𝐀 𝐨𝐧𝐞 𝐉𝐮𝐝𝐢𝐜𝐢𝐚𝐥 𝐀𝐜𝐚𝐝𝐞𝐦𝐲 (करें अपनी तैयारी बेहतर)
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A one Judicial Academy-Hindi
विधि संबंधी परीक्षाओं की "करें अपनी तैयारी बेहतर"

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प्रारम्भिक उपचार के मुताबिक बच्ची खतरे से बाहर और सुरक्षित है, परिवार को पहचान रही है ।
हालांकि उसका ऑपरेशन होना है और मस्तिष्क पर दूरगामी प्रभाव होने की संभावना है ।
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उत्तराखंड APO भर्ती
संभवतः 15 नवम्बर तक आ जाएगी ।
आंध्र प्रदेश: शिक्षक के सामने छात्रा का गला आरी से काटा, हालात गंभीर
▪️प्रारंभिक वजह लड़की द्वारा प्रपोजल स्वीकार न करना
▪️बचाव में आई दूसरी लड़की भी घायल
▪️लड़की के रिश्ते में चाचा लगता है आरोपी
वकीलो से विवाद को लेकर दिल्ली पुलिस के ACP मनस्वी वशिष्ठ दर्जनों पुलिस कर्मियों के साथ धरने पर बैठे

पूरा मामला पूर्वी दिल्ली के शाहदरा थाने में पुलिसकर्मियों और कड़कड़डूमा कोर्ट के वकीलों के बीच हुई हिंसक झड़प से शुरू हुआ।
▪️वकीलों का आरोप: झड़प के दौरान एक वकील (ललित बंसल) के सिर में गंभीर चोट आई। वकीलों ने आरोप लगाया कि गांधी नगर के ACP मनस्वी वशिष्ठ ने उन पर पिस्तौल तानी और दुर्व्यवहार किया।
▪️पुलिस का पक्ष: पुलिस का कहना था कि वकीलों के एक गुट ने थाने के अंदर आकर थानाध्यक्ष (SHO) के दफ्तर में बदतमीजी की, पुलिसकर्मियों से मारपीट की और सरकारी काम में बाधा डाली। पुलिस ने वकीलों के खिलाफ FIR भी दर्ज की।

इस झड़प के विरोध में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के वकीलों ने पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन काम-बंद हड़ताल शुरू कर दी। अदालतों में बढ़ता तनाव देखकर पुलिस विभाग ने दबाव में आकर 28 अक्टूबर को एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के SHO अरुण कुमार का ट्रांसफर गैर-महत्वपूर्ण यूनिट्स में कर दिया। इसके बाद वकीलों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली।

शीर्ष अधिकारियों द्वारा वकीलों के आगे झुकने और अपने ही साथियों के खिलाफ ट्रांसफर की कार्रवाई करने से निचले स्तर के पुलिसकर्मियों में भारी नाराजगी फैल गई। उनका मानना है कि:
• इस फैसले से पुलिस बल का मनोबल गिरता है।
• वकील अक्सर पुलिसवालों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट करते हैं, लेकिन कार्रवाई पुलिस पर ही हो जाती है।

इसी नाराजगी के चलते वाट्सएप ग्रुप्स पर संदेश भेजकर जवान 2 नवंबर की सुबह दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर जमा हो गए। वे दोनों अधिकारियों के ट्रांसफर को रद्द करने और पुलिस कमिश्नर के साथ संपर्क सभा की मांग कर रहे हैं।

अनोखी स्थिति: पुलिस ही पुलिस को रोक रही है
चूंकि पुलिस बल में सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन प्रतिबंधित है, इसलिए वरिष्ठ अधिकारियों ने अन्य जिला कप्तानों (DCPs) को निर्देश दिए कि वे अपने स्टाफ को मुख्यालय पहुंचने से रोकें।

मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे जवानों को समझाने और हटाने के लिए खुद दिल्ली पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और पैरामिलिट्री फोर्स को तैनात किया गया।

यह घटना दिल्ली पुलिस के इतिहास में बेहद दुर्लभ है, लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले नवंबर 2019 में तीस हजारी कोर्ट में पार्किंग विवाद को लेकर पुलिस और वकीलों में बड़ी हिंसक झड़प हुई थी। उस समय भी वकीलों द्वारा पुलिसकर्मियों की पिटाई के विरोध में 3,000 से अधिक दिल्ली पुलिस के जवान और उनके परिवार 11 घंटे तक पुलिस मुख्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए थे।
यह महाशय वकीलो को बहरूपिया और गुंडा बोल रहे है। 5 वकीलो के साथ थाने मे दिखने पर विधि विरूध जामाव मानकर कार्यवाही की बात कर रहे है।

पुलिस कर्मियों की ऐसी सभा अवैधानिक है । Police Forces (Restriction of Rights) Act, 1966 की धारा 3 के तहत पुलिसकर्मियों को ट्रेड यूनियन बनाने, किसी राजनीतिक गतिविधि में भाग लेने, या सार्वजनिक प्रदर्शन व हड़ताल करने का अधिकार नहीं होता है।

~ सीधी बात, नो बकवास
पुलिस वालो की अकड़ वकील ही निकालते है और हमेशा निकालते रहेंगे।
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दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने के बाद ACP मनस्वी वशिष्ठ सस्पेंड
दिल्ली पुलिस ने असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) मनस्वी वशिष्ठ को सस्पेंड कर दिया है। यह कार्रवाई पुलिस मुख्यालय के बाहर कर्मियों द्वारा किए गए विरोध-प्रदर्शन के बाद की गई है।
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सस्पेंड होने के बाद ACP मनस्वी वशिष्ठ के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचा मामला
दिल्ली हाईकोर्ट के वकील चाहते थे कि हाईकोर्ट इस मामले मे स्वत : संज्ञान ले, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वत : संज्ञान लेने से मना करने के बाद याचिका दाखिल करने का वकीलों को सुझाव दिया, मतलब साफ है की हाईकोर्ट इस पर अब सख्त फैसला देगा ।

ACP मनस्वी वशिष्ठ व अन्य के खिलाफ वकीलों ने अदालत को बताया कि ACP ने वकीलों के लिये AK-47 और काले कोट के गुंडे, बहरूपिए जैसी आपत्तिजनक और धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया, दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान ना लेकर सेफ बैटिंग करनी चाही अब याचिका दायर होने के बाद क्या होता है इस पर सबकी नज़र है ।
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