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CG psc / Vyapam की तैयारी के लिए तैयारी
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विनोद कुमार शुक्ल का आज निधन हो गया है😔😢
विनम्र श्रद्धांजलि 🌺🌸🌼

पिछले ही महीने उन्हें हिन्दी साहित्य के सर्वोच्च सम्मान, ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में 1 जनवरी 1937 को जन्मे विनोद कुमार शुक्ल, लगभग नौ दशक के जीवन-सफर के साथ, हिन्दी साहित्य में ऐसे लेखक के रूप में प्रतिष्ठित थे, जो बहुत धीमे बोलते थे लेकिन जिनकी साहित्यिक आवाज़ दूर-दूर तक सुनाई देती थी.
मध्यमवर्गीय, साधारण और लगभग अनदेखे रह जाने वाले जीवन को उन्होंने अपनी कविताओं, कहानियों और उपन्यासों में अद्भुत कोमलता और सूक्ष्मता के साथ जगह दी. उनके यहाँ एक साधारण कमरा, एक खिड़की, घास का छोटा-सा टुकड़ा, एक पेड़ भी, पूरे ब्रह्मांड की तरह खुल जाता है.
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उनका पहला कविता-संग्रह ‘लगभग जय हिन्द’ 1971 में प्रकाशित हुआ, जिसके साथ ही उनकी विशिष्ट भाषिक बनावट, चुप्पी और भीतर तक उतरती संवेदनाएँ हिन्दी कविता के परिदृश्य में दर्ज होने लगीं.

इसके बाद ‘वह आदमी चला गया नया गरम कोट पहिनकर विचार की तरह’, ‘सब कुछ होना बचा रहेगा’, ‘अतिरिक्त नहीं’, ‘कविता से लंबी कविता’, ‘आकाश धरती को खटखटाता है’, ‘पचास कविताएँ’, ‘कभी के बाद अभी’, ‘कवि ने कहा’, ‘चुनी हुई कविताएँ’ और ‘प्रतिनिधि कविताएँ’ जैसे संग्रहों ने उन्हें समकालीन हिन्दी कविता के सबसे मौलिक स्वरों में शामिल कर दिया.
कथा-साहित्य में उनके उपन्यास ‘नौकर की कमीज़’ ने 1979 में हिन्दी कहानी और उपन्यास की धारा को एक अलग मोड़ दिया.
इस उपन्यास पर बाद में मणि कौल ने फ़िल्म भी बनाई. आगे चलकर ‘खिलेगा तो देखेंगे’, ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’, ‘हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी और बौना पहाड़’, ‘यासि रासा त’ और ‘एक चुप्पी जगह’ के माध्यम से उन्होंने लोकआख्यान, स्वप्न, स्मृति, मध्यवर्गीय जीवन और मनुष्य की जटिल आकांक्षाओं को एक विशिष्ट कथा-शिल्प में रूपांतरित किया.
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Let's revise polity
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Let's revise
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“जो आदमी चलता रहता है,
वह रास्ता भी बना लेता है।”
— विनोद कुमार शुक्ल
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राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने 25 दिसंबर, 2025 को , सुशासन दिवस और पंडित रघुनाथ मुर्मु द्वारा 1925 में ओल चिकी लिपि विकसित किए जाने के शताब्दी वर्ष के अवसर पर संथाली भाषा में अनुवादित भारतीय संविधान का राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में विमोचन किया। इसे विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग द्वारा पहली बार प्रकाशित किया गया है।
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नए मुख्य सूचना आयुक्त राजकुमार गोयल
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Paper 7 part 3
At a Glance: Viksit Bharat Shiksha Adhishthan Bill, 2025

The Bill introduces a simplified, future-ready framework for higher education governance in India by establishing a single system for minimum academic standards, replacing multiple legacy regulators, and strengthening institutional autonomy, accreditation, and quality assurance.

With a technology-driven, transparent regulatory process, it promotes multidisciplinary learning, research, and innovation in line with NEP 2020, supporting globally competitive, outcome-oriented HEIs.
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Cgpsc mains 2024 Top 5 highest marks
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Wishing you a year full of Focus, Fortitude, and a Final Selection.....May 2026 be the year your hard work meets its destination. Happy New Year, future Officer
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नमस्ते मेरे प्यारे दोस्तो,

जैसे ही हम 2026 में कदम रख रहे हैं, मुझे आप सभी के दिन-रात की मेहनत के लिए बहुत सम्मान है।

मुझे पता है कि अभी... आप में से कई लोग देर रात तक पढ़ाई कर रहे हैं।
अपने परिवार और दोस्तों से दूर
परिवार की उम्मीदों को मैनेज कर रहे हैं।
चुपचाप अपने अंदर के शक से लड़ रहे हैं।

हर दिन... आप सिर्फ़ एक एग्जाम की तैयारी नहीं कर रहे हैं।
आप एक इंसान के तौर पर ज़्यादा मज़बूत, शांत और समझदार बन रहे हैं।

2026 में, अपने साथ नरमी बरतें।
मुश्किल दिनों में, खुद पर सख़्त न हों... बस आगे बढ़ते रहें।
छोटी-छोटी जीतों का जश्न मनाएं।
अपना "WHY" कभी न भूलें।

हाँ, आगे का रास्ता अभी भी लंबा है।
लेकिन अब आप वह इंसान नहीं हैं जिसने यह सफ़र शुरू किया था।
अब आप ज़्यादा समझदार हैं। अब ज़्यादा मज़बूत हैं। अब ज़्यादा सहनशील हैं।

चाहे यह आपका पहला अटेम्प्ट हो या आखिरी,
चाहे आप बिलासपुर में हों या अपने घर या गाँव से तैयारी कर रहे हों...
आपका सपना सही है और आपकी मेहनत मायने रखती है।

मेहनत करते रहना... खुद पर यकीन रखना...
और अपनी इस यात्रा की तुलना कभी किसी से न करना
क्योंकि सूरज और चाँद के बीच कोई तुलना नहीं है...
जब जिसका समय आता है वह चमकता ही है।
आपका भी समय आएगा... ज़रूर आएगा... बस समय की बात है...

मुझे आपके साथ चलने पर गर्व महसूस होता है...
कभी बड़े भाई के तौर पर,
कभी गाइड के तौर पर,
कभी मेंटर के तौर पर,
और कभी... बस देवेंद्र के तौर पर।

लेकिन सबसे बढ़कर... आप मेरा परिवार हैं।

आगे बढ़ते रहें।
आपके बदलाव का सफ़र पहले ही शुरू हो चुका है...
और एक दिन... यह कई लोगों को प्रेरित करेगा।

हैप्पी न्यू ईयर, मेरे सिपाहियों ❤️

दिल से शुभकामनाओं के साथ
               -देवेंद्र 🙏
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