भारत का पश्चिम भाग
◆ भारत के पश्चिम भाग में भारतीय महा मरुस्थल स्थित है यह शुष्क, गर्म तथा रेतीला स्थल है यहां वनस्पति की मात्रा बहुत कम है।
उत्तरी मैदान के दक्षिण में प्रायद्वीप पठार स्थित है इसकी आकृति त्रिभुजाकार है इसका धरातल काफी ऊंचा नीचा है इस क्षेत्र में बहुत सी पहाड़ियां श्रृंखलाएं तोता गाड़ियां स्थित है।
◆ इसके उत्तर पश्चिम में अरावली श्रृंखला स्थित है जो विश्व की सबसे पुरानी श्रृंखला हैं।
◆पश्चिम घाट के पश्चिम में तथा पूर्वी घाट के पूर्व में तटीय मैदान स्थित है पूर्वी तटीय मैदानों में पूर्व की ओर बहने वाली कई नदियां हैं महानदी गोदावरी, कृष्णा तथा कावेरी बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
●प्रवाल: प्रवाल छोटे समुंद्री जंतुओं के कंकाल है जिसे पोलिप कहा जाता है। जब जीवित पोलिप मरते हैं तब उनका कंकाल बच जाता है अन्य पोलिप की वृद्धि इन ठोस कंकालों के ऊपर होती है जो बढ़ते बढ़ते काफी ऊंचे होते जाते हैं तथा इस प्रकार प्रवाल द्वीपों का निर्माण करते हैं।
भारत के दो द्वीप समूह:
◆ लक्ष्यदीप द्वीप समूह अरब सागर में स्थित है यह केरल के तट से कुछ दूर स्थित प्रवाल द्वीप है।
अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह भारत से दक्षिण पूर्व दिशा में बंगाल की खाड़ी में स्थित है।
◆सुनामी: सुनामी एक विशाल सागरीय तरंग है जो समुद्र तल पर भूकंप के कारण उत्पन्न होती
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◆ भारत के पश्चिम भाग में भारतीय महा मरुस्थल स्थित है यह शुष्क, गर्म तथा रेतीला स्थल है यहां वनस्पति की मात्रा बहुत कम है।
उत्तरी मैदान के दक्षिण में प्रायद्वीप पठार स्थित है इसकी आकृति त्रिभुजाकार है इसका धरातल काफी ऊंचा नीचा है इस क्षेत्र में बहुत सी पहाड़ियां श्रृंखलाएं तोता गाड़ियां स्थित है।
◆ इसके उत्तर पश्चिम में अरावली श्रृंखला स्थित है जो विश्व की सबसे पुरानी श्रृंखला हैं।
◆पश्चिम घाट के पश्चिम में तथा पूर्वी घाट के पूर्व में तटीय मैदान स्थित है पूर्वी तटीय मैदानों में पूर्व की ओर बहने वाली कई नदियां हैं महानदी गोदावरी, कृष्णा तथा कावेरी बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
●प्रवाल: प्रवाल छोटे समुंद्री जंतुओं के कंकाल है जिसे पोलिप कहा जाता है। जब जीवित पोलिप मरते हैं तब उनका कंकाल बच जाता है अन्य पोलिप की वृद्धि इन ठोस कंकालों के ऊपर होती है जो बढ़ते बढ़ते काफी ऊंचे होते जाते हैं तथा इस प्रकार प्रवाल द्वीपों का निर्माण करते हैं।
भारत के दो द्वीप समूह:
◆ लक्ष्यदीप द्वीप समूह अरब सागर में स्थित है यह केरल के तट से कुछ दूर स्थित प्रवाल द्वीप है।
अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह भारत से दक्षिण पूर्व दिशा में बंगाल की खाड़ी में स्थित है।
◆सुनामी: सुनामी एक विशाल सागरीय तरंग है जो समुद्र तल पर भूकंप के कारण उत्पन्न होती
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NCERT Class 6 Geography Chapter 08 Notes
"भारत: जलवायु, वनस्पति तथा वन्य प्राणी"
भारत के प्रमुख मौसम
दिसंबर से फरवरी तक ठंडा मौसम (ठंडी)
मार्च से मई तक गर्म मौसम (गर्मी)
जून से सितंबर तक दक्षिण पश्चिम मानसून का मौसम (वर्षा)
अक्टूबर और नवंबर में मानसून के लौटने का मौसम (शरद)
शीत ऋतु: ठंडे मौसम में सूर्य की सीधी किरणें नहीं पड़ती है जिसके परिणाम स्वरूप उत्तर भारत का तापमान कम हो जाता है।
ग्रीष्म ऋतु: गर्मी के मौसम में सूर्य की किरने अधिकतर सीधी पड़ती है तापमान बहुत अधिक हो जाता है। दिन के समय गर्म एवं शुष्क पवन बहती है जिसे लू जाता है।
वर्षा ऋतु: यह मानसून के आने तथा आगे बढ़ने का मौसम है इस समय पवन बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर से स्थल की ओर बहती है वह अपने साथ नमी भी लाती है जब यह पवन पहाड़ों से टकराती है तब वर्षा होती है।
शरद ऋतु: इस समय पवन, स्थल भागों से लौटकर बंगाल की खाड़ी की ओर बहती है।
मानसून: मानसून शब्द अरबी भाषा के 'मौसिम' से लिया गया है जिसका अर्थ होता है मौसम।
किसी स्थान की जलवायु उसकी स्थिति, ऊंचाई, समुद्र से दूरी तथा उच्चावच पर निर्भर करती है।
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"भारत: जलवायु, वनस्पति तथा वन्य प्राणी"
भारत के प्रमुख मौसम
दिसंबर से फरवरी तक ठंडा मौसम (ठंडी)
मार्च से मई तक गर्म मौसम (गर्मी)
जून से सितंबर तक दक्षिण पश्चिम मानसून का मौसम (वर्षा)
अक्टूबर और नवंबर में मानसून के लौटने का मौसम (शरद)
शीत ऋतु: ठंडे मौसम में सूर्य की सीधी किरणें नहीं पड़ती है जिसके परिणाम स्वरूप उत्तर भारत का तापमान कम हो जाता है।
ग्रीष्म ऋतु: गर्मी के मौसम में सूर्य की किरने अधिकतर सीधी पड़ती है तापमान बहुत अधिक हो जाता है। दिन के समय गर्म एवं शुष्क पवन बहती है जिसे लू जाता है।
वर्षा ऋतु: यह मानसून के आने तथा आगे बढ़ने का मौसम है इस समय पवन बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर से स्थल की ओर बहती है वह अपने साथ नमी भी लाती है जब यह पवन पहाड़ों से टकराती है तब वर्षा होती है।
शरद ऋतु: इस समय पवन, स्थल भागों से लौटकर बंगाल की खाड़ी की ओर बहती है।
मानसून: मानसून शब्द अरबी भाषा के 'मौसिम' से लिया गया है जिसका अर्थ होता है मौसम।
किसी स्थान की जलवायु उसकी स्थिति, ऊंचाई, समुद्र से दूरी तथा उच्चावच पर निर्भर करती है।
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नोट: विश्व में सबसे अधिक वर्षा मेघालय में स्थित मौसिनराम में होती है।
जलवायु: किसी स्थान पर अनेक वर्षा में मापी गई मौसम की औसत दशा को जलवायु कहते हैं।
प्राकृतिक वनस्पति: झाड़ियां तथा पौधे जो बिना मनुष्य की सहायता के उपजते हैं उन्हें प्राकृतिक वनस्पति कहा जाता है।
हमें वनों की आवश्यकता क्यों है?
वन हमारे लिए बहुत ही लाभदायक है यह विभिन्न कार्य करते हैं पेड़, पौधे ऑक्सीजन छोड़ते हैं जिसे हम सांस लेते हैं तथा कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रहण करते हैं।
पेड़ पौधे की जड़े मिट्टी को बांध कर रखती है तथा इस प्रकार वह मिट्टी के अपरदन को रोकते हैं।
वनों से हमें ईंधन, लकड़ी, चारा, जड़ी बूटियां, लाख, शहद, गोंद इत्यादि प्राप्त होते हैं वन्य वन्यजीवो के प्राकृतिक निवास है।
नोट: बाघ हमारा राष्ट्रीय पशु है।
वन्य प्राणी
बाघ भारत के विभिन्न भागों में पाया जाता है गुजरात के गिर वन में एशियाई शेरों का निवास है।
हाथी तथा एक सींग वाले गैंडे असम के जंगलों में पाए जाते हैं। हाथी केरल एवं कर्नाटक में भी मिलते हैं।
ऊंट भारत के रेगिस्तान तथा जंगली गधा कच्छ के रण में पाए जाते हैं।
जंगली बकरी, हिम तेंदुआ, भालू इत्यादि हिमालय के क्षेत्र में पाए जाते हैं।
इनके अतिरिक्त बहुत से दूसरे जानवर जैसे बंदर, सियार, भेड़िया नीलगाय, चीता इत्यादि भी हमारे देश में पाए जाते हैं।
नोट: मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है।
नोट: भारत में सांपों की सैकड़ों प्रजातियां पाई जाती है उनमें कोबरा एवं करैत प्रमुख है।
भारत सरकार ने समाप्त / लुप्त हो रहे जानवरों के प्रजाति के लिए क्या किया है?
वनों के कटने तथा जानवरों की शिकार के कारण भारत में पाए जाने वाले वन्यजीवों की प्रजातियां तेजी से घट रही है बहुत सी प्रजातियां तो समाप्त भी हो चुकी है। उनको बचाने के लिए बहुत से नेशनल पार्क, पशु विहार तथा जीव मंडल आरक्षित क्षेत्र स्थापित किए गए हैं। सरकार ने हाथियों तथा बाघों को बचाने के लिए बाघ परियोजना एवं हस्ति परियोजना जैसी परियोजनाओं को शुरू किया है।
प्रवासी पक्षी: कुछ पक्षी पिंटेल, बत्तख कर्लियू, फ्लैमिंगो, आस्प्रे, लिटिल स्टिंग प्रत्येक वर्ष सर्दी के मौसम में हमारे देश में आते हैं। सबसे छोटी लिटिल स्टिंग जिसका वजन लगभग 15 ग्राम होता है आर्टिक प्रदेश से 800 किलोमीटर की दूरी तय करके भारत आती है।
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नोट: विश्व में सबसे अधिक वर्षा मेघालय में स्थित मौसिनराम में होती है।
जलवायु: किसी स्थान पर अनेक वर्षा में मापी गई मौसम की औसत दशा को जलवायु कहते हैं।
प्राकृतिक वनस्पति: झाड़ियां तथा पौधे जो बिना मनुष्य की सहायता के उपजते हैं उन्हें प्राकृतिक वनस्पति कहा जाता है।
हमें वनों की आवश्यकता क्यों है?
वन हमारे लिए बहुत ही लाभदायक है यह विभिन्न कार्य करते हैं पेड़, पौधे ऑक्सीजन छोड़ते हैं जिसे हम सांस लेते हैं तथा कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रहण करते हैं।
पेड़ पौधे की जड़े मिट्टी को बांध कर रखती है तथा इस प्रकार वह मिट्टी के अपरदन को रोकते हैं।
वनों से हमें ईंधन, लकड़ी, चारा, जड़ी बूटियां, लाख, शहद, गोंद इत्यादि प्राप्त होते हैं वन्य वन्यजीवो के प्राकृतिक निवास है।
नोट: बाघ हमारा राष्ट्रीय पशु है।
वन्य प्राणी
बाघ भारत के विभिन्न भागों में पाया जाता है गुजरात के गिर वन में एशियाई शेरों का निवास है।
हाथी तथा एक सींग वाले गैंडे असम के जंगलों में पाए जाते हैं। हाथी केरल एवं कर्नाटक में भी मिलते हैं।
ऊंट भारत के रेगिस्तान तथा जंगली गधा कच्छ के रण में पाए जाते हैं।
जंगली बकरी, हिम तेंदुआ, भालू इत्यादि हिमालय के क्षेत्र में पाए जाते हैं।
इनके अतिरिक्त बहुत से दूसरे जानवर जैसे बंदर, सियार, भेड़िया नीलगाय, चीता इत्यादि भी हमारे देश में पाए जाते हैं।
नोट: मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है।
नोट: भारत में सांपों की सैकड़ों प्रजातियां पाई जाती है उनमें कोबरा एवं करैत प्रमुख है।
भारत सरकार ने समाप्त / लुप्त हो रहे जानवरों के प्रजाति के लिए क्या किया है?
वनों के कटने तथा जानवरों की शिकार के कारण भारत में पाए जाने वाले वन्यजीवों की प्रजातियां तेजी से घट रही है बहुत सी प्रजातियां तो समाप्त भी हो चुकी है। उनको बचाने के लिए बहुत से नेशनल पार्क, पशु विहार तथा जीव मंडल आरक्षित क्षेत्र स्थापित किए गए हैं। सरकार ने हाथियों तथा बाघों को बचाने के लिए बाघ परियोजना एवं हस्ति परियोजना जैसी परियोजनाओं को शुरू किया है।
प्रवासी पक्षी: कुछ पक्षी पिंटेल, बत्तख कर्लियू, फ्लैमिंगो, आस्प्रे, लिटिल स्टिंग प्रत्येक वर्ष सर्दी के मौसम में हमारे देश में आते हैं। सबसे छोटी लिटिल स्टिंग जिसका वजन लगभग 15 ग्राम होता है आर्टिक प्रदेश से 800 किलोमीटर की दूरी तय करके भारत आती है।
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दोस्तो NCERT 6th Geography खत्म हो चुका है।
आगे हम NCERT 6th Science के बारे में पढ़ेंगे
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NCERT Class 6, Science Chapter 1 Shorts Notes
यह सभी प्रश्न - उत्तर बहुत ही महत्वपूर्ण है इसे याद कर ले।
1. संघटक किसे कहते हैं? या संघटक क्या हैं?
किसी भी चीज को बनाने में लगने वाले सभी पदार्थों और अवयव 'संघटक' कहलाता हैं।
2. जंतुओं से हमें किस तरह के खाद्य पदार्थ प्राप्त होते हैं?
जंतुओं से हमे बहुत सारे खाद्य पदार्थ प्राप्त होते हैं जैसे - दूध, अंडा, मुर्गा, मछली, झींगा, मास आदि।
3. किन्हीं 5 जंतुओं के नाम बताइए जो हमें दूध देते हैं।
1) गाय
2) भैंस
3) बकरी।
4) भेड़
5) ऊंट।
4. हम पौधे के कौन कौन से हिस्से को खाद्य पदार्थ के रूप में करते इस्तेमाल हैं?
हम पौधों के निम्न भागों को खाद्य पदार्थ के रूप में इस्तेमाल करते हैं। जड़े, तने, फूल, पत्तियां और फल को भोजन के रूप में उपयोग करते हैं।
5. पौधे के कौन कौन से भाग खाने लायक होते हैं?
पौधों के दो या दो से अधिक भाग खाने लायक होते हैं।
6. शहद कैसे बनता है?
शहद मधुमक्खियों द्वारा उत्पादित होता है। मधुमक्खियां फूल में से मीठे रस को निकालकर अपने छत्ते में इकठ्ठा कर लेती है और यह बहुत अधिक मात्रा में हो जाने के बाद शहद का रूप ले लेता है।
7. शाकाहारी जंतु किसे कहते हैं?
शाकाहारी जंतु उन्हें कहते हैं जो पेड़, पौधे और पादप, उत्पाद खाते हैं।
8. मांसाहारी जंतु किसे कहते हैं?
मांसाहारी जंतु उन्हें कहते हैं जो मांस खाते हैं जैसे मीट, मछली, अंडा इत्यादि।
9. सर्वाहारी जंतु किसे कहते हैं?
सर्वाहारी जंतु उन्हें कहते हैं जो पादप उत्पाद और मीट मछली दोनों का सेवन करते हैं।
10. हमारे भोजन के मुख्य स्रोत क्या है?
हमारे भोजन के मुख्य स्रोत पौधे तथा जंतु है।
#Ncertsci
#science
@Gk_trick
#Ncertseries
यह सभी प्रश्न - उत्तर बहुत ही महत्वपूर्ण है इसे याद कर ले।
1. संघटक किसे कहते हैं? या संघटक क्या हैं?
किसी भी चीज को बनाने में लगने वाले सभी पदार्थों और अवयव 'संघटक' कहलाता हैं।
2. जंतुओं से हमें किस तरह के खाद्य पदार्थ प्राप्त होते हैं?
जंतुओं से हमे बहुत सारे खाद्य पदार्थ प्राप्त होते हैं जैसे - दूध, अंडा, मुर्गा, मछली, झींगा, मास आदि।
3. किन्हीं 5 जंतुओं के नाम बताइए जो हमें दूध देते हैं।
1) गाय
2) भैंस
3) बकरी।
4) भेड़
5) ऊंट।
4. हम पौधे के कौन कौन से हिस्से को खाद्य पदार्थ के रूप में करते इस्तेमाल हैं?
हम पौधों के निम्न भागों को खाद्य पदार्थ के रूप में इस्तेमाल करते हैं। जड़े, तने, फूल, पत्तियां और फल को भोजन के रूप में उपयोग करते हैं।
5. पौधे के कौन कौन से भाग खाने लायक होते हैं?
पौधों के दो या दो से अधिक भाग खाने लायक होते हैं।
6. शहद कैसे बनता है?
शहद मधुमक्खियों द्वारा उत्पादित होता है। मधुमक्खियां फूल में से मीठे रस को निकालकर अपने छत्ते में इकठ्ठा कर लेती है और यह बहुत अधिक मात्रा में हो जाने के बाद शहद का रूप ले लेता है।
7. शाकाहारी जंतु किसे कहते हैं?
शाकाहारी जंतु उन्हें कहते हैं जो पेड़, पौधे और पादप, उत्पाद खाते हैं।
8. मांसाहारी जंतु किसे कहते हैं?
मांसाहारी जंतु उन्हें कहते हैं जो मांस खाते हैं जैसे मीट, मछली, अंडा इत्यादि।
9. सर्वाहारी जंतु किसे कहते हैं?
सर्वाहारी जंतु उन्हें कहते हैं जो पादप उत्पाद और मीट मछली दोनों का सेवन करते हैं।
10. हमारे भोजन के मुख्य स्रोत क्या है?
हमारे भोजन के मुख्य स्रोत पौधे तथा जंतु है।
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आगे भी हम सारे एग्जाम से रिलेटेड पोस्ट करेंगे धन्यवाद
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Class 6 Science Chapter 2 Important Notes
1 क्या हमारे शरीर को विशेष परियोजना के लिए विभिन्न प्रकार के भोजन की आवश्यकता होती है?
हां। हमारे शरीर को विशेष परियोजना के लिए विभिन्न प्रकार के भोजन की आवश्यकता होती है जैसे :-
1) जो ज्यादा शारीरिक मेहनत करते हैं उन्हें ज्यादा ऊर्जा वाले भोजन की जरूरत पड़ती है मांस, दूध, अंडे, आदि।
2) जो ज्यादा मानसिक मेहनत करते हैं उन्हें ज्यादा प्रोटीन और विटामिन वाले भोजन की जरूरत होती है। बादाम, किसमिस, दूध, हरी सब्जियां, फल आदि।
3) और जो कुछ नहीं करते हैं वह समान भोजन भी कर सकते हैं दाल, रोटी, सब्जी।
2 पोषक किसे कहते हैं?
भोजन में पाए जाने वाले घटक को पोषक कहते हैं जैसे :- कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, प्रोटीन, खनिज लवण और वसा ।
3 हमारे खाने में कौन-कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं?
हमारे भोजन में कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, प्रोटीन, खनिज लवण और वसा पाए जाते हैं।
4 घटक क्या है? / घटक किसे कहते हैं?
किसी भी वस्तु या पदार्थ के सबसे छोटी इकाई को घटक कहते हैं।
5 क्या सभी खाद्य पदार्थों में सभी पोषक तत्व पाए जाते हैं?
नहीं सभी खाद्य पदार्थों में सभी पोषक तत्व नहीं पाए जाते हैं।
जैसे :- गेहूं और चावल में कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है।, दूध, अंडा, मांस, घी में वसा पाया जाता हैं।, दाल, हरी सब्जियां और फल में विटामिन और प्रोटीन पाया जाता है।
6 हमें पोषक तत्व की आवश्यकता क्यों होती है?
हमें पोषक तत्व की आवश्यकता इसलिए होती है क्योंकि हमारे शरीर को जिंदा रहने के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है और इन पोषक तत्वों से हमारे शरीर को ऊर्जा मिलता है। सभी पोषक तत्वों का हमारे शरीर में अलग-अलग कार्य होता है।
जैसे:-1 कार्बोहाइड्रेट और वसा हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं,
2 प्रोटीन की आवश्यकता शरीर की वृद्धि तथा स्वस्थ रहने के लिए होती है।
3 विटामिन रोगों से हमारे शरीर की रक्षा करता है।
4 खनिज लवण की आवश्यकता हमारे शरीर के उचित विकास तथा स्वस्थ रहने के लिए होती है।
5 अहारी रेशे तथा जल बिना बच्चे भोजन को बाहर निकालने में हमारे शरीर की सहायता करता है।
7 विभिन्न पोषक हमारे शरीर के लिए क्या करते हैं?
प्रशन 5 के उत्तर आएंगे।
8 कार्बोहाइड्रेट और वसा हमारे शरीर के लिए क्या करते हैं?
कार्बोहाइड्रेट और वसा हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं
9 प्रोटीन हमारे शरीर के लिए क्या करते हैं?
प्रोटीन की आवश्यकता शरीर की वृद्धि तथा स्वस्थ रहने के लिए होती है।
10 शरीर वर्धक तक भोजन किसे कहते हैं?
प्रोटीन युक्त भोजन को शरीर वर्धक पोषण कहते हैं।
11 विटामिन हमारे शरीर के लिए क्या करते हैं?
विटामिन रोगों से हमारे शरीर की रक्षा करता है।
12 विटामिन कितने प्रकार के होते हैं?
विटामिन सात प्रकार के होते हैं
विटामिन A
विटामिन B
विटामिन C
विटामिन D
विटामिन E
विटामिन K
विटामिन B कांपलेक्स।
13 आहारी रेशे किस नाम से जाने जाते हैं?
आभारी रेशे रुक्षांश के नाम से भी जाने जाते हैं।
14 रूक्षांश किस भोजन से मिलता है और इनका हमारे शरीर में क्या कार्य होता है?
दाल, आलू, फल, और हरी सब्जियों से।
15 ऐसे पांच खाद्य पदार्थों के नाम बताओ जिनसे हमारे शरीर में जल की आवश्यकता पूरी होती है?
दाल, आलू, पालक, घिया, सेब ।
16 संतुलित आहार किसे कहते हैं? उदाहरण सहित बताइए।
जिस भोजन में सभी पोषक तत्वों के साथ-साथ रूक्षांश और जल होता हैं उसे संतुलित आहार कहते हैं। उदाहरण:- दाल, रोटी, सब्जी, चावल, सलाद आदि।
17 हमारे मोटे होने का क्या कारण है?
अधिक वसायुक्त भोजन का सेवन हमारे मोटे होने का कारण हैं।
18 विटामिन और खनिज लवणों के अभाव के कारण होने वाले रोगों के नाम बताइए?
विटामिन और खनिज लवणों के अभाव से होने वाले रोग:-
क्षीणता दृष्टिहीनता - विटामिन A
बेरी-बेरी - विटामिन B 1
स्कर्वी - विटामिन C
रिकेट्स - विटामिन D
अस्थियां और दंतक्षय - कैल्शियम
घेंघा - आयोडीन
अरक्तता - लौह
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#Science
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1 क्या हमारे शरीर को विशेष परियोजना के लिए विभिन्न प्रकार के भोजन की आवश्यकता होती है?
हां। हमारे शरीर को विशेष परियोजना के लिए विभिन्न प्रकार के भोजन की आवश्यकता होती है जैसे :-
1) जो ज्यादा शारीरिक मेहनत करते हैं उन्हें ज्यादा ऊर्जा वाले भोजन की जरूरत पड़ती है मांस, दूध, अंडे, आदि।
2) जो ज्यादा मानसिक मेहनत करते हैं उन्हें ज्यादा प्रोटीन और विटामिन वाले भोजन की जरूरत होती है। बादाम, किसमिस, दूध, हरी सब्जियां, फल आदि।
3) और जो कुछ नहीं करते हैं वह समान भोजन भी कर सकते हैं दाल, रोटी, सब्जी।
2 पोषक किसे कहते हैं?
भोजन में पाए जाने वाले घटक को पोषक कहते हैं जैसे :- कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, प्रोटीन, खनिज लवण और वसा ।
3 हमारे खाने में कौन-कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं?
हमारे भोजन में कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, प्रोटीन, खनिज लवण और वसा पाए जाते हैं।
4 घटक क्या है? / घटक किसे कहते हैं?
किसी भी वस्तु या पदार्थ के सबसे छोटी इकाई को घटक कहते हैं।
5 क्या सभी खाद्य पदार्थों में सभी पोषक तत्व पाए जाते हैं?
नहीं सभी खाद्य पदार्थों में सभी पोषक तत्व नहीं पाए जाते हैं।
जैसे :- गेहूं और चावल में कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है।, दूध, अंडा, मांस, घी में वसा पाया जाता हैं।, दाल, हरी सब्जियां और फल में विटामिन और प्रोटीन पाया जाता है।
6 हमें पोषक तत्व की आवश्यकता क्यों होती है?
हमें पोषक तत्व की आवश्यकता इसलिए होती है क्योंकि हमारे शरीर को जिंदा रहने के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है और इन पोषक तत्वों से हमारे शरीर को ऊर्जा मिलता है। सभी पोषक तत्वों का हमारे शरीर में अलग-अलग कार्य होता है।
जैसे:-1 कार्बोहाइड्रेट और वसा हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं,
2 प्रोटीन की आवश्यकता शरीर की वृद्धि तथा स्वस्थ रहने के लिए होती है।
3 विटामिन रोगों से हमारे शरीर की रक्षा करता है।
4 खनिज लवण की आवश्यकता हमारे शरीर के उचित विकास तथा स्वस्थ रहने के लिए होती है।
5 अहारी रेशे तथा जल बिना बच्चे भोजन को बाहर निकालने में हमारे शरीर की सहायता करता है।
7 विभिन्न पोषक हमारे शरीर के लिए क्या करते हैं?
प्रशन 5 के उत्तर आएंगे।
8 कार्बोहाइड्रेट और वसा हमारे शरीर के लिए क्या करते हैं?
कार्बोहाइड्रेट और वसा हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं
9 प्रोटीन हमारे शरीर के लिए क्या करते हैं?
प्रोटीन की आवश्यकता शरीर की वृद्धि तथा स्वस्थ रहने के लिए होती है।
10 शरीर वर्धक तक भोजन किसे कहते हैं?
प्रोटीन युक्त भोजन को शरीर वर्धक पोषण कहते हैं।
11 विटामिन हमारे शरीर के लिए क्या करते हैं?
विटामिन रोगों से हमारे शरीर की रक्षा करता है।
12 विटामिन कितने प्रकार के होते हैं?
विटामिन सात प्रकार के होते हैं
विटामिन A
विटामिन B
विटामिन C
विटामिन D
विटामिन E
विटामिन K
विटामिन B कांपलेक्स।
13 आहारी रेशे किस नाम से जाने जाते हैं?
आभारी रेशे रुक्षांश के नाम से भी जाने जाते हैं।
14 रूक्षांश किस भोजन से मिलता है और इनका हमारे शरीर में क्या कार्य होता है?
दाल, आलू, फल, और हरी सब्जियों से।
15 ऐसे पांच खाद्य पदार्थों के नाम बताओ जिनसे हमारे शरीर में जल की आवश्यकता पूरी होती है?
दाल, आलू, पालक, घिया, सेब ।
16 संतुलित आहार किसे कहते हैं? उदाहरण सहित बताइए।
जिस भोजन में सभी पोषक तत्वों के साथ-साथ रूक्षांश और जल होता हैं उसे संतुलित आहार कहते हैं। उदाहरण:- दाल, रोटी, सब्जी, चावल, सलाद आदि।
17 हमारे मोटे होने का क्या कारण है?
अधिक वसायुक्त भोजन का सेवन हमारे मोटे होने का कारण हैं।
18 विटामिन और खनिज लवणों के अभाव के कारण होने वाले रोगों के नाम बताइए?
विटामिन और खनिज लवणों के अभाव से होने वाले रोग:-
क्षीणता दृष्टिहीनता - विटामिन A
बेरी-बेरी - विटामिन B 1
स्कर्वी - विटामिन C
रिकेट्स - विटामिन D
अस्थियां और दंतक्षय - कैल्शियम
घेंघा - आयोडीन
अरक्तता - लौह
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Class 6 Science Chapter 3 Notes in Hindi
1) तंतु किसे कहते हैं?
धागे कि सबसे पतली लड़ियो को तंतु कहते हैं।
2) प्राकृतिक तंतु किसे कहते हैं?
जो तंतु पादप और जंतु से प्राप्त होते हैं उन्हें प्राकृतिक तंतु कहते हैं। जैसे :- सुती, जूट, रेशमी तथा ऊनी
3) संश्लिष्ट तंतु किसे कहते हैं?
जो तंतु रासायनिक पदार्थों से प्राप्त होते हैं उन्हें संश्लिष्ट तंतु कहते हैं। जैसे :- पॉलिएस्टर, नायलॉन तथा येक्रिलिक।
4) कपास ओटन किसे कहते हैं?
कपास को बीजों से कंकतन द्वारा अलग करने की प्रक्रिया को कपास ओटन कहा जाता है।
5) कपास की खेती किन राज्यों में की जाती है।
महाराष्ट्र, गुजरात और आंध्र प्रदेश में।
6) पटसन किस पादप से प्राप्त किया जाता है?
जूट पादप से।
7) पटसन तंतु को पटसन पादप के किस हिस्से से प्राप्त किया जाता हैं?
पटसन पादप के तने से।
8) कताई किसे कहते हैं?
रेशों से तागा बनाने की प्रक्रिया को कताई कहते हैं।
9) तकली किसे कहते हैं?
कताई के एक सरल युक्ति हस्त तकुआ का उपयोग किया जाता हैं जिसे तकली कहते हैं।
10) ग्रामोद्योग क्या हैं? और इसे कब बनाया गया था?
खादी के प्रचलन को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने 1956 में एक संगठन का निर्माण किया जिसे खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग कहते हैं।
11) बुनाई/ वीविंग किसे कहते हैं?
तागों के दो सेटों को आपस में व्यवस्थित करके वस्त्र बनाने की प्रक्रिया को बुनाई कहते हैं।
#Gk_trick
#Science
#ncert6sci
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1) तंतु किसे कहते हैं?
धागे कि सबसे पतली लड़ियो को तंतु कहते हैं।
2) प्राकृतिक तंतु किसे कहते हैं?
जो तंतु पादप और जंतु से प्राप्त होते हैं उन्हें प्राकृतिक तंतु कहते हैं। जैसे :- सुती, जूट, रेशमी तथा ऊनी
3) संश्लिष्ट तंतु किसे कहते हैं?
जो तंतु रासायनिक पदार्थों से प्राप्त होते हैं उन्हें संश्लिष्ट तंतु कहते हैं। जैसे :- पॉलिएस्टर, नायलॉन तथा येक्रिलिक।
4) कपास ओटन किसे कहते हैं?
कपास को बीजों से कंकतन द्वारा अलग करने की प्रक्रिया को कपास ओटन कहा जाता है।
5) कपास की खेती किन राज्यों में की जाती है।
महाराष्ट्र, गुजरात और आंध्र प्रदेश में।
6) पटसन किस पादप से प्राप्त किया जाता है?
जूट पादप से।
7) पटसन तंतु को पटसन पादप के किस हिस्से से प्राप्त किया जाता हैं?
पटसन पादप के तने से।
8) कताई किसे कहते हैं?
रेशों से तागा बनाने की प्रक्रिया को कताई कहते हैं।
9) तकली किसे कहते हैं?
कताई के एक सरल युक्ति हस्त तकुआ का उपयोग किया जाता हैं जिसे तकली कहते हैं।
10) ग्रामोद्योग क्या हैं? और इसे कब बनाया गया था?
खादी के प्रचलन को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने 1956 में एक संगठन का निर्माण किया जिसे खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग कहते हैं।
11) बुनाई/ वीविंग किसे कहते हैं?
तागों के दो सेटों को आपस में व्यवस्थित करके वस्त्र बनाने की प्रक्रिया को बुनाई कहते हैं।
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Class 6 Science Chapter 3 Notes in Hindi
◆जो पदार्थ रेगमाल से रगड़ने पर चमकीले दिखाई पड़ते हैं तथा घुतिवान होते हैं वह धातु होते हैं।
●जिस पदार्थ में चमक अथवा घुति होते हैं वे धातु होते हैं जैसे लोहा, तांबा, एलमुनियम तथा सोना।
●कुछ धातु अपनी चमक खो देती है और घुतिहीन हो जाती है ऐसा उन पर वायु तथा नमी के अभिक्रिया के कारण होता है।
●जिस पदार्थ को आसानी से खरोंचा व संपीड़ित किया जा सकता है वह कोमल पदार्थ होते हैं।
●जिन पदार्थ को आसानी से खरोंचा नहीं जा सकता वह कठोर पदार्थ होते है।
●जो पदार्थ पानी में आसानी से घुल जाते हैं वह विलय होते हैं।
●जो पदार्थ जेल में नहीं घुल पाते वे अविलय पदार्थ होते हैं।
●जिस वस्तु व पदार्थ के आर पार आसानी से देखा जा सकता है वह पारदर्शी होते हैं।
●जिस वस्तु व पदार्थ के आर पार नहीं देखा जा सकता है वह अपारदर्शी होते हैं।
●जिस वस्तु व पदार्थ के आर पर आसानी से नहीं देखा जा सकता है वह पारभासी होते हैं।
Class 6 Science Chapter 4 पाठ का सारांश :-
●हमारे चारों और की वस्तुएं अनेक प्रकार के पदार्थों से बनी हैं।
किसी दिए गए पदार्थ का उपयोग बहुत सी वस्तुओं के निर्माण में किया जा सकता है। किसी वस्तु को केवल एक ही पदार्थ से भी बनाना संभव हो सकता है अथवा उसे विभिन्न प्रकार के पदार्थों से भी बनाया जा सकता है।
विभिन्न प्रकार के पदार्थों के गुण भिन्न-भिन्न होते हैं।
●कुछ पदार्थ दिखावट में चमकदार होते हैं, जबकि अन्य नहीं होते। कुछ खुरदरे होते हैं तो कुछ अन्य चिकने (मसूड़ों)। इसी प्रकार, कुछ पदार्थ स्पर्श करने पर कठोर लगते हैं, तो कुछ अन्य कोमल लगते हैं।
◆ कुछ पदार्थ जल में विलय होते हैं जबकि कुछ अन्य अविलेय होते हैं।
कुछ पदार्थ जैसे कांच पारदर्शी होते हैं, तथा कुछ अन्य जैसे लकड़ी एवं धातु अपारदर्शी होते हैं। कुछ पदार्थ पारभासी होते हैं।
● पदार्थों को उनके गुणों में समानता तथा विभिन्नताओं के आधार पर समूह में बांटा जाता है।
●वस्तु को सुविधा तथा उनके गुणों के अध्ययन के लिए एक साथ समूहित किया जाता है।
@Gk_trick
#scie
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◆जो पदार्थ रेगमाल से रगड़ने पर चमकीले दिखाई पड़ते हैं तथा घुतिवान होते हैं वह धातु होते हैं।
●जिस पदार्थ में चमक अथवा घुति होते हैं वे धातु होते हैं जैसे लोहा, तांबा, एलमुनियम तथा सोना।
●कुछ धातु अपनी चमक खो देती है और घुतिहीन हो जाती है ऐसा उन पर वायु तथा नमी के अभिक्रिया के कारण होता है।
●जिस पदार्थ को आसानी से खरोंचा व संपीड़ित किया जा सकता है वह कोमल पदार्थ होते हैं।
●जिन पदार्थ को आसानी से खरोंचा नहीं जा सकता वह कठोर पदार्थ होते है।
●जो पदार्थ पानी में आसानी से घुल जाते हैं वह विलय होते हैं।
●जो पदार्थ जेल में नहीं घुल पाते वे अविलय पदार्थ होते हैं।
●जिस वस्तु व पदार्थ के आर पार आसानी से देखा जा सकता है वह पारदर्शी होते हैं।
●जिस वस्तु व पदार्थ के आर पार नहीं देखा जा सकता है वह अपारदर्शी होते हैं।
●जिस वस्तु व पदार्थ के आर पर आसानी से नहीं देखा जा सकता है वह पारभासी होते हैं।
Class 6 Science Chapter 4 पाठ का सारांश :-
●हमारे चारों और की वस्तुएं अनेक प्रकार के पदार्थों से बनी हैं।
किसी दिए गए पदार्थ का उपयोग बहुत सी वस्तुओं के निर्माण में किया जा सकता है। किसी वस्तु को केवल एक ही पदार्थ से भी बनाना संभव हो सकता है अथवा उसे विभिन्न प्रकार के पदार्थों से भी बनाया जा सकता है।
विभिन्न प्रकार के पदार्थों के गुण भिन्न-भिन्न होते हैं।
●कुछ पदार्थ दिखावट में चमकदार होते हैं, जबकि अन्य नहीं होते। कुछ खुरदरे होते हैं तो कुछ अन्य चिकने (मसूड़ों)। इसी प्रकार, कुछ पदार्थ स्पर्श करने पर कठोर लगते हैं, तो कुछ अन्य कोमल लगते हैं।
◆ कुछ पदार्थ जल में विलय होते हैं जबकि कुछ अन्य अविलेय होते हैं।
कुछ पदार्थ जैसे कांच पारदर्शी होते हैं, तथा कुछ अन्य जैसे लकड़ी एवं धातु अपारदर्शी होते हैं। कुछ पदार्थ पारभासी होते हैं।
● पदार्थों को उनके गुणों में समानता तथा विभिन्नताओं के आधार पर समूह में बांटा जाता है।
●वस्तु को सुविधा तथा उनके गुणों के अध्ययन के लिए एक साथ समूहित किया जाता है।
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◆ सिल्वर अर्थव्यवस्था
● सिल्वर अर्थव्यवस्था वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन, वितरण और उपभोग की प्रणाली है जिसका उद्देश्य वृद्ध और उम्रदराज़ लोगों की क्रय क्षमता का उपयोग करना तथा उनकी खपत, जीवन और स्वास्थ्य संबंधी ज़रूरतों को पूरा करना है।
●सिल्वर अर्थव्यवस्था का विश्लेषण सामाजिक जेरोन्टोलॉजी (उम्र बढ़ने का अध्ययन) के क्षेत्र में एक मौजूदा आर्थिक प्रणाली के रूप में नहीं बल्कि उम्र बढ़ने की नीति के एक साधन तथा बढ़ती आबादी के लिये एक संभावित, आवश्यकता-उन्मुख आर्थिक प्रणाली बनाने के राजनीतिक विचार के रूप में किया जाता है।
●इसका मुख्य तत्त्व एक नए वैज्ञानिक, अनुसंधान और कार्यान्वयन प्रतिमान के रूप में जेरोनटेक्नोलॉजी (वृद्ध लोगों से संबंधित प्रौद्योगिकी) है।
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● सिल्वर अर्थव्यवस्था वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन, वितरण और उपभोग की प्रणाली है जिसका उद्देश्य वृद्ध और उम्रदराज़ लोगों की क्रय क्षमता का उपयोग करना तथा उनकी खपत, जीवन और स्वास्थ्य संबंधी ज़रूरतों को पूरा करना है।
●सिल्वर अर्थव्यवस्था का विश्लेषण सामाजिक जेरोन्टोलॉजी (उम्र बढ़ने का अध्ययन) के क्षेत्र में एक मौजूदा आर्थिक प्रणाली के रूप में नहीं बल्कि उम्र बढ़ने की नीति के एक साधन तथा बढ़ती आबादी के लिये एक संभावित, आवश्यकता-उन्मुख आर्थिक प्रणाली बनाने के राजनीतिक विचार के रूप में किया जाता है।
●इसका मुख्य तत्त्व एक नए वैज्ञानिक, अनुसंधान और कार्यान्वयन प्रतिमान के रूप में जेरोनटेक्नोलॉजी (वृद्ध लोगों से संबंधित प्रौद्योगिकी) है।
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Class 6 Science Chapter 5 Notes
● गेहूं, चावल तथा दालों से कुछ बड़े मिट्टी के कणों, पत्थर तथा भूंसे को हाथों द्वारा अलग करने की विधि को हस्त चयन कहते हैं।
● सूखे पौधों की डंडियों से अन्नकणो अथवा अनाज को पृथक करने की प्रक्रिया को थ्रेशिंग कहते हैं।
● निष्पावन, अनाज के भारी बीजो से भूसे को अलग करने की एक विधि है इसे खाली मैदान में ऊंचे समतल स्थान पर खड़े होकर किया जाता है।
◆ मिश्रण में जल मिलाने पर भारी अवयवों के नीचे तली में बैठ जाने के प्रकम को अवसादन कहते हैं।
◆अवसादित मिश्रण को बिना हिलाए जल को मिट्टी सहित उड़ेलने की क्रिया को निस्तारण कहते हैं।
◆किसी मिश्रण के कणों की आमाप में अंतर का उपयोग चालन तथा निस्यंदन प्रक्रियाओं द्वारा पृथक्करण में किया जाता है।
◆जल को उसके वास्प में परिवर्तन करने की प्रक्रिया को वाष्पन कहते हैं।
◆जल वाष्प से उसकी द्रव अवस्था में परिवर्तित होने की प्रक्रिया को संघनन कहते हैं।
◆जिस विलियन में कोई पदार्थ और अधिक ना घुल सके वह उस पदार्थ का संतृप्त विलियन होता है।
◆जल विलय पदार्थों की विभिन्न मात्राएं घोलता है।
रेत और जल के मिश्रण में रेत के भारी कण तली में बैठ जाते हैं और निस्तारण की विधि द्वारा जल को पृथक किया जा सकता हैं।
◆द्रव तथा उसमें अविलेय पदार्थ के अवयवों को निस्यंदन के उपयोग से पृथक किया जा सकता है।
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● गेहूं, चावल तथा दालों से कुछ बड़े मिट्टी के कणों, पत्थर तथा भूंसे को हाथों द्वारा अलग करने की विधि को हस्त चयन कहते हैं।
● सूखे पौधों की डंडियों से अन्नकणो अथवा अनाज को पृथक करने की प्रक्रिया को थ्रेशिंग कहते हैं।
● निष्पावन, अनाज के भारी बीजो से भूसे को अलग करने की एक विधि है इसे खाली मैदान में ऊंचे समतल स्थान पर खड़े होकर किया जाता है।
◆ मिश्रण में जल मिलाने पर भारी अवयवों के नीचे तली में बैठ जाने के प्रकम को अवसादन कहते हैं।
◆अवसादित मिश्रण को बिना हिलाए जल को मिट्टी सहित उड़ेलने की क्रिया को निस्तारण कहते हैं।
◆किसी मिश्रण के कणों की आमाप में अंतर का उपयोग चालन तथा निस्यंदन प्रक्रियाओं द्वारा पृथक्करण में किया जाता है।
◆जल को उसके वास्प में परिवर्तन करने की प्रक्रिया को वाष्पन कहते हैं।
◆जल वाष्प से उसकी द्रव अवस्था में परिवर्तित होने की प्रक्रिया को संघनन कहते हैं।
◆जिस विलियन में कोई पदार्थ और अधिक ना घुल सके वह उस पदार्थ का संतृप्त विलियन होता है।
◆जल विलय पदार्थों की विभिन्न मात्राएं घोलता है।
रेत और जल के मिश्रण में रेत के भारी कण तली में बैठ जाते हैं और निस्तारण की विधि द्वारा जल को पृथक किया जा सकता हैं।
◆द्रव तथा उसमें अविलेय पदार्थ के अवयवों को निस्यंदन के उपयोग से पृथक किया जा सकता है।
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Class 6 Science Chapter 7 Important Notes
● पौधों को 3 संवर्गों में वर्गीकृत कर सकते हैं :- (क) शाक, (ख) वृक्ष, (ग) झाड़ी।
● हरे एवं कोमल तने वाले पौधों को शाक कहते हैं।
●कुछ पौधों में शाखाएं तने के आधार के समीप से निकलती है तना कठोर होता है परंतु अधिक मोटा नहीं होता। इन्हें झाड़ी कहते हैं।
●कुछ पौधे बहुत ऊंचे होते हैं तथा इनके तने सुदृढ़ एवं गहरे होते हैं इनमें शाखाएं भूमि से अधिक ऊंचाई पर तने के ऊपरी भाग से निकलती है। इन्हें वृक्ष कहते हैं।
◆कमजोर तने वाले पौधे सीधे खड़े नहीं हो सकते और यह भूमि पर फैल जाते हैं। इन्हें विसर्पी लता कहते हैं।
कुछ पौधे सहायता से ऊपर चढ़ जाते हैं ऐसे पौधे आरोही कहलाते हैं। यह शाक, झाड़ी और पेड़ों से अलग होते हैं।
◆पत्ती का वह भाग जिसके द्वारा वह तने से जुड़ी होती है वह पर्णवृंत कहलाता है।
●पत्ती के चपटे हरे भाग को फलक कहते हैं।
●पत्ती के मध्य में एक मोटी शिरा होती है जिसे मध्य शिरा कहते हैं।
पत्तियों पर शिराओं द्वारा बनाए गए डिजाइन को शिरा विन्यास कहते हैं।
जिन पत्तियों में शिराएं एक दूसरे के समांतर होते हैं ऐसे शिरा विन्यास को समांतर शिरा विन्यास कहते हैं।
●पत्तियों में से जल वाष्प के रूप में जल की बूंदे निकलती है इस क्रिया को वाष्पोत्सर्जन कहते हैं।
हरी पत्तियां सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में जल एवं कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करके अपना भोजन बनाती है इस प्रक्रम को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं।
जड़े पौधे को मिट्टी में मजबूती से जमाई रखती है इसे मिट्टी में पौधे का स्थिरक कहा जाता है।
●जिन पौधे की पत्तियां जलिका रूपी शिरा विन्यास वाली होती है एवं जिन पौधे में मुख्य जड़ होते हैं उसे मुसला जड़ कहते हैं तथा मुख्य जड़ के साथ छोटी जड़ों को पाश्र्व कहते हैं।
●जिन पौधे की पत्तियां समांतर शिरा विन्यास वाली होती है एवं जिन पौधों में मुख्य जड़ नहीं होते हैं सभी जड़े एक समान लगते हैं इन्हें रेशेदार जड़ कहते हैं।
◆पौधे अपना भोजन प्रकाश संश्लेषण द्वारा बनाते हैं।
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● पौधों को 3 संवर्गों में वर्गीकृत कर सकते हैं :- (क) शाक, (ख) वृक्ष, (ग) झाड़ी।
● हरे एवं कोमल तने वाले पौधों को शाक कहते हैं।
●कुछ पौधों में शाखाएं तने के आधार के समीप से निकलती है तना कठोर होता है परंतु अधिक मोटा नहीं होता। इन्हें झाड़ी कहते हैं।
●कुछ पौधे बहुत ऊंचे होते हैं तथा इनके तने सुदृढ़ एवं गहरे होते हैं इनमें शाखाएं भूमि से अधिक ऊंचाई पर तने के ऊपरी भाग से निकलती है। इन्हें वृक्ष कहते हैं।
◆कमजोर तने वाले पौधे सीधे खड़े नहीं हो सकते और यह भूमि पर फैल जाते हैं। इन्हें विसर्पी लता कहते हैं।
कुछ पौधे सहायता से ऊपर चढ़ जाते हैं ऐसे पौधे आरोही कहलाते हैं। यह शाक, झाड़ी और पेड़ों से अलग होते हैं।
◆पत्ती का वह भाग जिसके द्वारा वह तने से जुड़ी होती है वह पर्णवृंत कहलाता है।
●पत्ती के चपटे हरे भाग को फलक कहते हैं।
●पत्ती के मध्य में एक मोटी शिरा होती है जिसे मध्य शिरा कहते हैं।
पत्तियों पर शिराओं द्वारा बनाए गए डिजाइन को शिरा विन्यास कहते हैं।
जिन पत्तियों में शिराएं एक दूसरे के समांतर होते हैं ऐसे शिरा विन्यास को समांतर शिरा विन्यास कहते हैं।
●पत्तियों में से जल वाष्प के रूप में जल की बूंदे निकलती है इस क्रिया को वाष्पोत्सर्जन कहते हैं।
हरी पत्तियां सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में जल एवं कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करके अपना भोजन बनाती है इस प्रक्रम को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं।
जड़े पौधे को मिट्टी में मजबूती से जमाई रखती है इसे मिट्टी में पौधे का स्थिरक कहा जाता है।
●जिन पौधे की पत्तियां जलिका रूपी शिरा विन्यास वाली होती है एवं जिन पौधे में मुख्य जड़ होते हैं उसे मुसला जड़ कहते हैं तथा मुख्य जड़ के साथ छोटी जड़ों को पाश्र्व कहते हैं।
●जिन पौधे की पत्तियां समांतर शिरा विन्यास वाली होती है एवं जिन पौधों में मुख्य जड़ नहीं होते हैं सभी जड़े एक समान लगते हैं इन्हें रेशेदार जड़ कहते हैं।
◆पौधे अपना भोजन प्रकाश संश्लेषण द्वारा बनाते हैं।
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Important questions answers
1 : मुसला जड़ और रेशेदार जड़ में अंतर स्पष्ट कीजिए।
मूसला जड़ :- जिन पौधों में मुख्य जड़ होती है उसे मुसला जड़ कहते हैं।
रेशेदार जड़ :- जिन पौधों में मुख्य जड़ नहीं होते हैं सभी जड़े एक समान लगते हैं उसे रेशेदार जड़ कहते हैं।
2 : बिना जड़ निकाले कैसे पता लगाएं कि कौन से पौधे का जड़ मुसला जड़ है और रेशेदार जड़ है?
जिन पौधों के पत्ते समांतर शिरा विन्यास वाले होते हैं उनकी जड़े रेशेदार होती है।
जिन पौधों के पत्ते जलिका रुपी शिरा विन्यास वाले होते हैं उनकी जड़े मूसला जड़ होती है।
3 : पौधे के अन्य भागों में भोजन कैसे पहुंचता है?
तने द्वारा जड़ों से पत्तियों को जल और पत्तियों से भोजन, पौधे के अन्य भागों तक पहुंचता है।
4 : पुष्प के विभिन्न भागों के नाम बताइए।
पुष्प के विभिन्न भाग :- बाह्यदल, पंखुड़ी, पुंकेसर एवं स्त्रीकेसर
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1 : मुसला जड़ और रेशेदार जड़ में अंतर स्पष्ट कीजिए।
मूसला जड़ :- जिन पौधों में मुख्य जड़ होती है उसे मुसला जड़ कहते हैं।
रेशेदार जड़ :- जिन पौधों में मुख्य जड़ नहीं होते हैं सभी जड़े एक समान लगते हैं उसे रेशेदार जड़ कहते हैं।
2 : बिना जड़ निकाले कैसे पता लगाएं कि कौन से पौधे का जड़ मुसला जड़ है और रेशेदार जड़ है?
जिन पौधों के पत्ते समांतर शिरा विन्यास वाले होते हैं उनकी जड़े रेशेदार होती है।
जिन पौधों के पत्ते जलिका रुपी शिरा विन्यास वाले होते हैं उनकी जड़े मूसला जड़ होती है।
3 : पौधे के अन्य भागों में भोजन कैसे पहुंचता है?
तने द्वारा जड़ों से पत्तियों को जल और पत्तियों से भोजन, पौधे के अन्य भागों तक पहुंचता है।
4 : पुष्प के विभिन्न भागों के नाम बताइए।
पुष्प के विभिन्न भाग :- बाह्यदल, पंखुड़ी, पुंकेसर एवं स्त्रीकेसर
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#Chandrayaan3 |Chandryaan 3| चंद्रयान 3| Chandryaan 2| times of study | Isro | Current affairs
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