प्राचीन वैदिक सैद्धांतिक ज्ञान 🚩
प्र. ३००. क्या यज्ञकर्त्ता को यज्ञ करते समय विशेष वस्त्रों को धारण करना चाहिए ? उत्तर : यह आवश्यक नहीं है, चाहे तो कर सकते हैं । @vaidic_gyan
प्र. ३०१. क्या अपने व्यक्तिगत यज्ञ को किसी अन्य व्यक्ति को सौंप कर उससे करवा सकते हैं ?
उत्तर : हाँ, यदि समय न हो तो अन्यों से करवा सकते हैं किन्तु व्यक्तिगत यज्ञ करने से जो लाभ होते हैं, वह नहीं मिल पाते हैं।
@vaidic_gyan
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प्र. ३०१. क्या अपने व्यक्तिगत यज्ञ को किसी अन्य व्यक्ति को सौंप कर उससे करवा सकते हैं ? उत्तर : हाँ, यदि समय न हो तो अन्यों से करवा सकते हैं किन्तु व्यक्तिगत यज्ञ करने से जो लाभ होते हैं, वह नहीं मिल पाते हैं। @vaidic_gyan
प्र. ३०२. यज्ञ से पूर्व संकल्प पाठ क्यों करते हैं ?
उत्तर : काल गणना करने के उद्देश्य से संकल्प पाठ किया जाता है। यज्ञ कर्त्ता शुभ कर्म कर रहा है ऐसी भावना भी मन में उत्पन्न होती है।
@vaidic_gyan
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प्र. ३०२. यज्ञ से पूर्व संकल्प पाठ क्यों करते हैं ? उत्तर : काल गणना करने के उद्देश्य से संकल्प पाठ किया जाता है। यज्ञ कर्त्ता शुभ कर्म कर रहा है ऐसी भावना भी मन में उत्पन्न होती है। @vaidic_gyan
प्र. ३०३. दीपक को वेदी के उत्तर में तथा जल को पूर्व दिशा में क्यों रखा जाता है ?
उत्तर : यह मात्र एक व्यवस्था है, सुविधा के लिए।
@vaidic_gyan
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प्र. ३०३. दीपक को वेदी के उत्तर में तथा जल को पूर्व दिशा में क्यों रखा जाता है ? उत्तर : यह मात्र एक व्यवस्था है, सुविधा के लिए। @vaidic_gyan
प्र. ३०४. क्या यज्ञ द्वारा इच्छित समय एवं इच्छित स्थान पर वर्षा करायी जा सकती है या अधिक वर्षा को बन्द या कम किया जा सकता है ?
उत्तर : हाँ, ऐसा विधान शास्त्रों में है, किन्तु वर्तमान में इस विद्या के जानने वाले कम हैं।
@vaidic_gyan
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प्र. ३०४. क्या यज्ञ द्वारा इच्छित समय एवं इच्छित स्थान पर वर्षा करायी जा सकती है या अधिक वर्षा को बन्द या कम किया जा सकता है ? उत्तर : हाँ, ऐसा विधान शास्त्रों में है, किन्तु वर्तमान में इस विद्या के जानने वाले कम हैं। @vaidic_gyan
प्र. ३०५. क्या अग्नि जलाने के लिये लकड़ी के स्थान पर गोबर के कण्डों का प्रयोग किया जा सकता है ?
उत्तर : अग्नि जलाने के लिये लकड़ी के स्थान पर गोबर के कण्डों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
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प्र. ३०५. क्या अग्नि जलाने के लिये लकड़ी के स्थान पर गोबर के कण्डों का प्रयोग किया जा सकता है ? उत्तर : अग्नि जलाने के लिये लकड़ी के स्थान पर गोबर के कण्डों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। @vaidic_gyan
प्र. ३०६. कौन व्यक्ति यज्ञ कर्म को छोड़ सकता है ?
उत्तर : संन्यासी विरक्त व्यक्ति को यज्ञ करना आवश्यक नहीं होता है क्योंकि उसका जीवन ही यज्ञमय होता है ।
@vaidic_gyan
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प्र. ३०६. कौन व्यक्ति यज्ञ कर्म को छोड़ सकता है ? उत्तर : संन्यासी विरक्त व्यक्ति को यज्ञ करना आवश्यक नहीं होता है क्योंकि उसका जीवन ही यज्ञमय होता है । @vaidic_gyan
प्र. ३०७. क्या मन्त्रों के अर्थों को जाने बिना भी यज्ञ करने से लाभ होता है ?
उत्तर : मन्त्रों के अर्थों को जाने बिना भी यज्ञ करने से भौतिक लाभ तो होगा ही, किन्तु मन्त्रों के अर्थों को जानकर जो मानसिक, बौद्धिक लाभ होता है, वह नहीं होगा।
@vaidic_gyan
उत्तर : मन्त्रों के अर्थों को जाने बिना भी यज्ञ करने से भौतिक लाभ तो होगा ही, किन्तु मन्त्रों के अर्थों को जानकर जो मानसिक, बौद्धिक लाभ होता है, वह नहीं होगा।
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प्र. ३०७. क्या मन्त्रों के अर्थों को जाने बिना भी यज्ञ करने से लाभ होता है ? उत्तर : मन्त्रों के अर्थों को जाने बिना भी यज्ञ करने से भौतिक लाभ तो होगा ही, किन्तु मन्त्रों के अर्थों को जानकर जो मानसिक, बौद्धिक लाभ होता है, वह नहीं होगा। @vaidic_gyan
प्र. ३०८. क्या यज्ञ करने से शारीरिक, मानसिक रोग भी दूर होते हैं ?
उत्तर : हाँ। यज्ञ करने से शारीरिक, मानसिक रोग भी दूर होते हैं।
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प्र. ३०८. क्या यज्ञ करने से शारीरिक, मानसिक रोग भी दूर होते हैं ? उत्तर : हाँ। यज्ञ करने से शारीरिक, मानसिक रोग भी दूर होते हैं। @vaidic_gyan
प्र. ३०९. क्या बिना ही घी के या बिना ही सामग्री के यज्ञ हो सकता है ?
उत्तर : हाँ, यदि घी या सामग्री उपलब्ध न हो तो अन्य पदार्थों से तथा औषधि, अन्न, वनस्पति आदि से भी यज्ञ किया जा सकता है ।
@vaidic_gyan
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