आचार संहिता के उल्लंघन के लिए हरमनप्रीत कौर को दो अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए निलंबित कर दिया गया।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर को आईसीसी आचार संहिता के दो अलग-अलग उल्लंघनों के बाद अगले दो अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए निलंबित कर दिया गया है।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर को आईसीसी आचार संहिता के दो अलग-अलग उल्लंघनों के बाद अगले दो अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए निलंबित कर दिया गया है।
केंद्रीय मंत्री अमित शाह द्वारा "मेमोरीज़ नेवर डाई" नामक पुस्तक का विमोचन किया गया है।
अमित शाह ने तमिलनाडु के रामनाथपुरम की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान पुस्तक का विमोचन किया।
◆यह पुस्तक दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन और विरासत के लिए एक श्रद्धांजलि है।
●डॉ. एपीजेएम नसीमा मरैकयार और वैज्ञानिक डॉ. वाई.एस. राजन ने इस पुस्तक का सह-लेखन किया है।
श्री शाह ने कहा की डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम द्वारा अंतरिक्ष विज्ञान का दिखाया गया सपना साकार होता दिखाई दे रहा है।
अमित शाह ने तमिलनाडु के रामनाथपुरम की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान पुस्तक का विमोचन किया।
◆यह पुस्तक दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन और विरासत के लिए एक श्रद्धांजलि है।
●डॉ. एपीजेएम नसीमा मरैकयार और वैज्ञानिक डॉ. वाई.एस. राजन ने इस पुस्तक का सह-लेखन किया है।
श्री शाह ने कहा की डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम द्वारा अंतरिक्ष विज्ञान का दिखाया गया सपना साकार होता दिखाई दे रहा है।
. मानव तस्करी के खिलाफ विश्व दिवस: 30 जुलाई
मानव तस्करी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए यह हर साल 30 जुलाई को मनाया जाता है।
मानव तस्करी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए यह हर साल 30 जुलाई को मनाया जाता है।
"Class 6 Science Chapter 8 Notes" 👈click here
◆ शरीर के विभिन्न भागों को उसी स्थान से मोड़ा व घुमाया जा सकता है जहां पर दो हिस्से एक दूसरे से जुड़े हो। इन स्थानों को संधि कहते हैं।
◆संधि शरीर के उस भाग को कहते हैं जहां पर दो हिस्से एक दूसरे से जुड़े होते हैं।
◆जो अस्थियां संधियों पर हील नहीं सकती, ऐसी संधियों को अचल संधि कहते हैं।
◆हमारे शरीर की सभी अस्थियां हमारे शरीर को सुंदर आकृति प्रदान करने के लिए एक ढांचे का निर्माण करती है इस ढांचे को कंकाल कहते हैं।
◆मानव कंकाल अनेक अस्थियों, संधियों एवं उपास्थियो से मिलकर बना होता है।
◆संकुचन की अवस्था में पेशी छोटी, कठोर एवं मोटी हो जाती है यह अस्थि को खींचती है।
◆मछली का सिर एवं पूछ उसके मध्य भाग की अपेक्षा पतला एवं नुकीला होता है शरीर की ऐसी आकृति धारा रेखीय कहलाती है।
'गेट ऑफ एनिमल्स' अरस्तु द्वारा पुस्तक लिखी गई है अरस्तु प्रसिद्ध ग्रीक दार्शनिक थे।
Book's Notes
◆अस्थियां एवम उपास्थियां मानव कंकाल बनाते हैं यह शरीर का पिंजर बनाता है और इसे एक आकृति भी देता है कंकाल चलने में सहायक है और आंतरिक अंगों की रक्षा करता है।
◆मानव कंकाल की खोपड़ी, मेरुदंड, पसलियां, वक्ष की अस्थि, कंधे एवं श्रोणि, मेखला तथा हाथ एवं पांव की अस्थियों से बनता है
◆पेशियों के जोड़े के एकांतर क्रम में सिकुड़ने एवं फैलने से अस्थियां गति करती है
◆अस्थियों की संधियां अनेक प्रकार की होती है यह उस संधि की प्रकृति एवं गति की दिशा पर निर्भर करता है।
◆पक्षियों की दृढ़ पेशियां तथा हल्की अस्थियां मिलकर उन्हें उड़ने में सहायता करती है यह पंखों को फड़फड़ा कर उड़ते हैं।
◆मछली शरीर के दोनों और एकांतर क्रम में वलय बनाकर जल में तैरती है।
◆सर्प अपने शरीर के दोनों और एकांतर कर्म में वलय बनाते हुए भूमि पर वलयाकार गति करता हुआ आगे कि ओर फिसलता हैं। बहुत सारी अस्थियां यवम उससे जुड़ी पेशियां शरीर को आगे की और धक्का देती हैं।
◆तिलचट्टे का शरीर एवं पैर कठोर आवरण से ढके होते हैं जो बाह्य कंकाल बनाता है वक्ष की पेशियां तीन जोड़ी पैरों एवं दो जोड़ी पंखों से जुड़ी होती है जो तिलचट्टे को चलने एवं उड़ने में सहायता करती हैं।
◆केंचुए में गति शरीर की पेशियों के बारी-बारी से विस्तरण एवं संकुचन से होती है। शरीर की अध: सतह पर शूक केंचुए को भूमि पर पकड़ बनाने में सहायक है।
◆घोंघा पेशीय पाद की सहायता से चलता है।
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◆ शरीर के विभिन्न भागों को उसी स्थान से मोड़ा व घुमाया जा सकता है जहां पर दो हिस्से एक दूसरे से जुड़े हो। इन स्थानों को संधि कहते हैं।
◆संधि शरीर के उस भाग को कहते हैं जहां पर दो हिस्से एक दूसरे से जुड़े होते हैं।
◆जो अस्थियां संधियों पर हील नहीं सकती, ऐसी संधियों को अचल संधि कहते हैं।
◆हमारे शरीर की सभी अस्थियां हमारे शरीर को सुंदर आकृति प्रदान करने के लिए एक ढांचे का निर्माण करती है इस ढांचे को कंकाल कहते हैं।
◆मानव कंकाल अनेक अस्थियों, संधियों एवं उपास्थियो से मिलकर बना होता है।
◆संकुचन की अवस्था में पेशी छोटी, कठोर एवं मोटी हो जाती है यह अस्थि को खींचती है।
◆मछली का सिर एवं पूछ उसके मध्य भाग की अपेक्षा पतला एवं नुकीला होता है शरीर की ऐसी आकृति धारा रेखीय कहलाती है।
'गेट ऑफ एनिमल्स' अरस्तु द्वारा पुस्तक लिखी गई है अरस्तु प्रसिद्ध ग्रीक दार्शनिक थे।
Book's Notes
◆अस्थियां एवम उपास्थियां मानव कंकाल बनाते हैं यह शरीर का पिंजर बनाता है और इसे एक आकृति भी देता है कंकाल चलने में सहायक है और आंतरिक अंगों की रक्षा करता है।
◆मानव कंकाल की खोपड़ी, मेरुदंड, पसलियां, वक्ष की अस्थि, कंधे एवं श्रोणि, मेखला तथा हाथ एवं पांव की अस्थियों से बनता है
◆पेशियों के जोड़े के एकांतर क्रम में सिकुड़ने एवं फैलने से अस्थियां गति करती है
◆अस्थियों की संधियां अनेक प्रकार की होती है यह उस संधि की प्रकृति एवं गति की दिशा पर निर्भर करता है।
◆पक्षियों की दृढ़ पेशियां तथा हल्की अस्थियां मिलकर उन्हें उड़ने में सहायता करती है यह पंखों को फड़फड़ा कर उड़ते हैं।
◆मछली शरीर के दोनों और एकांतर क्रम में वलय बनाकर जल में तैरती है।
◆सर्प अपने शरीर के दोनों और एकांतर कर्म में वलय बनाते हुए भूमि पर वलयाकार गति करता हुआ आगे कि ओर फिसलता हैं। बहुत सारी अस्थियां यवम उससे जुड़ी पेशियां शरीर को आगे की और धक्का देती हैं।
◆तिलचट्टे का शरीर एवं पैर कठोर आवरण से ढके होते हैं जो बाह्य कंकाल बनाता है वक्ष की पेशियां तीन जोड़ी पैरों एवं दो जोड़ी पंखों से जुड़ी होती है जो तिलचट्टे को चलने एवं उड़ने में सहायता करती हैं।
◆केंचुए में गति शरीर की पेशियों के बारी-बारी से विस्तरण एवं संकुचन से होती है। शरीर की अध: सतह पर शूक केंचुए को भूमि पर पकड़ बनाने में सहायक है।
◆घोंघा पेशीय पाद की सहायता से चलता है।
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"Class 6 Science Chapter 9 Notes"
●समुंद्र में जंतु एवं पौधे लवणीय जल (खारे पानी) में रहते हैं तथा श्वसन के लिए जल में मिले वायु ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं।
●रेगिस्तान (मरुस्थल) दिन में बहुत गर्म होता हैं और रात में बहुत ज्यादा ठंडा होता है।
●जिन विशेष संरचनाएं विशिष्ट संरचनाएं अथवा स्वभाव की उपस्थिति किसी पौधे अथवा जंतु को उसके परिवेश में रहने के योग्य बनाती है उसे 'अनुकूलन' कहते हैं।
●आवास :- किसी सजीव का वह स्थान जिसमें वह रहता है उसका आवास कहलाता है।
●स्थलीय आवास :- जमीन पर पाए जाने वाले पौधे एवं जंतुओं के आवास को स्थानीय आवास कहते हैं।
●जलीय आवास :- जलाशय, दल-दल, झील, नदियां एवं समुद्र जहां पौधे एवं जंतु जल में रहते हैं उसे जलीय आवास है।
●जैव घटक :- किसी आवास में पाए जाने वाले सभी जीव जैसे कि पौधे एवं जंतु उसके जैव घटक हैं।
●अजैव घटक :- चट्टान, मिट्टी, वायु एवं जल जैसी अनेक निर्जीव वस्तुएं आवास के अजैव घटक हैं।
सूर्य का प्रकाश एवं ऊष्मा भी परिवेश के अजैव घटक है।
●पर्यनुकूलन :- अपने परिवेश में होने वाले परिवर्तनों के साथ समाजस्य स्थापित करने के लिए कुछ जीवो में थोड़े समय के लिए परिवर्तन हो सकते हैं अल्प अवधि में किसी एक जीव के शरीर में होने वाले यह छोटे-छोटे परिवर्तन पर्यनुकूलन कहलाते हैं। जैसे :- यदि हम मैदानी क्षेत्र में रहते हैं और अचानक ही ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र में चले जाए तो हमें कुछ दिनों तक सांस लेने में शारीरिक व्यायाम में असुविधा हो सकती है।
◆ पहाड़ पर हमें तीव्र गति से सोंग्स देना पड़ता है। कुछ दिनों बाद हमारा शरीर पर्वतीय क्षेत्र के वातावरण के प्रति अपने आप को ढाल लेता है तथा हमें श्वास लेने में कोई परेशानी नहीं होती है।
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●समुंद्र में जंतु एवं पौधे लवणीय जल (खारे पानी) में रहते हैं तथा श्वसन के लिए जल में मिले वायु ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं।
●रेगिस्तान (मरुस्थल) दिन में बहुत गर्म होता हैं और रात में बहुत ज्यादा ठंडा होता है।
●जिन विशेष संरचनाएं विशिष्ट संरचनाएं अथवा स्वभाव की उपस्थिति किसी पौधे अथवा जंतु को उसके परिवेश में रहने के योग्य बनाती है उसे 'अनुकूलन' कहते हैं।
●आवास :- किसी सजीव का वह स्थान जिसमें वह रहता है उसका आवास कहलाता है।
●स्थलीय आवास :- जमीन पर पाए जाने वाले पौधे एवं जंतुओं के आवास को स्थानीय आवास कहते हैं।
●जलीय आवास :- जलाशय, दल-दल, झील, नदियां एवं समुद्र जहां पौधे एवं जंतु जल में रहते हैं उसे जलीय आवास है।
●जैव घटक :- किसी आवास में पाए जाने वाले सभी जीव जैसे कि पौधे एवं जंतु उसके जैव घटक हैं।
●अजैव घटक :- चट्टान, मिट्टी, वायु एवं जल जैसी अनेक निर्जीव वस्तुएं आवास के अजैव घटक हैं।
सूर्य का प्रकाश एवं ऊष्मा भी परिवेश के अजैव घटक है।
●पर्यनुकूलन :- अपने परिवेश में होने वाले परिवर्तनों के साथ समाजस्य स्थापित करने के लिए कुछ जीवो में थोड़े समय के लिए परिवर्तन हो सकते हैं अल्प अवधि में किसी एक जीव के शरीर में होने वाले यह छोटे-छोटे परिवर्तन पर्यनुकूलन कहलाते हैं। जैसे :- यदि हम मैदानी क्षेत्र में रहते हैं और अचानक ही ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र में चले जाए तो हमें कुछ दिनों तक सांस लेने में शारीरिक व्यायाम में असुविधा हो सकती है।
◆ पहाड़ पर हमें तीव्र गति से सोंग्स देना पड़ता है। कुछ दिनों बाद हमारा शरीर पर्वतीय क्षेत्र के वातावरण के प्रति अपने आप को ढाल लेता है तथा हमें श्वास लेने में कोई परेशानी नहीं होती है।
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सजीव जीवो के लक्ष्ण :-
● सजीव वस्तुओं को भोजन की आवश्यकता होती है।
●सजीवों में वृद्धि होती है।
●सभी सजीव शोषण करते हैं /सांस लेते हैं।
●सभी सजीव उद्दीपन करते हैं।
●सभी सजीव उत्सर्जन करते हैं।
●सभी सजीव गति करते हैं।
●सभी सजीव प्रजनन करते हैं।
उद्दीपन :-
◆मनोविज्ञान में अर्थ :- इंद्रियों द्वारा पकड़े जाने योग्य किसी भी 'परिवर्तन' को उद्दीपन कहते हैं।
◆उद्दीपन का शाब्दिक अर्थ :- ज्योति अग्नि अथवा किसी भाव को बढ़ा देना है। 'उत्' उपसर्ग पूर्वक 'दीप' मूल शब्द में 'णिच्' (संस्कृत) 'अन' (हिंदी) प्रत्यय लगाने पर उद्दीपन शब्द की निष्पत्ति होती है।
◆ उत्सर्जन :- सजीवों द्वारा अपशिष्ट पदार्थों के निष्कासन के प्रक्रम को उत्सर्जन कहते हैं।
Book Notes :-
●किसी स्थान का परिवेश जिसमें पौधे, जंतु एवं अन्य जीव रहते हैं उनका आवास कहलाता है।
●विभिन्न प्रकार के पौधे एवं जंतुओं एक ही आवास में एक साथ रह सकते हैं।
●पौधों और जीवो के विशिष्ट लक्षण एवं स्वभाव जो उन्हें एक आवास विशेष में रहने के अनुकूल बनाते हैं अनुकूलन कहलाता है।
●आवास अनेक प्रकार के होते हैं परंतु सामान्यतः इन्हें स्थलीय (जमीन पर) एवं जलीय आवास (जल में) वर्गीकृत किया जाता है।
●विभिन्न आवास में सजीवों की विविध प्रजातियां पाई जाती है।
पौधे, जंतु एवं सूक्ष्म जीव संयुक्त रूप से जैव घटक बनाते हैं।
●चट्टान, मिट्टी, वायु, जल, प्रकाश एवं ताप हमारे परिवेश के कुछ अवशेष घटक हैं।
●सजीव वस्तुओं के कुछ सामान्य लक्षण है :- उन्हें भोजन की आवश्यकता होती है, वह श्वसन, उत्सर्जन, पर्यावरण के प्रति अनुक्रिया, प्रजनन, वृद्धि एवं गति करते हैं।
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● सजीव वस्तुओं को भोजन की आवश्यकता होती है।
●सजीवों में वृद्धि होती है।
●सभी सजीव शोषण करते हैं /सांस लेते हैं।
●सभी सजीव उद्दीपन करते हैं।
●सभी सजीव उत्सर्जन करते हैं।
●सभी सजीव गति करते हैं।
●सभी सजीव प्रजनन करते हैं।
उद्दीपन :-
◆मनोविज्ञान में अर्थ :- इंद्रियों द्वारा पकड़े जाने योग्य किसी भी 'परिवर्तन' को उद्दीपन कहते हैं।
◆उद्दीपन का शाब्दिक अर्थ :- ज्योति अग्नि अथवा किसी भाव को बढ़ा देना है। 'उत्' उपसर्ग पूर्वक 'दीप' मूल शब्द में 'णिच्' (संस्कृत) 'अन' (हिंदी) प्रत्यय लगाने पर उद्दीपन शब्द की निष्पत्ति होती है।
◆ उत्सर्जन :- सजीवों द्वारा अपशिष्ट पदार्थों के निष्कासन के प्रक्रम को उत्सर्जन कहते हैं।
Book Notes :-
●किसी स्थान का परिवेश जिसमें पौधे, जंतु एवं अन्य जीव रहते हैं उनका आवास कहलाता है।
●विभिन्न प्रकार के पौधे एवं जंतुओं एक ही आवास में एक साथ रह सकते हैं।
●पौधों और जीवो के विशिष्ट लक्षण एवं स्वभाव जो उन्हें एक आवास विशेष में रहने के अनुकूल बनाते हैं अनुकूलन कहलाता है।
●आवास अनेक प्रकार के होते हैं परंतु सामान्यतः इन्हें स्थलीय (जमीन पर) एवं जलीय आवास (जल में) वर्गीकृत किया जाता है।
●विभिन्न आवास में सजीवों की विविध प्रजातियां पाई जाती है।
पौधे, जंतु एवं सूक्ष्म जीव संयुक्त रूप से जैव घटक बनाते हैं।
●चट्टान, मिट्टी, वायु, जल, प्रकाश एवं ताप हमारे परिवेश के कुछ अवशेष घटक हैं।
●सजीव वस्तुओं के कुछ सामान्य लक्षण है :- उन्हें भोजन की आवश्यकता होती है, वह श्वसन, उत्सर्जन, पर्यावरण के प्रति अनुक्रिया, प्रजनन, वृद्धि एवं गति करते हैं।
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दोस्तो sci अकसर एग्जाम के दृष्टिकोण से थोड़ा टफ कहा जाता है ।
अगर बेसिक clear है तो आगे पढ़ने में आसानी और समझ में जल्दी आने लगता है तो आप notes को पढ़े और समझे
और अगर आपको हमारा work अच्छा लगे तो हमारे यूट्यूब चैनल को subscribe करे धन्यवाद
अगर बेसिक clear है तो आगे पढ़ने में आसानी और समझ में जल्दी आने लगता है तो आप notes को पढ़े और समझे
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भारत में जूट का पहला कारखाना कहाँ स्थापित किया गया था?
© भारत में पहली जूट कारखाना/ मिल की स्थापना वर्ष 1855 में कोलकाता के पास हुगली नदी पर रिषड़ा (Rishra) में की गई थी।
1947 में विभाजन के बाद, जूट मिल भारत में रही लेकिन जूट उत्पादक क्षेत्र का तीन चौथाई हिस्सा बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) में चला गया।
भारत कच्चे जूट और जूट के सामान का सबसे बड़ा उत्पादक है और बांग्लादेश के बाद निर्यातक के रूप में दूसरे स्थान पर है।
जूट सुनहरी और रेशमी चमक वाला एक प्राकृतिक रेशा है और इसलिए इसे सुनहरा रेशा (द गोल्डन फाइबर) कहा जाता है।
@Gk_trick
#first
© भारत में पहली जूट कारखाना/ मिल की स्थापना वर्ष 1855 में कोलकाता के पास हुगली नदी पर रिषड़ा (Rishra) में की गई थी।
1947 में विभाजन के बाद, जूट मिल भारत में रही लेकिन जूट उत्पादक क्षेत्र का तीन चौथाई हिस्सा बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) में चला गया।
भारत कच्चे जूट और जूट के सामान का सबसे बड़ा उत्पादक है और बांग्लादेश के बाद निर्यातक के रूप में दूसरे स्थान पर है।
जूट सुनहरी और रेशमी चमक वाला एक प्राकृतिक रेशा है और इसलिए इसे सुनहरा रेशा (द गोल्डन फाइबर) कहा जाता है।
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#first
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Q. भारत का चुनाव आयोग (ECI) देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों का प्रहरी है और भारतीय संविधान के __ में इस संस्था से संबंधित प्रावधान संरक्षित हैं।
A. अनुच्छेद 101
B. अनुच्छेद 356
C. अनुच्छेद 324
D. अनुच्छेद 352
A. अनुच्छेद 101
B. अनुच्छेद 356
C. अनुच्छेद 324
D. अनुच्छेद 352
भारत चुनाव आयोग
© यह मुख्य रूप से भारत गणराज्य का एक स्वशासी निकाय है। इसका संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया पर नियंत्रण होता है।
✍️ EIC की स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई थी। ECI का मुख्यालय नई दिल्ली में है। ECI 15 अक्टूबर 1989 तक भारत के "मुख्य चुनाव आयुक्त" के साथ एक सदस्यीय निकाय था।
✍️ 16 अक्टूबर 1989 से, भारत के चुनाव आयुक्त ने दो और चुनाव आयुक्तों को नामित किया और फिर मतदान की आयु 21 से बदलकर 18 वर्ष कर दी गई। ECI एक बहु-सदस्यीय निकाय है और इसमें तीन चुनाव आयुक्त हैं।
✍️ इस प्रकार, भारत के संविधान का भाग XV चुनाव के भाग से संबंधित है। "अनुच्छेद 324 से 329" चुनाव आयोग और सदस्यों की पात्रता, शक्तियां, कार्यकाल और कार्य से संबंधित है।
✍️ ECI की भूमिका
भारत के चुनाव आयोग की मुख्य और महत्वपूर्ण भूमिका पूरे देश में "स्वतंत्र और निष्पक्ष" चुनाव को लागू करना और संचालित करना और हिंसा और उल्लंघन के किसी भी मामले के लिए उचित कार्रवाई करना है।
✍️ ECI ने 1952 से भारत में राज्यों और राष्ट्रीय चुनावों का सफलतापूर्वक संचालन किया है।
@Gk_trick
#polity
Current topics
© यह मुख्य रूप से भारत गणराज्य का एक स्वशासी निकाय है। इसका संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया पर नियंत्रण होता है।
✍️ EIC की स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई थी। ECI का मुख्यालय नई दिल्ली में है। ECI 15 अक्टूबर 1989 तक भारत के "मुख्य चुनाव आयुक्त" के साथ एक सदस्यीय निकाय था।
✍️ 16 अक्टूबर 1989 से, भारत के चुनाव आयुक्त ने दो और चुनाव आयुक्तों को नामित किया और फिर मतदान की आयु 21 से बदलकर 18 वर्ष कर दी गई। ECI एक बहु-सदस्यीय निकाय है और इसमें तीन चुनाव आयुक्त हैं।
✍️ इस प्रकार, भारत के संविधान का भाग XV चुनाव के भाग से संबंधित है। "अनुच्छेद 324 से 329" चुनाव आयोग और सदस्यों की पात्रता, शक्तियां, कार्यकाल और कार्य से संबंधित है।
✍️ ECI की भूमिका
भारत के चुनाव आयोग की मुख्य और महत्वपूर्ण भूमिका पूरे देश में "स्वतंत्र और निष्पक्ष" चुनाव को लागू करना और संचालित करना और हिंसा और उल्लंघन के किसी भी मामले के लिए उचित कार्रवाई करना है।
✍️ ECI ने 1952 से भारत में राज्यों और राष्ट्रीय चुनावों का सफलतापूर्वक संचालन किया है।
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Current topics
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Election Commission of India
© It is primarily a self-governing body of the Republic of India. It has control over the entire election process.
✍️ EIC was established on 25 January 1950. The headquarter of ECI is in New Delhi. ECI was a single-member body with the "Chief Election Commissioner" of India as its head until 15 October 1989.
✍️ From 16 October 1989, the Election Commissioner of India nominated two more Election Commissioners and then the voting age was changed from 21 to 18 years. ECI is a multi-member body and has three Election Commissioners.
✍️ Thus, Part XV of the Constitution of India deals with the part of elections. "Articles 324 to 329" deals with the eligibility, powers, tenure and functions of the Election Commission and members.
✍️ Role of ECI
The main and vital role of the Election Commission of India is to implement and conduct “free and fair” elections throughout the country and take appropriate action for any cases of violence and violations.
✍️ ECI has successfully conducted state and national elections in India since 1952.
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© It is primarily a self-governing body of the Republic of India. It has control over the entire election process.
✍️ EIC was established on 25 January 1950. The headquarter of ECI is in New Delhi. ECI was a single-member body with the "Chief Election Commissioner" of India as its head until 15 October 1989.
✍️ From 16 October 1989, the Election Commissioner of India nominated two more Election Commissioners and then the voting age was changed from 21 to 18 years. ECI is a multi-member body and has three Election Commissioners.
✍️ Thus, Part XV of the Constitution of India deals with the part of elections. "Articles 324 to 329" deals with the eligibility, powers, tenure and functions of the Election Commission and members.
✍️ Role of ECI
The main and vital role of the Election Commission of India is to implement and conduct “free and fair” elections throughout the country and take appropriate action for any cases of violence and violations.
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