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4. विवरण प्रविधि (Description Method)
अर्थ
जब शिक्षक किसी विषय, घटना, स्थान या प्रसंग का सरल भाषा में विवरण प्रस्तुत करता है, तो इसे विवरण प्रविधि कहते हैं।
उदाहरण: ताजमहल कहाँ स्थित है, इसे किसने बनवाया और यह क्यों प्रसिद्ध है—इन तथ्यों को बताना।
उपयोगिता
तथ्यात्मक ज्ञान प्राप्त होता है।
विद्यार्थियों की जानकारी का विस्तार होता है।
विषय को क्रम से समझने में सहायता मिलती है।
ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।
ध्यान रखने योग्य बातें
विवरण सरल और स्पष्ट हो।
विषय से संबंधित हो।
बहुत लंबा न हो।
चित्र, मॉडल या श्यामपट्ट का उपयोग किया जा सकता है।
अंत में प्रश्न पूछकर समझ की जाँच करनी चाहिए।
याद रखें: विवरण प्रविधि में किसी विषय या घटना का क्रमबद्ध विवरण दिया जाता है।
5. वर्णन प्रविधि (Narration Method)
अर्थ
इस प्रविधि में शिक्षक किसी विषय या घटना का विस्तारपूर्वक वर्णन करता है, जिससे विद्यार्थी उसके विभिन्न पहलुओं को समझ सकें।
उदाहरण
शिक्षक स्वतंत्रता संग्राम की किसी घटना का वर्णन करता है और उसके कारणों, प्रमुख व्यक्तियों तथा परिणामों को समझाता है।
वर्णन प्रस्तुत करने के तरीके
चित्रों और मॉडलों द्वारा
भ्रमण के माध्यम से
प्रयोग द्वारा
वर्णन प्रविधि की विशेषताएँ
विषय को विस्तार से समझाया जाता है।
भाषा सरल और स्पष्ट होनी चाहिए।
वर्णन क्रमबद्ध होना चाहिए।
वर्णन विद्यार्थियों के स्तर के अनुकूल होना चाहिए।
विवरण और वर्णन में अंतर: पुस्तक के अनुसार, विवरण अपेक्षाकृत सतही जानकारी देता है, जबकि वर्णन में विषय का अधिक व्यापक चित्रण किया जाता है।
6. व्याख्यान प्रविधि (Lecture Method)
अर्थ
जब शिक्षक किसी विषय को मौखिक रूप से विस्तारपूर्वक समझाता है, तो इसे व्याख्यान प्रविधि कहते हैं।
उदाहरण
शिक्षक विद्यार्थियों को प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया विस्तार से समझाता है।
प्रमुख लाभ
कम समय में अधिक जानकारी दी जा सकती है।
कठिन विषयों को विस्तार से समझाया जा सकता है।
विद्यार्थियों में स्वाध्याय की भावना विकसित हो सकती है।
पाठ के विभिन्न पहलुओं की जानकारी मिलती है।
सीमाएँ
शिक्षक अधिक सक्रिय रहता है।
विद्यार्थी निष्क्रिय श्रोता बन सकते हैं।
लगातार व्याख्यान से रुचि कम हो सकती है।
इसे प्रभावी कैसे बनाएँ?
भाषा सरल और स्पष्ट रखें।
चित्र, मॉडल और उदाहरणों का उपयोग करें।
विद्यार्थियों के स्तर के अनुसार पढ़ाएँ।
बीच-बीच में प्रश्न पूछें।
पूर्वज्ञान से नए ज्ञान को जोड़ें।
याद रखें: व्याख्यान प्रविधि में शिक्षक की भूमिका प्रमुख होती है।
7. स्पष्टीकरण प्रविधि (Explanation Method)
अर्थ
किसी वस्तु, विषय या घटना को इस प्रकार समझाना कि विद्यार्थी उसे स्पष्ट रूप से समझ सकें, स्पष्टीकरण प्रविधि कहलाता है।
उदाहरण
शिक्षक सौरमंडल पढ़ाते समय पहले सौरमंडल का अर्थ बताता है, फिर ग्रहों की स्थिति और उनकी विशेषताएँ समझाता है।
प्रमुख लाभ
विषय की स्पष्ट समझ विकसित होती है।
क्रमबद्ध ज्ञान प्राप्त होता है।
कठिन विषय सरल बनते हैं।
विषय के विभिन्न पहलुओं को समझने में मदद मिलती है।
प्रभावी बनाने के तरीके
पाठ्यवस्तु को छोटे-छोटे भागों में बाँटें।
सरल और शुद्ध भाषा का प्रयोग करें।
चित्रों, मॉडलों और श्यामपट्ट की सहायता लें।
कठिन अवधारणाओं को स्पष्ट करें।
अंत में प्रश्न पूछें।
याद रखें: स्पष्टीकरण प्रविधि का मुख्य उद्देश्य विषय को बोधगम्य बनाना है।
प्रश्न 1. प्रश्नोत्तर प्रविधि का जनक किसे माना गया है?
A. रूसो
B. सुकरात
C. फ्रोबेल
D. मॉन्टेसरी
✅ उत्तर: B. सुकरात
प्रश्न 2. कम समय में अधिक जानकारी देने के लिए कौन-सी प्रविधि उपयोगी है?
A. खेल प्रविधि
B. भ्रमण प्रविधि
C. व्याख्यान प्रविधि
D. वाद-विवाद प्रविधि
✅ उत्तर: C. व्याख्यान प्रविधि
प्रश्न 3. विद्यार्थियों के पूर्वज्ञान की जाँच करने के लिए कौन-सी प्रविधि उपयोगी है?
A. प्रश्नोत्तर प्रविधि
B. भ्रमण प्रविधि
C. कार्यशाला प्रविधि
D. खेल प्रविधि
✅ उत्तर: A. प्रश्नोत्तर प्रविधि
प्रश्न 4. ताजमहल की स्थिति, निर्माण और प्रसिद्धि के बारे में बताना किसका उदाहरण है?
A. प्रयोगात्मक कार्य
B. विवरण प्रविधि
C. खेल प्रविधि
D. समूह चर्चा
✅ उत्तर: B. विवरण प्रविधि
प्रश्न 5. किसी घटना का विस्तारपूर्वक चित्रण करना कहलाता है—
A. प्रश्नोत्तर
B. वर्णन प्रविधि
C. वाद-विवाद
D. कार्यशाला
✅ उत्तर: B. वर्णन प्रविधि
प्रश्न 6. व्याख्यान प्रविधि में सामान्यतः किसकी भूमिका अधिक होती है?
A. विद्यार्थी
B. अभिभावक
C. शिक्षक
D. समुदाय
✅ उत्तर: C. शिक्षक
प्रश्न 7. कठिन विषय को स्पष्ट और बोधगम्य बनाने के लिए कौन-सी प्रविधि उपयोगी है?
A. स्पष्टीकरण प्रविधि
B. वाद-विवाद प्रविधि
C. खेल प्रविधि
D. भ्रमण प्रविधि
✅ उत्तर: A. स्पष्टीकरण प्रविधि
प्रश्न 8. प्रश्नोत्तर प्रविधि से किसका विकास होता है?
A. केवल स्मरण शक्ति
B. जिज्ञासा और चिंतन
C. केवल शारीरिक क्षमता
D. केवल लेखन गति
✅ उत्तर: B. जिज्ञासा और चिंतन
प्रश्न 9. वर्णन प्रविधि में शिक्षक को किस बात का ध्यान रखना चाहिए?
A. भाषा कठिन हो
B. वर्णन अव्यवस्थित हो
C. वर्णन विद्यार्थियों के स्तर के अनुकूल हो
D. केवल पाठ्यपुस्तक पढ़ी जाए
✅ उत्तर: C. वर्णन विद्यार्थियों के स्तर के अनुकूल हो
प्रश्न 10. स्पष्टीकरण प्रविधि में शिक्षण सामग्री के रूप में किसका उपयोग किया जा सकता है?
A. चित्र और मॉडल
B. केवल गृहकार्य
C. केवल परीक्षा
D. इनमें से कोई नहीं
✅ उत्तर: A. चित्र और मॉडल
कहानी-कथन प्रविधि (Storytelling Method)
अर्थ
जब शिक्षक किसी विषय को कहानी के रूप में प्रस्तुत करता है, तो इसे कहानी-कथन प्रविधि कहते हैं।
उदाहरण: पंचतंत्र की कहानियों से नैतिक शिक्षा देना या किसी ऐतिहासिक घटना को कहानी के रूप में समझाना।
प्रमुख लाभ
बच्चों की एकाग्रता बढ़ती है।
कल्पनाशक्ति का विकास होता है।
सीखने की गति बढ़ सकती है।
कक्षा में जिज्ञासा जागृत होती है।
ध्यान रखने योग्य बातें
कहानी विद्यार्थियों के स्तर के अनुकूल हो।
भाषा सरल और स्पष्ट हो।
कहानी सुनाते समय उचित हाव-भाव का प्रयोग करें।
शिक्षण सामग्री का आवश्यकतानुसार उपयोग करें।
कहानी के बाद समझ जाँचने के लिए प्रश्न पूछें।
परीक्षा की ट्रिक: कहानी + कल्पनाशक्ति + एकाग्रता = कहानी-कथन प्रविधि।
निरीक्षण एवं अवलोकन प्रविधि (Observation Method)
अर्थ
किसी वस्तु, स्थान या घटना का ध्यानपूर्वक निरीक्षण करना अवलोकन कहलाता है।
उदाहरण: बच्चों को पौधे की पत्तियों, तने और जड़ों का निरीक्षण करवाना।
प्रमुख उपयोग
पुस्तक के अनुसार यह प्रविधि विशेष रूप से इन विषयों में उपयोगी है:
विज्ञान
कृषि
समाज विज्ञान
आवश्यक सावधानियाँ
अवलोकन का उद्देश्य पहले निर्धारित होना चाहिए।
विद्यार्थियों को पता हो कि क्या, कहाँ, कब और कैसे देखना है।
निरीक्षण शिक्षक के मार्गदर्शन में होना चाहिए।
अवलोकन के बाद उसका विवरण लिखवाना चाहिए।
परीक्षा की ट्रिक: ध्यानपूर्वक देखना और जाँच करना = अवलोकन प्रविधि।
उदाहरण प्रविधि (Example Method)
अर्थ
किसी कठिन या जटिल विषय को उदाहरणों, चित्रों, चार्ट और अनुभवों की सहायता से सरल बनाना उदाहरण प्रविधि कहलाता है।
उदाहरण: हिंदी व्याकरण में दीर्घ संधि समझाने के लिए रामायण, विद्यालय और देवालय जैसे शब्दों के उदाहरण देना।
प्रमुख लाभ
कठिन अवधारणाएँ सरल होती हैं।
विषय स्पष्ट रूप से समझ आता है।
गलतियाँ होने की संभावना कम होती है।
विद्यार्थियों की रुचि बढ़ती है।
अच्छे उदाहरण की विशेषताएँ
उदाहरण सरल और स्पष्ट हो।
विद्यार्थियों के स्तर के अनुकूल हो।
पूर्वज्ञान से संबंधित हो।
उदाहरणों में विविधता हो।
सरल उदाहरणों के बाद कठिन उदाहरण दिए जा सकते हैं।
परीक्षा की ट्रिक: कठिन अवधारणा को उदाहरण से समझाना = उदाहरण प्रविधि।
उदाहरण प्रविधि (Example Method)
अर्थ
किसी कठिन या जटिल विषय को उदाहरणों, चित्रों, चार्ट और अनुभवों की सहायता से सरल बनाना उदाहरण प्रविधि कहलाता है।
उदाहरण: हिंदी व्याकरण में दीर्घ संधि समझाने के लिए रामायण, विद्यालय और देवालय जैसे शब्दों के उदाहरण देना।
प्रमुख लाभ
कठिन अवधारणाएँ सरल होती हैं।
विषय स्पष्ट रूप से समझ आता है।
गलतियाँ होने की संभावना कम होती है।
विद्यार्थियों की रुचि बढ़ती है।
अच्छे उदाहरण की विशेषताएँ
उदाहरण सरल और स्पष्ट हो।
विद्यार्थियों के स्तर के अनुकूल हो।
पूर्वज्ञान से संबंधित हो।
उदाहरणों में विविधता हो।
सरल उदाहरणों के बाद कठिन उदाहरण दिए जा सकते हैं।
परीक्षा की ट्रिक: कठिन अवधारणा को उदाहरण से समझाना = उदाहरण प्रविधि।
खेल प्रविधि (Play-Way Method)
अर्थ
खेल और गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को सिखाने की विधि को खेल प्रविधि कहते हैं।
उदाहरण: बच्चों को अक्षर पहचानने के लिए अक्षर-कार्ड देना या दौड़ के खेल से गिनती सिखाना।
प्रमुख लाभ
सीखना रुचिकर बनता है।
रचनात्मकता का विकास होता है।
सामाजिक गुण विकसित होते हैं।
शारीरिक और मानसिक विकास में सहायता मिलती है।
बच्चों में समूह में काम करने की प्रवृत्ति विकसित होती है।
महत्त्वपूर्ण तथ्य
पुस्तक में खेल प्रविधि के महत्त्व को रेखांकित करने वाले शिक्षाविद् के रूप में फ्रीबेल का उल्लेख किया गया है।
परीक्षा की ट्रिक: खेल-खेल में सीखना = खेल प्रविधि।
समूह चर्चा प्रविधि (Group Discussion Method)
अर्थ
किसी विषय पर एक से अधिक व्यक्तियों द्वारा विचार-विमर्श करना समूह चर्चा कहलाता है।
उदाहरण: विद्यार्थियों के समूह में चर्चा करवाना कि विद्यालय में स्वच्छता कैसे बनाए रखी जा सकती है।
प्रमुख लाभ
सुनने और समझने का कौशल विकसित होता है।
विचार व्यक्त करने का अवसर मिलता है।
ज्ञान में वृद्धि होती है।
लोकतांत्रिक भावना और सामाजिकता विकसित होती है।
तर्क करने की क्षमता बढ़ती है।
ध्यान रखने योग्य बातें
चर्चा का विषय स्पष्ट हो।
सभी विद्यार्थियों को भाग लेने का अवसर मिले।
चर्चा छोटे समूहों में कराई जा सकती है।
अनावश्यक विवाद से बचना चाहिए।
अंत में प्रश्न पूछकर समझ की जाँच करनी चाहिए।
परीक्षा की ट्रिक: विचार-विमर्श + सहभागिता = समूह चर्चा।
प्रयोगात्मक प्रविधि (Experimental Method)
अर्थ
जब विद्यार्थियों को प्रयोग करके किसी विषय या घटना का ज्ञान दिया जाता है, तो इसे प्रयोगात्मक प्रविधि कहते हैं।
उदाहरण: लाल और हरे रंग को मिलाकर नया रंग बनाना या विज्ञान की प्रयोगशाला में प्रयोग करके परिणाम देखना।
प्रमुख लाभ
विद्यार्थी सक्रिय रहते हैं।
स्वयं करके सीखने का अवसर मिलता है।
ज्ञान अधिक स्थायी हो सकता है।
जिज्ञासा की पूर्ति होती है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तर्कशीलता विकसित होती है।
परीक्षा की ट्रिक: प्रयोग करके सीखना = प्रयोगात्मक प्रविधि।
वाद-विवाद प्रविधि (Debate Method)
अर्थ
जब किसी विषय पर दो पक्ष अपने अलग-अलग विचार प्रस्तुत करते हैं और तर्कों के आधार पर चर्चा करते हैं, तो इसे वाद-विवाद प्रविधि कहते हैं।
उदाहरण: विषय—“विद्यालयों में गृहकार्य आवश्यक है या नहीं?”
एक पक्ष गृहकार्य के समर्थन में तर्क देगा और दूसरा पक्ष विरोध में।
प्रमुख लाभ
विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता मिलती है।
सुनने और बोलने का कौशल विकसित होता है।
तर्कशक्ति का विकास होता है।
नए ज्ञान की प्राप्ति होती है।
मानसिक विकास में सहायता मिलती है।
समूह चर्चा और वाद-विवाद में अंतर:
समूह चर्चा में किसी विषय को समझने और विचार साझा करने पर जोर होता है।
वाद-विवाद में विषय के पक्ष और विपक्ष में तर्क प्रस्तुत किए जाते हैं।
कार्यशाला प्रविधि (Workshop Technique)
अर्थ
कार्यशाला ऐसी शिक्षण प्रविधि है जिसमें प्रतिभागी सक्रिय रूप से काम करते हुए, अपने अनुभव और कौशल साझा करके किसी विषय को सीखते हैं।
उदाहरण: शिक्षकों द्वारा नई शिक्षण विधियों पर कार्यशाला आयोजित करना, जिसमें वे स्वयं शिक्षण सामग्री तैयार करें।
प्रमुख उद्देश्य
शिक्षण संबंधी समस्याओं का समाधान खोजना।
व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करना।
समूह में कार्य करने की भावना विकसित करना।
शिक्षण कौशल में सुधार करना।
शिक्षण की नई विधियों का अभ्यास करना।
कार्यशाला में शिक्षण का क्रम
विषय या समस्या का चयन।
समस्या का प्रस्तुतीकरण और स्पष्टीकरण।
समूहों में कार्य करना।
विभिन्न तरीकों का अभ्यास करना।
अनुभवों का आदान-प्रदान।
कार्य की जाँच और निष्कर्ष निकालना।
परीक्षा की ट्रिक: सक्रिय सहभागिता + व्यावहारिक कार्य + सहयोग = कार्यशाला प्रविधि।
भ्रमण प्रविधि (Excursion Method)
अर्थ
किसी स्थान या वस्तु का प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त करने के लिए वहाँ जाकर अध्ययन करना भ्रमण प्रविधि कहलाता है। इसे शैक्षिक भ्रमण भी कहते हैं।
उदाहरण: विद्यार्थियों को संग्रहालय, ऐतिहासिक स्थल, कृषि फार्म या विज्ञान केंद्र ले जाना।
प्रमुख लाभ
सीखना रुचिकर बनता है।
प्रत्यक्ष अनुभव मिलता है।
सामाजिक भावना का विकास होता है।
विभिन्न संस्कृतियों की जानकारी मिलती है।
विद्यार्थी अपनी इंद्रियों का सक्रिय उपयोग करते हैं।
ध्यान रखने योग्य बात
भ्रमण के बाद विद्यार्थियों से सीखी गई बातों का विवरण लिखवाना चाहिए, ताकि ज्ञान अधिक स्थायी हो सके।
परीक्षा की ट्रिक: स्थान पर जाकर प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त करना = भ्रमण प्रविधि।
प्रश्न 1. कहानी-कथन प्रविधि से मुख्यतः किसका विकास होता है?
A. कल्पनाशक्ति
B. केवल शारीरिक शक्ति
C. केवल लेखन गति
D. इनमें से कोई नहीं
✅ उत्तर: A. कल्पनाशक्ति
प्रश्न 2. विज्ञान और कृषि में कौन-सी प्रविधि विशेष रूप से उपयोगी है?
A. व्याख्यान
B. निरीक्षण एवं अवलोकन
C. कहानी-कथन
D. वाद-विवाद
✅ उत्तर: B. निरीक्षण एवं अवलोकन
प्रश्न 3. कठिन अवधारणा को उदाहरणों की सहायता से सरल बनाना कहलाता है—
A. खेल प्रविधि
B. उदाहरण प्रविधि
C. भ्रमण प्रविधि
D. कार्यशाला प्रविधि
✅ उत्तर: B. उदाहरण प्रविधि
प्रश्न 4. खेल प्रविधि के महत्त्व को रेखांकित करने वाले शिक्षाविद् कौन हैं?
A. सुकरात
B. फ्रीबेल
C. थॉर्नडाइक
D. स्किनर
✅ उत्तर: B. फ्रीबेल
प्रश्न 5. किसी विषय पर कई व्यक्तियों द्वारा विचार-विमर्श करना कहलाता है—
A. समूह चर्चा
B. व्याख्यान
C. विवरण
D. स्पष्टीकरण
✅ उत्तर: A. समूह चर्चा
प्रश्न 6. विद्यार्थियों को प्रयोग करके सिखाने वाली प्रविधि कौन-सी है?
A. कहानी-कथन
B. प्रयोगात्मक प्रविधि
C. विवरण प्रविधि
D. वाद-विवाद
✅ उत्तर: B. प्रयोगात्मक प्रविधि
प्रश्न 7. किसी विषय के पक्ष और विपक्ष में तर्क प्रस्तुत करना कहलाता है—
A. समूह चर्चा
B. वाद-विवाद
C. निरीक्षण
D. भ्रमण
✅ उत्तर: B. वाद-विवाद
प्रश्न 8. कार्यशाला प्रविधि में किस पर विशेष जोर दिया जाता है?
A. केवल रटने पर
B. निष्क्रिय सुनने पर
C. व्यावहारिक कार्य और सहभागिता पर
D. केवल लिखित परीक्षा पर
✅ उत्तर: C. व्यावहारिक कार्य और सहभागिता पर
प्रश्न 9. शैक्षिक भ्रमण का प्रमुख लाभ क्या है?
A. प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त होना
B. केवल पुस्तक पढ़ना
C. केवल याद करना
D. केवल गृहकार्य करना
✅ उत्तर: A. प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त होना
प्रश्न 10. अवलोकन के बाद किस कार्य को आवश्यक बताया गया है?
A. खेलना
B. विवरण लिखना
C. पाठ छोड़ना
D. परीक्षा रद्द करना
✅ उत्तर: B. विवरण लिखना
प्रश्न 11. बच्चों को खेल के माध्यम से अक्षर और गिनती सिखाना किस प्रविधि का उदाहरण है?
A. व्याख्यान
B. खेल प्रविधि
C. वाद-विवाद
D. विवरण
✅ उत्तर: B. खेल प्रविधि
प्रश्न 12. कार्यशाला प्रविधि का एक प्रमुख उद्देश्य है—
A. विद्यार्थियों को निष्क्रिय रखना
B. सहयोग और शिक्षण कौशल का विकास करना
C. केवल व्याख्यान देना
D. केवल परीक्षा लेना
✅ उत्तर: B. सहयोग और शिक्षण कौशल का विकास करना
✅ अध्याय 5 का रिवीजन
अब तक हमने आपकी पुस्तक के अनुसार शिक्षण प्रविधियों के ये प्रकार पढ़े हैं:
प्रश्नोत्तर
विवरण
वर्णन
व्याख्यान
स्पष्टीकरण
कहानी-कथन
निरीक्षण एवं अवलोकन
उदाहरण
खेल
समूह चर्चा
प्रयोगात्मक कार्य
वाद-विवाद
कार्यशाला
भ्रमण
अगला अध्याय: अध्याय 6 — शिक्षण की नवीन विधाएँ (उपागम)।
अध्याय 6 — शिक्षण की नवीन विधाएँ (उपागम)
UP SUPER TET परीक्षा के लिए सम्पूर्ण नोट्स — भाग 1
हम आपकी पुस्तक शिक्षण अधिगम के सिद्धांत के पृष्ठ 55 से आगे दिए गए विषय को क्रम से पढ़ेंगे। इस अध्याय में परीक्षा की दृष्टि से बालक-केंद्रित शिक्षण, क्रिया/गतिविधि आधारित शिक्षण, रुचिपूर्ण शिक्षण, सहभागी शिक्षण, दक्षता आधारित शिक्षण, उपचारात्मक शिक्षण और बहुकक्षा शिक्षण महत्त्वपूर्ण हैं। (D.El.Ed. Sem1) शिक्षण अधिगम के सिद्धांत.pdf
1. शिक्षण की नवीन विधाओं का अर्थ
शिक्षण एक सामाजिक प्रक्रिया है। इस पर देश की शासन-व्यवस्था, सामाजिक परिस्थितियों, दर्शन, मूल्यों और संस्कृति का प्रभाव पड़ता है।
शिक्षण की नवीन विधाओं का उद्देश्य शिक्षण को अधिक प्रभावशाली बनाना तथा बच्चों को सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाना है।
नवीन शिक्षण उपागमों के उद्देश्य
शिक्षकों को नई शिक्षण विधाओं की जानकारी देना।
बच्चों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना।
गतिविधि-आधारित शिक्षण की जानकारी देना।
खेल-खेल में सीखने को प्रोत्साहित करना।
उपचारात्मक और बहुकक्षा शिक्षण के बारे में जानकारी देना।
परीक्षा के लिए याद रखें: नवीन शिक्षण उपागमों में बच्चे की सक्रिय भागीदारी और सीखने की प्रक्रिया पर जोर दिया जाता है।
2. बालक-केंद्रित शिक्षण उपागम
Child-Centred Approach
अर्थ
जिस शिक्षण में बालक को केंद्र में रखकर उसकी रुचियों, प्रवृत्तियों, क्षमताओं और आवश्यकताओं के अनुसार पढ़ाया जाता है, उसे बालक-केंद्रित शिक्षण कहते हैं।
इसमें शिक्षक केवल जानकारी देने वाला नहीं, बल्कि बच्चे का सहयोगी, सहायक और मार्गदर्शक होता है।
उदाहरण
यदि बच्चों को पौधों के बारे में पढ़ाना है, तो शिक्षक केवल किताब से परिभाषा नहीं पढ़ाएगा। वह बच्चों को पौधा दिखाएगा, उसके भागों का निरीक्षण करवाएगा और प्रश्न पूछने का अवसर देगा।
प्रमुख उद्देश्य
बच्चे का सर्वांगीण विकास करना।
स्वयं करके सीखने की प्रवृत्ति विकसित करना।
आत्मविश्वास बढ़ाना।
चिंतन, मनन और जिज्ञासा का विकास करना।
सहयोग की भावना विकसित करना।
स्वतंत्र रूप से कार्य करने की क्षमता बढ़ाना।
बच्चे को अभिव्यक्ति के अवसर देना।
बालक-केंद्रित शिक्षण की विशेषताएँ
बच्चा सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय रहता है।
शिक्षण बच्चे की रुचि और क्षमता के अनुसार होता है।
गतिविधियों और शिक्षण सामग्री का उपयोग किया जाता है।
बच्चों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अवसर मिलता है।
शिक्षक मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है।
शारीरिक दंड की प्रक्रिया को बाहर रखा जाता है।
शिक्षक की भूमिका
बालक-केंद्रित शिक्षण में शिक्षक:
सहयोगी और मार्गदर्शक होता है।
बच्चों की कठिनाइयों को समझता है।
गतिविधियों में सहायता करता है।
बच्चों को स्वयं सीखने के अवसर देता है।
उनके आत्मविश्वास को बढ़ाता है।
SUPER TET ट्रिक: बालक-केंद्रित शिक्षण = बच्चा सक्रिय, शिक्षक मार्गदर्शक।

परीक्षा में प्रश्न: यदि शिक्षक बच्चों को स्वयं खोजने, सोचने, प्रश्न पूछने और गतिविधियों के माध्यम से सीखने के अवसर देता है, तो यह बालक-केंद्रित शिक्षण है।
4. क्रिया/गतिविधि आधारित शिक्षण
Activity-Based Teaching
अर्थ
जब विद्यार्थी विभिन्न क्रियाओं और गतिविधियों में भाग लेकर स्वयं ज्ञान प्राप्त करते हैं, तो इसे क्रिया या गतिविधि आधारित शिक्षण कहते हैं।
पुस्तक के अनुसार, विद्यार्थी की गतिविधियों में उसका शरीर और मस्तिष्क दोनों सक्रिय रहते हैं।
उदाहरण
बच्चों को जोड़ सिखाने के लिए कंकड़ या गेंदों का उपयोग करना, अक्षर पहचानने के लिए अक्षर-कार्ड देना और दिशा-ज्ञान के लिए गतिविधियाँ करवाना।
गतिविधियों के प्रकार
1. शारीरिक गतिविधियाँ
कदमताल करना।
हाथ ऊपर-नीचे करना।
उछलना-कूदना।
2. मानसिक गतिविधियाँ
चिंतन और मनन।
तर्क करना।
पहेलियाँ हल करना।
लिखना और भाषण देना।
3. शारीरिक एवं मानसिक दोनों गतिविधियाँ
वर्ग पहेली हल करना।
अक्षरों से शब्द बनाना।
निर्देश के अनुसार पशु-पक्षियों के नाम लेकर आगे या पीछे कूदना।
प्रमुख उद्देश्य
शिक्षण को रोचक और प्रभावशाली बनाना।
बच्चों की सक्रियता बढ़ाना।
अनेक कौशल विकसित करना।
बच्चों की रुचि और मानसिक स्तर के अनुसार शिक्षण करना।
कक्षा में सहभागिता बढ़ाना।
शिक्षक को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
सभी बच्चों को भाग लेने का अवसर मिले।
गतिविधि रुचिकर हो।
बच्चों में भय का वातावरण न हो।
गतिविधि जिज्ञासा उत्पन्न करे।
शारीरिक गतिविधि के साथ मानसिक अभ्यास भी हो।
आवश्यकता के अनुसार गतिविधि के नियम बदले जा सकें।
SUPER TET ट्रिक: गतिविधि आधारित शिक्षण = करके सीखना (Learning by Doing)।
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5. बालक-केंद्रित शिक्षण का महत्त्व
पुस्तक में इसके निम्नलिखित महत्त्व बताए गए हैं:
बालक की प्रधानता।
सरल और रुचिपूर्ण शिक्षण।
आत्म-अभिव्यक्ति के अवसर।
ज्ञानेंद्रियों के सक्रिय उपयोग पर जोर।
व्यावहारिक और सामाजिक ज्ञान।
क्रियाशीलता पर आधारित शिक्षा।
स्वयं करके सीखने पर बल।