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प्र. २९०. तीन समिधाओं को विशेष रूप से घी में डुबोकर क्यों आहुति दी जाती है । उत्तर : समिधाओं को घी में डूबोकर जलाने से वे शीघ्र जलती हैं। @vaidic_gyan
प्र. २९१. क्या यज्ञ से आध्यात्मिक-मानसिक लाभ भी होते हैं ?
उत्तर : हाँ, यज्ञ करने से शारीरिक स्वास्थ्य लाभ, त्याग की भावना प्रसन्नता, पवित्रता आदि गुणों की प्राप्ति होती है।
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उत्तर : हाँ, यज्ञ करने से शारीरिक स्वास्थ्य लाभ, त्याग की भावना प्रसन्नता, पवित्रता आदि गुणों की प्राप्ति होती है।
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प्र. २९१. क्या यज्ञ से आध्यात्मिक-मानसिक लाभ भी होते हैं ? उत्तर : हाँ, यज्ञ करने से शारीरिक स्वास्थ्य लाभ, त्याग की भावना प्रसन्नता, पवित्रता आदि गुणों की प्राप्ति होती है। @vaidic_gyan
प्र. २९२. यज्ञ करते समय घी की आहुति कभी उत्तर भाग में कभी दक्षिण में कभी मध्य में देते हैं, ऐसा क्यों किया जाता है ?
उत्तर : ऐसा इसलिए किया जाता है कि जिससे सभी समिधाओं पर समान रूप से घी पड़े तथा वे ठीक प्रकार से जल जाएँ।
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प्र. २९२. यज्ञ करते समय घी की आहुति कभी उत्तर भाग में कभी दक्षिण में कभी मध्य में देते हैं, ऐसा क्यों किया जाता है ? उत्तर : ऐसा इसलिए किया जाता है कि जिससे सभी समिधाओं पर समान रूप से घी पड़े तथा वे ठीक प्रकार से जल जाएँ। @vaidic_gyan
प्र. २९३. क्या यज्ञ करना सबके लिए अनिवार्य है ?
उत्तर : शास्त्रों में यज्ञ करना सबके लिए अनिवार्य बताया गया है, चाहे थोड़ा करें या अधिक करें ।
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उत्तर : शास्त्रों में यज्ञ करना सबके लिए अनिवार्य बताया गया है, चाहे थोड़ा करें या अधिक करें ।
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प्र. २९३. क्या यज्ञ करना सबके लिए अनिवार्य है ? उत्तर : शास्त्रों में यज्ञ करना सबके लिए अनिवार्य बताया गया है, चाहे थोड़ा करें या अधिक करें । @vaidic_gyan
प्र. २९४. यज्ञ में, हवन में, अग्निहोत्र में, होम में क्या भेद है ?
उत्तर : अग्निहोत्र का अर्थ है हवन कुण्ड में धृत सामग्री जलाना । हवन और होम, अग्निहोत्र के ही पर्यायवाची शब्द हैं किन्तु यज्ञ शब्द का अर्थ विस्तृत है, जिसका अर्थ है ईश्वर की आज्ञा के अनुसार प्रत्येक शुभ कार्य को निष्काम भावना से पुरुषार्थ, त्याग, तपस्या पूर्वक करना, जिससे परिवार समाज राष्ट्र तथा विश्व को सुख, शान्ति, समृद्धि की प्राप्ति हो ।
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उत्तर : अग्निहोत्र का अर्थ है हवन कुण्ड में धृत सामग्री जलाना । हवन और होम, अग्निहोत्र के ही पर्यायवाची शब्द हैं किन्तु यज्ञ शब्द का अर्थ विस्तृत है, जिसका अर्थ है ईश्वर की आज्ञा के अनुसार प्रत्येक शुभ कार्य को निष्काम भावना से पुरुषार्थ, त्याग, तपस्या पूर्वक करना, जिससे परिवार समाज राष्ट्र तथा विश्व को सुख, शान्ति, समृद्धि की प्राप्ति हो ।
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प्र. २९४. यज्ञ में, हवन में, अग्निहोत्र में, होम में क्या भेद है ? उत्तर : अग्निहोत्र का अर्थ है हवन कुण्ड में धृत सामग्री जलाना । हवन और होम, अग्निहोत्र के ही पर्यायवाची शब्द हैं किन्तु यज्ञ शब्द का अर्थ विस्तृत है, जिसका अर्थ है ईश्वर की आज्ञा के अनुसार…
प्र. २९५. क्या यज्ञ करने का अधिकार केवल ब्राह्मण को ही होता है या कोई भी व्यक्ति यज्ञ कर सकता है ?
उत्तर : यज्ञ करने का अधिकार सभी मनुष्यों को है।
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उत्तर : यज्ञ करने का अधिकार सभी मनुष्यों को है।
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प्र. २९५. क्या यज्ञ करने का अधिकार केवल ब्राह्मण को ही होता है या कोई भी व्यक्ति यज्ञ कर सकता है ? उत्तर : यज्ञ करने का अधिकार सभी मनुष्यों को है। @vaidic_gyan
प्र. २९६. यज्ञ को श्रेष्ठतम कर्म क्यों कहा गया है ?
उत्तर : थोड़े से धन, थोड़े से साधन तथा थोड़े से समय में हजारों प्राणियों को जीवनदायी, रोगनाशक भेषज (औषधीय) वायु की प्राप्ति होती है। इसलिए यज्ञ को श्रेष्ठतम कर्म कहा गया है।
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उत्तर : थोड़े से धन, थोड़े से साधन तथा थोड़े से समय में हजारों प्राणियों को जीवनदायी, रोगनाशक भेषज (औषधीय) वायु की प्राप्ति होती है। इसलिए यज्ञ को श्रेष्ठतम कर्म कहा गया है।
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प्र. २९६. यज्ञ को श्रेष्ठतम कर्म क्यों कहा गया है ? उत्तर : थोड़े से धन, थोड़े से साधन तथा थोड़े से समय में हजारों प्राणियों को जीवनदायी, रोगनाशक भेषज (औषधीय) वायु की प्राप्ति होती है। इसलिए यज्ञ को श्रेष्ठतम कर्म कहा गया है। @vaidic_gyan
प्र. २९७. छोटे से यज्ञ कुण्ड़ में थोड़े से घी व सामग्री से गांवों, नगरों में फैला भयंकर प्रदूषण कैसे दूर हो सकता है ?
उत्तर : जैसे थोड़े से पोटेशियम साईनाइड से सैकड़ों, हजारों व्यक्तियों का जीवन नष्ट हो जाता है वैसे ही थोड़े से घी, सामग्री से सैकड़ों हजारों व्यक्तियों को जीवन मिलता है।
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उत्तर : जैसे थोड़े से पोटेशियम साईनाइड से सैकड़ों, हजारों व्यक्तियों का जीवन नष्ट हो जाता है वैसे ही थोड़े से घी, सामग्री से सैकड़ों हजारों व्यक्तियों को जीवन मिलता है।
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प्र. २९७. छोटे से यज्ञ कुण्ड़ में थोड़े से घी व सामग्री से गांवों, नगरों में फैला भयंकर प्रदूषण कैसे दूर हो सकता है ? उत्तर : जैसे थोड़े से पोटेशियम साईनाइड से सैकड़ों, हजारों व्यक्तियों का जीवन नष्ट हो जाता है वैसे ही थोड़े से घी, सामग्री से सैकड़ों हजारों…
प्र. २९८. अगरबत्ती, धूप, इत्र, सेन्ट, फूल आदि से वातावरण को शुद्ध किया जा सकता है तो फिर यज्ञ की क्या आवश्यकता है ?
उत्तर : अगरबत्ती आदि से मात्र सुगन्धी उत्पन्न होती है किन्तु रोगों के कीटाणु नष्ट नहीं होते हैं। न वायु शुद्ध होती है ।
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उत्तर : अगरबत्ती आदि से मात्र सुगन्धी उत्पन्न होती है किन्तु रोगों के कीटाणु नष्ट नहीं होते हैं। न वायु शुद्ध होती है ।
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प्र. २९८. अगरबत्ती, धूप, इत्र, सेन्ट, फूल आदि से वातावरण को शुद्ध किया जा सकता है तो फिर यज्ञ की क्या आवश्यकता है ? उत्तर : अगरबत्ती आदि से मात्र सुगन्धी उत्पन्न होती है किन्तु रोगों के कीटाणु नष्ट नहीं होते हैं। न वायु शुद्ध होती है । @vaidic_gyan
प्र. २९९. क्या यज्ञ करने से यज्ञकर्ता की सभी इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं ?
उत्तर : यज्ञ के साथ पुरुषार्थ भी अपेक्षित है, मात्र अग्निहोत्र से मनोकामना पूर्ण नहीं होती है।
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उत्तर : यज्ञ के साथ पुरुषार्थ भी अपेक्षित है, मात्र अग्निहोत्र से मनोकामना पूर्ण नहीं होती है।
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प्र. २९९. क्या यज्ञ करने से यज्ञकर्ता की सभी इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं ? उत्तर : यज्ञ के साथ पुरुषार्थ भी अपेक्षित है, मात्र अग्निहोत्र से मनोकामना पूर्ण नहीं होती है। @vaidic_gyan
प्र. ३००. क्या यज्ञकर्त्ता को यज्ञ करते समय विशेष वस्त्रों को धारण करना चाहिए ?
उत्तर : यह आवश्यक नहीं है, चाहे तो कर सकते हैं ।
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उत्तर : यह आवश्यक नहीं है, चाहे तो कर सकते हैं ।
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