📕बिहार दारोगा मेंस एडमिट कार्ड जारी
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•Exam Date: 27/05/2026
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📕भारत में आपदा प्रबंधन "प्रतिक्रिया-केंद्रित" (Response-centric) दृष्टिकोण से हटकर "निवारण और तैयारी" (Prevention and Preparedness) के मॉडल को अपनाया है।
1. विधायी प्रावधान: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005
यह भारत में आपदा प्रबंधन के लिए कानूनी आधार प्रदान करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कानून है।
परिभाषा: यह अधिनियम आपदा को एक "तबाही या दुर्घटना" के रूप में परिभाषित करता है जो मानवीय या प्राकृतिक कारणों से होती है।
शक्तियाँ:
दंड का प्रावधान:
2. संस्थागत ढांचा (Institutional Framework)
भारत में आपदा प्रबंधन के लिए एक त्रि-स्तरीय (Three-tier) संरचना अपनाई गई है:
A. राष्ट्रीय स्तर (National Level)
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA):
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF):
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM):
B. राज्य स्तर (State Level)
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA):
C. जिला स्तर (District Level)
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA):
3. वित्तीय प्रावधान (Financial Provisions)
आपदा मोचन निधि (DRF):
आपदा शमन निधि (DMF):
4. प्रमुख राष्ट्रीय योजनाएं और नीतियां
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन नीति (2009):
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (NDMP):
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1. विधायी प्रावधान: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005
यह भारत में आपदा प्रबंधन के लिए कानूनी आधार प्रदान करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कानून है।
परिभाषा: यह अधिनियम आपदा को एक "तबाही या दुर्घटना" के रूप में परिभाषित करता है जो मानवीय या प्राकृतिक कारणों से होती है।
शक्तियाँ:
यह केंद्र, राज्य और जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन योजनाओं को अनिवार्य बनाता है।
दंड का प्रावधान:
इसमें आपदा के समय राहत सामग्री के दुरुपयोग या बाधा डालने पर दंड और जुर्माने की व्यवस्था है।
2. संस्थागत ढांचा (Institutional Framework)
भारत में आपदा प्रबंधन के लिए एक त्रि-स्तरीय (Three-tier) संरचना अपनाई गई है:
A. राष्ट्रीय स्तर (National Level)
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA):
यह भारत की शीर्ष संस्था है। इसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं। यह नीतियां और दिशानिर्देश तैयार करता है।
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF):
यह आपदा के समय तत्काल कार्रवाई करने वाला विशेषज्ञ बल है।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM):
यह प्रशिक्षण, शोध और क्षमता निर्माण का कार्य करता है।
राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (NEC): यह NDMA को सहायता प्रदान करती है और मंत्रालयों के बीच समन्वय करती है।
B. राज्य स्तर (State Level)
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA):
इसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री होते हैं। यह राज्य की आपदा योजना बनाता है और राष्ट्रीय दिशानिर्देशों को लागू करता है।
C. जिला स्तर (District Level)
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA):
इसके अध्यक्ष जिला मजिस्ट्रेट/कलेक्टर होते हैं। यह आपदा प्रबंधन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है जो स्थानीय स्तर पर योजनाओं का कार्यान्वयन सुनिश्चित करती है।
3. वित्तीय प्रावधान (Financial Provisions)
आपदाओं से निपटने के लिए दो विशेष निधियों का प्रावधान किया गया है:
आपदा मोचन निधि (DRF):
यह आपातकालीन प्रतिक्रिया और राहत कार्यों के लिए है (NDRF और SDRF)।
आपदा शमन निधि (DMF):
यह आपदा के जोखिम को कम करने और दीर्घकालिक रोकथाम परियोजनाओं के लिए है (NDMF और SDMF)।
4. प्रमुख राष्ट्रीय योजनाएं और नीतियां
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन नीति (2009):
यह नीति "सुरक्षित और आपदा-प्रतिरोधी भारत" के निर्माण पर केंद्रित है।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (NDMP):
इसे 2016 में जारी किया गया था। यह सेंडाई फ्रेमवर्क (Sendai Framework) के लक्ष्यों के अनुरूप भारत की पहली राष्ट्रीय योजना है।
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📕सेंदाई फ्रेमवर्क (Sendai Framework for Disaster Risk Reduction 2015-2030)
👉आपदा जोखिम को कम करने के लिए एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समझौता है।
👉 इसे मार्च 2015 में जापान के सेंदाई शहर में आयोजित 'तीसरे संयुक्त राष्ट्र विश्व सम्मेलन' में अपनाया गया था।
यह 'ह्योगो फ्रेमवर्क (2005-2015)' का स्थान लेता है और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अगले 15 वर्षों के लिए वैश्विक रोडमैप निर्धारित करता है।
📕 मुख्य उद्देश्य (Main Goals)
इसका प्राथमिक लक्ष्य आपदाओं के कारण होने वाले नुकसान (जीवन, स्वास्थ्य, और आर्थिक संपत्ति) को कम करना है।
👉इसके लिए 4 विशिष्ट प्राथमिकताओं
👉7 वैश्विक लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया है:
📕 4 कार्य प्राथमिकताएँ (4 Priorities for Action)
आपदा जोखिम कम करने में निवेश: संरचनात्मक और गैर-संरचनात्मक उपायों (जैसे बेहतर बुनियादी ढांचा) के जरिए आपदाओं के प्रति लचीलापन (Resilience) बढ़ाना।
बेहतर तैयारी और 'बिल्ड बैक बेटर': आपदा आने पर प्रभावी प्रतिक्रिया की तैयारी और पुनर्निर्माण के दौरान पहले से बेहतर (अधिक सुरक्षित) निर्माण करना।
📕7 वैश्विक लक्ष्य (7 Global Targets)
सेंदाई फ्रेमवर्क के तहत 2030 तक निम्नलिखित लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है
📕भारत और सेंदाई फ्रेमवर्क
भारत सेंदाई फ्रेमवर्क का एक हस्ताक्षरकर्ता देश है।
भारत ने इसके सिद्धांतों के अनुरूप अपनी 'राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना' (NDMP) तैयार की है, जो आपदा जोखिम को कम करने के लिए एक व्यापक ढांचा प्रदान करती है।
📕महत्वपूर्ण बिंदु:
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👉आपदा जोखिम को कम करने के लिए एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समझौता है।
👉 इसे मार्च 2015 में जापान के सेंदाई शहर में आयोजित 'तीसरे संयुक्त राष्ट्र विश्व सम्मेलन' में अपनाया गया था।
यह 'ह्योगो फ्रेमवर्क (2005-2015)' का स्थान लेता है और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अगले 15 वर्षों के लिए वैश्विक रोडमैप निर्धारित करता है।
📕 मुख्य उद्देश्य (Main Goals)
इसका प्राथमिक लक्ष्य आपदाओं के कारण होने वाले नुकसान (जीवन, स्वास्थ्य, और आर्थिक संपत्ति) को कम करना है।
👉इसके लिए 4 विशिष्ट प्राथमिकताओं
👉7 वैश्विक लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया है:
📕 4 कार्य प्राथमिकताएँ (4 Priorities for Action)
👉आपदा जोखिम को समझना:
👉आपदाओं के स्वरूप
👉 खतरों के बारे में डेटा और ज्ञान बढ़ाना।
👉आपदा जोखिम शासन का सुदृढ़ीकरण: आपदा प्रबंधन के लिए सरकारी संस्थानों और कानूनों को मजबूत बनाना।
आपदा जोखिम कम करने में निवेश: संरचनात्मक और गैर-संरचनात्मक उपायों (जैसे बेहतर बुनियादी ढांचा) के जरिए आपदाओं के प्रति लचीलापन (Resilience) बढ़ाना।
बेहतर तैयारी और 'बिल्ड बैक बेटर': आपदा आने पर प्रभावी प्रतिक्रिया की तैयारी और पुनर्निर्माण के दौरान पहले से बेहतर (अधिक सुरक्षित) निर्माण करना।
📕7 वैश्विक लक्ष्य (7 Global Targets)
सेंदाई फ्रेमवर्क के तहत 2030 तक निम्नलिखित लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है
👉वैश्विक आपदा मृत्यु दर को कम करना।
👉प्रभावित लोगों की संख्या को कम करना।
👉जीडीपी के सापेक्ष आर्थिक नुकसान को कम करना।
👉महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे (अस्पताल, स्कूल) और सेवाओं को होने वाले नुकसान को कम करना।
👉2020 तक आपदा जोखिम रणनीतियों वाले देशों की संख्या में वृद्धि करना।
👉विकासशील देशों को अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना।
👉प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (Early Warning Systems) तक लोगों की पहुंच बढ़ाना।
📕भारत और सेंदाई फ्रेमवर्क
भारत सेंदाई फ्रेमवर्क का एक हस्ताक्षरकर्ता देश है।
भारत ने इसके सिद्धांतों के अनुरूप अपनी 'राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना' (NDMP) तैयार की है, जो आपदा जोखिम को कम करने के लिए एक व्यापक ढांचा प्रदान करती है।
📕महत्वपूर्ण बिंदु:
यह फ्रेमवर्क स्वैच्छिक और गैर-बाध्यकारी (Non-binding) है,
जिसमें प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राष्ट्र की अपनी सरकार की होती है।
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📕 पश्चिमी विक्षोभ :—
यह शीतोष्ण चक्रवात है। इनकी उत्पत्ति के संबंध में जे.बर्कनीज द्वारा प्रस्तुत ध्रुवीय पोलर फ्रंट थ्योरी सर्वमान्य है।
इनका मुख्य प्रभाव क्षेत्र जम्मू-कश्मीर, राजस्थान,पंजाब,हरियाणा,हिमाचलप्रदेश और प.उत्तर प्रदेश है, कभी-कभी ये बिहार,बंगाल,असम और अरुणाचल प्रदेश के मौसम को प्रभावित करते हैं।
यह रबी की फसल विशेषकर गेहूं की फसल के लिए बहुत फायदेमंद है।
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यह शीतोष्ण चक्रवात है। इनकी उत्पत्ति के संबंध में जे.बर्कनीज द्वारा प्रस्तुत ध्रुवीय पोलर फ्रंट थ्योरी सर्वमान्य है।
भारत में आने वाले शीतोष्ण चक्रवात भूमध्य सागर के ऊपर से उत्पन्न होते हैं और पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ते हैं और इराक, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान को पार करते हुए भारत के उत्तर-पश्चिमी भाग में प्रवेश करते हैं चूँकि ये पश्चिमी दिशा से आते हैं इसलिए इन्हें पश्चिमी विक्षोभ कहा जाता है।
इनका मुख्य प्रभाव क्षेत्र जम्मू-कश्मीर, राजस्थान,पंजाब,हरियाणा,हिमाचलप्रदेश और प.उत्तर प्रदेश है, कभी-कभी ये बिहार,बंगाल,असम और अरुणाचल प्रदेश के मौसम को प्रभावित करते हैं।
यह रबी की फसल विशेषकर गेहूं की फसल के लिए बहुत फायदेमंद है।
पश्चिमी विक्षोभ का जीवन काल 3-4 दिन का होता है इस अवधि के दौरान शीत लहर चलती है और तापमान सामान्य से 5-10 डिग्री नीचे चला जाता है सुबह-शाम धुंध और कोहरा आम बात है कई बार एक के बाद एक 2-3 पश्चिमी विक्षोभ आते हैं और 8-10 दिनों तक मौसम को प्रभावित करते रहते हैं।
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Answer Key...UPSC CSE Pre 2025.. GS I.pdf
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📕 सहारिया जनजाति
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👉यह जनजाति ललितपुर सोनभद्र में पाई जाती है।
कुछ अन्य जनजातियां जैसी बेंगा पंखा अंगरिया पठारी भैया चेरो सोनभद्र में पाई जाती है।
👉पंखा या पानी का यह मिर्जापुर में भी पाई जाती है।
चेरो यह चंदौली में भी पाई जाती है।
👉यह शबरी के वंशज माने जाते हैं।
👉इनका संबंध महाभारत काल से है।
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जौनसारी जनजाति
👉यह जनजाति मुख्य रूप से उत्तरखंड में पायी जाती है लेकिन उत्तर प्रदेश के पुरोला क्षेत्र में यह जनजाति पायी जाती है.
👉जौंनसारी जनजाति को खस जाति का वंशज माना है. “खस लोग सामान्यता लंबे, सुंदर, गोरे चिट्टे, गुलाबी और पीले होते हैं. उनका सिर लंबा, नाक तीखी या लंबी पतली, ललाट खड़ा, आंखें धुंधली नीले बाल घुँघराले, छीटों वाली, तथा अन्य विशेषताओं वाले सुंदर ढंग से संवारे गये होते हैं.
👉इस जनजाति की स्त्रियाँ तुलनात्मक दृष्टि से लंबी, छरहरी काया वाली और आकर्षक होती हैं.
👉
जौनसारी समुदाय के मुख्य त्यौहार बिस्सू (बैसाखी) , पंचाई (दशहरा), दियाई (दिवाली), नुणाई , अठोई आदि है ये दीपावली को एक माह बाद मनाते है
हारुल, रासों, घुमसू , झेला, धीई, तांदी, मरोज , पौणाई आदि इनके प्रमुख्य नृत्य है
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है कौन विघ्न ऐसा जग में, टिक सके वीर नर के मग में?
खम ठोंक ठेलता है जब नर, पर्वत के जाते पाँव उखड़, मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है।"
#Targetlekhpal, मात्र 7 दिन शेष
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खम ठोंक ठेलता है जब नर, पर्वत के जाते पाँव उखड़, मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है।"
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Q वी बी जी राम जी (ग्रामीण) योजना में केंद्र और राज्य सरकार के मध्य वित्त का अनुपात है
Anonymous Poll
5%
50:50
32%
75:25
56%
60:40
11%
80:20
📕कुछ प्रमुख सम्मेलन
📕6 वा IBSA शिखर सम्मेलन 2026 👉 साउथ अफ्रीका 2026 में
📕G 7 सम्मेलन
📕G20 ke सम्मेलन
📕BRICS के सम्मेलन
📕SCO शंघाई सहयोग संगठन
📕 रामसर कन्वेंशन
📕NATO
📕BIMSTEC
📕 47 वा आसियान शिखर सम्मेलन
नोट 👉 रट लीजिए एक प्रश्न पक्का है
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📕6 वा IBSA शिखर सम्मेलन 2026 👉 साउथ अफ्रीका 2026 में
📕G 7 सम्मेलन
50 वा G7 2024👉👉 अपुलिया ,इटली
51 वा G7 2025👉👉 कनाडा
52 व G7 2026👉👉 फ्रांस
📕G20 ke सम्मेलन
18 वा G20 2023👉👉 भारत
19 वा G 20 2024👉👉ब्राज़ील
21 वा G 20 2026 👉👉 डेराल अमेरिका
20 वा G 20 2025👉👉 दक्षिण अफ्रीका
📕BRICS के सम्मेलन
16 वा BRICS 2024 👉👉 कजान, रूस📕Cop जलवायु परिवर्तन सम्मेलन
17 वा BRICS 2025 👉👉ब्राज़ील
18 वा BRICS 2026 👉👉भारत
Cop 28 ,2023 👉👉UAE
COP 29 ,2024👉👉 बाकू अज़रबैजान
Cop 30 ,2025👉👉 ब्राज़ील
Cop 31, 2026 👉👉 तुर्की
Cop 33, 2028👉👉 भारत
📕SCO शंघाई सहयोग संगठन
24 वा 2024 रूस
25 वा 2025 चीन
26 वा 2026 किर्गिस्तान
📕 रामसर कन्वेंशन
👉 COP 15,2025 ,विक्टोरिया फॉल्स राष्ट्रीय उद्यान, जिम्बाब्वे
👉Cop 16, 2028, पनामा
📕NATO
👉34 वा शिखर सम्मेलन 2025 ,👉हेग नीदरलैंड
👉 35 वा 2026 👉तुर्की
📕BIMSTEC
6 वा 2025, बैंकॉक, थाईलैंड
7 वा 2026 बांग्लादेश
📕 47 वा आसियान शिखर सम्मेलन
👉 मलेशिया कुआलालंपुरम
👉48और 49 👉 प्रयाश फिलीपींस
नोट 👉 रट लीजिए एक प्रश्न पक्का है
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📕 बुक्सा जनजाति
👉बुक्सा अथवा भोक्सा जनजाति उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में छोटी-छोटी ग्रामीण बस्तियों में निवास करती है।
👉बुक्सा जनजाति की पंचायत के सर्वोच्च व्यक्ति को तखत कहा जाता है
👉उत्तर प्रदेश में बुक्सा जनजाति विकास परियोजना 1983-84 में प्रारंभ की गयी
👉बुक्सा लोग प्रमुख रूप से हिन्दी भाषा बोलते हैं। इनमें जो लोग लिखना-पढ़ना जानते हैं वे देवनागरी लिपि का प्रयोग करते हैं।
👉बुक्सा पुरुषों की वेशभूषा में धोती, कुर्ता, सदरी और सिर पर पगड़ी धारण करते हैं। नगरों में रहने वाले पुरुष गाँधी टोपी, कोट, ढीली पेन्ट और चमड़े के जूते, चप्पल आदि पहनते हैं। स्त्रियाँ पहले गहरे लाल, नीले या काले रंग की छींट का ढीला लहंगा पहनती थीं और चोली (अंगिया) के साथ ओढ़नी (चुनरी) सिर पर पहनती थीं, लेकिन अब स्त्रियों में साड़ी, ब्लाउज, स्वेटर एवं कार्कीगन का प्रचलन सामान्य हो गया है।
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👉बुक्सा अथवा भोक्सा जनजाति उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में छोटी-छोटी ग्रामीण बस्तियों में निवास करती है।
👉बुक्सा जनजाति की पंचायत के सर्वोच्च व्यक्ति को तखत कहा जाता है
👉उत्तर प्रदेश में बुक्सा जनजाति विकास परियोजना 1983-84 में प्रारंभ की गयी
👉बुक्सा लोग प्रमुख रूप से हिन्दी भाषा बोलते हैं। इनमें जो लोग लिखना-पढ़ना जानते हैं वे देवनागरी लिपि का प्रयोग करते हैं।
👉बुक्सा पुरुषों की वेशभूषा में धोती, कुर्ता, सदरी और सिर पर पगड़ी धारण करते हैं। नगरों में रहने वाले पुरुष गाँधी टोपी, कोट, ढीली पेन्ट और चमड़े के जूते, चप्पल आदि पहनते हैं। स्त्रियाँ पहले गहरे लाल, नीले या काले रंग की छींट का ढीला लहंगा पहनती थीं और चोली (अंगिया) के साथ ओढ़नी (चुनरी) सिर पर पहनती थीं, लेकिन अब स्त्रियों में साड़ी, ब्लाउज, स्वेटर एवं कार्कीगन का प्रचलन सामान्य हो गया है।
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संवैधानिक निकाय सूची
■ भारत निर्वाचन आयोग -: (अनुच्छेद 324-329) (भाग-XV)
■ संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) -: Article 315-323 (भाग- XIV)
■ राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC)
-: Article 315-323 (भाग- XIV)
■ वित्त आयोग -: Article 280
■ राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग-: Article 338
■ राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग
-: Article 338 (A)
■ राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग -: Article 338(B)
■ भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकार -: Article 350(B)
■ भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक-: Article-148
■ महान्यायवादी -: Article -76
■ महाधिवक्ता -: Article -165
■ सहकारी समितियाँ -: Article 243ZH - 243 ZT (भाग - IX-B)
■ राजभाषा - Article 343-351
(भाग XVII)
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