GK Trick
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#करट अफेयर्स Tips & Tricks
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✅ बंगाल विभाजन 

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⏩ 19 जुलाई 1905को भारत के तत्कालीन वाइसराय कर्जन के द्वारा किया गया था।

➡️ एक मुस्लिम बहुल प्रान्त का सृजन करने के उद्देश्य से ही भारत के बंगाल को दो भागों में बाँट दिये जाने का निर्णय लिया गया था।आप जीके ट्रिक्स टेलीग्राम पर पढ़ रहे है।

⏩ बंगाल-विभाजन 16 अक्टूबर 1905 से प्रभावी हुआ। इतिहास में इसे बंगभंग के नाम से भी जाना जाता है। यह अंग्रेजों की "फूट डालो - शासन करो" वाली नीति का ही एक अंग था। अत: इसके विरोध में 1908 ई. में सम्पूर्ण देश में `बंग-भंग' आन्दोलन शुरु हो गया। 

⏩ इस विभाजन के कारण उत्पन्न उच्च स्तरीय राजनीतिक अशांति के कारण 1911 में दोनो तरफ की भारतीय जनता के दबाव की वजह से बंगाल के पूर्वी एवं पश्चिमी हिस्से पुनः एक हो गए।
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✅ बंगभंग की समाप्ति

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⏩ सन 1911 के 12 दिसम्बर को दिल्ली में एक दरबार हुआ, जिसमें सम्राट् पंचम जार्ज, सम्राज्ञी मेरी तथा भारत सचिव लार्ड क्रू आए थे।

⏩ इस दरबार के अवसर पर एक राजकीय घोषणा-द्वारा पश्चिम और पूर्व वंग के बँगला भाषी इलाकों को एक प्रांत में लाने का आदेश किया गया। आप जीके ट्रिक्स टेलीग्राम चैलन पर पढ़ रहे है।

⏩ राजधानी कलकत्ते से दिल्ली में हटा दी गई। मुस्लिम लीग का 1912 का वार्षिक अधिवेशन नवाब सलीमुल्ला खाँ के सभापतित्व में ढाके में हुआ।

⏩ इसमें नवाब ने अपने अभिभाषण में हिंदुओं की शोरिशों और सरकार की बेमुरव्वतियों का बड़ा जोरदार चित्र खींचा और वंगभंग रद्द करने का विरोध प्रकट किया।
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#His
उत्तर:B. दूसरी

SOLUTION
* वल्लभी वह स्थान था जहाँ दूसरी जैन पारिषद आयोजित हुई थी।

* इसे 521 A.D में देवार्दि क्षाश्रमण की अध्यक्षता में आयोजित किया गया था।

◆पहली जैन परिषद 300BC में पाटलिपुत्र में हुई थी।

◆ यह शतुलभद्र की अध्यक्षता में हुई थी।
12 अंग का संकलन प्रथम परिषद में किया गया था।

◆ यह पवित्र पाठ अगमों को लिखने से संबंधित थी, जो पहले मौखिक रूप से प्रसारित किये जाते थे।
यह देवार्धि क्षेमसेमना के नेतृत्व में आयोजित की गयी थी।
यह 512 AD में आयोजित की गयी।


◆ Doctrine of Jainism (जैन धर्म के सिद्धांत)

● Jainism में तीन रत्न है, सम्यक श्रद्धा, सम्यक जनन और सम्यक कर्मा।
सम्यक श्रद्धा तीर्थंकरों की आस्था है।
तथा, सम्यक जनन को ज्ञान पंथ का ज्ञान कहा गया है।
और, सम्यक कर्मा जैन धर्म के पाँच व्रतों का अभ्यास है।

◆ महावीर का जन्म 540 ईसा पूर्व बिहार में वैशाली के पास कुंडग्राम नामक गाँव में हुआ था।

● महावीर के पिता का नाम सिद्धार्थ थे।

● और, वे वैशाली के वज्जी के तहत ज्नाथ्रिका क्षत्रिय वंश के प्रमुख थे।

● तथा, महावीर के माता का नाम त्रिशला थे।

●और, वे वैशाली के राजा चेतक की बहन थी।

◆ महावीर का निधन 468 ईसा पूर्व में बहत्तर वर्ष की आयु में, बिहार के पास पावापुरी में हुवा था।

और, महावीर के निधन के वाद ग्यारह गंधरस में सुधर्मन (Sudharman) शिष्य ही केवल जीवित थे।     



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#Mahavir
सही उत्तर C

Explanation
व्याख्याः महरौली का लौह स्तंभ दिल्ली में कुतुब मीनार के परिसर में खड़ा है। इसकी ऊँचाई 7.2 मीटर और वजन 3 टन से भी ज़्यादा है। इस पर खुदे अभिलेख से इसके बनने के समय की जानकारी मिलती है। इसमें ‘चंद्र’ नामक एक शासक का ज़िक्र है जो सम्भवतः गुप्त वंश के थे।
#Ncertquiz
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लार्ड कैनिंग
═══════════════════
• रानी विक्टोरिया की घोषणा और भारत सरकार अधिनियम 1858 की घोषणा
• व्हाइट विद्रोह_
• भारतीय परिषद अधिनियम 1861
• भारतीय दंड संहिता 1860
• वहाबी आन्दोलन का दमन
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#His
प्रमुख राजवंश और उनके संस्थापक

▪️ हर्यक वंश          - बिम्बिसार

▪️ नन्द वंश           - महापदम नन्द

▪️ मौर्य साम्राज्य       - चन्द्रगुप्त मौर्य

▪️ गुप्त वंश             - श्री गुप्त श्रीगुप्त

▪️ पाल वंश           - गोपाल

▪️ पल्लव वंश         - सिंहविष्णु

▪️ राष्ट्रकूट वंश        - दन्तिदुर्ग

▪️ चालुक्य-वातापी वंश - पुलकेशिन प्रथम

▪️ चालुक्य-कल्याणी वंश - तैलप-द्वितीय

▪️ चोल वंश            - विजयालय

▪️ सेन वंश            - सामन्तसेन

▪️ गुर्जर प्रतिहार वंश    - हरिश्चंद्र/नागभट्ट

▪️ चौहान वंश          - वासुदेव

▪️ चंदेल वंश           - नन्नुक

▪️ गुलाम वंश          - कुतुबुद्दीन ऐबक

▪️ ख़िलजी वंश - जलालुद्दीन फिरोज ख़िलजी

▪️ तुगलक वंश         - गयासुद्दीन तुगलक

▪️ सैयद वंश           - खिज्र खान

▪️ लोदी वंश           - बहलोल लोदी

▪️ विजयनगर साम्राज्य - हरिहर एवं बुक्का

▪️ बहमनी साम्राज्य    - हसन गंगू

▪️ मुगल वंश         - बाबर
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#Imp
गोवा में पुर्तगाली शासन

✍️ भारत के पश्चिमी तट पर स्थित गोवा वर्ष 1510 से वर्ष 1961 तक एक पुर्तगाली उपनिवेश था।
इस छोटे तटीय क्षेत्र को अफोंसो-डी-अल्बुकर्क ने जीत लिया, जो पूर्वी मसाला व्यापार के लिये एक महत्त्वपूर्ण व्यापार केंद्र बन गया।
उल्लेखनीय रूप से गोवा ने 450 वर्षों तक केप ऑफ गुड होप के पूर्व में संपूर्ण पुर्तगाली साम्राज्य की राजधानी के रूप में कार्य किया।

✍️ वर्ष 1940 के दशक में जैसे ही भारत, ब्रिटिशराज से स्वतंत्र हुआ, गोवा में भी स्वतंत्रता के लिये संघर्ष शुरू हो गया।
अंततः 19 दिसंबर, 1961 को अपने उपनिवेशीकरण की चार शताब्दियों से भी अधिक समय पश्चात् गोवा को पुर्तगाली शासन से मुक्त कर दिया गया।
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