोल, ऋतु, प्रकृति और जीवन को समझने वाली भारतीय ज्ञान-परंपरा का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इस पॉडकास्ट में हम Hindu Panchang के माध्यम…
पंचांग केवल तारीखों और त्योहारों की सूची नहीं, बल्कि समय, खगोल, ऋतु, प्रकृति और जीवन को समझने वाली भारतीय ज्ञान-परंपरा का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इस पॉडकास्ट में हम Hindu Panchang के माध्यम…
The Narrative
Narrative Exclusive
> Reclaiming Bharat’s past, India’s decolonisation push challenges colonial and ideological narratives that shaped generations of historical consciousness.
https://short-url.cc/1x3A3
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दही हांडी उत्सव: श्रीकृष्ण की बाललीला से सामूहिक उत्सव तक
जन्माष्टमी के अवसर पर मनाया जाने वाला दही हांडी उत्सव, भगवान श्रीकृष्ण की बाललीलाओं की स्मृति से जुड़ी जीवंत लोकपरंपरा है.
आस्था है कि बालकृष्ण अपने सखाओं के साथ मिलकर घरों में ऊँचाई पर लटकाई गई मटकी से दही-माखन चुराते थे. इसी लीला की स्मृति में दही हांडी की परंपरा विकसित हुई.
ऊँचाई पर बाँधी गई मटकी को गोविंदा पथक मानव-पिरामिड बनाकर फोड़ते हैं. इसमें केवल शारीरिक सामर्थ्य नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास, विश्वास और तालमेल की आवश्यकता होती है.
समय के साथ दही हांडी ने सामाजिक और सार्वजनिक उत्सव का व्यापक रूप लिया है, लेकिन इसके केंद्र में आज भी वही बालकृष्ण हैं.
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जन्माष्टमी के अवसर पर मनाया जाने वाला दही हांडी उत्सव, भगवान श्रीकृष्ण की बाललीलाओं की स्मृति से जुड़ी जीवंत लोकपरंपरा है.
आस्था है कि बालकृष्ण अपने सखाओं के साथ मिलकर घरों में ऊँचाई पर लटकाई गई मटकी से दही-माखन चुराते थे. इसी लीला की स्मृति में दही हांडी की परंपरा विकसित हुई.
ऊँचाई पर बाँधी गई मटकी को गोविंदा पथक मानव-पिरामिड बनाकर फोड़ते हैं. इसमें केवल शारीरिक सामर्थ्य नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास, विश्वास और तालमेल की आवश्यकता होती है.
समय के साथ दही हांडी ने सामाजिक और सार्वजनिक उत्सव का व्यापक रूप लिया है, लेकिन इसके केंद्र में आज भी वही बालकृष्ण हैं.
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Short Story by The Narrative
> "मार्केट फोर्सेस" के निशाने पर हिन्दू पर्व!
📍 विज्ञापन कैसे बदलता है अर्थ?
📍संस्कृति या व्यवसायीकरण?
📍देखे पूरा वीडियो!
YouTube Link - https://youtube.com/shorts/QQquhgUVDWE
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"मार्केट फोर्सेस" के निशाने पर हिन्दू पर्व!
क्या बाज़ार, ब्रांड और विज्ञापन जगत हिंदू त्योहारों को उत्सव से व्या...
The Narrative
Global Narrative - Internal Security
> Rasuwa’s deadly flood has turned China’s Himalayan expansion into a ecological and strategic concern for India ahead of BRICS.
https://short-url.cc/1CR7n
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Global Narrative - Internal Security
> Rasuwa’s deadly flood has turned China’s Himalayan expansion into a ecological and strategic concern for India ahead of BRICS.
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नाग नथैया लीला, बनारस
बनारस के भदैनी में स्थित तुलसी घाट में होने वाली नाग नथैया की लीला का समय कुछ ऐसा होता है कि काशी की उत्तरवाहिनी गंगा उस दिन यमुना बन जाती है.
यहां महाकवि गोस्वामी तुलसीदासजी ने 498 वर्ष पूर्व कार्तिक मास में श्रीकृष्ण लीला आरंभ की थी, जो आज भी उसी प्रथानुसार की जाती है.
इसी कृष्ण लीला में नाग नथैया की लीला होती है, जिसमें कालिया नाग से जुड़ी लीला का मंचन किया जाता है.
22 दिनों तक चलने वाली इस श्रीकृष्ण लीला को देखने हजारों श्रद्धालु उपस्थित होते हैं. नाग नथैया के दिन गंगा जी यमुना एवं तुलसी घाट गोकुल में परिवर्तित हो जाते हैं.
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बनारस के भदैनी में स्थित तुलसी घाट में होने वाली नाग नथैया की लीला का समय कुछ ऐसा होता है कि काशी की उत्तरवाहिनी गंगा उस दिन यमुना बन जाती है.
यहां महाकवि गोस्वामी तुलसीदासजी ने 498 वर्ष पूर्व कार्तिक मास में श्रीकृष्ण लीला आरंभ की थी, जो आज भी उसी प्रथानुसार की जाती है.
इसी कृष्ण लीला में नाग नथैया की लीला होती है, जिसमें कालिया नाग से जुड़ी लीला का मंचन किया जाता है.
22 दिनों तक चलने वाली इस श्रीकृष्ण लीला को देखने हजारों श्रद्धालु उपस्थित होते हैं. नाग नथैया के दिन गंगा जी यमुना एवं तुलसी घाट गोकुल में परिवर्तित हो जाते हैं.
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जलमग्न द्वारका - समुद्र की गहराइयों में जीवित कृष्णनगरी
गुजरात के सौराष्ट्र तट के निकट समुद्र की गहराइयों में प्राचीन द्वारका के जलमग्न पुरातात्त्विक अवशेष आज भी विद्यमान हैं. पत्थर की संरचनाएँ, स्थापत्य अवशेष और अन्य पुरावशेष इस क्षेत्र की प्राचीन समुद्री सभ्यता और नगर-परंपरा का प्रमाण देते हैं.
शास्त्रों में वर्णित द्वारका वही पावन नगरी है, जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने बसाया था और जिसके समुद्र में समा जाने का वर्णन मिलता है.
फरवरी 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं समुद्र की गहराइयों में पहुँचे और जलमग्न द्वारका के स्थल पर भगवान श्रीकृष्ण को नमन करते हुए पूजा-अर्चना की. उन्होंने वहाँ मोरपंख भी अर्पित किया.
समुद्र के भीतर दिखाई देते ये अवशेष केवल पत्थर नहीं, भारत की प्राचीन समुद्री परंपरा, नगर-योजना और सांस्कृतिक स्मृति के अद्भुत साक्षी हैं.
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गुजरात के सौराष्ट्र तट के निकट समुद्र की गहराइयों में प्राचीन द्वारका के जलमग्न पुरातात्त्विक अवशेष आज भी विद्यमान हैं. पत्थर की संरचनाएँ, स्थापत्य अवशेष और अन्य पुरावशेष इस क्षेत्र की प्राचीन समुद्री सभ्यता और नगर-परंपरा का प्रमाण देते हैं.
शास्त्रों में वर्णित द्वारका वही पावन नगरी है, जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने बसाया था और जिसके समुद्र में समा जाने का वर्णन मिलता है.
फरवरी 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं समुद्र की गहराइयों में पहुँचे और जलमग्न द्वारका के स्थल पर भगवान श्रीकृष्ण को नमन करते हुए पूजा-अर्चना की. उन्होंने वहाँ मोरपंख भी अर्पित किया.
समुद्र के भीतर दिखाई देते ये अवशेष केवल पत्थर नहीं, भारत की प्राचीन समुद्री परंपरा, नगर-योजना और सांस्कृतिक स्मृति के अद्भुत साक्षी हैं.
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Video Story by The Narrative
> BRICS से पहले CJP की साजिश?
📍 BRICS से पहले CJP प्रदर्शन!
📍निशाने पर भारत की छवि!
📍देखें पूरा वीडियो!
YouTube Link - https://youtu.be/2-BIaSPcRKM
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BRICS से पहले CJP की साजिश? | The Narrative
दिल्ली में प्रतिबंध लागू हैं और मार्च के लिए पुलिस की अनुमति भी जरूरी है। इसके बावजूद CJP ने BRICS Summit से ठीक एक सप्ताह पहले संवेदनशील रूट पर मार्च का ऐलान क्यों किया? क्या राजनीतिक विरोध के नाम पर भारत की वैश्विक छवि को दांव पर लगाया जा रहा है?
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The Narrative Graphical Document
दिमागी नक्सल क्या है? दिमागी नक्सल कौन है? क्या नैरेटिव चलाने का प्रयास हो रहा है? पढ़िए द नैरेटिव की विशेष ग्राफिकल रिपोर्ट में!
> दिमागी नक्सल - नैरेटिव, विचार और अराजकता का तंत्र
✒️ The Narrative
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नैरेटिव एक्सक्लुसिव - कनेक्टिंग डॉट्स
> कांग्रेस का ‘Break the Cage’ आखिर कहां से आया? ‘पिंजरा तोड़ो’, राहुल गांधी और पवन खेड़ा के बयानों के बीच दिखती कड़ी क्या बताती है? क्या कट्टर वामपंथी (नक्सली) भाषा अब कांग्रेस की राजनीति का हिस्सा बन रही है? पढ़िए पूरा लेख!
https://bit.ly/4dcnKw6
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नैरेटिव एक्सक्लुसिव - कनेक्टिंग डॉट्स
> कांग्रेस का ‘Break the Cage’ आखिर कहां से आया? ‘पिंजरा तोड़ो’, राहुल गांधी और पवन खेड़ा के बयानों के बीच दिखती कड़ी क्या बताती है? क्या कट्टर वामपंथी (नक्सली) भाषा अब कांग्रेस की राजनीति का हिस्सा बन रही है? पढ़िए पूरा लेख!
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‘Pinjra Tod’ से ‘Break the Cage’ तक: क्या कट्टर वामपंथी विचारों को मुख्यधारा में लाना चाहती है कांग्रेस?
कांग्रेस ने महिला स्वतंत्रता के नाम पर अपने अभियान को एक ऐसे वैचारिक फ्रेम में रखा है जिसकी जड़ें कम्युनिस्ट कट्टरपंथी समूह की शब्दावली में दिखाई देती हैं। यहां कांग्रेस के सामने असली सवाल यह नहीं है कि महिलाओं को क्या पहनना चाहिए। असली सवाल यह है कि कांग्रेस…
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गोवर्धन परिक्रमा - जहाँ हर कदम कृष्णभक्ति बन जाता है
उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र में स्थित गोवर्धन पर्वत, श्रीकृष्ण की बाललीलाओं और ब्रज की भक्ति परंपरा से गहराई से जुड़ा पावन स्थल है. इसकी परिक्रमा को गोवर्धन परिक्रमा कहा जाता है.
ब्रज परंपरा में लगभग 21 किलोमीटर की यह परिक्रमा श्रद्धालु पैदल करते हैं. कोई नंगे पाँव चलता है, कोई दंडवत प्रणाम करते हुए आगे बढ़ता है और कोई संकीर्तन करते हुए, हर किसी की अपनी भक्ति की विधि है.
परिक्रमा मार्ग में मानसी गंगा, दानघाटी, पूँछरी का लौठा, राधाकुंड और श्यामकुंड जैसे अनेक पवित्र स्थल आते हैं. हर पड़ाव कृष्ण जी, राधा रानीऔर ब्रज की लीलाओं से जुड़ी अपनी अलग कथा और परंपरा समेटे हुए है.
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उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र में स्थित गोवर्धन पर्वत, श्रीकृष्ण की बाललीलाओं और ब्रज की भक्ति परंपरा से गहराई से जुड़ा पावन स्थल है. इसकी परिक्रमा को गोवर्धन परिक्रमा कहा जाता है.
ब्रज परंपरा में लगभग 21 किलोमीटर की यह परिक्रमा श्रद्धालु पैदल करते हैं. कोई नंगे पाँव चलता है, कोई दंडवत प्रणाम करते हुए आगे बढ़ता है और कोई संकीर्तन करते हुए, हर किसी की अपनी भक्ति की विधि है.
परिक्रमा मार्ग में मानसी गंगा, दानघाटी, पूँछरी का लौठा, राधाकुंड और श्यामकुंड जैसे अनेक पवित्र स्थल आते हैं. हर पड़ाव कृष्ण जी, राधा रानीऔर ब्रज की लीलाओं से जुड़ी अपनी अलग कथा और परंपरा समेटे हुए है.
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भारत - कम्युनिज़्म
> वो कौन हैं जिन्हें “दिमागी नक्सल” होने पर गर्व है? कांग्रेस, Left, CJP और मीडिया की बेचैनी के पीछे आखिर कौन सा नैरेटिव है? पढ़िए पूरा लेख!
https://bit.ly/4y86yzZ
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‘दिमागी नक्सल’ शब्द से इतना डर क्यों?
“दिमागी नक्सल” शब्द की बहस केवल शब्दों की बहस नहीं है। यह भारत की उस वैचारिक लड़ाई की बहस है जिसमें यह तय होना है कि नक्सलवाद को केवल बंदूक तक सीमित रखा जाए या उसके वैचारिक विस्तार को भी पहचाना जाए।