ऐतिहासिक मंदिर और उनकी कथा
1.89K subscribers
1K photos
408 videos
200 files
325 links
हमारी संस्कृति हमारा अभिमान

*इस चैनल मे हमारे मंदिरों की कथा के आडियो विडियो और हमारी सभ्यता से जुड़ी जगह का प्रसारण किया जाता है*

किसी और को इस ग्रुप में जोड़ने के लिये उन्हें ये लिंक दे

https://t.me/joinchat/AAAAAFTKJrx50fB1EhTzeg
Download Telegram
*🟠●अद्भुत ●ঔৣ● अकल्पनीय●🟠*
~~~~~~~~~~~~~~~~

🌹चित्र में आप तीन शिवलिंग देख रहे है ......
इसमे एक शिवलिंग अफगानिस्तान का है, दूसरा शिवलिंग वियतनाम का है.........और तीसरा शिवलिंग है मलेशिया का ....
यह सभी शिवलिंग लगभग 2000 वर्ष से भी अधिक पुराने है .....

यह सभी शिवलिंग इस बात प्रत्यक्ष प्रमाण है, की आज से 2500 वर्ष पहले सिर्फ एक धर्म था, जिसका नाम " सनातन ( वैदिक/हिन्दू) धर्म था ।। यह बात अलग है, की हमसे, हमारा धर्म संभाला नही गया ......

*꧁༒ॐ हर हर महादेव ॐ ༒꧂*
बहुत पुरानी फोटो ओरछा रामराजा मंदिर की
Forwarded from The Narrative
This media is not supported in your browser
VIEW IN TELEGRAM
कनक दुर्गा मंदिर, विजयवाड़ा 🛕
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
नासा ने जारी किया अंडर वाटर बहुत ही सुंदर "द्वारिका" जो कि समुद्र में आज भी मौजूद हैl
Forwarded from The Narrative
This media is not supported in your browser
VIEW IN TELEGRAM
भद्रराज मंदिर, मसूरी 🛕
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
*🟠●अद्भुत ●ঔৣ● अकल्पनीय●🟠*
~~~~~~~~~~~~~~~~

🌹जानना_चाहते_हो_अजूबा_किसे_कहते_हैं ?

इस मंदिर की वास्तुकला इस प्रकार की है कि सुबह की पहली किरण वेधशाला, मंडप और गर्भगृह के छोटे से द्वार को चीरती हुई शिवलिंग पर गिरती है।

मानो सूर्य भोलेनाथ को प्रणाम कर दुनिया में प्रकाश फैलाने की अनुमति मांगता हो ।

क्या उन्नत वास्तुकला व तकनीक के धनी थे हमारे पूर्वज, हमें इस पर गर्व है, लेकिन आजकल की युवा पीढ़ी को ये सब जानने की इच्छा कहा है ।

🌹नीलकंठेश्वर_मंदिर, उदयपुर🙏🏻🚩

*꧁༒ॐ हर हर महादेव ॐ ༒꧂*
Forwarded from Santosh Kumar Doshi
This media is not supported in your browser
VIEW IN TELEGRAM
बाबा नीम करोरी की अद्भूत कथाए।
*🟠●अद्भुत ●ঔৣ● अकल्पनीय●🟠*
~~~~~~~~~~~~~~~~

🌹गौरीश्वर मंदिर येलंदूर, चामराजनगर जिला, कर्नाटक राज्य, भारत (भारत)

मंदिर का निर्माण 1500 ईस्वी में विजयनगर साम्राज्य के एक स्थानीय सामंत प्रमुख सिंगेदेपा देवभूपाल द्वारा किया गया था।

स्थापत्य विशेषताएं:
*******
मंदिर की योजना सरल है। इसमें एक गर्भगृह (गर्भगृह), एक बंद हॉल (मंतपा), ग्रेनाइट स्तंभों द्वारा समर्थित एक खुला हॉल और एक असामान्य महाद्वारा (भव्य प्रवेश द्वार) है, जिसके ऊपर सामान्य टॉवर (गोपुरम) का अभाव है। इस प्रकार के प्रवेश द्वार को समकालीन शैली में बाले मंतपा (जलाया हुआ, चूड़ीदार हॉल) कहा जाता है। गर्भगृह में लिंग है, जो हिंदू भगवान शिव का सार्वभौमिक प्रतीक है। बंद हॉल में विभिन्न हिंदू देवताओं के चित्र हैं; विष्णु, शनमुख, पार्वती, महिषासुरमर्दिनी (देवी दुर्गा का एक रूप), भैरव (भगवान शिव का एक रूप), मां दुर्गा, वीरभद्र (शिव का दूसरा रूप) और श्री गणपति। प्रवेश द्वार की दीवारों को पौराणिक कथाओं और महाकाव्यों के दृश्यों को दर्शाने वाली राहत से सजाया गया है। प्रवेश द्वार को प्रदान की जाने वाली एक असामान्य सजावट पत्थर के छल्ले (गठरी) की जंजीरें हैं।

*꧁༒ॐ हर हर महादेव ॐ ༒꧂*
*क्या आप जानते हैं ???*
*महाभारत के युद्ध मे कितने लोग मारे गये ??*

महाभारत के *स्त्री पर्व* के एक प्रसंग में धृतराष्ट्र युधिष्ठिर से *युद्ध में मारे गए योद्धाओं की संख्या* पूछते हैं।
धृतराष्ट्र के इस सवाल का जवाब देते हुए युधिष्ठिर कहते हैं कि, *इस युद्ध में 1 अरब 66 करोड़ 20 हजार वीर मारे गए हैं। इनके अलावा 24 हजार 165 वीरों का कोई पता ही नहीं है।*

*🙏🏻🌹 हरे कृष्णा 🙏🏻🌹*
*🚩महाभारत चक्रव्यूह🕸️*
विश्व का सबसे बड़ा युद्ध था महाभारत का कुरुक्षेत्र युद्ध। इतिहास में इतना भयंकर युद्ध केवल एक बार ही घटित हुआ था। अनुमान है कि महाभारत के कुरुक्षेत्र युद्ध में परमाणू हथियारों का उपयॊग भी किया गया था।
‘चक्र’ यानी ‘पहिया’
और
‘व्यूह’ यानी ‘गठन’
पहिए के जैसे घूमता हुआ व्यूह है चक्रव्यूह। कुरुक्षेत्र युद्ध का सबसे खतरनाक रण तंत्र था चक्रव्यूह। यधपि आज का आधुनिक जगत भी चक्रव्यूह जैसे रण तंत्र से अनभिज्ञ हैं। चक्रव्यू या पद्मव्यूह को भेधना असंभव था। द्वापरयुग में केवल सात लोग ही इसे भेधना जानते थे।
भगवान कृष्ण के अलावा अर्जुन, भीष्मपितामह, द्रॊणाचार्य, कर्ण, अश्वत्थामा और प्रद्युम्न ही व्यूह को बेध सकते थे जानते हैं।
अभिमन्यु केवल चक्रव्यूह के अंदर प्रवेश करना जानता था।

चक्रव्यूह में कुल सात परत होती थी। सबसे अंदरूनी परत में सबसे शौर्यवान सैनिक तैनात होते थे। यह परत इस प्रकार बनाये जाते थे कि बाहरी परत के सैनिकों से अंदर की परत के सैनिक शारीरिक और मानसिक रूप से ज्यादा बलशाली होते थे।
सबसे बाहरी परत में पैदल सैन्य के सैनिक तैनात हुआ करते थे। अंदरूनी परत में अस्र शत्र से सुसज्जित हाथियों की सेना हुआ करती थी।
चक्रव्यूह की रचना एक भूल भुलैय्या के जैसे हॊती थी जिसमें एक बार शत्रू फंस गया तो घन चक्कर बनकर रह जाता था।
चक्रव्यूह में हर परत की सेना घड़ी के कांटे के जैसे ही हर पल घूमता रहता था। इससे व्यूह के अंदर प्रवेश करने वाला व्यक्ति अंदर ही खॊ जाता और बाहर जाने का रास्ता भूल जाता था। महाभारत में व्यूह की रचना गुरु द्रॊणाचार्य ही करते थे।
चक्रव्यूह को युग का सबसे सर्वेष्ठ सैन्य दलदल माना जाता था। इस व्यूह का गठन युधिष्टिर को बंधी बनाने के लिए ही किया गया था। माना जाता है कि 48×128 किलॊमीटर के क्षेत्र फल में कुरुक्षेत्र नामक जगह पर युद्ध हुआ था जिसमें भाग लेने वाले सैनिकों की संख्या 1.8 मिलियन था!

चक्रव्यूह को घुमता हुआ मृत्यु का पहिया भी कहा जाता था। क्योंकि एक बार जो इस व्यूक के अंदर गया वह कभी बाहर नहीं आ सकता था। यह पृथ्वी की ही तरह अपने अक्ष में घूमता था साथ ही साथ हर परत भी परिक्रमा करती हुई घूमती थी। इसी कारण से बाहर जाने का द्वार हर वक्त अलग दिशा में बदल जाता था जो शत्रु को भ्रमित करता था। अद्भुत और अकल्पनीय युद्ध तंत्र था चक्रव्यूह। आज का आधुनिक जगत भी इतने उलझे हुए और असामान्य रण तंत्र को युद्ध में नहीं अपना सकता है।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि संगीत या शंख के नाद के अनुसार ही चक्रव्यूह के सैनिक अपने स्थिती को बदल सकते थे। कॊई भी सेनापती या सैनिक अपनी मन मर्ज़ी से अपनी स्थिती को बदल नहीं सकता था।
अद्भूत अकल्पनीय

ज़रा सॊचिये कि सहस्र सहस्र वर्ष पूर्व चक्रव्यूह जैसे घातक युद्ध तकनीक को अपनाने वाले कितने बुद्धिवान रहें होंगे।

चक्रव्यूह ठीक उस आंधी की तरह था जो अपने मार्ग में आनेवाले हर एक चीज को तिनके की तरह उड़ाकर नष्ट कर देता था। अभिमन्यू व्यूह के भीतर प्रवेश करना तो जानता था लेकिन बाहर निकलना नहीं जानता था।
इसी कारण वश कौरवों ने छल से अभिमन्यू की हत्या कर दी थी।
माना जाता है कि चक्रव्यूह का गठन शत्रु सैन्य को मनोवैज्ञानिक और मानसिक रूप से इतना जर्जर बनाता था कि एक ही पल में हज़ारों शत्रु सैनिक प्राण त्याग देते थे।
श्री कृष्ण, अर्जुन, भीष्मपितामह, द्रॊणाचार्य, कर्ण, अश्वत्थामा और प्रद्युम्न के अलावा चक्रव्यूह से बाहर निकलने की रणनीति किसी के भी पास नहीं थी।

सदियों पूर्व ही इतने वैज्ञानिक रीति से अनुशासित रण नीती का गठन करना सामान्य विषय नहीं है। महाभारत के युद्ध में कुल तीन बार चक्रव्यूह का गठन किया था, जिनमें से एक में अभिमन्यू की म्रुत्यू हुई थी। केवल अर्जुन ने कृष्ण की कृपा से चक्रव्यूह को भेध कर जयद्रथ का वध किया था।
हमें गर्व होना चाहिए कि हम उस देश के वासी है जिस देश में सदियों पूर्व के विज्ञान और तकनीक का अद्भुत निदर्शन देखने को मिलता है। निस्संदेह चक्रव्यूह न भूतो न भविष्यती युद्ध तकनीक था। न भूत काल में किसी ने देखा और ना भविष्य में कॊई इसे देख पायेगा।
*जय श्री कृष्णा*
*🚩जय सत्य सनातन धर्म🏹*
*🟠●अद्भुत ●ঔৣ● अकल्पनीय●🟠*
~~~~~~~~~~~~~~~~

🌹प्राचीन ग्रीक रोमन राजा जिस देवता की पूजा करते थे, यह उन्ही की मूर्ति है ।। इंटरनेट से प्राप्त स्रोत्रों के अनुसार यह प्रतिमाएं 2200 वर्ष प्राचीन है ।। इससे एक बात और स्पष्ठ हो जाता है, की रोमन राजा भी उन्ही देवी देवताओं की पूजा करते थे, जिनकी पूजा आज हम हिन्दू करते है ।।अमेरिका से लेकर रूस तक, पूरे विश्व मे एक भी ऐसा देश नही है, जहां प्राचीन सनातन सभ्यता के साक्ष्य न मिलें हो ।।।

।। यह चित्र ग्रीक देवताओ के है ।।

*꧁༒ॐ हर हर महादेव ॐ ༒꧂*