UPPSC_Rejected_Candidate_list.pdf
5.3 MB
UPPCS MAINS 2025 मेंस फॉर्म में निरस्त कैंडिडेट्स के रोल नम्बर की लिस्ट।
Note 👉आप सभी अपना रोल नम्बर एक बार अवश्य चेक कर लें।
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राष्ट्रपति शासन लगाने की प्रक्रिया
❇️ कारण:-
▪️संवैधानिक तंत्र विफल होना
▪️बहुमत साबित न कर पाना
▪️चुनाव ना हो पाना(युद्ध आपदा आदि)
❇️ राज्यपाल केंद्र को स्थित की रिपोर्ट भेजता है
❇️ प्रधानमंत्री और कैबिनेट, राष्ट्रपति को अनुच्छेद 356 लागू करने का सुझाव देते है
❇️ राष्ट्रपति की घोषणा:-
▪️राष्ट्रपति शासन लागू होता है
▪️राज्य सरकार भंग, विधानसभा निलंबित/भंग
❇️ संसदीय अनुमोदन:-
▪️2 महीने के भीतर संसद के दोनों सदनों से मंजूरी जरूरी
▪️लोकसभा और राज्यसभा में साधारण बहुमत से पास होना चाहिए
❇️ अवधि और विस्तार:-
▪️पहले 6 महीने - बिना संसदीय मंजूरी के
▪️6 महीने के बाद - हर 6 महीने पर संसद की मंजूरी जरूरी (अधिकतम 3 वर्ष तक)
❇️ न्यायिक समीक्षा:- सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती (जैसे 1994 का बोम्मई केस)
❇️ परिणाम:-
▪️प्रशासन राज्यपाल के माध्यम से केंद्र सरकार चलती है
▪️विधानसभा भंग होने पर 6 माह के भीतर चुनाव अनिवार्य
❇️ सरकारिया आयोग:- राजनीतिक दुरुपयोग रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश
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❇️ कारण:-
▪️संवैधानिक तंत्र विफल होना
▪️बहुमत साबित न कर पाना
▪️चुनाव ना हो पाना(युद्ध आपदा आदि)
❇️ राज्यपाल केंद्र को स्थित की रिपोर्ट भेजता है
❇️ प्रधानमंत्री और कैबिनेट, राष्ट्रपति को अनुच्छेद 356 लागू करने का सुझाव देते है
❇️ राष्ट्रपति की घोषणा:-
▪️राष्ट्रपति शासन लागू होता है
▪️राज्य सरकार भंग, विधानसभा निलंबित/भंग
❇️ संसदीय अनुमोदन:-
▪️2 महीने के भीतर संसद के दोनों सदनों से मंजूरी जरूरी
▪️लोकसभा और राज्यसभा में साधारण बहुमत से पास होना चाहिए
❇️ अवधि और विस्तार:-
▪️पहले 6 महीने - बिना संसदीय मंजूरी के
▪️6 महीने के बाद - हर 6 महीने पर संसद की मंजूरी जरूरी (अधिकतम 3 वर्ष तक)
❇️ न्यायिक समीक्षा:- सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती (जैसे 1994 का बोम्मई केस)
❇️ परिणाम:-
▪️प्रशासन राज्यपाल के माध्यम से केंद्र सरकार चलती है
▪️विधानसभा भंग होने पर 6 माह के भीतर चुनाव अनिवार्य
44वां संशोधन 1978 - 1 साल से ज्यादा विस्तार के लिए संसद के दोनों सदनों का बहुमत जरूरी
❇️ सरकारिया आयोग:- राजनीतिक दुरुपयोग रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश
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❤3
📕Up स्पेशल
लोकसभा सीटें:- 80
राज्यसभा सीटें -31
न्यायपालिका: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
( खंडपीठ -लखनऊ )
विधान सभा सीटें -403
विधान परिषद सीटें-100
राजकीय भाषा :- हिंदी, उर्दू
क्षेत्रफल -2,40,928 वर्ग किलोमीटर
राजकीय पक्षी- सारस अथवा क्रौंच
राजकीय पशु :- बारहसिंगा
राजकीय फूल- पलाश या टेंसू
राजकीय वृक्ष - अशोक
राजकीय खेल- हॉकी
राजकीय चिन्ह - एक वृत्त में दो मछली व एक तीर धनुष (रूमी दरवाजा )
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लोकसभा सीटें:- 80
राज्यसभा सीटें -31
न्यायपालिका: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
( खंडपीठ -लखनऊ )
विधान सभा सीटें -403
विधान परिषद सीटें-100
राजकीय भाषा :- हिंदी, उर्दू
क्षेत्रफल -2,40,928 वर्ग किलोमीटर
राजकीय पक्षी- सारस अथवा क्रौंच
राजकीय पशु :- बारहसिंगा
राजकीय फूल- पलाश या टेंसू
राजकीय वृक्ष - अशोक
राजकीय खेल- हॉकी
राजकीय चिन्ह - एक वृत्त में दो मछली व एक तीर धनुष (रूमी दरवाजा )
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UPPSC LT GRADE MUSIC , ARTS , AGRICULTURE, URDU RESULT OUT
https://uppsc.up.nic.in/FooterPages/Results
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LT ग्रेड उर्दू .pdf
197.1 KB
LT ग्रेड उर्दू .pdf
LT ग्रेड कला .pdf
298.6 KB
LT ग्रेड कला .pdf
LT_ग्रेड_कृषि_उद्यानकर्म_.pdf
203 KB
LT_ग्रेड_कृषि_उद्यानकर्म_.pdf
Paper-1_07Feb2026.pdf
139 KB
◾CTET आंसर key पेपर 01✔️
◾07 फरवरी 2026✔️
◾07 फरवरी 2026✔️
Paper-2_07Feb2026.pdf
150.3 KB
◾CTET आंसर key पेपर 02 ✔️
◾07 फरवरी 2026✔️
◾07 फरवरी 2026✔️
❤2
📕केंद्र- राज्य संबंध से संबंधित अनुच्छेद
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#PrelimsBoosterfact #roaro
#roaro #uppcs #bpsc #mppcs #ras #ssccgl #sscgd #ntpc #upp #upssscpet #ssc #Lekhpal #grampanchayatadhikari
#vpo
👉केंद्र राज्यों का संबंध संविधान के भाग 11(अनुच्छेद 245-263) में दिया गया है
👉अनुच्छेद 245
संसद देश में कानून बना सकती है।
विधानमंडल राज्य में कानून बना सकती है।
👉अनुच्छेद 246
संघ सूची ,राज्य सूची व समवर्ती सूची के विषयों का उल्लेख।
👉अनुच्छेद 247
अतिरिक्त न्यायालय बनाया जा सकता है।
👉अनुच्छेद 248
अवशिष्ट सूची।
जो विषय बाद में जुड़े जाएंगे वह केंद्र सरकार के विषय में जोड़े जाएंगे। ex-इसरो, डीआरडीओ, साइबर क्राइम आदि।
👉अनुच्छेद 252
दो या दो से अधिक राज्यों की सहमति हो तो संसद राज्य सूची में भी कानून बना सकती है।
👉अनुच्छेद 253
अंतर्राष्ट्रीय करार या समझौते को प्रभावी बनाने के लिए संसद राज्य सूची में भी कानून बना सकती है।
👉अनुच्छेद 254
विधानमंडल ऐसा कोई कानून नहीं बनाएगी जो संसद के कानून से असंगत हो या मेल ना खाता हो।
👉अनुच्छेद 263
अन्तर्राजीय परिषद का उल्लेख।
सभी राज्य और यूटी के मुख्यमंत्री की केंद्र सरकार द्वारा वर्ष में तीन बार मीटिंग
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📕ब्रिटिश काल में भू राजस्व नीतियां
📕 दूसरी व्यवस्था रैयतवाड़ी व्यवस्था
📕महालवाड़ी पद्धति
👉 भू-राजस्व व्यवस्था कृषक के साथ नहीं, बल्कि प्रत्येक ग्राम अथवा महाल (जागीर का एक भाग) के साथ स्थापित की जाती थी।
✍️ इसके अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति अपनी भूमि छोड़ देता था, तो ग्राम समाज इस भूमि को संभाल लेता था।
✍️ यह ग्राम समाज ही सम्मिलित भूमि (शामलात) तथा अन्य भूमि का स्वामी होता था।
👉यह पद्धति उ.प्र., मध्य प्रांत तथा पंजाब में (कुछ परिवर्तनों के साथ) लागू की गई, जिसके अंतर्गत कुल ब्रिटिश भारत के भू-क्षेत्र का 30 प्रतिशत हिस्सा शामिल था।
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#ro_aro #pcs2025
👉1793 ई. में लॉर्ड कार्नवालिस ने भू-राजस्व की स्थायी बंदोबस्त प्रणाली को प्रारंभ किया।
👉इसे इस्तमरारी, जागीरदारी, मालगुजारी एवं बीसवेदारी आदि भिन्न-भिन्न नामों से भी जाना जाता है।
👉यह व्यवस्था बंगाल, बिहार उड़ीसा तथा उत्तर प्रदेश के वाराणसी तक के क्षेत्र में लागू थी।
✍️ इसके अंतर्गत समूचे ब्रिटिश भारत के क्षेत्रफल का लगभग 19 प्रतिशत हिस्सा शामिल था।
✍️इस व्यवस्था के अंतर्गत जमींदारों के एक नए वर्ग को भू-स्वामी घोषित कर दिया गया, जिसे भूमि के लगान का 10/11 भाग कंपनी को देना था तथा 1/11 भाग अपनी सेवाओं के लिए अपने पास रखना था।
✍️ स्थायी बंदोबस्त के अंतर्गत जमींदार छोटे पूंजीपति (भद्र नवाब) थे।
📕 दूसरी व्यवस्था रैयतवाड़ी व्यवस्था
✍️इस व्यवस्था के जन्मदाता टॉमस मुनरो और कैप्टन रीड थे तथा सर्वप्रथम इसे तमिलनाडु के बारामहल जिले में लागू किया गया।
✍️ तत्पश्चात यह व्यवस्था मद्रास, बंबई के कुछ हिस्से, पूर्वी बंगाल, असम तथा कुर्ग (आधुनिक कर्नाटक का एक भाग) में लागू की गई।
👉इस प्रथा के अंतर्गत रैयतों को भूमि के मालिकाना और कब्जादारी अधिकार दिए गए थे और प्रत्यक्ष रूप से या सीधे तथा व्यक्तिगत रूप से वे स्वयं सरकार को भू-राजस्व का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी थे।
✍️ इस व्यवस्था ने कृषक भू-स्वामित्व की स्थापना की। इसके अंतर्गत कुल ब्रिटिश भारत के भू-क्षेत्र का 51 प्रतिशत हिस्सा शामिल था। इस व्यवस्था के अंतर्गत लगान की वसूली कठोरता से की जाती थी तथा लगान की दर भी काफी ऊंची थी।
📕महालवाड़ी पद्धति
👉 भू-राजस्व व्यवस्था कृषक के साथ नहीं, बल्कि प्रत्येक ग्राम अथवा महाल (जागीर का एक भाग) के साथ स्थापित की जाती थी।
✍️ इसके अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति अपनी भूमि छोड़ देता था, तो ग्राम समाज इस भूमि को संभाल लेता था।
✍️ यह ग्राम समाज ही सम्मिलित भूमि (शामलात) तथा अन्य भूमि का स्वामी होता था।
👉यह पद्धति उ.प्र., मध्य प्रांत तथा पंजाब में (कुछ परिवर्तनों के साथ) लागू की गई, जिसके अंतर्गत कुल ब्रिटिश भारत के भू-क्षेत्र का 30 प्रतिशत हिस्सा शामिल था।
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#ro_aro #pcs2025
🔷♦🔷 भारत के लोकनृत्य 🔷♦🔷
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🔷【आंध्रप्रदेश】----कुचीपुड़ी, घंटामरदाला, ओट्टम थेडल, वेदी नाटकम।
🔷【असम】----बीहू, बीछुआ, नटपूजा, महारास, कालिगोपाल, बागुरुम्बा, नागा नृत्य, खेल गोपाल, ताबाल चोनग्ली, कानोई, झूमूरा होबजानाई।
🔷【बिहार】---जाट– जाटिन, बक्खो– बखैन, पनवारिया, सामा चकवा, बिदेसिया।
🔷【गुजरात】--गरबा, डांडिया रास, टिप्पनी जुरुन, भावई।
🔷【हरियाणा】--झूमर, फाग, डाफ, धमाल, लूर, गुग्गा, खोर, जागोर।
🔷【हिमाचल प्रदेश】---झोरा, झाली, छारही, धामन, छापेली, महासू, नटी, डांगी।
🔷【जम्मू और कश्मीर】---रऊफ, हीकत, मंदजात, कूद डांडी नाच, दमाली।
🔷【कर्नाटक】---यक्षगान, हुट्टारी, सुग्गी, कुनीथा, करगा, लाम्बी।
,🔷【केरल】---कथकली (शास्त्रीय), ओट्टम थुलाल, मोहिनीअट्टम, काईकोट्टिकली।
,🔷【महाराष्ट्र】---लावणी, नकाटा, कोली, लेजिम, गाफा, दहीकला दसावतार या बोहादा।
🔷【ओडीशा】---ओडिसि (शास्त्रीय), सवारी, घूमरा, पैंरास मुनारी, छाउ।
🔷【पश्चिम बंगाल】---काठी, गंभीरा, ढाली, जतरा, बाउल, मरासिया, महाल, कीरतन।
🔷【पंजाब】 ---भांगड़ा, गिद्दा, दफ्फ, धामन, भांड, नकूला।
🔷【राजस्थान】--घूमर, चाकरी, गणगौर, झूलन लीला, झूमा, सुईसिनी, घपाल, कालबेलिया।
🔷【तमिलनाडु】---भरतनाट्यम, कुमी, कोलट्टम, कवाडी।
🔷【उत्तर प्रदेश】---नौटंकी, रासलीला, कजरी, झोरा, चाप्पेली, जैता।
🔷【उत्तराखंड】---गढ़वाली, कुंमायुनी, कजरी, रासलीला, छाप्पेली।
🔷【गोवा】---तरंगमेल, कोली, देक्खनी, फुग्दी, शिग्मो, घोडे, मोडनी, समायी नृत्य, जगर, रणमाले, गोंफ, टून्नया मेल।
🔷【मध्यप्रदेश】---जवारा, मटकी, अडा, खाड़ा नाच, फूलपति, ग्रिदा नृत्य, सालेलार्की, सेलाभडोनी, मंच।
🔷【छत्तीसगढ़】---गौर मारिया, पैंथी, राउत नाच, पंडवाणी, वेडामती, कपालिक, भारथरी चरित्र, चंदनानी।
🔷【झारखंड】---अलकप, कर्मा मुंडा, अग्नि, झूमर, जनानी झूमर, मर्दाना झूमर, पैका, फगुआ, हूंटा नृत्य, मुंदारी नृत्य, सरहुल, बाराओ, झीटका, डांगा, डोमचक, घोरा नाच।
🔷【अरुणाचल प्रदेश】---बुईया, छालो, वांचो, पासी कोंगकी, पोनुंग, पोपीर, बारडो छाम।
🔷【मणिपुर】--डोल चोलम, थांग टा, लाई हाराओबा, पुंग चोलोम, खांबा थाईबी, नूपा नृत्य, रासलीला, खूबक इशेली, लोहू शाह।
🔷【मेघालय】---का शाद सुक मिनसेइम, नॉन्गरेम, लाहो।
🔷【मिजोरम】----छेरव नृत्य, खुल्लम, चैलम, स्वलाकिन, च्वांगलाईज्वान, जंगतालम, पर लाम, सरलामकई/ सोलाकिया, लंगलम।
🔷【नगालैंड】----रंगमा, बांस नृत्य, जीलैंग, सूईरोलियंस, गीथिंगलिम, तिमांगनेतिन, हेतलईयूली।
🔷【त्रिपुरा】---होजागिरी
🔷【सिक्किम】---छू फाट नृत्य, सिकमारी, सिंघई चाम या स्नो लायन डांस, याक छाम, डेनजोंग नेनहा, ताशी यांगकू नृत्य, खूखूरी नाच, चुटके नाच, मारूनी नाच।
🔷【लक्ष्यद्वीप】 --लावा, कोलकाई, परीचाकली
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UPSSSC NEW NOTIFICATION
विज्ञापन संख्या-03-परिक्षा/2026, दिव्यांगजन सशक्तिकरण निदेशालय (शिक्षक संवर्ग) मुख्य परीक्षा (प्रा0अ0प0-2025)/04 का विज्ञापन ।
विज्ञापन संख्या-03-परिक्षा/2026, दिव्यांगजन सशक्तिकरण निदेशालय (शिक्षक संवर्ग) मुख्य परीक्षा (प्रा0अ0प0-2025)/04 का विज्ञापन ।