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प्र. २११. ईश्वर के मुख्य कार्य कौन कौन से हैं ? उत्तर : ईश्वर के मुख्य रुप से ५ कार्य हैं : (१) सृष्टि को बनाना, (२) पालन करना, (३) संहार करना, (४) जीवों के कर्मों का फल देना, (५) वेदों का ज्ञान देना । @vaidic_gyan
प्र. २१२. प्रलय में ईश्वर कुछ करता है या सो जाता है ?
उत्तर : प्रलय समय में ईश्वर मुक्तात्माओं को आनन्द भुगाता है।
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प्र. २१२. प्रलय में ईश्वर कुछ करता है या सो जाता है ? उत्तर : प्रलय समय में ईश्वर मुक्तात्माओं को आनन्द भुगाता है। @vaidic_gyan
प्र. २१३. ईश्वर का ज्ञान सदा एक सा रहता है या घटता बढ़ता है ?
उत्तर : ईश्वर का ज्ञान सदा एकरस रहता है अर्थात् घटता बढ़ता नहीं है तथा वह असत्य भी नहीं होता ।
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प्र. २१३. ईश्वर का ज्ञान सदा एक सा रहता है या घटता बढ़ता है ? उत्तर : ईश्वर का ज्ञान सदा एकरस रहता है अर्थात् घटता बढ़ता नहीं है तथा वह असत्य भी नहीं होता । @vaidic_gyan
प्र. २१४. संसार को किसने धारण किया हुआ है ?
उत्तर : ईश्वर ने अपने सामर्थ्य से सब लोक-लोकान्तरों को (संसार को) धारण कर रखा है।
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उत्तर : ईश्वर ने अपने सामर्थ्य से सब लोक-लोकान्तरों को (संसार को) धारण कर रखा है।
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प्र. २१४. संसार को किसने धारण किया हुआ है ? उत्तर : ईश्वर ने अपने सामर्थ्य से सब लोक-लोकान्तरों को (संसार को) धारण कर रखा है। @vaidic_gyan
प्र. २१५. ईश्वर के सुख व सांसारिक पदार्थों के सुख में कोई अन्तर है या नहीं ?
उत्तर : ईश्वर के सुख व सांसारिक पदार्थों के सुख में अन्तर है। ईश्वर का आनन्द स्थायी व पूर्ण तृप्ति देने वाला है जबकि सांसारिक पदार्थों का सुख क्षणिक व दुःखमिश्रित है ।
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उत्तर : ईश्वर के सुख व सांसारिक पदार्थों के सुख में अन्तर है। ईश्वर का आनन्द स्थायी व पूर्ण तृप्ति देने वाला है जबकि सांसारिक पदार्थों का सुख क्षणिक व दुःखमिश्रित है ।
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प्र. २१५. ईश्वर के सुख व सांसारिक पदार्थों के सुख में कोई अन्तर है या नहीं ? उत्तर : ईश्वर के सुख व सांसारिक पदार्थों के सुख में अन्तर है। ईश्वर का आनन्द स्थायी व पूर्ण तृप्ति देने वाला है जबकि सांसारिक पदार्थों का सुख क्षणिक व दुःखमिश्रित है । @vaidic_gyan
प्र. २१६. ईश्वर व जीवों के बीच कोई दूरी है या नहीं ?
उत्तर : काल व स्थान की दृष्टि से जीव, ईश्वर से दूर नहीं हैं। ईश्वर हर समय, हर स्थान पर उनके साथ रहता है। परन्तु ज्ञान की दृष्टि से जीव ईश्वर से दूर हो जाते हैं। जो ईश्वर को नहीं जानते, मानते, व उसकी भक्ति नहीं करते वे जीव, ईश्वर से दूर हैं ।
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उत्तर : काल व स्थान की दृष्टि से जीव, ईश्वर से दूर नहीं हैं। ईश्वर हर समय, हर स्थान पर उनके साथ रहता है। परन्तु ज्ञान की दृष्टि से जीव ईश्वर से दूर हो जाते हैं। जो ईश्वर को नहीं जानते, मानते, व उसकी भक्ति नहीं करते वे जीव, ईश्वर से दूर हैं ।
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प्र. २१६. ईश्वर व जीवों के बीच कोई दूरी है या नहीं ? उत्तर : काल व स्थान की दृष्टि से जीव, ईश्वर से दूर नहीं हैं। ईश्वर हर समय, हर स्थान पर उनके साथ रहता है। परन्तु ज्ञान की दृष्टि से जीव ईश्वर से दूर हो जाते हैं। जो ईश्वर को नहीं जानते, मानते, व उसकी भक्ति…
प्र. २१७. ईश्वर की क्या विशेषता है ?
उत्तर : ईश्वर सदा अपने आनन्द में मग्न रहता है। ईश्वर में कोई न्यूनता, कोई दोष नहीं है। उसे किसी भौतिक पदार्थ की आवश्यकता नहीं होती ।
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उत्तर : ईश्वर सदा अपने आनन्द में मग्न रहता है। ईश्वर में कोई न्यूनता, कोई दोष नहीं है। उसे किसी भौतिक पदार्थ की आवश्यकता नहीं होती ।
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प्र. २१७. ईश्वर की क्या विशेषता है ? उत्तर : ईश्वर सदा अपने आनन्द में मग्न रहता है। ईश्वर में कोई न्यूनता, कोई दोष नहीं है। उसे किसी भौतिक पदार्थ की आवश्यकता नहीं होती । @vaidic_gyan
प्र. २१८. ईश्वर किस किस का स्वामी है ?
उत्तर : ईश्वर प्रकृति, जीवों, संसार व मोक्ष का स्वामी है ।
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उत्तर : ईश्वर प्रकृति, जीवों, संसार व मोक्ष का स्वामी है ।
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प्र. २१८. ईश्वर किस किस का स्वामी है ? उत्तर : ईश्वर प्रकृति, जीवों, संसार व मोक्ष का स्वामी है । @vaidic_gyan
प्र. २१९. क्या जीव अपने कर्मों का फल पूर्ण रूप से स्वयं ले सकते हैं ?
उत्तर : नहीं, कर्मों का फल ईश्वर के अधीन है। वह अपनी व्यवस्था से कर्मफल देता है।
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उत्तर : नहीं, कर्मों का फल ईश्वर के अधीन है। वह अपनी व्यवस्था से कर्मफल देता है।
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प्र. २१९. क्या जीव अपने कर्मों का फल पूर्ण रूप से स्वयं ले सकते हैं ? उत्तर : नहीं, कर्मों का फल ईश्वर के अधीन है। वह अपनी व्यवस्था से कर्मफल देता है। @vaidic_gyan
प्र. २२०. क्या भक्त अपने सामर्थ्य से ईश्वर का दर्शन (अनुभूति) कर सकता है ?
उत्तर : नहीं, जब तक ईश्वर से विशेष ज्ञान विज्ञान न मिले व ईश्वर की कृपा न हो तब तक भक्त उसका दर्शन (अनुभूति) नहीं कर सकता ।
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उत्तर : नहीं, जब तक ईश्वर से विशेष ज्ञान विज्ञान न मिले व ईश्वर की कृपा न हो तब तक भक्त उसका दर्शन (अनुभूति) नहीं कर सकता ।
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