📕कैबिनेट मिशन योजना (1946)
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👉कैबिनेट मिशन 24 मार्च, 1946 को दिल्ली आया
👉 इसके अध्यक्ष भारत मंत्री लॉर्ड पैथिक लॉरेंस थे तथा अन्य दो सदस्य स्टैफोर्ड क्रिप्स (अध्यक्ष बोर्ड ऑफ ट्रेड) तथा ए.वी. एलेक्जेंडर (नौसेना मंत्री) थे।
👉कैबिनेट मिशन ने त्रिस्तरीय शासन व्यवस्था को सुझाया।
👉 प्रांतों के छोटे अथवा बड़े गुट बनाने के अधिकार की पुष्टि की तथा प्रांतों को अ, ब और स तीन श्रेणियों में विभक्त किया।
👉 कैबिनेट मिशन ने अपने प्रस्तावों की घोषणा की, इसके प्रमुख प्रस्ताव थे-
(1) भारत की एकता बनाई रखी जाए।
(2) मुस्लिम लीग की पाकिस्तान कीमांग ठुकरा दी गई।
(3) भारत एक संघ होगा जिसमें ब्रिटिश प्रांत तथा देशी रियासतें शामिल होंगी।
(4) संविधान निर्मात्री संस्था या संविधान सभा का गठन प्रांतीय विधानसभाओं तथा देशी रियासतों के प्रतिनिधियों द्वारा किया जाए।
कैबिनेट मिशन, 1946 ने वायसराय की एक्जीक्यूटिव काउंसिल का पुनर्गठन कर अंतरिम सरकार के गठन का सुझाव दिया
👉कैबिनेट मिशन योजना के पक्ष में गांधीजी पूरी तरह से थे।
👉 इस योजना के संदर्भ में गांधीजी ने कहा-' यह योजना उस समय की परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में सबसे उत्कृष्ट योजना थी, जिसमें ऐसे बीज थे, जिनसे दुःख की मारी भारत भूमि यातना से मुक्त हो सकती थी।"
👉 मौलाना अबुल कलाम आजाद कैबिनेट मिशन के भारत आगमन के समय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष थे।
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Q क्या कॉकरोच जनता पार्टी को कॉकरोच चुनाव चिह्न दिया जा सकता है?
Anonymous Poll
48%
हा
43%
नहीं
12%
मुझे नहीं पता
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Q क्या कॉकरोच जनता पार्टी को कॉकरोच चुनाव चिह्न दिया जा सकता है?
भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने 1990 के दशक के बाद से किसी भी नए राजनीतिक दल को पशु, पक्षी या कीट-पतंगों के चुनाव चिह्न आवंटित करना बंद कर दिया है।
यह निर्णय पशु क्रूरता को रोकने और चुनाव प्रचार के दौरान जानवरों के दुरुपयोग से बचने के लिए लिया गया था।
हालांकि, बहुजन समाज पार्टी (हाथी) जैसी जो पुरानी पार्टियां हैं, उनके पास पहले से आवंटित प्रतीक होने के कारण अपवाद हैं।
वर्तमान में, 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) चुनाव आयोग के साथ कोई पंजीकृत राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि एक ऑनलाइन व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन/प्रेशर समूह है।
नियमों के अंतर्गत, यदि कोई नया दल पंजीकृत होता है, तो उसे चुनाव आयोग द्वारा जारी 'मुक्त प्रतीकों' (Free Symbols) की सूची में से ही कोई चिह्न दिया जा सकता है, जिसमें घरेलू उपकरण, फल, सब्जियां और अन्य निर्जीव वस्तुएं शामिल होती हैं।
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यह निर्णय पशु क्रूरता को रोकने और चुनाव प्रचार के दौरान जानवरों के दुरुपयोग से बचने के लिए लिया गया था।
हालांकि, बहुजन समाज पार्टी (हाथी) जैसी जो पुरानी पार्टियां हैं, उनके पास पहले से आवंटित प्रतीक होने के कारण अपवाद हैं।
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नियमों के अंतर्गत, यदि कोई नया दल पंजीकृत होता है, तो उसे चुनाव आयोग द्वारा जारी 'मुक्त प्रतीकों' (Free Symbols) की सूची में से ही कोई चिह्न दिया जा सकता है, जिसमें घरेलू उपकरण, फल, सब्जियां और अन्य निर्जीव वस्तुएं शामिल होती हैं।
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पशुपति के रूप में संदर्भित इस आकृति ने तीन सींगों वाला सिर पहना हुआ है
👉 उसके चारों ओर जानवर हैं।
👉आकृति के बाईं ओर एक हाथी और एक बाघ है
👉जबकि दाईं ओर एक गैंडा और एक भैंसा दिखाई देता है।
👉आकृति की सीट के नीचे दो मृग दिखाए गए हैं
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लेखक - रचना/पुस्तकें
जियाउद्दीन बरनी - तारीख-ए-फिरोजशाही
हसन निजामी - ताजुल मासिर
मिनहाज-उस-सिराज - तबकत-ए-नासिरी
याहिया-बिन-अहमद - तारीख-ए-मुबारकशाही
अमीर खुसरो - खजाइन-उल-फतूह
जियाउद्दीन बरनी - फतवा-ए-जहांदारी
मुल्ला दाउद - चांदायन
दामोदर कवि - पद्मावती कथा
सोमनाथ - राग विबोध
अमीर खुसरो - आशिका
शम्स-ए-सिराज-अफीफ - तारीख-ए-फिरोजशाही
अमीर खुसरो - तुगलकनामा
गुलबदन बेगम - हुमायूंनामा
अलबरूनी - तारीख-ए-हिंद/किताब-उल-हिंद
खुसरो - तारीख-ए-दिल्ली
इब्नबतूता - रेहला
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📕प्रमुख संविधान संशोधन
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52वाँ संशोधन (1985):
संसद और विधान मंडलों के सदस्यों को दल-बदल के आधार पर वर्गीकरण की व्यवस्था दी गई और इस संदर्भ में विस्तृत जानकारी के लिए एक नई अनुसूची (दसवीं अनुसूची) को जोड़ा गया।
👉61वाँ संशोधन (1988)
विपक्ष और राज्य विधान सभा के चुनाव में मतदान की आयु 21 वर्ष से 18 वर्ष कर दी गई।
👉73वाँ और 74वाँ संशोधन (1992):
73वाँ संशोधन अधिनियम:
इस संशोधन के माध्यम से अलौकिक राज संस्था को संवैधानिक बनाया गया।
👉इस अधिनियम में भारत के संविधान का एक नया भाग-IX जोड़ा गया है तथा इसमें 243 से 243O तक के जुलूस शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त अधिनियम में संविधान द्वारा एक नई 11वीं अनुसूची का भी मिलान किया गया है और इसमें परियोजना के 29 संरचनात्मक विषयों को शामिल किया गया है।
👉74वाँ संशोधन अधिनियम:
👉शहरी स्थानीय संस्था 1992 में पी.वी. नरसिम्हा राव की सरकार के दौरान 74वें संशोधन अधिनियम के माध्यम से इसे संवैधानिक बनाया गया था। यह 1 जून, 1993 को लागू हुआ।
इसमें भाग IX-A को जोड़ा गया है और इसमें 243-पी से 243-जेडजी तक के प्रॉजेक्ट को शामिल किया गया है।
👉इसके अलावा इस अधिनियम द्वारा संविधान में 12वीं अनुसूची का भी मिलान किया गया । नगर पालिकाओं के 18 कार्यात्मक मद शामिल हैं।
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🔰संविधान में संशोधन की प्रक्रिया
👉संविधान के भाग 20 के अनुच्छेद 368 में संसद को संविधान एवं इसकी व्यवस्था में संशोधन की शक्ति प्रदान करता है।
यह प्रावधान करता है कि संसद अपनी संवैधानिक शक्ति का प्रयोग करते हुए संविधान के किसी उपबंध कापरिवर्धन, परिवर्तन या निरसन के रूप में संशोधन कर सकती है।
👉हलाकि संसद उन व्यवस्थाओ को संशोधित नही कर सकती जो संविधान के मूल ढांचे की संरचना से सम्बद्ध हो यह व्यवस्था उच्चतम न्यायलय द्वारा केशवानंद भारती मामले (1973) में की।
👉अनुछेद 368 के अंतर्गत यह निम्नलिखित तरीके से हो सकती है-
👉 संविधान के संशोधन का आरम्भ संसद के किसी भी सदन में किया जा सकता है किन्तु राज्य विधान मंडल में नही।
👉 विधेयक को मंत्री या गैर सरकारी सदस्यों द्वारा पुर्स्थापित किया जा सकता है।
👉विधेयक को दोनो सदनों में विशेष बहुमत से पारित कराना अनिवार्य है।
👉दोनों ही सदनों में विधेयक अलग अलग पारित होना चाहिए और असहमति या गतिरोध की की स्थिति में संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नही है।
👉 विधेयक के संघीय व्यवस्था से सम्बंधित होने पर उसे आधे राज्यों के विधानमंडल से भी सामान्य बहुमत से पारित होना चाहिए।
👉 राष्ट्रपति विधेयक को सहमती देंगे क्यूंकि वे विधेयक को न तो अपने पास रख सकते है और न ही संसद के पास पुनर्विचार के लिये भेज सकते है। राष्ट्रपति की सहमति के बाद विधेयक अधिनियम बन जाता है।
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पूर्वावलोकन_भारतीय_इतिहास_भाग_2_2026_2612_C_E_Book_combined_1.pdf
15.6 MB
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पूर्वावलोकन_सामान्य_भूगोल_भाग_3_2026_2613_C_E_Book_combined.pdf
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पूर्वावलोकन_राज्य_आधारित_प्रश्न_भाग_8a_उत्तर_प्रदेश_एवं_उत्तराखंड2.pdf
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पूर्वावलोकन_सामान्य_विज्ञान_भाग_7_2026_C_E_Book_.pdf
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