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सूत्र 2. ज्ञात से अज्ञात की ओर
From Known to Unknown
अर्थ
बच्चों को पहले उस विषय से जोड़ना चाहिए जिसे वे पहले से जानते हैं। फिर उसके आधार पर नई जानकारी देनी चाहिए।
उदाहरण 1: हिंदी
बच्चा 'क' अक्षर जानता है। शिक्षक उससे कमल, कलम और कबूतर जैसे शब्दों का परिचय कराता है।
उदाहरण 2: गणित
बच्चे को गिनती आती है। शिक्षक उसी ज्ञान के आधार पर पहाड़े सिखाता है।
उदाहरण 3: विज्ञान
बच्चा बारिश देख चुका है। शिक्षक उसके पूर्व अनुभव के आधार पर जलचक्र समझाता है।
परीक्षा में पहचान कैसे करें?
प्रश्न में यदि पूर्वज्ञान, पहले से ज्ञात जानकारी या पुराने अनुभव के आधार पर नया ज्ञान देने की बात हो, तो उत्तर होगा—ज्ञात से अज्ञात की ओर।
SUPER TET ट्रिक: पुराना ज्ञान → नया ज्ञान।
सूत्र 3. स्थूल से सूक्ष्म की ओर
From Concrete to Abstract
इसे मूर्त से अमूर्त की ओर भी कहा जाता है।
अर्थ
पहले ऐसी वस्तुओं से पढ़ाना चाहिए जिन्हें बच्चे देख या छू सकते हैं। फिर उन वस्तुओं से संबंधित अमूर्त विचार समझाने चाहिए।
स्थूल/मूर्त: जिन्हें देखा या छुआ जा सकता है।
सूक्ष्म/अमूर्त: विचार, भाव या ऐसी अवधारणाएँ जिन्हें सीधे छूकर नहीं समझा जा सकता।
उदाहरण 1: गणित
बच्चों को जोड़ सिखाने के लिए पहले 3 गेंदें और 2 गेंदें दिखाएँ।
फिर समझाएँ: 3 + 2 = 5
उदाहरण 2: भूगोल
पहले ग्लोब या पृथ्वी का मॉडल दिखाएँ। फिर पृथ्वी के आकार और विभिन्न स्थानों के बारे में समझाएँ।
उदाहरण 3: विज्ञान
पहले वास्तविक पौधा दिखाएँ। फिर उसके भागों के कार्य समझाएँ।
परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण
आपकी पुस्तक में इस सूत्र के संबंध में हरबर्ट स्पेंसर का उल्लेख किया गया है।
SUPER TET ट्रिक: वास्तविक वस्तु → विचार या अवधारणा।
सूत्र 4. पूर्ण से अंश की ओर
From Whole to Part
अर्थ
पहले किसी वस्तु या विषय का संपूर्ण रूप दिखाया जाता है। उसके बाद उसके अलग-अलग भागों को समझाया जाता है।
उदाहरण 1: कविता
पहले पूरी कविता सुनाएँ। उसके बाद प्रत्येक पंक्ति का अर्थ समझाएँ।
उदाहरण 2: कंप्यूटर
पहले पूरा कंप्यूटर दिखाएँ। उसके बाद मॉनिटर, की-बोर्ड, माउस और CPU के बारे में बताएँ।
उदाहरण 3: पेड़
पहले पूरा पेड़ दिखाएँ। फिर उसकी जड़, तना, शाखाएँ, पत्तियाँ, फूल और फल समझाएँ।
परीक्षा में पहचान
यदि पहले पूरी वस्तु या संपूर्ण विषय और फिर उसके अलग-अलग भागों का वर्णन किया जाए, तो यह सूत्र है—पूर्ण से अंश की ओर।
SUPER TET ट्रिक: पूरा → भाग।
पुस्तक में संबंध: इस सूत्र का आधार गेस्टाल्टवाद (Gestaltism) बताया गया है।
सूत्र 5. अनिश्चित से निश्चित की ओर
From Indefinite to Definite
अर्थ
बच्चों के मन में किसी विषय के बारे में जो अस्पष्ट या अनिश्चित जानकारी होती है, शिक्षक उसे स्पष्ट और निश्चित बनाता है।
उदाहरण
बच्चे ने भारत के कई राज्यों के नाम सुने हैं, लेकिन उनकी स्थिति नहीं जानता।
शिक्षक भारत का मानचित्र दिखाकर राज्यों की स्थिति समझाता है। इससे उसकी अस्पष्ट जानकारी स्पष्ट हो जाती है।
दूसरा उदाहरण
बच्चे को लगता है कि सभी चमकने वाली वस्तुएँ तारे हैं। शिक्षक तारे और ग्रह में अंतर समझाकर उसकी गलत धारणा दूर करता है।
ऐसा क्यों?
गलत धारणाओं में सुधार होता है।
ज्ञान स्पष्ट होता है।
विषय को सही ढंग से समझने में मदद मिलती है।
SUPER TET ट्रिक: अस्पष्ट ज्ञान → स्पष्ट ज्ञान।
याद रखने की ट्रिक
सरल–ज्ञात–स्थूल–पूर्ण–अनिश्चित
ये पहले पाँच सूत्र हैं। इन्हें अच्छी तरह समझना जरूरी है, क्योंकि परीक्षा में उदाहरण देकर सही सूत्र पहचानने को कहा जा सकता है।
अभ्यास के लिए 5 प्रश्न
1. शिक्षक पहले बच्चों को गेंदों से जोड़ समझाता है और फिर संख्याओं में जोड़ करवाता है। यह कौन-सा सूत्र है?
A. ज्ञात से अज्ञात
B. स्थूल से सूक्ष्म
C. पूर्ण से अंश
D. अनिश्चित से निश्चित
2. शिक्षक पहले पूरी कविता पढ़ता है, फिर प्रत्येक पंक्ति की व्याख्या करता है। यह है—
A. सरल से जटिल
B. पूर्ण से अंश
C. विशिष्ट से सामान्य
D. अनुभव से युक्तियुक्त
3. बच्चों को पहले गिनती सिखाकर फिर पहाड़े सिखाना किस सूत्र का उदाहरण है?
A. ज्ञात से अज्ञात
B. प्रत्यक्ष से अप्रत्यक्ष
C. पूर्ण से अंश
D. विश्लेषण से संश्लेषण
4. शिक्षक ग्लोब दिखाकर पृथ्वी के बारे में समझाता है। यह मुख्यतः किस सूत्र का उदाहरण है?
A. स्थूल से सूक्ष्म
B. अनिश्चित से निश्चित
C. सरल से जटिल
D. विशिष्ट से सामान्य
5. बच्चे के मन में किसी राज्य की स्थिति को लेकर अस्पष्ट जानकारी है। शिक्षक मानचित्र से उसे स्पष्ट करता है। यह है—
A. पूर्ण से अंश
B. सरल से जटिल
C. अनिश्चित से निश्चित
D. ज्ञात से अज्ञात
1-B
2-B
3-A
4-A
5-C
6. प्रत्यक्ष से अप्रत्यक्ष की ओर
From Seen to Unseen
अर्थ
शिक्षक को पहले ऐसी वस्तुओं या घटनाओं के बारे में पढ़ाना चाहिए जिन्हें बच्चे प्रत्यक्ष रूप से देख चुके हों। फिर उनके आधार पर ऐसी वस्तुओं या घटनाओं का ज्ञान देना चाहिए जिन्हें वे सीधे नहीं देख सकते।
उदाहरण:
बच्चों को पृथ्वी का ग्लोब दिखाकर दूसरे देशों के बारे में समझाना।
चित्रों की सहायता से ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में बताना।
सूर्य और चंद्रमा को दिखाकर अंतरिक्ष के बारे में समझाना।
परीक्षा में पहचान: देखी हुई वस्तु से अनदेखी वस्तु का ज्ञान देना।
याद रखें: प्रत्यक्ष → अप्रत्यक्ष।
7. विशिष्ट से सामान्य की ओर
From Particular to General
अर्थ
पहले किसी विषय के विशिष्ट उदाहरण दिए जाते हैं। फिर उन उदाहरणों के आधार पर सामान्य नियम या सिद्धांत समझाया जाता है।
उदाहरण:
शिक्षक बोर्ड पर लिखता है:
राम खेलता है।
मोहन पढ़ता है।
सीता गाती है।
इन वाक्यों के आधार पर बच्चों को क्रिया के बारे में सामान्य नियम समझाया जाता है।
मुख्य बात: उदाहरणों से नियम तक पहुँचना।
विशेष तथ्य: पुस्तक के अनुसार इस सूत्र को दृष्टांत से सिद्धांत की ओर भी कहा जाता है। इसका संबंध आगमन विधि (Inductive Method) से है।
याद रखें: विशेष उदाहरण → सामान्य नियम।
8. विश्लेषण से संश्लेषण की ओर
From Analysis to Synthesis
अर्थ
विश्लेषण: किसी विषय को उसके अलग-अलग भागों में बाँटकर समझना।
संश्लेषण: अलग-अलग भागों को जोड़कर संपूर्ण विषय को समझना।
उदाहरण
उत्तर प्रदेश के बारे में पढ़ाते समय शिक्षक पहले उसके विभिन्न जिलों की स्थिति और विशेषताएँ समझाता है। फिर सभी जिलों की जानकारी को जोड़कर पूरे उत्तर प्रदेश के बारे में समझाता है।
परीक्षा में पहचान:
भागों में बाँटना = विश्लेषण।
भागों को जोड़ना = संश्लेषण।
याद रखें: विश्लेषण = अलग करना; संश्लेषण = जोड़ना।
9. मनोवैज्ञानिक क्रम से तार्किक क्रम की ओर
From Psychological to Logical
अर्थ
शिक्षण करते समय पहले बच्चों की रुचि, अनुभव, मानसिक स्तर और जिज्ञासा का ध्यान रखना चाहिए। इसके बाद विषय को व्यवस्थित एवं तार्किक क्रम में समझाना चाहिए।
उदाहरण
इतिहास पढ़ाते समय शिक्षक पहले मुगलकालीन इमारतों के चित्र दिखाकर बच्चों की रुचि उत्पन्न करता है। इसके बाद उन इमारतों की विशेषताओं और ऐतिहासिक तथ्यों को क्रम से समझाता है।
मनोवैज्ञानिक क्रम: बालक की रुचि और मानसिक स्तर के अनुसार।
तार्किक क्रम: विषय को क्रमबद्ध एवं तर्कसंगत तरीके से प्रस्तुत करना।
याद रखें: पहले बालक की रुचि, फिर विषय का तार्किक क्रम।
10. अनुभव से युक्तियुक्त की ओर
From Empirical to Rational
अर्थ
बच्चे अपने निरीक्षण और अनुभव से जो ज्ञान प्राप्त करते हैं, शिक्षक उसे तर्क एवं कारणों की सहायता से अधिक स्पष्ट बनाता है।
उदाहरण
बच्चा देखता है कि धूप में रखे गीले कपड़े सूख जाते हैं।
शिक्षक उसे केवल यह तथ्य नहीं बताता, बल्कि समझाता है कि गर्मी के कारण पानी वाष्पित होता है और कपड़े सूखते हैं।
यहाँ बच्चा अपने अनुभव से वैज्ञानिक कारण तक पहुँचता है।
याद रखें: अनुभव एवं निरीक्षण → तर्क एवं कारण।
11. प्रकृति का अनुसरण
Following the Nature
अर्थ
शिक्षण बच्चों की प्राकृतिक विकास प्रक्रिया, आयु, रुचि और मानसिक क्षमता के अनुकूल होना चाहिए।
शिक्षक को बच्चों पर उनकी क्षमता से अधिक कठिन विषय थोपने के बजाय उनके विकास के स्तर के अनुसार पढ़ाना चाहिए।
उदाहरण: छोटे बच्चों को खेल, चित्र, कहानियों और गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाना; उनकी उम्र और समझ के अनुसार धीरे-धीरे कठिन विषयों की ओर बढ़ना।
याद रखें: बालक की प्रकृति और विकास के अनुकूल शिक्षण।
प्रश्न 1. आगमन विधि का संबंध किस शिक्षण सूत्र से है?
A. सरल से जटिल
B. विशिष्ट से सामान्य
C. पूर्ण से अंश
D. प्रत्यक्ष से अप्रत्यक्ष
✅ उत्तर: B. विशिष्ट से सामान्य
प्रश्न 2. किसी विषय को अलग-अलग भागों में बाँटकर समझाना कहलाता है—
A. संश्लेषण
B. विश्लेषण
C. सामान्यीकरण
D. निरीक्षण
✅ उत्तर: B. विश्लेषण
प्रश्न 3. बच्चों को पहले ग्लोब दिखाकर दूसरे देशों की जानकारी देना किस सूत्र का उदाहरण है?
A. प्रत्यक्ष से अप्रत्यक्ष
B. सरल से जटिल
C. विशिष्ट से सामान्य
D. पूर्ण से अंश
✅ उत्तर: A. प्रत्यक्ष से अप्रत्यक्ष
प्रश्न 4. उदाहरणों के आधार पर सामान्य नियम बनाना कहलाता है—
A. निगमन
B. आगमन
C. विश्लेषण
D. संश्लेषण
✅ उत्तर: B. आगमन
प्रश्न 5. बच्चों की रुचि और मानसिक स्तर को ध्यान में रखकर पढ़ाना किस क्रम से संबंधित है?
A. तार्किक क्रम
B. मनोवैज्ञानिक क्रम
C. विश्लेषण क्रम
D. संश्लेषण क्रम
✅ उत्तर: B. मनोवैज्ञानिक क्रम
प्रश्न 6. अलग-अलग भागों को जोड़कर संपूर्ण ज्ञान प्राप्त करना कहलाता है—
A. विश्लेषण
B. संश्लेषण
C. आगमन
D. निरीक्षण
✅ उत्तर: B. संश्लेषण
प्रश्न 7. बच्चे के अनुभव के आधार पर किसी घटना का वैज्ञानिक कारण समझाना किस सूत्र का उदाहरण है?
A. अनुभव से युक्तियुक्त
B. पूर्ण से अंश
C. सरल से जटिल
D. ज्ञात से अज्ञात
✅ उत्तर: A. अनुभव से युक्तियुक्त
प्रश्न 8. शिक्षण को बालक की आयु और विकास के अनुकूल रखना किस सूत्र का उदाहरण है?
A. चयन का सिद्धांत
B. प्रकृति का अनुसरण
C. विभाजन का सिद्धांत
D. आवृत्ति का सिद्धांत
✅ उत्तर: B. प्रकृति का अनुसरण
प्रश्न 9. शिक्षक पहले उदाहरण देता है और फिर नियम समझाता है। यह है—
A. निगमन विधि
B. आगमन विधि
C. व्याख्यान विधि
D. प्रदर्शन विधि
✅ उत्तर: B. आगमन विधि
प्रश्न 10. मनोवैज्ञानिक क्रम के बाद विषय को क्रमबद्ध और तर्कसंगत ढंग से प्रस्तुत करना किस सूत्र से संबंधित है?
A. सरल से जटिल
B. मनोवैज्ञानिक क्रम से तार्किक क्रम
C. प्रत्यक्ष से अप्रत्यक्ष
D. अनुभव से युक्तियुक्त
✅ उत्तर: B. मनोवैज्ञानिक क्रम से तार्किक क्रम
अध्याय 4 — शिक्षण के सूत्र पूरा हो गया।
अब अगला अध्याय है:
📘 अध्याय 5 — शिक्षण प्रविधियाँ (Teaching Techniques)
इसमें हम आपकी पुस्तक के अनुसार पढ़ेंगे:
शिक्षण प्रविधि का अर्थ एवं परिभाषा
प्रमुख शिक्षण प्रविधियाँ
प्रत्येक प्रविधि के गुण, दोष और उदाहरण
UP SUPER TET के महत्त्वपूर्ण प्रश्न—प्रत्येक प्रश्न के नीचे उत्तर सहित।
चलिए, अध्याय 5 शुरू करते हैं।
अध्याय 5 — शिक्षण प्रविधियाँ (Teaching Techniques)
UP SUPER TET परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण नोट्स
हम आपकी पुस्तक शिक्षण अधिगम के सिद्धांत के पृष्ठ 41 से आगे दिए गए विषय को क्रम से पढ़ेंगे। आज पहले शिक्षण प्रविधि का अर्थ और प्रमुख प्रविधियों को समझते हैं। (D.El.Ed. Sem1) शिक्षण अधिगम के सिद्धांत.pdf
1. शिक्षण प्रविधि का अर्थ
शिक्षण प्रविधि वह तरीका है, जिसके माध्यम से शिक्षक विद्यार्थियों को किसी विषय का ज्ञान प्रदान करता है।
सरल शब्दों में—शिक्षक कैसे पढ़ाता है, यही शिक्षण प्रविधि है।
शिक्षण प्रविधियाँ क्यों आवश्यक हैं?
विषय को सरलता से समझाने के लिए।
विद्यार्थियों की रुचि और ध्यान बनाए रखने के लिए।
शिक्षण को प्रभावशाली बनाने के लिए।
विद्यार्थियों के सीखने के स्तर को बेहतर बनाने के लिए।
परीक्षा के लिए याद रखें: शिक्षण प्रविधि का संबंध शिक्षण की प्रक्रिया और पढ़ाने के तरीके से है।
2. पुस्तक में दी गई प्रमुख शिक्षण प्रविधियाँ
आपकी पुस्तक में निम्नलिखित प्रविधियाँ दी गई हैं:
प्रश्नोत्तर प्रविधि
विवरण प्रविधि
वर्णन प्रविधि
व्याख्यान प्रविधि
स्पष्टीकरण प्रविधि
कहानी-कथन प्रविधि
निरीक्षण एवं अवलोकन प्रविधि
उदाहरण प्रविधि
खेल/गतिविधि प्रविधि
प्रयोगात्मक कार्य प्रविधि
वाद-विवाद प्रविधि
कार्यशाला प्रविधि
भ्रमण प्रविधि
समूह चर्चा प्रविधि
अब पहली पाँच प्रविधियों को विस्तार से समझते हैं।
प्रश्नोत्तर प्रविधि (Question-Answer Method)
अर्थ
इस प्रविधि में शिक्षक प्रश्न पूछकर विद्यार्थियों के पूर्वज्ञान की जाँच करता है और नए ज्ञान की ओर ले जाता है।
उदाहरण: शिक्षक पूछता है—पौधों को बढ़ने के लिए किन चीजों की आवश्यकता होती है?
बच्चों के उत्तरों के आधार पर शिक्षक विषय को आगे समझाता है।
प्रमुख विशेषताएँ
विद्यार्थियों की जिज्ञासा बढ़ती है।
चिंतन और समस्या-समाधान की क्षमता विकसित होती है।
पूर्वज्ञान की जाँच होती है।
कक्षा में सक्रिय सहभागिता बढ़ती है।
प्रश्न पूछते समय ध्यान रखें
प्रश्न सरल और स्पष्ट हों।
प्रश्न पाठ्यवस्तु से संबंधित हों।
प्रश्न विद्यार्थियों के स्तर के अनुकूल हों।
प्रश्न क्रमबद्ध होने चाहिए।
सही उत्तर देने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करना चाहिए।
महत्त्वपूर्ण तथ्य: पुस्तक में प्रश्नोत्तर प्रविधि का जनक सुकरात को बताया गया है।