मैनें समझनें में ज़रा देर कर दी....
औऱ वो खिलाड़ी.... खेल कर गया....
औऱ वो खिलाड़ी.... खेल कर गया....
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पीतल के बालियों में बेटी ब्याह दी गई
बाप मजदूर था,सोने की खान में...!!
बाप मजदूर था,सोने की खान में...!!
💗✍️
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मुझे Vo पसंद है...✨
~ अरे हां बाबा तुम ही 💗🫵
~ अरे हां बाबा तुम ही 💗🫵
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तस्वीर तेरी थी, पर नजर मेरी थी,
हर कोने में बस तेरी ही कमी थी।
खुद को कैसे देखता उस आईने में,
जहाँ हर परछाईं में सिर्फ तू ही तू थी…
@khalnayakji92
हर कोने में बस तेरी ही कमी थी।
खुद को कैसे देखता उस आईने में,
जहाँ हर परछाईं में सिर्फ तू ही तू थी…
@khalnayakji92
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मेहनत इस कदर करना है...🤏
कि एक दिन
माँ की दुआ और पापा की
मेहनत रंग ले आए...!!
कि एक दिन
माँ की दुआ और पापा की
मेहनत रंग ले आए...!!
✨💯🔥
мєєт...✍️
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खुशबू क्यों ना आये मेरी बातों से यारों..
मैंने बरसों से एक ही फूल से जो मोहब्बत की है..
मैंने बरसों से एक ही फूल से जो मोहब्बत की है..
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बस तुम्हेँ पाने की तमन्ना नहीं रही...
मोहब्बत तो आज भी तुमसे बेशुमार करते हैं....
मोहब्बत तो आज भी तुमसे बेशुमार करते हैं....
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दिल ने सोचा था उसे टूट कर चाहेंगे ...,
सच में चाहा भी बहुत... टूटे भी बहुत ...!!
सच में चाहा भी बहुत... टूटे भी बहुत ...!!
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✨🌷
उम्मीद रखते रखते, मेरी आदतें बदल गई
शक्श तो वही हूं, मगर मेरी शख्सियत बदल गई
इच्छाएं जो थी सारी, इक पल में खाक हुई की
बेपनाह इश्क किया उसे, और मेरी चाहत बदल गई
प्रियांशु
✨🌷
उम्मीद रखते रखते, मेरी आदतें बदल गई
शक्श तो वही हूं, मगर मेरी शख्सियत बदल गई
इच्छाएं जो थी सारी, इक पल में खाक हुई की
बेपनाह इश्क किया उसे, और मेरी चाहत बदल गई
प्रियांशु
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प्रेम के रण में वो चालें बिछाना जानती थी,
मैं सादा दिल था, हर दांव पे हार गया…
वो मुस्कुराकर मेरी धड़कनों को कैद करती रही,
मैं हर बार उसे अपनी जीत समझता रहा… 🥀
उसकी खामोशी में भी इक साज़िश सी थी शायद,
मैं हर ख़ामोश लम्हे को इकरार समझता रहा… 🥺
वो निकल गई मेरे जज़्बातों के दरिया से किनारा कर,
मैं डूबता रहा और उसे साहिल समझता रहा…
प्रेम के चक्रव्यूह से निकलना उसे बखूबी आता था,
मैं अभिमन्यू-सा मासूम था… और सच में मारा गया…
मैं सादा दिल था, हर दांव पे हार गया…
वो मुस्कुराकर मेरी धड़कनों को कैद करती रही,
मैं हर बार उसे अपनी जीत समझता रहा… 🥀
उसकी खामोशी में भी इक साज़िश सी थी शायद,
मैं हर ख़ामोश लम्हे को इकरार समझता रहा… 🥺
वो निकल गई मेरे जज़्बातों के दरिया से किनारा कर,
मैं डूबता रहा और उसे साहिल समझता रहा…
प्रेम के चक्रव्यूह से निकलना उसे बखूबी आता था,
मैं अभिमन्यू-सा मासूम था… और सच में मारा गया…
🪷 💔
Kanha✍️ 🥺
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कह देना अभी सांसों में कुछ असर बाकी है
वो जो टूटा सा रहता है, वो अक्सर बाकी है
उसे ये वहम न हो कि सब ख़त्म हो चुका है
मेरे सीने में तेरा ज़िक्र मुकम्मल बाकी है
बहुत तमीज़ से मैंने ज़हर भी पी लिया है
बस उसकी याद का स्वाद अब तक बाकी है
वो लौटे या न लौटे, ये मुक़द्दर की बात है
मगर इस दिल में उसके लिए जगह बाकी है
भैरव
वो जो टूटा सा रहता है, वो अक्सर बाकी है
उसे ये वहम न हो कि सब ख़त्म हो चुका है
मेरे सीने में तेरा ज़िक्र मुकम्मल बाकी है
बहुत तमीज़ से मैंने ज़हर भी पी लिया है
बस उसकी याद का स्वाद अब तक बाकी है
वो लौटे या न लौटे, ये मुक़द्दर की बात है
मगर इस दिल में उसके लिए जगह बाकी है
भैरव
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कौन कहता है उसकी याद से
बे-खबर हूँ मैं ...,
मेरी आंखो से पूछ ले मेरी रात
कैसे गुजरती है ...!!
बे-खबर हूँ मैं ...,
मेरी आंखो से पूछ ले मेरी रात
कैसे गुजरती है ...!!
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मोहब्बत का ये अंदाजा यूं ही उम्र भर बना रहें
✨
क्या सुबह , क्या शाम
✨
क्या सुबह , क्या शाम
तू यूं ही उम्र भर चांद बना रहे....
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घर जाते ही अपनी नज़र उतार लेना...
हमने इश्क़ की नजरो से देखा है तुम्हे...
Bhairav
हमने इश्क़ की नजरो से देखा है तुम्हे...
Bhairav
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