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प्र. २७८. व्यक्ति सच्चा और पूर्ण आस्तिक कब बनता है ? उत्तर : सत्य का पालन, चोरी का त्याग, धैर्य, प्रेम पूर्वक व्यवहार, निष्पक्षता, दया, क्षमा, संयम, निष्कामता आदि उत्तम गुणों को धारण करने से व्यक्ति सच्चा व पूर्ण आस्तिक बनता है। @vaidic_gyan
प्र. २७९. यज्ञ किसे कहते हैं ? यज्ञ की परिभाषा क्या है ?
उत्तर : यज्ञ का सामान्य अर्थ है दान देना, त्याग करना तथा वस्तुओं का ठीक ठीक उपयोग लेना ।
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उत्तर : यज्ञ का सामान्य अर्थ है दान देना, त्याग करना तथा वस्तुओं का ठीक ठीक उपयोग लेना ।
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प्र. २७९. यज्ञ किसे कहते हैं ? यज्ञ की परिभाषा क्या है ? उत्तर : यज्ञ का सामान्य अर्थ है दान देना, त्याग करना तथा वस्तुओं का ठीक ठीक उपयोग लेना । @vaidic_gyan
प्र. २८०. यज्ञ कुण्ड विशेष आकार का ही क्यों बनाया जाता हैं, किसी भी पात्र में यज्ञ क्यों नहीं होता ?
उत्तर : विशेष प्रकार के यज्ञ कुण्ड में अग्नि का तापमान अधिक बनता है तथा घी और सामग्री शीघ्रता से जलते हैं और अति सूक्ष्म आकार लेते हैं ।
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उत्तर : विशेष प्रकार के यज्ञ कुण्ड में अग्नि का तापमान अधिक बनता है तथा घी और सामग्री शीघ्रता से जलते हैं और अति सूक्ष्म आकार लेते हैं ।
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प्र. २८०. यज्ञ कुण्ड विशेष आकार का ही क्यों बनाया जाता हैं, किसी भी पात्र में यज्ञ क्यों नहीं होता ? उत्तर : विशेष प्रकार के यज्ञ कुण्ड में अग्नि का तापमान अधिक बनता है तथा घी और सामग्री शीघ्रता से जलते हैं और अति सूक्ष्म आकार लेते हैं । @vaidic_gyan
प्र. २८१. यज्ञ के लिए समिधायें (लकड़ी) पीपल, बरगद, आम, गूलर आदि कुछ विशेष वृक्षों की ही क्यों प्रयोग की जाती हैं ? किसी भी वृक्ष की लकड़ी से यज्ञ करने में क्या हानि है ?
उत्तर : पीपल, आम आदि विशेष समिधाओं के जलाने से कार्बन डाई ऑक्साइड आदि हानिकारक गैसें बहुत कम बनती हैं और कोयले व राख भी कम बनते हैं।
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उत्तर : पीपल, आम आदि विशेष समिधाओं के जलाने से कार्बन डाई ऑक्साइड आदि हानिकारक गैसें बहुत कम बनती हैं और कोयले व राख भी कम बनते हैं।
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प्र. २८१. यज्ञ के लिए समिधायें (लकड़ी) पीपल, बरगद, आम, गूलर आदि कुछ विशेष वृक्षों की ही क्यों प्रयोग की जाती हैं ? किसी भी वृक्ष की लकड़ी से यज्ञ करने में क्या हानि है ? उत्तर : पीपल, आम आदि विशेष समिधाओं के जलाने से कार्बन डाई ऑक्साइड आदि हानिकारक गैसें…
प्र. २८२. यज्ञ में गाय के घी का ही प्रयोग क्यों होता है ? भैंस, बकरी, ऊंटनी का या वनस्पति घी या तेल का प्रयोग क्यों नहीं होता ?
उत्तर : क्योंकि गाय के घी को जलाने से विशेष गैसें बनती हैं जो आकाश में स्थित प्रदूषण को शीघ्र ही अधिक मात्रा में नष्ट कर देती हैं। अन्य किसी घी या तेल में यह शक्ति नहीं होती हैं।
@vaidic_gyan
उत्तर : क्योंकि गाय के घी को जलाने से विशेष गैसें बनती हैं जो आकाश में स्थित प्रदूषण को शीघ्र ही अधिक मात्रा में नष्ट कर देती हैं। अन्य किसी घी या तेल में यह शक्ति नहीं होती हैं।
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Forwarded from Darshnik Vichar (आचार्य प्रशान्त शर्मा)
शास्त्राण्यधीत्यापि भवन्ति मूर्खा:
यस्तु क्रियावान् पुरूष: स विद्वान् ।
शास्त्र पढ़ने के पश्चात् भी व्यक्ति मूर्ख रह सकता है
विद्वान वह है जो पढ़े हुए शास्त्र को आचरण में लाता है।
यस्तु क्रियावान् पुरूष: स विद्वान् ।
शास्त्र पढ़ने के पश्चात् भी व्यक्ति मूर्ख रह सकता है
विद्वान वह है जो पढ़े हुए शास्त्र को आचरण में लाता है।
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श्रवणायापि बहुभिर्यो न लभ्य: श्रृण्वन्तोऽपि बहवो यं न विद्यु: आश्चर्यो वक्ता कुशलोऽस्य लब्धाऽऽश्चर्यो ज्ञाता कुशलानुशिष्ट:
बहुतों को तो परमात्मा के विषय में सुनने को भी नहीं मिलता, बहुत कम लोग ही उसके विषय में सुन पाते हैं, उसके विषय में कहने वाला भी विरला है, उसको पाने वाला कोई कुशल ही है, कुशल गुरू के उपदेश से कोई विरला ही उसको जान सकता है ...
बहुतों को तो परमात्मा के विषय में सुनने को भी नहीं मिलता, बहुत कम लोग ही उसके विषय में सुन पाते हैं, उसके विषय में कहने वाला भी विरला है, उसको पाने वाला कोई कुशल ही है, कुशल गुरू के उपदेश से कोई विरला ही उसको जान सकता है ...
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प्र. २८२. यज्ञ में गाय के घी का ही प्रयोग क्यों होता है ? भैंस, बकरी, ऊंटनी का या वनस्पति घी या तेल का प्रयोग क्यों नहीं होता ? उत्तर : क्योंकि गाय के घी को जलाने से विशेष गैसें बनती हैं जो आकाश में स्थित प्रदूषण को शीघ्र ही अधिक मात्रा में नष्ट कर देती हैं।…
प्र. २८३. यज्ञ सूर्योदय के पश्चात् तथा सायं सूर्यास्त से पूर्व ही क्यों करते हैं रात्रि में यज्ञ क्यों नहीं करना चाहिये ?
उत्तर : सूर्य की किरणें, यज्ञ द्वारा उत्पन्न विशेष रोग विनाशक गैसों को ऊपर आकाश में ले जाकर फैला देती हैं, यह कार्य रात में नहीं हो सकता है ।
@vaidic_gyan
उत्तर : सूर्य की किरणें, यज्ञ द्वारा उत्पन्न विशेष रोग विनाशक गैसों को ऊपर आकाश में ले जाकर फैला देती हैं, यह कार्य रात में नहीं हो सकता है ।
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प्र. २८३. यज्ञ सूर्योदय के पश्चात् तथा सायं सूर्यास्त से पूर्व ही क्यों करते हैं रात्रि में यज्ञ क्यों नहीं करना चाहिये ? उत्तर : सूर्य की किरणें, यज्ञ द्वारा उत्पन्न विशेष रोग विनाशक गैसों को ऊपर आकाश में ले जाकर फैला देती हैं, यह कार्य रात में नहीं हो सकता…
प्र. २८४. यज्ञ करने से पूर्व आचमन व अंग स्पर्श (जल से) क्यों करते हैं ?
उत्तर : जल का आचमन करने से शरीर में पवित्रता होती है तथा पवित्र विचार भी उत्पन्न होते हैं ।
@vaidic_gyan
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प्र. २८४. यज्ञ करने से पूर्व आचमन व अंग स्पर्श (जल से) क्यों करते हैं ? उत्तर : जल का आचमन करने से शरीर में पवित्रता होती है तथा पवित्र विचार भी उत्पन्न होते हैं । @vaidic_gyan
प्र. २८५. यज्ञ एक भौतिक क्रिया है तो इसमें मंत्रों का उच्चारण क्यों किया जाता है ?
उत्तर : मंत्रों के बोलने से यज्ञ के लाभों, परिणामों, प्रभावों का पता चलता है तथा मंत्रों पर विचार करने से आत्मा में शुद्धता आती है ।
@vaidic_gyan
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प्र. २८५. यज्ञ एक भौतिक क्रिया है तो इसमें मंत्रों का उच्चारण क्यों किया जाता है ? उत्तर : मंत्रों के बोलने से यज्ञ के लाभों, परिणामों, प्रभावों का पता चलता है तथा मंत्रों पर विचार करने से आत्मा में शुद्धता आती है । @vaidic_gyan
प्र. २८६. क्या यज्ञ करने से जो धुंआ उत्पन्न होता है उससे वायु प्रदूषण नहीं होता हैं ?
उत्तर : यज्ञ से थोड़ा सा प्रदूषण हो सकता है किन्तु यज्ञ द्वारा निर्मित विशेष वायु अनेक प्रकार के रोगों के कीटाणुओं का नाश करती है ।
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उत्तर : यज्ञ से थोड़ा सा प्रदूषण हो सकता है किन्तु यज्ञ द्वारा निर्मित विशेष वायु अनेक प्रकार के रोगों के कीटाणुओं का नाश करती है ।
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