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प्र. २८६. क्या यज्ञ करने से जो धुंआ उत्पन्न होता है उससे वायु प्रदूषण नहीं होता हैं ? उत्तर : यज्ञ से थोड़ा सा प्रदूषण हो सकता है किन्तु यज्ञ द्वारा निर्मित विशेष वायु अनेक प्रकार के रोगों के कीटाणुओं का नाश करती है । @vaidic_gyan
प्र. २८७. यज्ञ में घी के साथ सामग्री (जड़ी बूटियों) की भी आहुति क्यों दी जाती है ?
उत्तर : सामग्री जलाने से अलग लाभ होते हैं तथा घी जलाने से अलग लाभ होते हैं।
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उत्तर : सामग्री जलाने से अलग लाभ होते हैं तथा घी जलाने से अलग लाभ होते हैं।
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प्र. २८७. यज्ञ में घी के साथ सामग्री (जड़ी बूटियों) की भी आहुति क्यों दी जाती है ? उत्तर : सामग्री जलाने से अलग लाभ होते हैं तथा घी जलाने से अलग लाभ होते हैं। @vaidic_gyan
प्र. २८८. यज्ञ की सामग्री में क्या क्या पदार्थ होते हैं ?
उत्तर : यज्ञ की सामग्री में मुख्य रूप से सुगन्धित, रोगनाशक, पुष्टिकारक तथा मधुर पदार्थ होते हैं।
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उत्तर : यज्ञ की सामग्री में मुख्य रूप से सुगन्धित, रोगनाशक, पुष्टिकारक तथा मधुर पदार्थ होते हैं।
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प्र. २८८. यज्ञ की सामग्री में क्या क्या पदार्थ होते हैं ? उत्तर : यज्ञ की सामग्री में मुख्य रूप से सुगन्धित, रोगनाशक, पुष्टिकारक तथा मधुर पदार्थ होते हैं। @vaidic_gyan
प्र. २८९. 'स्वाहा' शब्द का अर्थ क्या है ?
उत्तर : स्वाहा शब्द के निम्न अर्थ होते हैं -
(१) सत्य बोलना
(२) मधुर बोलना
(३) अपनी वस्तु को अपनी कहना
(४) जैसा मन में हो वैसा ही वाणी से बोलना, तथा कर्म करना।
(५) परिवार समाज राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व आहुत करने की योग्यता बनाना तथा
(६) घी, सामग्री को अग्नि में डालना।
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उत्तर : स्वाहा शब्द के निम्न अर्थ होते हैं -
(१) सत्य बोलना
(२) मधुर बोलना
(३) अपनी वस्तु को अपनी कहना
(४) जैसा मन में हो वैसा ही वाणी से बोलना, तथा कर्म करना।
(५) परिवार समाज राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व आहुत करने की योग्यता बनाना तथा
(६) घी, सामग्री को अग्नि में डालना।
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प्र. २८९. 'स्वाहा' शब्द का अर्थ क्या है ? उत्तर : स्वाहा शब्द के निम्न अर्थ होते हैं - (१) सत्य बोलना (२) मधुर बोलना (३) अपनी वस्तु को अपनी कहना (४) जैसा मन में हो वैसा ही वाणी से बोलना, तथा कर्म करना। (५) परिवार समाज राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व आहुत…
प्र. २९०. तीन समिधाओं को विशेष रूप से घी में डुबोकर क्यों आहुति दी जाती है ।
उत्तर : समिधाओं को घी में डूबोकर जलाने से वे शीघ्र जलती हैं।
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उत्तर : समिधाओं को घी में डूबोकर जलाने से वे शीघ्र जलती हैं।
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प्र. २९०. तीन समिधाओं को विशेष रूप से घी में डुबोकर क्यों आहुति दी जाती है । उत्तर : समिधाओं को घी में डूबोकर जलाने से वे शीघ्र जलती हैं। @vaidic_gyan
प्र. २९१. क्या यज्ञ से आध्यात्मिक-मानसिक लाभ भी होते हैं ?
उत्तर : हाँ, यज्ञ करने से शारीरिक स्वास्थ्य लाभ, त्याग की भावना प्रसन्नता, पवित्रता आदि गुणों की प्राप्ति होती है।
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उत्तर : हाँ, यज्ञ करने से शारीरिक स्वास्थ्य लाभ, त्याग की भावना प्रसन्नता, पवित्रता आदि गुणों की प्राप्ति होती है।
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प्र. २९१. क्या यज्ञ से आध्यात्मिक-मानसिक लाभ भी होते हैं ? उत्तर : हाँ, यज्ञ करने से शारीरिक स्वास्थ्य लाभ, त्याग की भावना प्रसन्नता, पवित्रता आदि गुणों की प्राप्ति होती है। @vaidic_gyan
प्र. २९२. यज्ञ करते समय घी की आहुति कभी उत्तर भाग में कभी दक्षिण में कभी मध्य में देते हैं, ऐसा क्यों किया जाता है ?
उत्तर : ऐसा इसलिए किया जाता है कि जिससे सभी समिधाओं पर समान रूप से घी पड़े तथा वे ठीक प्रकार से जल जाएँ।
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उत्तर : ऐसा इसलिए किया जाता है कि जिससे सभी समिधाओं पर समान रूप से घी पड़े तथा वे ठीक प्रकार से जल जाएँ।
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प्र. २९२. यज्ञ करते समय घी की आहुति कभी उत्तर भाग में कभी दक्षिण में कभी मध्य में देते हैं, ऐसा क्यों किया जाता है ? उत्तर : ऐसा इसलिए किया जाता है कि जिससे सभी समिधाओं पर समान रूप से घी पड़े तथा वे ठीक प्रकार से जल जाएँ। @vaidic_gyan
प्र. २९३. क्या यज्ञ करना सबके लिए अनिवार्य है ?
उत्तर : शास्त्रों में यज्ञ करना सबके लिए अनिवार्य बताया गया है, चाहे थोड़ा करें या अधिक करें ।
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उत्तर : शास्त्रों में यज्ञ करना सबके लिए अनिवार्य बताया गया है, चाहे थोड़ा करें या अधिक करें ।
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प्र. २९३. क्या यज्ञ करना सबके लिए अनिवार्य है ? उत्तर : शास्त्रों में यज्ञ करना सबके लिए अनिवार्य बताया गया है, चाहे थोड़ा करें या अधिक करें । @vaidic_gyan
प्र. २९४. यज्ञ में, हवन में, अग्निहोत्र में, होम में क्या भेद है ?
उत्तर : अग्निहोत्र का अर्थ है हवन कुण्ड में धृत सामग्री जलाना । हवन और होम, अग्निहोत्र के ही पर्यायवाची शब्द हैं किन्तु यज्ञ शब्द का अर्थ विस्तृत है, जिसका अर्थ है ईश्वर की आज्ञा के अनुसार प्रत्येक शुभ कार्य को निष्काम भावना से पुरुषार्थ, त्याग, तपस्या पूर्वक करना, जिससे परिवार समाज राष्ट्र तथा विश्व को सुख, शान्ति, समृद्धि की प्राप्ति हो ।
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उत्तर : अग्निहोत्र का अर्थ है हवन कुण्ड में धृत सामग्री जलाना । हवन और होम, अग्निहोत्र के ही पर्यायवाची शब्द हैं किन्तु यज्ञ शब्द का अर्थ विस्तृत है, जिसका अर्थ है ईश्वर की आज्ञा के अनुसार प्रत्येक शुभ कार्य को निष्काम भावना से पुरुषार्थ, त्याग, तपस्या पूर्वक करना, जिससे परिवार समाज राष्ट्र तथा विश्व को सुख, शान्ति, समृद्धि की प्राप्ति हो ।
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प्र. २९४. यज्ञ में, हवन में, अग्निहोत्र में, होम में क्या भेद है ? उत्तर : अग्निहोत्र का अर्थ है हवन कुण्ड में धृत सामग्री जलाना । हवन और होम, अग्निहोत्र के ही पर्यायवाची शब्द हैं किन्तु यज्ञ शब्द का अर्थ विस्तृत है, जिसका अर्थ है ईश्वर की आज्ञा के अनुसार…
प्र. २९५. क्या यज्ञ करने का अधिकार केवल ब्राह्मण को ही होता है या कोई भी व्यक्ति यज्ञ कर सकता है ?
उत्तर : यज्ञ करने का अधिकार सभी मनुष्यों को है।
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प्र. २९५. क्या यज्ञ करने का अधिकार केवल ब्राह्मण को ही होता है या कोई भी व्यक्ति यज्ञ कर सकता है ? उत्तर : यज्ञ करने का अधिकार सभी मनुष्यों को है। @vaidic_gyan
प्र. २९६. यज्ञ को श्रेष्ठतम कर्म क्यों कहा गया है ?
उत्तर : थोड़े से धन, थोड़े से साधन तथा थोड़े से समय में हजारों प्राणियों को जीवनदायी, रोगनाशक भेषज (औषधीय) वायु की प्राप्ति होती है। इसलिए यज्ञ को श्रेष्ठतम कर्म कहा गया है।
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उत्तर : थोड़े से धन, थोड़े से साधन तथा थोड़े से समय में हजारों प्राणियों को जीवनदायी, रोगनाशक भेषज (औषधीय) वायु की प्राप्ति होती है। इसलिए यज्ञ को श्रेष्ठतम कर्म कहा गया है।
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