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प्र. ३२६. क्या किसी पण्डित, ब्राह्मण को धन देकर अपने लाभ के लिये यज्ञ कराया जा सकता है ? उत्तर : हाँ, धन देकर यज्ञ कराया जा सकता है। जितने धन से घृत-सामग्री आदि का यज्ञ होगा उसका तो पुण्य मिलेगा किन्तु करने का पुण्य लाभ कर्त्ता (पण्डित, ब्राह्मण) को मिलेगा…
प्र. ३२७. यज्ञ एक समय करना चाहिये या दो समय ?
उत्तर : सामर्थ्य, साधन, समय, श्रद्धा रूचि हो तो दो समय (प्रातः व सांय) करना चाहिए ।
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प्र. ३२७. यज्ञ एक समय करना चाहिये या दो समय ? उत्तर : सामर्थ्य, साधन, समय, श्रद्धा रूचि हो तो दो समय (प्रातः व सांय) करना चाहिए । @vaidic_gyan
प्र. ३२८. पंचमहायज्ञ किसे कहते हैं ?
उत्तर: प्रत्येक घर के लिए आवश्यक पाँच कृत्यों को पंचमहायज्ञ कहा जाता है। जैसे (1) ब्रह्मयज्ञ (2) देव यज्ञ (3) पितृ यज्ञ (4) बलिवैश्वदेव यज्ञ (5) अतिथि यज्ञ।
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उत्तर: प्रत्येक घर के लिए आवश्यक पाँच कृत्यों को पंचमहायज्ञ कहा जाता है। जैसे (1) ब्रह्मयज्ञ (2) देव यज्ञ (3) पितृ यज्ञ (4) बलिवैश्वदेव यज्ञ (5) अतिथि यज्ञ।
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प्र. ३२८. पंचमहायज्ञ किसे कहते हैं ? उत्तर: प्रत्येक घर के लिए आवश्यक पाँच कृत्यों को पंचमहायज्ञ कहा जाता है। जैसे (1) ब्रह्मयज्ञ (2) देव यज्ञ (3) पितृ यज्ञ (4) बलिवैश्वदेव यज्ञ (5) अतिथि यज्ञ। @vaidic_gyan
प्र. ३२९. परिभाषा सहित पाँच महायज्ञों का वर्णन करो ?
उत्तर :
(1) ब्रह्मयज्ञ
= नित्य प्रातः, सायं ईश्वर का ध्यान करना वेदों का स्वाध्याय करना ।
(2) देव-यज्ञ
= अग्निहोत्र (हवन करना) ।
(3) पितृ यज्ञ
= माता-पिता, सास-ससुर आदि की सेवा सुश्रुषा करना ।
(4) बलिवैश्वदेव यज्ञ
पशुओं, पक्षियों, अनाथों, विकलांगों, बीमारों और अन्य जीवित प्राणियों को भोजन अन्न आदि प्रदान करना।
(५) अतिथियज्ञ
= घर में पधारे संन्यासी, विद्वान, उपदेशक आदि की सेवा-सत्कार करना उनसे उपदेश ग्रहण करना ।
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उत्तर :
(1) ब्रह्मयज्ञ
= नित्य प्रातः, सायं ईश्वर का ध्यान करना वेदों का स्वाध्याय करना ।
(2) देव-यज्ञ
= अग्निहोत्र (हवन करना) ।
(3) पितृ यज्ञ
= माता-पिता, सास-ससुर आदि की सेवा सुश्रुषा करना ।
(4) बलिवैश्वदेव यज्ञ
पशुओं, पक्षियों, अनाथों, विकलांगों, बीमारों और अन्य जीवित प्राणियों को भोजन अन्न आदि प्रदान करना।
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प्र. ३२९. परिभाषा सहित पाँच महायज्ञों का वर्णन करो ? उत्तर : (1) ब्रह्मयज्ञ = नित्य प्रातः, सायं ईश्वर का ध्यान करना वेदों का स्वाध्याय करना । (2) देव-यज्ञ = अग्निहोत्र (हवन करना) । (3) पितृ यज्ञ = माता-पिता, सास-ससुर आदि की सेवा सुश्रुषा करना । (4)…
प्र. ३३०. संस्कार किसे कहते हैं ? व कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर : जिससे शरीर, मन और आत्मा उत्तम बनते हैं उसको संस्कार कहते है ।
संस्कार १६ प्रकार के होते हैं -
(१) गर्भाधान
(२) पुंसवन
(3) सीमंतोन्नयन
(4) जातकर्म
(५) नामकरण
(६) अन्नप्राशन
(7) निष्क्रमणम
(८) चूड़ाकर्म
(९) कर्णवेध
(१०) उपनयन
(११) वेदारंभ
(१२) समावर्तन
(13) विवाह
(१४) वानप्रस्थ
(१५) संन्यास
(16) अंत्येष्टि
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उत्तर : जिससे शरीर, मन और आत्मा उत्तम बनते हैं उसको संस्कार कहते है ।
संस्कार १६ प्रकार के होते हैं -
(१) गर्भाधान
(२) पुंसवन
(3) सीमंतोन्नयन
(4) जातकर्म
(५) नामकरण
(६) अन्नप्राशन
(7) निष्क्रमणम
(८) चूड़ाकर्म
(९) कर्णवेध
(१०) उपनयन
(११) वेदारंभ
(१२) समावर्तन
(13) विवाह
(१४) वानप्रस्थ
(१५) संन्यास
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प्र. ३३०. संस्कार किसे कहते हैं ? व कितने प्रकार के होते हैं ? उत्तर : जिससे शरीर, मन और आत्मा उत्तम बनते हैं उसको संस्कार कहते है । संस्कार १६ प्रकार के होते हैं - (१) गर्भाधान (२) पुंसवन (3) सीमंतोन्नयन (4) जातकर्म (५) नामकरण (६) अन्नप्राशन (7)…
प्र. ३३१. समाज में संन्यासियों की क्या आवश्यकता है ? क्या वे समाज पर भार रूप नहीं हैं ?
उत्तर : जैसे शरीर में सिर की आवश्यकता होती है वैसे ही समाज के सुसंचालन हेतु, धार्मिक, विद्वान्, तपस्वी, धन, मान और पुत्र/शिष्य की इच्छा का त्याग करने वाले संन्यासियों की आवश्यकता है।
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उत्तर : जैसे शरीर में सिर की आवश्यकता होती है वैसे ही समाज के सुसंचालन हेतु, धार्मिक, विद्वान्, तपस्वी, धन, मान और पुत्र/शिष्य की इच्छा का त्याग करने वाले संन्यासियों की आवश्यकता है।
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प्र. ३३१. समाज में संन्यासियों की क्या आवश्यकता है ? क्या वे समाज पर भार रूप नहीं हैं ? उत्तर : जैसे शरीर में सिर की आवश्यकता होती है वैसे ही समाज के सुसंचालन हेतु, धार्मिक, विद्वान्, तपस्वी, धन, मान और पुत्र/शिष्य की इच्छा का त्याग करने वाले संन्यासियों…
प्र. ३३२. गर्भस्थ शिशु के शारीरिक एवं मानसिक विकास हेतु कौन से संस्कार किये जाते है ?
उत्तर: अजन्मे बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए पुंसवन और सीमंतोन्नयन अनुष्ठान किए जाते हैं।
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उत्तर: अजन्मे बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए पुंसवन और सीमंतोन्नयन अनुष्ठान किए जाते हैं।
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चुनौती— वेद विज्ञान ही है । Acharya Agnivrat । Vaidic Physics
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प्र. ३३२. गर्भस्थ शिशु के शारीरिक एवं मानसिक विकास हेतु कौन से संस्कार किये जाते है ? उत्तर: अजन्मे बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए पुंसवन और सीमंतोन्नयन अनुष्ठान किए जाते हैं। @vaidic_gyan
प्र. ३३३. विभिन्न संस्कारों में किये जाने वाले विविध कर्मकाण्डों से क्या तात्पर्य = अर्थ होता है ?
उत्तर : विभिन्न संस्कारों में किये जाने वाले विविध कर्मकाण्डों में संकेत अथवा प्रतीक छिपे होते हैं। आगे जीवन में कैसे चलना होता है उसका बोध मिलता है। कुछ व्रत, प्रतिज्ञाओं का भी धारण होता है। इन कर्मकाण्डों से सदाचार, शिष्टाचार सिखाया जाता है।
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उत्तर : विभिन्न संस्कारों में किये जाने वाले विविध कर्मकाण्डों में संकेत अथवा प्रतीक छिपे होते हैं। आगे जीवन में कैसे चलना होता है उसका बोध मिलता है। कुछ व्रत, प्रतिज्ञाओं का भी धारण होता है। इन कर्मकाण्डों से सदाचार, शिष्टाचार सिखाया जाता है।
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प्र. ३३३. विभिन्न संस्कारों में किये जाने वाले विविध कर्मकाण्डों से क्या तात्पर्य = अर्थ होता है ? उत्तर : विभिन्न संस्कारों में किये जाने वाले विविध कर्मकाण्डों में संकेत अथवा प्रतीक छिपे होते हैं। आगे जीवन में कैसे चलना होता है उसका बोध मिलता है। कुछ व्रत…
प्र. ३३४. संसार में मृतक देह की अंतिम विधि के लिए कौन कौन सी पद्धतियाँ प्रचलित हैं ?
उत्तर : संसार में मृतक देह की अंतिम विधि के लिए, मुर्दे को गाड़ना, नदीं में बहाना, जंगल, पर्वत आदि स्थानों में खुला छोड़ देना तथा जलाना आदि पद्धतियाँ प्रचलित हैं ।
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उत्तर : संसार में मृतक देह की अंतिम विधि के लिए, मुर्दे को गाड़ना, नदीं में बहाना, जंगल, पर्वत आदि स्थानों में खुला छोड़ देना तथा जलाना आदि पद्धतियाँ प्रचलित हैं ।
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प्र. ३३४. संसार में मृतक देह की अंतिम विधि के लिए कौन कौन सी पद्धतियाँ प्रचलित हैं ? उत्तर : संसार में मृतक देह की अंतिम विधि के लिए, मुर्दे को गाड़ना, नदीं में बहाना, जंगल, पर्वत आदि स्थानों में खुला छोड़ देना तथा जलाना आदि पद्धतियाँ प्रचलित हैं । @vaidic_gyan
प्र. ३३५. इनमें से सर्वश्रेष्ठ विधि कौन सी है और क्यों ?
उत्तर : इनमें सर्वश्रेष्ठ मुर्दे को जलाना है। क्योंकि इससे जमीन, पानी, हवा आदि = पर्यावरण की बहुत ही कम हानि होती है थोड़ी सी भूमि में लाखों, करोड़ों मृतदेहों के अन्तिम संस्कार किये जा सकते हैं ।
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उत्तर : इनमें सर्वश्रेष्ठ मुर्दे को जलाना है। क्योंकि इससे जमीन, पानी, हवा आदि = पर्यावरण की बहुत ही कम हानि होती है थोड़ी सी भूमि में लाखों, करोड़ों मृतदेहों के अन्तिम संस्कार किये जा सकते हैं ।
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प्र. ३३५. इनमें से सर्वश्रेष्ठ विधि कौन सी है और क्यों ? उत्तर : इनमें सर्वश्रेष्ठ मुर्दे को जलाना है। क्योंकि इससे जमीन, पानी, हवा आदि = पर्यावरण की बहुत ही कम हानि होती है थोड़ी सी भूमि में लाखों, करोड़ों मृतदेहों के अन्तिम संस्कार किये जा सकते हैं । @vaidic_gyan
प्र. ३३६. क्या स्वर्ग-नरक किसी स्थान विशेष का नाम है ?
उत्तर : नहीं स्वर्ग या नरक कोई स्थान विशेष का नाम नहीं है।
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उत्तर : नहीं स्वर्ग या नरक कोई स्थान विशेष का नाम नहीं है।
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