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प्र. २२४. क्या ईश्वर विरक्त है ? उत्तर : नहीं, जो प्राप्त हुए पदार्थ को छोड़ दे उसे विरक्त कहते हैं ईश्वर सर्वव्यापक होने से किसी पदार्थ को नहीं छोड़ता इस दृष्टि से वह विरक्त नहीं हैं। @vaidic_gyan
प्र. २२५. क्या ईश्वर जीवों में या सांसारिक पदार्थों में राग रखता है ?
उत्तर : नहीं, राग अपने से भिन्न उत्तम पदार्थ में होता है। ईश्वर से कोई भी जीव या सांसारिक पदार्थ उत्तम नहीं हैं। अतः ईश्वर किसी से भी राग नहीं रखता है।
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उत्तर : नहीं, राग अपने से भिन्न उत्तम पदार्थ में होता है। ईश्वर से कोई भी जीव या सांसारिक पदार्थ उत्तम नहीं हैं। अतः ईश्वर किसी से भी राग नहीं रखता है।
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प्र. २२५. क्या ईश्वर जीवों में या सांसारिक पदार्थों में राग रखता है ? उत्तर : नहीं, राग अपने से भिन्न उत्तम पदार्थ में होता है। ईश्वर से कोई भी जीव या सांसारिक पदार्थ उत्तम नहीं हैं। अतः ईश्वर किसी से भी राग नहीं रखता है। @vaidic_gyan
प्र. २२६. क्या ईश्वर इस संसार के बाहर भी है ?
उत्तर : हाँ, है। अपितु ईश्वर इतना महान् है कि यह सारी सृष्टि तो उसके सामने परमाणु के तुल्य भी नहीं है।
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उत्तर : हाँ, है। अपितु ईश्वर इतना महान् है कि यह सारी सृष्टि तो उसके सामने परमाणु के तुल्य भी नहीं है।
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प्र. २२६. क्या ईश्वर इस संसार के बाहर भी है ? उत्तर : हाँ, है। अपितु ईश्वर इतना महान् है कि यह सारी सृष्टि तो उसके सामने परमाणु के तुल्य भी नहीं है। @vaidic_gyan
प्र. २२७. क्या ईश्वर हमें प्रतिदिन शिक्षा देता है ?
उत्तर : जी, हाँ। जीव जब बुरे या अच्छे काम करने की इच्छा करता है तो अन्दर से भय, लज्जा, शंका या आनन्द, उत्साह, निर्भयता प्राप्त होते हैं। यह अन्तर्यामी ईश्वर की शिक्षा है जिससे जीव बुरे व अच्छे कर्मों को जान सकता है ।
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उत्तर : जी, हाँ। जीव जब बुरे या अच्छे काम करने की इच्छा करता है तो अन्दर से भय, लज्जा, शंका या आनन्द, उत्साह, निर्भयता प्राप्त होते हैं। यह अन्तर्यामी ईश्वर की शिक्षा है जिससे जीव बुरे व अच्छे कर्मों को जान सकता है ।
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प्र. २२७. क्या ईश्वर हमें प्रतिदिन शिक्षा देता है ? उत्तर : जी, हाँ। जीव जब बुरे या अच्छे काम करने की इच्छा करता है तो अन्दर से भय, लज्जा, शंका या आनन्द, उत्साह, निर्भयता प्राप्त होते हैं। यह अन्तर्यामी ईश्वर की शिक्षा है जिससे जीव बुरे व अच्छे कर्मों को…
प्र. २२८. क्या संसार में कभी ईश्वर का अभाव होता है ?
उत्तर : नहीं, संसार का तो प्रलय में अभाव हो जाता है परन्तु उस समय भी ईश्वर व जीव व प्रकृति रहते हैं उनका तीनों कालों में अस्तित्व रहता है।
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उत्तर : नहीं, संसार का तो प्रलय में अभाव हो जाता है परन्तु उस समय भी ईश्वर व जीव व प्रकृति रहते हैं उनका तीनों कालों में अस्तित्व रहता है।
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प्र. २२८. क्या संसार में कभी ईश्वर का अभाव होता है ? उत्तर : नहीं, संसार का तो प्रलय में अभाव हो जाता है परन्तु उस समय भी ईश्वर व जीव व प्रकृति रहते हैं उनका तीनों कालों में अस्तित्व रहता है। @vaidic_gyan
प्र. २२९. मनुष्य संसार की हानि करते हैं तो क्या ऐसे में ईश्वर उन्हें देखकर दुःखी होते है ?
उत्तर : नहीं । परन्तु जो पापी हैं उन्हें अच्छा नहीं मानते व उन्हें भय, शंका, लज्जा आदि के रूप में दण्ड देते हैं और जो पुण्यात्मा हैं उन्हें अच्छा मानते हैं व उन्हें उत्साह, प्रेरणा देते है।
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उत्तर : नहीं । परन्तु जो पापी हैं उन्हें अच्छा नहीं मानते व उन्हें भय, शंका, लज्जा आदि के रूप में दण्ड देते हैं और जो पुण्यात्मा हैं उन्हें अच्छा मानते हैं व उन्हें उत्साह, प्रेरणा देते है।
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प्र. २२९. मनुष्य संसार की हानि करते हैं तो क्या ऐसे में ईश्वर उन्हें देखकर दुःखी होते है ? उत्तर : नहीं । परन्तु जो पापी हैं उन्हें अच्छा नहीं मानते व उन्हें भय, शंका, लज्जा आदि के रूप में दण्ड देते हैं और जो पुण्यात्मा हैं उन्हें अच्छा मानते हैं व उन्हें…
प्र. २३०. ईश्वर का दर्शन कौन करते हैं ?
उत्तर : वेद आदि शास्त्रों के विद्वान, धर्मात्मा व योगी मनुष्य ही ईश्वर का साक्षात्कार कर सकते हैं ।
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प्र. २३०. ईश्वर का दर्शन कौन करते हैं ? उत्तर : वेद आदि शास्त्रों के विद्वान, धर्मात्मा व योगी मनुष्य ही ईश्वर का साक्षात्कार कर सकते हैं । @vaidic_gyan
प्र. २३१. क्या ईश्वर शरीर धारण करता या रोगी, बूढ़ा होता है ?
उत्तर : नहीं, ईश्वर कभी शरीर धारण नहीं करता है। न तो रोगी या बूढ़ा होता है वह तो बिना शरीर के ही अपने सब कार्य अपने सामर्थ्य से कर सकता है ।
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प्र. २३१. क्या ईश्वर शरीर धारण करता या रोगी, बूढ़ा होता है ? उत्तर : नहीं, ईश्वर कभी शरीर धारण नहीं करता है। न तो रोगी या बूढ़ा होता है वह तो बिना शरीर के ही अपने सब कार्य अपने सामर्थ्य से कर सकता है । @vaidic_gyan
प्र. २३२. भगवान राम, कृष्ण, शिव आदि ईश्वर की भक्ति करते थे या नहीं ?
उत्तर : हाँ, भगवान राम, कृष्ण, शिव आदि भी ईश्वर की भक्ति करते थे ।
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उत्तर : हाँ, भगवान राम, कृष्ण, शिव आदि भी ईश्वर की भक्ति करते थे ।
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