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प्र. ३३१. समाज में संन्यासियों की क्या आवश्यकता है ? क्या वे समाज पर भार रूप नहीं हैं ? उत्तर : जैसे शरीर में सिर की आवश्यकता होती है वैसे ही समाज के सुसंचालन हेतु, धार्मिक, विद्वान्, तपस्वी, धन, मान और पुत्र/शिष्य की इच्छा का त्याग करने वाले संन्यासियों…
प्र. ३३२. गर्भस्थ शिशु के शारीरिक एवं मानसिक विकास हेतु कौन से संस्कार किये जाते है ?
उत्तर: अजन्मे बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए पुंसवन और सीमंतोन्नयन अनुष्ठान किए जाते हैं।
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चुनौती— वेद विज्ञान ही है । Acharya Agnivrat । Vaidic Physics
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प्र. ३३२. गर्भस्थ शिशु के शारीरिक एवं मानसिक विकास हेतु कौन से संस्कार किये जाते है ? उत्तर: अजन्मे बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए पुंसवन और सीमंतोन्नयन अनुष्ठान किए जाते हैं। @vaidic_gyan
प्र. ३३३. विभिन्न संस्कारों में किये जाने वाले विविध कर्मकाण्डों से क्या तात्पर्य = अर्थ होता है ?
उत्तर : विभिन्न संस्कारों में किये जाने वाले विविध कर्मकाण्डों में संकेत अथवा प्रतीक छिपे होते हैं। आगे जीवन में कैसे चलना होता है उसका बोध मिलता है। कुछ व्रत, प्रतिज्ञाओं का भी धारण होता है। इन कर्मकाण्डों से सदाचार, शिष्टाचार सिखाया जाता है।
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उत्तर : विभिन्न संस्कारों में किये जाने वाले विविध कर्मकाण्डों में संकेत अथवा प्रतीक छिपे होते हैं। आगे जीवन में कैसे चलना होता है उसका बोध मिलता है। कुछ व्रत, प्रतिज्ञाओं का भी धारण होता है। इन कर्मकाण्डों से सदाचार, शिष्टाचार सिखाया जाता है।
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प्र. ३३३. विभिन्न संस्कारों में किये जाने वाले विविध कर्मकाण्डों से क्या तात्पर्य = अर्थ होता है ? उत्तर : विभिन्न संस्कारों में किये जाने वाले विविध कर्मकाण्डों में संकेत अथवा प्रतीक छिपे होते हैं। आगे जीवन में कैसे चलना होता है उसका बोध मिलता है। कुछ व्रत…
प्र. ३३४. संसार में मृतक देह की अंतिम विधि के लिए कौन कौन सी पद्धतियाँ प्रचलित हैं ?
उत्तर : संसार में मृतक देह की अंतिम विधि के लिए, मुर्दे को गाड़ना, नदीं में बहाना, जंगल, पर्वत आदि स्थानों में खुला छोड़ देना तथा जलाना आदि पद्धतियाँ प्रचलित हैं ।
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उत्तर : संसार में मृतक देह की अंतिम विधि के लिए, मुर्दे को गाड़ना, नदीं में बहाना, जंगल, पर्वत आदि स्थानों में खुला छोड़ देना तथा जलाना आदि पद्धतियाँ प्रचलित हैं ।
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प्र. ३३४. संसार में मृतक देह की अंतिम विधि के लिए कौन कौन सी पद्धतियाँ प्रचलित हैं ? उत्तर : संसार में मृतक देह की अंतिम विधि के लिए, मुर्दे को गाड़ना, नदीं में बहाना, जंगल, पर्वत आदि स्थानों में खुला छोड़ देना तथा जलाना आदि पद्धतियाँ प्रचलित हैं । @vaidic_gyan
प्र. ३३५. इनमें से सर्वश्रेष्ठ विधि कौन सी है और क्यों ?
उत्तर : इनमें सर्वश्रेष्ठ मुर्दे को जलाना है। क्योंकि इससे जमीन, पानी, हवा आदि = पर्यावरण की बहुत ही कम हानि होती है थोड़ी सी भूमि में लाखों, करोड़ों मृतदेहों के अन्तिम संस्कार किये जा सकते हैं ।
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उत्तर : इनमें सर्वश्रेष्ठ मुर्दे को जलाना है। क्योंकि इससे जमीन, पानी, हवा आदि = पर्यावरण की बहुत ही कम हानि होती है थोड़ी सी भूमि में लाखों, करोड़ों मृतदेहों के अन्तिम संस्कार किये जा सकते हैं ।
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प्र. ३३५. इनमें से सर्वश्रेष्ठ विधि कौन सी है और क्यों ? उत्तर : इनमें सर्वश्रेष्ठ मुर्दे को जलाना है। क्योंकि इससे जमीन, पानी, हवा आदि = पर्यावरण की बहुत ही कम हानि होती है थोड़ी सी भूमि में लाखों, करोड़ों मृतदेहों के अन्तिम संस्कार किये जा सकते हैं । @vaidic_gyan
प्र. ३३६. क्या स्वर्ग-नरक किसी स्थान विशेष का नाम है ?
उत्तर : नहीं स्वर्ग या नरक कोई स्थान विशेष का नाम नहीं है।
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प्र. ३३६. क्या स्वर्ग-नरक किसी स्थान विशेष का नाम है ? उत्तर : नहीं स्वर्ग या नरक कोई स्थान विशेष का नाम नहीं है। @vaidic_gyan
प्र. ३३७. स्वर्ग का वास्तविक अर्थ क्या है ?
उत्तर : सुख विशेष की प्राप्ति को स्वर्ग कहते हैं ।
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प्र. ३३८. स्वर्गलोक में इन्द्र, रुद्र, वरुण आदि देवता रहते हैं, क्या यह मान्यता सही है ?
उत्तर : नहीं, यह मान्यता सही नहीं है।
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प्र. ३३८. स्वर्गलोक में इन्द्र, रुद्र, वरुण आदि देवता रहते हैं, क्या यह मान्यता सही है ? उत्तर : नहीं, यह मान्यता सही नहीं है। @vaidic_gyan
प्र. ३३९. वास्तव में देवता किसे कहते हैं ?
उत्तर: माता, पिता, शिक्षक, विद्वान, अतिथि आदि तथा दाता, उपकारक, धर्मात्मा लोग देवता कहलाते हैं।
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प्र. ३४०. नरक किसे कहते हैं ? उत्तर : दुःख विशेष की प्राप्ति को नरक कहते हैं। @vaidic_gyan
प्र. ३४१. नरक प्राप्ति का अर्थ क्या है ?
उत्तर : जीवन में अभाव कष्ट, दुःख, पीडा और मरणोपरांत कीट, पतंग, सूअर, कुत्ता, बिल्ली आदि दुःखमय योनि में जन्म लेना तथा घोर दुःख कष्ट पाना नर्क प्राप्ति कहलाती है।
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उत्तर : जीवन में अभाव कष्ट, दुःख, पीडा और मरणोपरांत कीट, पतंग, सूअर, कुत्ता, बिल्ली आदि दुःखमय योनि में जन्म लेना तथा घोर दुःख कष्ट पाना नर्क प्राप्ति कहलाती है।
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प्र. ३४१. नरक प्राप्ति का अर्थ क्या है ? उत्तर : जीवन में अभाव कष्ट, दुःख, पीडा और मरणोपरांत कीट, पतंग, सूअर, कुत्ता, बिल्ली आदि दुःखमय योनि में जन्म लेना तथा घोर दुःख कष्ट पाना नर्क प्राप्ति कहलाती है। @vaidic_gyan
प्र. ३४२. क्या कुत्ते, बिल्ली, सुअर और मनुष्य को समान सुख दुःख है, "वह अपने शरीर में सुखी, हम अपने शरीर में" क्या यह मान्यता ठीक है ?
उत्तर : कुत्ते, बिल्ली, सूअर और मनुष्य को समान सुख-दुःख नहीं है अपितु पशुओं को दुःख अधिक होता है। "वह अपने शरीर में सुखी, हम अपने शरीर में" यह मान्यता ठीक नहीं है। मनुष्यों को उत्कृष्ट बुद्धि, हाथ, वाणी ये विशेष उपलब्ध है जिससे वे अधिकाधिक सुख प्राप्त कर सकते हैं। जबकि पशु आदि को विशेष साधन न होने से व इनकी स्वतंत्रता की सीमा होने से इन्हें दुःख अधिक होता है।
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उत्तर : कुत्ते, बिल्ली, सूअर और मनुष्य को समान सुख-दुःख नहीं है अपितु पशुओं को दुःख अधिक होता है। "वह अपने शरीर में सुखी, हम अपने शरीर में" यह मान्यता ठीक नहीं है। मनुष्यों को उत्कृष्ट बुद्धि, हाथ, वाणी ये विशेष उपलब्ध है जिससे वे अधिकाधिक सुख प्राप्त कर सकते हैं। जबकि पशु आदि को विशेष साधन न होने से व इनकी स्वतंत्रता की सीमा होने से इन्हें दुःख अधिक होता है।
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प्र. ३४२. क्या कुत्ते, बिल्ली, सुअर और मनुष्य को समान सुख दुःख है, "वह अपने शरीर में सुखी, हम अपने शरीर में" क्या यह मान्यता ठीक है ? उत्तर : कुत्ते, बिल्ली, सूअर और मनुष्य को समान सुख-दुःख नहीं है अपितु पशुओं को दुःख अधिक होता है। "वह अपने शरीर में सुखी…
प्र. ३४३. स्वर्ग प्राप्ति किसे कहते हैं ?
उत्तर : धन, ऐश्वर्य से सम्पन्न विद्वान माता-पिता के यहां जन्म लेना तथा विशेष सुख, शांति, आनन्द उत्साह, निर्भयता आदि को प्राप्त करना स्वर्गप्राप्ति कहलाती है।
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उत्तर : धन, ऐश्वर्य से सम्पन्न विद्वान माता-पिता के यहां जन्म लेना तथा विशेष सुख, शांति, आनन्द उत्साह, निर्भयता आदि को प्राप्त करना स्वर्गप्राप्ति कहलाती है।
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