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🔳 भारतीय संविधान के स्रोत
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🔳 भारतीय संविधान के स्रोत
▪️जापान – विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया।
▪️ ऑस्ट्रेलिया – प्रस्तावना की भाषा, केंद्र राज्य संबंध ,संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक, समवर्ती सूची।
▪️ दक्षिण अफ्रीका– संविधान की संशोधन पद्धती ,राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन।
▪️ सोवियत संघ( रूस) –मूल कर्तव्य ,प्रस्तावना में न्यायिक आदर्श।
▪️ फ्रांस– गणतंत्रात्मक शासन प्रणाली, स्वतंत्रता समानता एवं बंधुत्व का सिद्धांत।
▪️ भारतीय संविधान पर सबसे अधिक प्रभाव भारत शासन अधिनियम 1935 का है।
▪️ भारत शासन अधिनियम 1935 से लगभग 250 अनुच्छेद लिए गए हैं।
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🔳भारतीय संविधान की विशेषताएं
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🔳भारतीय संविधान की विशेषताएं
▪️ विशाल एवं विस्तृत संविधान
▪️ एकल नागरिकता
▪️ संसदीय शासन प्रणाली
▪️ स्वतंत्र न्यायपालिका
▪️ नम्यता एवं अन्यमता का अनोखा मिश्रण
▪️ वयस्क मताधिकार
▪️ आपातकालीन उपबंध
▪️ मूल अधिकार एवं मूल कर्तव्य
▪️ नीति निर्देशक तत्व
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🔳 भारतीय संविधान के भाग
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🔳 भारतीय संविधान के भाग
▪️भाग 1– संघ और उसका राज्य क्षेत्र ( अनु.1– 4)
▪️भाग 2 – नागरिकता ( अनु. 5 – 11)
▪️भाग 3 – मौलिक अधिकार ( अनु. 12– 35)
▪️भाग 4 – राज्य के नीति निदेशक तत्व ( अनु. 36 –51)
▪️भाग 5 – संघ ( अनु. 52– 151)
▪️भाग 6 – राज्य ( अनु. 152–237)
▪️भाग 7 – सातवां संविधान संशोधन अधिनियम 1956 द्वारा निरस्त
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🔳 भारतीय संविधान के भाग
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🔳 भारतीय संविधान के भाग
▪️भाग 8 – संघ राज्य क्षेत्र ( अनु. 239–242)
▪️भाग 9 – पंचायतें ( अनु. 243– 243ण), 73वा संविधान संशोधन अधिनियम 1992 द्वारा जोड़ा गया
▪️भाग 9 क – नगरपालिकाएं ( अनु. 243त–243 य छ ), 74वा संविधान संशोधन अधिनियम 1992 द्वारा जोड़ा गया
▪️भाग 9 ख – सहकारी समिति ( अनु. 243य ज – 243य न),97वा संविधान संशोधन अधिनियम 2011 द्वारा जोड़ा गया
▪️भाग 10 – अनुसूचित तथा जनजातीय क्षेत्र ( अनु. 244, 244क)
▪️भाग 11 – संघ तथा राज्यों के मध्य संबंध ( अनु. 245 –263)
▪️भाग 12 – वित्त, संपति संविदाय व वाद ( अनु. 264– 300क)
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🔳 भारतीय संविधान के भाग
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🔳 भारतीय संविधान के भाग
▪️भाग 13 – भारत के राज्य क्षेत्र के भीतर व्यापार ,वाणिज्य तथा समागम ( अनु. 301– 307)#AbNahiRukegaPrelims
▪️भाग 14 – संघ तथा राज्यों के अधीन सेवाएं ( अनु. 308– 323)
▪️भाग 15 –निर्वाचन ( अनु. 324– 329क)
▪️भाग 16 – कुछ वर्गों के संबंध में विशेष उपबंध ( अनु. 330–342क)
▪️भाग 17 – राजभाषा ( अनु. 343–351)
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🔳 भारतीय संविधान के भाग
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🔳 भारतीय संविधान के भाग
▪️भाग 18 – आपात उपबंध ( अनु. 352–360)#AbNahiRukegaPrelims
▪️भाग 19 – प्रकीर्ण( अनु. 361–367)
▪️भाग 20 – संविधान संशोधन ( अनु.368)
▪️भाग 21 – अस्थाई, संक्रमण कालीन तथा विशेष उपबंध ( अनु. 369–392)
▪️भाग 22 – संक्षिप्त नाम प्रारंभ हिंदी में प्राधिकृत पाठ और निरसन ( अनु. 393–395)
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🔳 भारतीय संविधान की अनुसूचियां
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🔳 भारतीय संविधान की अनुसूचियां
▪️ मूल संविधान में आठ अनुसूचियां थी , वर्तमान में इनकी संख्या 12 है।
▪️पहली अनुसूची – राज्य व संघ राज्य क्षेत्र
▪️दूसरी अनुसूची – प्रमुख पदाधिकारियों के वेतन, भत्ते, पेंशन
▪️तीसरी अनुसूची – शपथ और प्रतिज्ञान के प्रारूप
▪️चौथी अनुसूची –राज्यसभा में स्थानों का आवंटन
▪️पांचवी अनुसूची – अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण के बारे में
▪️छठी अनुसूची – असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों के जनजाति क्षेत्र के प्रशासन के संबंध में
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🔳 भारतीय संविधान की अनुसूचियां
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🔳 भारतीय संविधान की अनुसूचियां
▪️सातवीं अनुसूची – संघ सूची, राज्य सूची , व समवर्ती सूची में केंद्र और राज्यों में शक्तियों का विभाजन
▪️आठवीं अनुसूची – भाषाएं
▪️नौवीं अनुसूची – कुछ अधिनियमों और विनियमों का विधि मान्यकरण( प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम 1951 द्वारा जोड़ी गई)
▪️दसवीं अनुसूची – दल परिवर्तन के आधार पर योग्यता(52वे संविधान संशोधन अधिनियम 1985 द्वारा जोड़ी गई)
▪️ग्यारहवीं अनुसूची – पंचायत से संबंधित प्रावधान( 73वे संविधान संशोधन अधिनियम 1992 द्वारा जोड़ी गई)
▪️बारहवीं अनुसूची –नगर पालिकाओं से संबंधित उपबंध( 74वे संविधान संशोधन अधिनियम 1992 द्वारा जोड़ी गई)
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🔳 भारतीय संविधान की प्रस्तावना
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🔳 भारतीय संविधान की प्रस्तावना
▪️ पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा संविधान सभा में 13 दिसंबर 1946 को प्रस्तुत एवं 22 जनवरी 1947 को स्वीकृत उद्देश्य प्रस्ताव ही संविधान की प्रस्तावना है।#AbNahiRukegaPrelims
▪️ इसे "संविधान की आत्मा" कहा जाता है।
▪️ बेरुबारी वाद,1960 में सर्वोच्च न्यायालय ने प्रस्तावना को संविधान का अंग नहीं माना था।
▪️ केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य वाद,1973 में प्रस्तावना को संविधान का अंग माना गया।
▪️ संसद प्रस्तावना में अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन कर सकती है लेकिन इसके मूल ढांचे में परिवर्तन नहीं कर सकती।
▪️ प्रस्तावना में केवल एक बार संशोधन 42वे संविधान संशोधन अधिनियम,1976 द्वारा किया गया है।
▪️ 42वे संविधान संशोधन अधिनियम,1976 द्वारा प्रस्तावना में "समाजवादी", "पंथनिरपेक्ष", और "अखंडता" शब्दों को जोड़ा गया।
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🔳 भारतीय संविधान की प्रस्तावना
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🔳 भारतीय संविधान की प्रस्तावना
▪️ भारतीय संविधान की प्रस्तावना में भारत को संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न ,समाजवादी ,पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में घोषित किया गया है।
▪️ के.एम. मुंशी ने प्रस्तावना को "राजनीतिक जन्मपत्री" की संज्ञा प्रदान की है।
▪️ भारतीय संविधान की प्रस्तावना के अंतर्गत व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता एवं अखंडता को सुनिश्चित करना एक संकल्प है।
▪️ संविधान की प्रस्तावना में तीन प्रकार के न्याय – सामाजिक आर्थिक एवं राजनीतिक।
▪️पांच प्रकार की स्वतंत्रता– विचार ,अभिव्यक्ति, विश्वास ,धर्म और उपासना।
▪️ दो प्रकार की समानता – प्रतिष्ठा एवं अवसर।
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🔳 संघ और उसका राज्य क्षेत्र
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🔳 संघ और उसका राज्य क्षेत्र
▪️ भारतीय संविधान के भाग एक के अंतर्गत अनुच्छेद 1 से 4 तक भारतीय संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र का वर्णन किया गया है।
▪️ वर्तमान में भारत में 28 राज्य तथा 8 संघशासित प्रदेश हैं।
▪️अनुच्छेद 1 के अनुसार – भारत राज्यों का एक संघ है
▪️अनुच्छेद 2 के अनुसार – संसद को संघ में नए राज्यों के प्रवेश या स्थापना करने के लिए विधि बनाने का अधिकार देता है।
▪️अनुच्छेद 3 के अनुसार –नए राज्यों का निर्माण और वर्तमान राज्यों के क्षेत्रफल सीमा व नाम में परिवर्तन की शक्ति संसद को प्राप्त है।
▪️अनुच्छेद 4 के अनुसार –संसद द्वारा अनुच्छेद दो तथा तीन के अंतर्गत बनाई गई विधि अनुच्छेद 368 के तहत संविधान में संशोधन नहीं समझा जाएगा।
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🔳 भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन
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🔳 भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन
▪️ भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के लिए डॉ राजेंद्र प्रसाद द्वारा 1947 को एस. के. धर की अध्यक्षता में चार सदस्य "भाषायी प्रांत आयोग" का गठन किया गया।
▪️ इस आयोग ने 10 दिसंबर 1948 को प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में प्रशासनिक, भौगोलिक एवं वित्तीय ,विकास की सुविधा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन का सुझाव दिया।
▪️ जवाहरलाल नेहरू ,वल्लभभाई पटेल तथा पत्तभी सीता रमैया ( JVP) के तीन सदस्य समिति के आधार पर 1 अप्रैल 1949 को प्रस्तुत रिपोर्ट में भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन का विरोध किया।
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🔳 भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन
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🔳 भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन
▪️ भारतीय संघ के राज्यों के पुनर्गठन के लिए राज्य पुनर्गठन आयोग की स्थापना वर्ष 1953 में की गई थी।#AbNahiRukegaPrelims
▪️ इस आयोग के अध्यक्ष फजल अली थे ।इस आयोग ने वर्ष 1955 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
▪️ इस आयोग के अन्य अध्यक्ष के. एम. पाणिकर तथा हृदयनाथ कुंजरू थे।
▪️ इस आयोग की रिपोर्ट के आधार पर राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 पारित किया गया इसके लिए सातवां संविधान संशोधन किया गया।
▪️ भाषा के आधार पर गठित होने वाला भारत का प्रथम राज्य आंध्र प्रदेश था ।जिसका गठन एक अक्टूबर 1953 को किया गया।
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🔳 राज्यों का पुनर्गठन
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🔳 राज्यों का पुनर्गठन
▪️ राज्य पुनर्गठन अधिनियम जुलाई 1956 में पास किया गया ।
▪️ इसके आधार पर भारत में 14 राज्य एवं 6 केंद्र शासित प्रदेश स्थापित किए गए।
▪️ राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 के द्वारा भारत संघ में क्षेत्रीय परिषदों की स्थापना की गई थी
▪️ 18 दिसंबर 1961 को पुर्तगालियों पर सैनिक कार्रवाई करके गोवा दमन व दीव को भारत संघ में मिल लिया गया।
▪️ भारत में पांच क्षेत्रीय परिषद हैं ,केंद्रीय गृह मंत्री इसका अध्यक्ष होता है।
▪️ 31 अक्टूबर 2019 को जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के तहत दो नए केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख का गठन किया गया
▪️ दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव विधेयक, 2019 के द्वारा 26 जनवरी 2020 से दमन एवं दीव और दादरा नगर हवेली को संयुक्त रूप से एक केंद्रशासित प्रदेश बना दिया गया।
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🔳 नए राज्यों का गठन
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🔳 नए राज्यों का गठन
▪️आंध्र प्रदेश – 1 अक्टूबर, 1953
▪️गुजरात – 1 मई, 1960
▪️नागालैंड – 1 दिसंबर, 1963
▪️हरियाणा – 1 नवंबर, 1966
▪️ हिमाचल प्रदेश – 25 जनवरी, 1971
▪️मेघालय, मणिपुर ,त्रिपुरा – 21 जनवरी, 1972
▪️सिक्किम – 16 मई, 1975
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🔳 नए राज्यों का गठन
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🔳 नए राज्यों का गठन
▪️ मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश –20 फरवरी,1987#AbNahiRukegaPrelims
▪️ गोवा –30 मई,1987
▪️ छत्तीसगढ़ –1 नवंबर,2000
▪️ उत्तराखंड – 9 नवंबर,2000
▪️ झारखंड –15 नवंबर,2000
▪️तेलंगाना – 2 जून, 2014
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🔳नागरिकता
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🔳नागरिकता
▪️ भारतीय संविधान के भाग 2, अनुच्छेद 5 से 11 तक नागरिकता के बारे में है।
▪️ भारत में ब्रिटन के समान एकल नागरिकता का प्रावधान किया गया है।
▪️ भारत में संसद को नागरिकता के संबंध में विधि बनाने की शक्ति दी गई है।
▪️ संसद द्वारा भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 पारित किया गया है।
▪️ नागरिकता अधिनियम 1955 के अनुसार निम्न प्रकार से भारतीय नागरिकता प्राप्त की जा सकती है– जन्म से , वंश के आधार पर , पंजीकरण द्वारा , देशीकरण द्वारा, क्षेत्र ग्रहण द्वारा
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🔳 नागरिकता से संबंधित अनुच्छेद
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🔳 नागरिकता से संबंधित अनुच्छेद
▪️अनुच्छेद 5 –संविधान के प्रारंभ के समय जन्म ,वंश, पंजीकरण तथा देशीयकरण के आधार पर नागरिकता का प्रावधान।
▪️अनुच्छेद 6 –पाकिस्तान से भारत को प्रव्रजन करने वाले कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार।
▪️अनुच्छेद 7 –पाकिस्तान को प्रव्रजन करने वाले कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार।
▪️अनुच्छेद 8 –भारत के बाहर रहने वाले भारतीय उद्भव के कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार।
▪️ अनुच्छेद 9 – विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से अर्जित करने वाले व्यक्तियों का नागरिक ना होना।
▪️अनुच्छेद 10 – नागरिकता के अधिकारों का बने रहना
▪️अनुच्छेद 11–संसद द्वारा नागरिकता के अधिकार का विधि द्वारा विनियमन किया जाना।
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🔳नागरिकता का अंत
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🔳नागरिकता का अंत
▪️ सरकार द्वारा नागरिकता से वंचित करने पर।
▪️ किसी अन्य देश की नागरिकता ग्रहण करने पर।
▪️ नागरिकता का परित्याग करने पर।
▪️ गलत तरीके से नागरिकता प्राप्त करने पर।
▪️ युद्ध काल में शत्रु की सहायता करने पर।
▪️ लगातार 7 वर्ष तक भारत से बाहर रहने पर।
भारत सरकार नागरिकता समाप्त कर सकती है।
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🔳 नागरिकता संशोधन अधिनियम ,2019
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🔳 नागरिकता संशोधन अधिनियम ,2019
▪️ यह नागरिकता अधिनियम ,1955 में संशोधन करती है।
▪️ यह बिल 9 दिसंबर 2019 को लोकसभा में तथा 11 दिसंबर 2019 को राज्यसभा में पारित हुआ।
▪️ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 12 दिसंबर 2019 को इस पर अपनी स्वीकृति प्रदान की।
▪️ इसके अनुसार 31 दिसंबर 2014 या उसके पहले अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान, से भारत आए 6 समुदायों– हिंदू ,सिख ,बौद्ध जैन ,पारसी तथा ईसाई को अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा।
▪️ केंद्र सरकार इन प्रवासियों को लाभ प्रदान करने के लिए विदेशी अधिनियम, 1946 एवं पासपोर्ट अधिनियम, 1920 में छूट प्रदान करेगी।
▪️ यह अधिनियम 6 अल्पसंख्यक समूह के लोगों के लिए देशीयकारण की अवधि को 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष करता है।
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