Forwarded from Darshnik Vichar (आचार्य प्रशान्त शर्मा)
शास्त्राण्यधीत्यापि भवन्ति मूर्खा:
यस्तु क्रियावान् पुरूष: स विद्वान् ।
शास्त्र पढ़ने के पश्चात् भी व्यक्ति मूर्ख रह सकता है
विद्वान वह है जो पढ़े हुए शास्त्र को आचरण में लाता है।
यस्तु क्रियावान् पुरूष: स विद्वान् ।
शास्त्र पढ़ने के पश्चात् भी व्यक्ति मूर्ख रह सकता है
विद्वान वह है जो पढ़े हुए शास्त्र को आचरण में लाता है।
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श्रवणायापि बहुभिर्यो न लभ्य: श्रृण्वन्तोऽपि बहवो यं न विद्यु: आश्चर्यो वक्ता कुशलोऽस्य लब्धाऽऽश्चर्यो ज्ञाता कुशलानुशिष्ट:
बहुतों को तो परमात्मा के विषय में सुनने को भी नहीं मिलता, बहुत कम लोग ही उसके विषय में सुन पाते हैं, उसके विषय में कहने वाला भी विरला है, उसको पाने वाला कोई कुशल ही है, कुशल गुरू के उपदेश से कोई विरला ही उसको जान सकता है ...
बहुतों को तो परमात्मा के विषय में सुनने को भी नहीं मिलता, बहुत कम लोग ही उसके विषय में सुन पाते हैं, उसके विषय में कहने वाला भी विरला है, उसको पाने वाला कोई कुशल ही है, कुशल गुरू के उपदेश से कोई विरला ही उसको जान सकता है ...
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प्राचीन वैदिक सैद्धांतिक ज्ञान 🚩
प्र. २८२. यज्ञ में गाय के घी का ही प्रयोग क्यों होता है ? भैंस, बकरी, ऊंटनी का या वनस्पति घी या तेल का प्रयोग क्यों नहीं होता ? उत्तर : क्योंकि गाय के घी को जलाने से विशेष गैसें बनती हैं जो आकाश में स्थित प्रदूषण को शीघ्र ही अधिक मात्रा में नष्ट कर देती हैं।…
प्र. २८३. यज्ञ सूर्योदय के पश्चात् तथा सायं सूर्यास्त से पूर्व ही क्यों करते हैं रात्रि में यज्ञ क्यों नहीं करना चाहिये ?
उत्तर : सूर्य की किरणें, यज्ञ द्वारा उत्पन्न विशेष रोग विनाशक गैसों को ऊपर आकाश में ले जाकर फैला देती हैं, यह कार्य रात में नहीं हो सकता है ।
@vaidic_gyan
उत्तर : सूर्य की किरणें, यज्ञ द्वारा उत्पन्न विशेष रोग विनाशक गैसों को ऊपर आकाश में ले जाकर फैला देती हैं, यह कार्य रात में नहीं हो सकता है ।
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प्राचीन वैदिक सैद्धांतिक ज्ञान 🚩
प्र. २८३. यज्ञ सूर्योदय के पश्चात् तथा सायं सूर्यास्त से पूर्व ही क्यों करते हैं रात्रि में यज्ञ क्यों नहीं करना चाहिये ? उत्तर : सूर्य की किरणें, यज्ञ द्वारा उत्पन्न विशेष रोग विनाशक गैसों को ऊपर आकाश में ले जाकर फैला देती हैं, यह कार्य रात में नहीं हो सकता…
प्र. २८४. यज्ञ करने से पूर्व आचमन व अंग स्पर्श (जल से) क्यों करते हैं ?
उत्तर : जल का आचमन करने से शरीर में पवित्रता होती है तथा पवित्र विचार भी उत्पन्न होते हैं ।
@vaidic_gyan
उत्तर : जल का आचमन करने से शरीर में पवित्रता होती है तथा पवित्र विचार भी उत्पन्न होते हैं ।
@vaidic_gyan
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प्र. २८४. यज्ञ करने से पूर्व आचमन व अंग स्पर्श (जल से) क्यों करते हैं ? उत्तर : जल का आचमन करने से शरीर में पवित्रता होती है तथा पवित्र विचार भी उत्पन्न होते हैं । @vaidic_gyan
प्र. २८५. यज्ञ एक भौतिक क्रिया है तो इसमें मंत्रों का उच्चारण क्यों किया जाता है ?
उत्तर : मंत्रों के बोलने से यज्ञ के लाभों, परिणामों, प्रभावों का पता चलता है तथा मंत्रों पर विचार करने से आत्मा में शुद्धता आती है ।
@vaidic_gyan
उत्तर : मंत्रों के बोलने से यज्ञ के लाभों, परिणामों, प्रभावों का पता चलता है तथा मंत्रों पर विचार करने से आत्मा में शुद्धता आती है ।
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प्र. २८५. यज्ञ एक भौतिक क्रिया है तो इसमें मंत्रों का उच्चारण क्यों किया जाता है ? उत्तर : मंत्रों के बोलने से यज्ञ के लाभों, परिणामों, प्रभावों का पता चलता है तथा मंत्रों पर विचार करने से आत्मा में शुद्धता आती है । @vaidic_gyan
प्र. २८६. क्या यज्ञ करने से जो धुंआ उत्पन्न होता है उससे वायु प्रदूषण नहीं होता हैं ?
उत्तर : यज्ञ से थोड़ा सा प्रदूषण हो सकता है किन्तु यज्ञ द्वारा निर्मित विशेष वायु अनेक प्रकार के रोगों के कीटाणुओं का नाश करती है ।
@vaidic_gyan
उत्तर : यज्ञ से थोड़ा सा प्रदूषण हो सकता है किन्तु यज्ञ द्वारा निर्मित विशेष वायु अनेक प्रकार के रोगों के कीटाणुओं का नाश करती है ।
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प्र. २८६. क्या यज्ञ करने से जो धुंआ उत्पन्न होता है उससे वायु प्रदूषण नहीं होता हैं ? उत्तर : यज्ञ से थोड़ा सा प्रदूषण हो सकता है किन्तु यज्ञ द्वारा निर्मित विशेष वायु अनेक प्रकार के रोगों के कीटाणुओं का नाश करती है । @vaidic_gyan
प्र. २८७. यज्ञ में घी के साथ सामग्री (जड़ी बूटियों) की भी आहुति क्यों दी जाती है ?
उत्तर : सामग्री जलाने से अलग लाभ होते हैं तथा घी जलाने से अलग लाभ होते हैं।
@vaidic_gyan
उत्तर : सामग्री जलाने से अलग लाभ होते हैं तथा घी जलाने से अलग लाभ होते हैं।
@vaidic_gyan
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प्र. २८७. यज्ञ में घी के साथ सामग्री (जड़ी बूटियों) की भी आहुति क्यों दी जाती है ? उत्तर : सामग्री जलाने से अलग लाभ होते हैं तथा घी जलाने से अलग लाभ होते हैं। @vaidic_gyan
प्र. २८८. यज्ञ की सामग्री में क्या क्या पदार्थ होते हैं ?
उत्तर : यज्ञ की सामग्री में मुख्य रूप से सुगन्धित, रोगनाशक, पुष्टिकारक तथा मधुर पदार्थ होते हैं।
@vaidic_gyan
उत्तर : यज्ञ की सामग्री में मुख्य रूप से सुगन्धित, रोगनाशक, पुष्टिकारक तथा मधुर पदार्थ होते हैं।
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प्र. २८८. यज्ञ की सामग्री में क्या क्या पदार्थ होते हैं ? उत्तर : यज्ञ की सामग्री में मुख्य रूप से सुगन्धित, रोगनाशक, पुष्टिकारक तथा मधुर पदार्थ होते हैं। @vaidic_gyan
प्र. २८९. 'स्वाहा' शब्द का अर्थ क्या है ?
उत्तर : स्वाहा शब्द के निम्न अर्थ होते हैं -
(१) सत्य बोलना
(२) मधुर बोलना
(३) अपनी वस्तु को अपनी कहना
(४) जैसा मन में हो वैसा ही वाणी से बोलना, तथा कर्म करना।
(५) परिवार समाज राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व आहुत करने की योग्यता बनाना तथा
(६) घी, सामग्री को अग्नि में डालना।
@vaidic_gyan
उत्तर : स्वाहा शब्द के निम्न अर्थ होते हैं -
(१) सत्य बोलना
(२) मधुर बोलना
(३) अपनी वस्तु को अपनी कहना
(४) जैसा मन में हो वैसा ही वाणी से बोलना, तथा कर्म करना।
(५) परिवार समाज राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व आहुत करने की योग्यता बनाना तथा
(६) घी, सामग्री को अग्नि में डालना।
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प्र. २८९. 'स्वाहा' शब्द का अर्थ क्या है ? उत्तर : स्वाहा शब्द के निम्न अर्थ होते हैं - (१) सत्य बोलना (२) मधुर बोलना (३) अपनी वस्तु को अपनी कहना (४) जैसा मन में हो वैसा ही वाणी से बोलना, तथा कर्म करना। (५) परिवार समाज राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व आहुत…
प्र. २९०. तीन समिधाओं को विशेष रूप से घी में डुबोकर क्यों आहुति दी जाती है ।
उत्तर : समिधाओं को घी में डूबोकर जलाने से वे शीघ्र जलती हैं।
@vaidic_gyan
उत्तर : समिधाओं को घी में डूबोकर जलाने से वे शीघ्र जलती हैं।
@vaidic_gyan
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