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प्र. २९६. यज्ञ को श्रेष्ठतम कर्म क्यों कहा गया है ? उत्तर : थोड़े से धन, थोड़े से साधन तथा थोड़े से समय में हजारों प्राणियों को जीवनदायी, रोगनाशक भेषज (औषधीय) वायु की प्राप्ति होती है। इसलिए यज्ञ को श्रेष्ठतम कर्म कहा गया है। @vaidic_gyan
प्र. २९७. छोटे से यज्ञ कुण्ड़ में थोड़े से घी व सामग्री से गांवों, नगरों में फैला भयंकर प्रदूषण कैसे दूर हो सकता है ?
उत्तर : जैसे थोड़े से पोटेशियम साईनाइड से सैकड़ों, हजारों व्यक्तियों का जीवन नष्ट हो जाता है वैसे ही थोड़े से घी, सामग्री से सैकड़ों हजारों व्यक्तियों को जीवन मिलता है।
@vaidic_gyan
उत्तर : जैसे थोड़े से पोटेशियम साईनाइड से सैकड़ों, हजारों व्यक्तियों का जीवन नष्ट हो जाता है वैसे ही थोड़े से घी, सामग्री से सैकड़ों हजारों व्यक्तियों को जीवन मिलता है।
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प्र. २९७. छोटे से यज्ञ कुण्ड़ में थोड़े से घी व सामग्री से गांवों, नगरों में फैला भयंकर प्रदूषण कैसे दूर हो सकता है ? उत्तर : जैसे थोड़े से पोटेशियम साईनाइड से सैकड़ों, हजारों व्यक्तियों का जीवन नष्ट हो जाता है वैसे ही थोड़े से घी, सामग्री से सैकड़ों हजारों…
प्र. २९८. अगरबत्ती, धूप, इत्र, सेन्ट, फूल आदि से वातावरण को शुद्ध किया जा सकता है तो फिर यज्ञ की क्या आवश्यकता है ?
उत्तर : अगरबत्ती आदि से मात्र सुगन्धी उत्पन्न होती है किन्तु रोगों के कीटाणु नष्ट नहीं होते हैं। न वायु शुद्ध होती है ।
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प्र. २९८. अगरबत्ती, धूप, इत्र, सेन्ट, फूल आदि से वातावरण को शुद्ध किया जा सकता है तो फिर यज्ञ की क्या आवश्यकता है ? उत्तर : अगरबत्ती आदि से मात्र सुगन्धी उत्पन्न होती है किन्तु रोगों के कीटाणु नष्ट नहीं होते हैं। न वायु शुद्ध होती है । @vaidic_gyan
प्र. २९९. क्या यज्ञ करने से यज्ञकर्ता की सभी इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं ?
उत्तर : यज्ञ के साथ पुरुषार्थ भी अपेक्षित है, मात्र अग्निहोत्र से मनोकामना पूर्ण नहीं होती है।
@vaidic_gyan
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प्र. २९९. क्या यज्ञ करने से यज्ञकर्ता की सभी इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं ? उत्तर : यज्ञ के साथ पुरुषार्थ भी अपेक्षित है, मात्र अग्निहोत्र से मनोकामना पूर्ण नहीं होती है। @vaidic_gyan
प्र. ३००. क्या यज्ञकर्त्ता को यज्ञ करते समय विशेष वस्त्रों को धारण करना चाहिए ?
उत्तर : यह आवश्यक नहीं है, चाहे तो कर सकते हैं ।
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प्र. ३००. क्या यज्ञकर्त्ता को यज्ञ करते समय विशेष वस्त्रों को धारण करना चाहिए ? उत्तर : यह आवश्यक नहीं है, चाहे तो कर सकते हैं । @vaidic_gyan
प्र. ३०१. क्या अपने व्यक्तिगत यज्ञ को किसी अन्य व्यक्ति को सौंप कर उससे करवा सकते हैं ?
उत्तर : हाँ, यदि समय न हो तो अन्यों से करवा सकते हैं किन्तु व्यक्तिगत यज्ञ करने से जो लाभ होते हैं, वह नहीं मिल पाते हैं।
@vaidic_gyan
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प्र. ३०१. क्या अपने व्यक्तिगत यज्ञ को किसी अन्य व्यक्ति को सौंप कर उससे करवा सकते हैं ? उत्तर : हाँ, यदि समय न हो तो अन्यों से करवा सकते हैं किन्तु व्यक्तिगत यज्ञ करने से जो लाभ होते हैं, वह नहीं मिल पाते हैं। @vaidic_gyan
प्र. ३०२. यज्ञ से पूर्व संकल्प पाठ क्यों करते हैं ?
उत्तर : काल गणना करने के उद्देश्य से संकल्प पाठ किया जाता है। यज्ञ कर्त्ता शुभ कर्म कर रहा है ऐसी भावना भी मन में उत्पन्न होती है।
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प्र. ३०२. यज्ञ से पूर्व संकल्प पाठ क्यों करते हैं ? उत्तर : काल गणना करने के उद्देश्य से संकल्प पाठ किया जाता है। यज्ञ कर्त्ता शुभ कर्म कर रहा है ऐसी भावना भी मन में उत्पन्न होती है। @vaidic_gyan
प्र. ३०३. दीपक को वेदी के उत्तर में तथा जल को पूर्व दिशा में क्यों रखा जाता है ?
उत्तर : यह मात्र एक व्यवस्था है, सुविधा के लिए।
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प्र. ३०३. दीपक को वेदी के उत्तर में तथा जल को पूर्व दिशा में क्यों रखा जाता है ? उत्तर : यह मात्र एक व्यवस्था है, सुविधा के लिए। @vaidic_gyan
प्र. ३०४. क्या यज्ञ द्वारा इच्छित समय एवं इच्छित स्थान पर वर्षा करायी जा सकती है या अधिक वर्षा को बन्द या कम किया जा सकता है ?
उत्तर : हाँ, ऐसा विधान शास्त्रों में है, किन्तु वर्तमान में इस विद्या के जानने वाले कम हैं।
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उत्तर : हाँ, ऐसा विधान शास्त्रों में है, किन्तु वर्तमान में इस विद्या के जानने वाले कम हैं।
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