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📕 उत्तर प्रदेश में "कांग्रेस भारतीय राष्ट्रीय" कांग्रेस के कुल 9 अधिवेशन :–

👉4th    –इलाहाबाद(1888) –जॉर्ज यूले

👉8th    –इलाहाबाद(1892) –WC बनर्जी

👉15th  –लखनऊ(1899) –रमेश चंद्र दत्त

👉21st  –बनारस(1905) –GK गोखले

👉26th  –इलाहाबाद(1910) –वि. वेडरबर्न

👉32nd –लखनऊ(1916) –AC मजूमदार

👉41st  –कानपुर(1925) –सरोजनी नायडू

👉50th  –लखनऊ(1936) –JL नेहरू

👉55th  –मेरठ(1946) –JB कृपलानी
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📕उत्तर प्रदेश में आम

दशहरी _ मलिहाबाद, लखनऊ

चौसा _सहारनपुर,हरदोई

लंगड़ा _ वाराणसी

सफेदा _ लखनऊ

रटौल _ बाग़पत

स्टेम आम _सहारनपुर
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📕उत्तर प्रदेश में दलहनी फसलों का प्रतिशत

चना_ 6.08%

उड़द _5.61%

अरहर _2.90%

मूंग _0.085%

सर्वाधिक चने का उत्पादन
❤2👍1
उत्तर प्रदेश के सभी मंडलों की मानचित्र पर स्थित -

01 सहारनपुर
02 मुरादाबाद
03 बरेली
04 लखनऊ
05 देवीपाटन
06 बस्ती
07 गोरखपुर
08 मेरठ
09 अलीगढ
10 आगरा
11 कानपुर
12 फैजाबाद
13 आजमगढ़
14 झांसी
15 चित्रकूट
16 इलाहाबाद
17 वाराणसी
18 मिर्जापुर
❤8👍1
Lower pcs देने वाले साथी बताइए आज किस subject का मैटर दे?
Anonymous Poll
47%
Polity
36%
History
46%
Hindi
👉12 अगस्त, 1946 को लॉर्ड वेवेल ने कांग्रेस अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू को अंतरिम सरकार के गठन के लिए निमंत्रण दिया।
👉24 अगस्त, 1946 को पं. नेहरू के नेतृत्व में भारत की पहली अंतरिम राष्ट्रीय सरकार की घोषणा

👉2 सितंबर, 1946 को इसका गठन हुआ, जिसमें प्रारंभ में मुस्लिम लीग की भागीदारी नहीं थी।

👉 डॉ. राजेंद्र प्रसाद _ खाद्य एवं कृषि मंत्री

👉रक्षा विभाग बलदेव सिंह

👉 विदेश मामले तथा राष्ट्रमंडल _ जवाहरलाल नेहरू

👉 आसफ अली _ रेल और परिवहन विभाग

👉अक्टूबर, 1946 में लीग के पांच सदस्य सरकार में शामिल हो गए।

👉लियाकत अली _ वित्त मंत्री

👉, जिन्होंने नया बजट प्रस्तुत करते समय उद्योगपतियों और व्यापारियों पर अत्यधिक कर लगाए।

👉 अंतरिम सरकार में अबुल कलाम आजाद मंत्री नहीं थे। * इस सरकार में शामिल होने वाले 12 कांग्रेसी मंत्री थे-पं. जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, आसफ अली, सी. राजगोपालाचारी, शरत चंद्र बोस, डॉ. जॉन मथाई, सरदार बलदेव सिंह, सर शफात अहमद खां, जगजीवन राम, सैयद अली जहीर और सी.एच. भाभा ।

👉 हालांकि 2 सितंबर, 1946 को गठित अंतरिम सरकार में लियाकत अली प्रारंभ में शामिल नहीं थे,

👉लियाकत अली सहित लीग के 5 सदस्यों को 26 अक्टूबर, 1946 को सरकार में मंत्री बनाया गया जिसके कारण तीन कांग्रेसी सदस्यों सैयद अली जहीर, शरत चंद्र बोस तथा सर शफात अहमद खां को हटना पड़ा।

👉बंगाल में ए. के. फजलुल हक के नेतृत्व में कृषक प्रजा पार्टी तथा मुस्लिम लीग की गठबंधन सरकार वर्ष 1946 के चुनाव में सत्ता में आई किंतु बाद में मुस्लिम लीग का मंत्रिमंडल गठित हुआ, जो 14 अगस्त, 1947 तक सत्ता में रहा।

👉 इसके प्रधानमंत्री एच. एस. सुहरावर्दी थे।

👉16 अगस्त, 1946 की तिथि मुस्लिम लीग द्वारा "सीधी कार्यवाही दिवस" हेतु सुनिश्चित की गई थी।

👉 इस कार्यवाही में 'नोआखाली' दंगे का प्रमुख केंद्र रहा।

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     उच्च न्यायालय



✍️भारतीय संविधान के तहत राज्यों के न्यायिक प्रशासन में उच्च न्यायालय की स्थिति शीर्ष पर होती है।

✍️ भारतीय संविधान में राज्यों के लिए उच्च न्यायालय हेतु भाग 6 के अध्याय 5 के तहत अनुच्छेद 214 से 231 तक में प्रावधान किया गया है।

✍️प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय की व्यवस्था की गई है, लेकिन सातवें संविधान संशोधन अधिनियम, 1956 द्वारा संसद को अनुच्छेद 231 के तहत यह अधिकार दिया गया है कि वह विधि द्वारा दो या दो से अधिक राज्यों के लिए अथवा दो या अधिक राज्यों और किसी संघ राज्यक्षेत्र के लिए एक साझा उच्च न्यायालय की स्थापना कर सकती है।

✍️अनुच्छेद 230 के तहत संसद विधि द्वारा किसी - संघ राज्यक्षेत्र पर किसी उच्च न्यायालय की अधिकारिता का विस्तार कर सकेगी या किसी संघ राज्यक्षेत्र से किसी उच्च न्यायालय की अधिकारिता का अपवर्जन कर सकेगी।

✍️अनुच्छेद 214 के अनुसार, प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय होगा।

✍️ अनुच्छेद 215 के अनुसार, प्रत्येक उच्च न्यायालय अभिलेख न्यायालय होगा।

✍️ अभिलेख न्यायालय होने का तात्पर्य है कि उच्च न्यायालय के निर्णय, आदेश आदि अधीनस्थ न्यायालय के लिए बाध्यकर होंगे तथा उसको अपने अवमान के लिए दंड देने सहित ऐसे न्यायालय की सभी शक्तियां होंगी।

✍️अनु. 216 के अनुसार, प्रत्येक उच्च न्यायालय, मुख्य न्यायमूर्ति और ऐसे अन्य न्यायाधीशों से मिलकर बनेगा, जिन्हें राष्ट्रपति समय-समय पर नियुक्त करना आवश्यक समझे।

✍️उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।

✍️उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक पद धारण करते हैं।

✍️ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, राष्ट्रपति को  अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकते हैं।

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👉ब्रिटिश काल में भू राजस्व नीतियां

👉1793 ई. में लॉर्ड कार्नवालिस ने भू-राजस्व की स्थायी बंदोबस्त प्रणाली को प्रारंभ किया।

👉इसे इस्तमरारी, जागीरदारी, मालगुजारी एवं बीसवेदारी आदि भिन्न-भिन्न नामों से भी जाना जाता है।

👉यह व्यवस्था बंगाल, बिहार उड़ीसा तथा उत्तर प्रदेश के वाराणसी तक के क्षेत्र में लागू थी।

✍️ इसके अंतर्गत समूचे ब्रिटिश भारत के क्षेत्रफल का लगभग 19 प्रतिशत हिस्सा शामिल था।

✍️इस व्यवस्था के अंतर्गत जमींदारों के एक नए वर्ग को भू-स्वामी घोषित कर दिया गया, जिसे भूमि के लगान का 10/11 भाग कंपनी को देना था तथा 1/11 भाग अपनी सेवाओं के लिए अपने पास रखना था।

✍️ स्थायी बंदोबस्त के अंतर्गत जमींदार छोटे पूंजीपति (भद्र नवाब) थे।

✍️ दूसरी व्यवस्था रैयतवाड़ी व्यवस्था

✍️इस व्यवस्था के जन्मदाता टॉमस मुनरो और कैप्टन रीड थे तथा सर्वप्रथम इसे तमिलनाडु के बारामहल जिले में लागू किया गया।
✍️ तत्पश्चात यह व्यवस्था मद्रास, बंबई के कुछ हिस्से, पूर्वी बंगाल, असम तथा कुर्ग (आधुनिक कर्नाटक का एक भाग) में लागू की गई।

👉इस प्रथा के अंतर्गत रैयतों को भूमि के मालिकाना और कब्जादारी अधिकार दिए गए थे और प्रत्यक्ष रूप से या सीधे तथा व्यक्तिगत रूप से वे स्वयं सरकार को भू-राजस्व का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी थे।

✍️ इस व्यवस्था ने कृषक भू-स्वामित्व की स्थापना की। इसके अंतर्गत कुल ब्रिटिश भारत के भू-क्षेत्र का 51 प्रतिशत हिस्सा शामिल था। इस व्यवस्था के अंतर्गत लगान की वसूली कठोरता से की जाती थी तथा लगान की दर भी काफी ऊंची थी।

✍️महालवाड़ी पद्धति

👉 भू-राजस्व व्यवस्था कृषक के साथ नहीं, बल्कि प्रत्येक ग्राम अथवा महाल (जागीर का एक भाग) के साथ स्थापित की जाती थी।

✍️ इसके अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति अपनी भूमि छोड़ देता था, तो ग्राम समाज इस भूमि को संभाल लेता था।

✍️ यह ग्राम समाज ही सम्मिलित भूमि (शामलात) तथा अन्य भूमि का स्वामी होता था।

👉यह पद्धति उ.प्र., मध्य प्रांत तथा पंजाब में (कुछ परिवर्तनों के साथ) लागू की गई, जिसके अंतर्गत कुल ब्रिटिश भारत के भू-क्षेत्र का 30 प्रतिशत हिस्सा शामिल था।

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    👉उपराष्ट्रपति।                  

✍️'भारत में उपराष्ट्रपति का पद अमेरिका के उपराष्ट्रपति की तर्ज पर बनाया

✍️ अनुच्छेद 63 _ भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा।

✍️ अनुच्छेद 64 _उपराष्ट्रपति राज्य सभा का 'पदेन सभापति' होता है।

✍️ अनु. 65 _राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन करता है, उस दौरान वह राज्य सभा के सभापति के पद के कर्तव्यों का पालन नहीं करेगा तथा अनु. 97 के अधीन सभापति को संदेय वेतन-भत्ते का हकदार नहीं होगा।

✍️भारत के उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित औरमनोनीत दोनों सदस्यों द्वारा किया जाता है।

✍️अनु. 66(1) _उपराष्ट्रपति का निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है तथा ऐसे निर्वाचन में मतदान गुप्त होता है।

✍️भारत के उपराष्ट्रपति को राज्य सभा के सभापति पद के लिए वर्तमान में 4 लाख रुपये प्रतिमाह वेतन

✍️उपराष्ट्रपति को, उपराष्ट्रपति पद के लिए वेतन नहीं प्राप्त होता है, बल्कि राज्य सभा के सभापति के रूप में प्राप्त होता है।

✍️अनुच्छेद 66(3) _ उपराष्ट्रपति पद के लिए योग्यता

✍️अनुच्छेद 67_ उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पद ग्रहण की तिथि से 5 वर्ष तक है।    

✍️अनुच्छेद 67 (क) _ उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग कर सकता है।  

✍️अनुच्छेद 67 (ख) _उपराष्ट्रपति राज्य सभा के ऐसे संकल्प द्वारा अपने पद से हटाया जा सकेगा, जिसे राज्य सभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत ने पारित किया है और जिससे लोक सभा सहमत है।

✍️उपराष्ट्रपति अनु. 69 में वर्णित प्रारूप में राष्ट्रपति या राष्ट्रपति के द्वारा इस निमित्त नियुक्त किसी व्यक्ति के समक्ष पद की शपथ लेता है।


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👉
केंद्र- राज्य संबंध से संबंधित अनुच्छेद

👉केंद्र राज्यों का संबंध संविधान के भाग 11(अनुच्छेद 245-263) में दिया गया है

👉अनुच्छेद 245
संसद देश में कानून बना सकती है।
विधानमंडल राज्य में कानून बना सकती है।

👉अनुच्छेद 246
संघ सूची ,राज्य सूची व समवर्ती सूची के विषयों का उल्लेख।

👉अनुच्छेद 247
अतिरिक्त न्यायालय बनाया जा सकता है।

👉अनुच्छेद 248
अवशिष्ट सूची।
जो विषय बाद में जुड़े जाएंगे वह केंद्र सरकार के विषय में जोड़े जाएंगे। ex-इसरो, डीआरडीओ, साइबर क्राइम आदि।

👉अनुच्छेद 252
दो या दो से अधिक राज्यों की सहमति हो तो संसद राज्य सूची में भी कानून बना सकती है।

👉अनुच्छेद 253
अंतर्राष्ट्रीय करार या समझौते को प्रभावी बनाने के लिए संसद राज्य सूची में भी कानून बना सकती है।

👉अनुच्छेद 254
विधानमंडल ऐसा कोई कानून नहीं बनाएगी जो संसद के कानून से असंगत हो या मेल ना खाता हो।

👉अनुच्छेद 263
अन्तर्राजीय परिषद का उल्लेख।
सभी राज्य और यूटी के मुख्यमंत्री की केंद्र सरकार द्वारा वर्ष में तीन बार मीटिंग



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राष्ट्रपति शासन लगाने की प्रक्रिया

❇️ कारण:-
▪️संवैधानिक तंत्र विफल होना
▪️बहुमत साबित न कर पाना
▪️चुनाव ना हो पाना(युद्ध आपदा आदि)

❇️ राज्यपाल केंद्र को स्थित की रिपोर्ट भेजता है

❇️ प्रधानमंत्री और कैबिनेट, राष्ट्रपति को अनुच्छेद 356 लागू करने का सुझाव देते है

❇️ राष्ट्रपति की घोषणा:-
▪️राष्ट्रपति शासन लागू होता है
▪️राज्य सरकार भंग, विधानसभा निलंबित/भंग

❇️ संसदीय अनुमोदन:-
▪️2 महीने के भीतर संसद के दोनों सदनों से मंजूरी जरूरी
▪️लोकसभा और राज्यसभा में साधारण बहुमत से पास होना चाहिए

❇️ अवधि और विस्तार:-
▪️पहले 6 महीने - बिना संसदीय मंजूरी के
▪️6 महीने के बाद - हर 6 महीने पर संसद की मंजूरी जरूरी (अधिकतम 3 वर्ष तक)

❇️ न्यायिक समीक्षा:- सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती (जैसे 1994 का बोम्मई केस)

❇️ परिणाम:-
▪️प्रशासन राज्यपाल के माध्यम से केंद्र सरकार चलती है
▪️विधानसभा भंग होने पर 6 माह के भीतर चुनाव अनिवार्य

44वां संशोधन 1978 - 1 साल से ज्यादा विस्तार के लिए संसद के दोनों सदनों का बहुमत जरूरी

❇️ सरकारिया आयोग:- राजनीतिक दुरुपयोग रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश
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👉इसे 26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा द्वारा अंगीकृत (adopted) किया गया था और यह 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ था।

👉संविधान को अंगीकृत किए जाने के समय इसमें 395 अनुच्छेद (Articles),

👉 8 अनुसूचियां (Schedules) और लगभग 145,000 शब्द थे।

👉इस प्रकार यह अब तक अंगीकृत किया जाने वाला 'सबसे लंबा राष्ट्रीय संविधान' (Longest National Constitution) बन गया था।

👉वर्तमान में भारत के संविधान में 395 अनुच्छेद एवं 12 अनुसूचियां हैं।

👉डॉ. भीम राव अंबेडकर को भारतीय संविधान का मुख्य रचनाकार माना जाता है।

👉 भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के संविधान पर हस्ताक्षर करने वाले पहले व्यक्ति बने थे।

👉यह विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है।

👉
भारत का संविधान न तो मुद्रित (printed) है, न ही टंकित (typed) है।

👉यह हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में हस्तलिखित और सुलेखित (calligraphed) है।


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✅ गवर्नर/गवर्नर जनरल/वायसराय द्वारा किए गए प्रमुख कार्य 👇👇

• अंग्रेजी शिक्षा - विलियम बैंटिंक

• सामाजिक सुधार - विलियम बैंटिंक

• ठगों का दमन - कैप्टन स्लीमन

• प्रेस पर प्रतिबंध हटाना - चार्ल्स मेटकॉफ

• सिन्ध का विलय - लॉर्ड एलनबरो

• दास प्रथा का अंत - लॉर्ड एनलबरो

• राज्य अपहरण की नीति - लॉर्ड डलहौजी

• व्यपगत का सिद्धान्त - लॉर्ड डलहौजी

• राज्य हड़प नीति - लॉर्ड डलहौजी

• ड्राक्सिन ऑफ लैप्स - लॉर्ड डलहौजी

• अवध का विलय - लॉर्ड डलहौजी

• चतुराईपूर्ण निष्क्रियता की नीति - जान लॉरेंस

• वर्नाकुलर प्रेस एक्ट - लॉर्ड लिटन

• अग्रफारवर्ड नीति - लॉर्ड रिपन

• स्थानीय स्वशासन - लॉर्ड रिपन


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राष्ट्रपति शासन लगाने की प्रक्रिया

🔰 कारण:-
▪️संवैधानिक तंत्र विफल होना
▪️बहुमत साबित न कर पाना
▪️चुनाव ना हो पाना(युद्ध आपदा आदि)

🔰 राज्यपाल केंद्र को स्थित की रिपोर्ट भेजता है

🔰 प्रधानमंत्री और कैबिनेट, राष्ट्रपति को अनुच्छेद 356 लागू करने का सुझाव देते है

🔰 राष्ट्रपति की घोषणा:-
▪️राष्ट्रपति शासन लागू होता है
▪️राज्य सरकार भंग, विधानसभा निलंबित/भंग

🔰 संसदीय अनुमोदन:-
▪️2 महीने के भीतर संसद के दोनों सदनों से मंजूरी जरूरी
▪️लोकसभा और राज्यसभा में साधारण बहुमत से पास होना चाहिए

🔰 अवधि और विस्तार:-
▪️पहले 6 महीने - बिना संसदीय मंजूरी के
▪️6 महीने के बाद - हर 6 महीने पर संसद की मंजूरी जरूरी (अधिकतम 3 वर्ष तक)

🔰 न्यायिक समीक्षा:- सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती (जैसे 1994 का बोम्मई केस)

🔰 परिणाम:-
▪️प्रशासन राज्यपाल के माध्यम से केंद्र सरकार चलती है
▪️विधानसभा भंग होने पर 6 माह के भीतर चुनाव अनिवार्य

44वां संशोधन 1978 - 1 साल से ज्यादा विस्तार के लिए संसद के दोनों सदनों का बहुमत जरूरी

🔰 सरकारिया आयोग:- राजनीतिक दुरुपयोग रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश

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🔰संविधान में संशोधन की प्रक्रिया

👉संविधान के भाग 20 के अनुच्छेद 368 में संसद को संविधान एवं इसकी व्यवस्था में संशोधन की शक्ति प्रदान करता है।

यह प्रावधान करता है कि संसद अपनी संवैधानिक शक्ति का प्रयोग करते हुए संविधान के किसी उपबंध कापरिवर्धन, परिवर्तन या निरसन के रूप में संशोधन कर सकती है।

👉हलाकि संसद उन व्यवस्थाओ को संशोधित नही कर सकती जो संविधान के मूल ढांचे की संरचना से सम्बद्ध हो यह व्यवस्था उच्चतम न्यायलय द्वारा केशवानंद भारती मामले (1973) में की।

👉अनुछेद 368 के अंतर्गत यह निम्नलिखित तरीके से हो सकती है-

👉 संविधान के संशोधन का आरम्भ संसद के किसी भी सदन में किया जा सकता है किन्तु राज्य विधान मंडल में नही।

👉 विधेयक को मंत्री या गैर सरकारी सदस्यों द्वारा पुर्स्थापित किया जा सकता है।

👉विधेयक को दोनो सदनों में विशेष बहुमत से पारित कराना अनिवार्य है।

👉दोनों ही सदनों में विधेयक अलग अलग पारित होना चाहिए और असहमति या गतिरोध की की स्थिति में संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नही है।

👉 विधेयक के संघीय व्यवस्था से सम्बंधित होने पर उसे आधे राज्यों के विधानमंडल से भी सामान्य बहुमत से पारित होना चाहिए।

👉 राष्ट्रपति विधेयक को सहमती देंगे क्यूंकि वे विधेयक को न तो अपने पास रख सकते है और न ही संसद के पास पुनर्विचार के लिये भेज सकते है। राष्ट्रपति की सहमति के बाद विधेयक अधिनियम बन जाता है।

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👉
52वाँ संशोधन (1985):

संसद और विधान मंडलों के सदस्यों को दल-बदल के आधार पर वर्गीकरण की व्यवस्था दी गई और इस संदर्भ में विस्तृत जानकारी के लिए एक नई अनुसूची (दसवीं अनुसूची) को जोड़ा गया।

👉61वाँ संशोधन (1988)

विपक्ष और राज्य विधान सभा के चुनाव में मतदान की आयु 21 वर्ष से 18 वर्ष कर दी गई।

👉73वाँ और 74वाँ संशोधन (1992):

73वाँ संशोधन अधिनियम:
इस संशोधन के माध्यम से अलौकिक राज संस्था को संवैधानिक बनाया गया।

👉इस अधिनियम में भारत के संविधान का एक नया भाग-IX जोड़ा गया है तथा इसमें 243 से 243O तक के जुलूस शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त अधिनियम में संविधान द्वारा एक नई 11वीं अनुसूची का भी मिलान किया गया है और इसमें परियोजना के 29 संरचनात्मक विषयों को शामिल किया गया है।

👉74वाँ संशोधन अधिनियम:

👉शहरी स्थानीय संस्था 1992 में पी.वी. नरसिम्हा राव की सरकार के दौरान 74वें संशोधन अधिनियम के माध्यम से इसे संवैधानिक बनाया गया था। यह 1 जून, 1993 को लागू हुआ।
इसमें भाग IX-A को जोड़ा गया है और इसमें 243-पी से 243-जेडजी तक के प्रॉजेक्ट को शामिल किया गया है।

👉इसके अलावा इस अधिनियम द्वारा संविधान में 12वीं अनुसूची का भी मिलान किया गया । नगर पालिकाओं के 18 कार्यात्मक मद शामिल हैं।


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👉102वां संशोधन अधिनियम, 2018-

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया।

इस अधिनियम ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को पिछड़े वर्गों से संबंधित कार्यों से मुक्त कर दिया।

इसने राष्ट्रपति को किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को निर्दिष्ट करने का अधिकार भी दिया

।

103वां संशोधन अधिनियम, 2019-

राज्य को नागरिकों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) की उन्नति के लिए कोई विशेष प्रावधान करने का अधिकार दिया गया।

ईडब्ल्यूएस श्रेणी का लाभ प्राप्त करने के लिए ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र की आवश्यकता होती है।

राज्य को शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए कुछ वर्गों के लिए 10% तक सीटें आरक्षित करने की अनुमति दी गई थी, जिसमें अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को छोड़कर निजी शैक्षणिक संस्थान भी शामिल थे, जिन्हें राज्य द्वारा सहायता प्राप्त या गैर-सहायता प्राप्त थी। 10% तक का यह अतिरिक्त आरक्षण पहले से किए गए आरक्षण के अतिरिक्त होगा।

104वां संशोधन अधिनियम, 2020-

लोक सभा और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों की समाप्ति की समय-सीमा को 70 वर्ष से बढ़ाकर 80 वर्ष करना।

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए आरक्षित सीटों को हटाना।

105वां संशोधन अधिनियम, 2020-
इसने सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (एसईबीसी) की पहचान करने और उन्हें मान्यता देने की राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की शक्ति को बहाल कर दिया।

यह संशोधन 15 अगस्त, 2021 से प्रभावी हो गया।


106वां संशोधन अधिनियम, 2020-

इसे महिला आरक्षण अधिनियम के नाम से भी जाना जाता है।

यह विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करता है।

यह संशोधन सितंबर 2023 में पारित किया गया तथा 28 सितंबर 2023 को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई।

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