🟠 वीर सावरकर
• पूरा नाम: विनायक दामोदर सावरकर
• जन्म: 28 मई 1883, भगूर (नासिक, महाराष्ट्र)
• मृत्यु: 26 फरवरी 1966, मुंबई
• उपाधि: स्वातंत्र्यवीर
🔹 प्रमुख योगदान:
• अभिनव भारत संगठन की स्थापना (1904)
• ब्रिटिश विरोधी गतिविधियों के लिए कुख्यात
• ‘1857 का स्वतंत्रता संग्राम’ को “प्रथम स्वतंत्रता संग्राम” कहा
• ‘हिंदुत्व’ शब्द को परिभाषित किया (1923 की किताब: Hindutva – Who is a Hindu?)
• काला पानी की सजा (1911, सेल्युलर जेल, अंडमान)
• हिंदू महासभा से जुड़ाव
• गांधीजी की हत्या मामले में आरोपित, पर बरी हुए
🔹 प्रमुख पुस्तकें:
• The First War of Indian Independence – 1857
• Hindutva
• My Transportation for Life
• जीवन कथा
🔹 विचारधारा:
• हिंदू राष्ट्रवाद के समर्थक
• जातिप्रथा और अंधविश्वास के विरोधी
• समाज सुधारक
• गांधीजी की अहिंसा नीति के आलोचक
✍🏻पुष्पेंद्र कसाना
Lect.PM Shri GSSS Hindaun City
• पूरा नाम: विनायक दामोदर सावरकर
• जन्म: 28 मई 1883, भगूर (नासिक, महाराष्ट्र)
• मृत्यु: 26 फरवरी 1966, मुंबई
• उपाधि: स्वातंत्र्यवीर
🔹 प्रमुख योगदान:
• अभिनव भारत संगठन की स्थापना (1904)
• ब्रिटिश विरोधी गतिविधियों के लिए कुख्यात
• ‘1857 का स्वतंत्रता संग्राम’ को “प्रथम स्वतंत्रता संग्राम” कहा
• ‘हिंदुत्व’ शब्द को परिभाषित किया (1923 की किताब: Hindutva – Who is a Hindu?)
• काला पानी की सजा (1911, सेल्युलर जेल, अंडमान)
• हिंदू महासभा से जुड़ाव
• गांधीजी की हत्या मामले में आरोपित, पर बरी हुए
🔹 प्रमुख पुस्तकें:
• The First War of Indian Independence – 1857
• Hindutva
• My Transportation for Life
• जीवन कथा
🔹 विचारधारा:
• हिंदू राष्ट्रवाद के समर्थक
• जातिप्रथा और अंधविश्वास के विरोधी
• समाज सुधारक
• गांधीजी की अहिंसा नीति के आलोचक
✍🏻पुष्पेंद्र कसाना
Lect.PM Shri GSSS Hindaun City
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📝राजस्थान हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति के. आर. श्रीराम (Justice K.R. Shriram) नियुक्त किए गए हैं। उनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर केंद्र सरकार द्वारा की गई है। वे पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम. एम. श्रीवास्तव का स्थान लेंगे, जिन्हें मद्रास हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया गया है ।

📝मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति प्रक्रिया
भारत के संविधान के अनुच्छेद 217 के अनुसार, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जो भारत के मुख्य न्यायाधीश और संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श करते हैं। कॉलेजियम, जिसमें मुख्य न्यायाधीश और दो वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं, मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए सिफारिश करता है।
⚖️ कोलेजियम की संरचना
1. सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम:
• मुख्य न्यायाधीश (CJI) और चार वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं। 
2. उच्च न्यायालय कोलेजियम:
• मुख्य न्यायाधीश और दो वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं।
📝 नियुक्ति और स्थानांतरण की प्रक्रिया
1. सिफारिश: कोलेजियम उपयुक्त उम्मीदवारों के नामों की सिफारिश करता है।
2. समीक्षा: सिफारिशों की समीक्षा के बाद, उन्हें केंद्र सरकार को भेजा जाता है।
3. स्वीकृति: केंद्र सरकार सिफारिशों को राष्ट्रपति के पास अनुमोदन के लिए भेजती है।
4. नियुक्ति: राष्ट्रपति नियुक्ति की अधिसूचना जारी करते हैं।
📜 कोलेजियम प्रणाली का कानूनी आधार
कोलेजियम प्रणाली का विकास तीन प्रमुख मामलों के माध्यम से हुआ: 
1. एस. पी. गुप्ता बनाम भारत संघ (1981): न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर जोर।
2. सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम भारत संघ (1993): कोलेजियम प्रणाली की स्थापना।
3. विशेष संदर्भ 1 (1998): कोलेजियम की कार्यप्रणाली की पुष्टि। 

📝मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति प्रक्रिया
भारत के संविधान के अनुच्छेद 217 के अनुसार, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जो भारत के मुख्य न्यायाधीश और संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श करते हैं। कॉलेजियम, जिसमें मुख्य न्यायाधीश और दो वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं, मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए सिफारिश करता है।
⚖️ कोलेजियम की संरचना
1. सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम:
• मुख्य न्यायाधीश (CJI) और चार वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं। 
2. उच्च न्यायालय कोलेजियम:
• मुख्य न्यायाधीश और दो वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं।
📝 नियुक्ति और स्थानांतरण की प्रक्रिया
1. सिफारिश: कोलेजियम उपयुक्त उम्मीदवारों के नामों की सिफारिश करता है।
2. समीक्षा: सिफारिशों की समीक्षा के बाद, उन्हें केंद्र सरकार को भेजा जाता है।
3. स्वीकृति: केंद्र सरकार सिफारिशों को राष्ट्रपति के पास अनुमोदन के लिए भेजती है।
4. नियुक्ति: राष्ट्रपति नियुक्ति की अधिसूचना जारी करते हैं।
📜 कोलेजियम प्रणाली का कानूनी आधार
कोलेजियम प्रणाली का विकास तीन प्रमुख मामलों के माध्यम से हुआ: 
1. एस. पी. गुप्ता बनाम भारत संघ (1981): न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर जोर।
2. सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम भारत संघ (1993): कोलेजियम प्रणाली की स्थापना।
3. विशेष संदर्भ 1 (1998): कोलेजियम की कार्यप्रणाली की पुष्टि। 
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✍🏻Quick revision for Indian & Western thinkers & ideology important Books pdf
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🍀आज भारत के पूर्व राष्ट्रपति की पुण्यतिथि है 🌸
✍🏻नीलम संजीव रेड्डी भारत के छठे राष्ट्रपति थे, जिन्होंने 25 जुलाई 1977 से 25 जुलाई 1982 तक इस पद पर कार्य किया। वे इस पद के लिए निर्विरोध चुने गए पहले व्यक्ति थे।
प्रारंभिक जीवन और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान
नीलम संजीव रेड्डी का जन्म 19 मई 1913 को आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के इल्लूर गांव में हुआ था। 1931 में, महात्मा गांधी के प्रभाव से प्रेरित होकर, उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए अपनी पढ़ाई छोड़ दी। वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहे और 1940 से 1945 के बीच कई बार जेल गए।
राजनीतिक करियर
• मुख्यमंत्री: 1956 में, वे आंध्र प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने। उन्होंने सिंचाई और कृषि विकास पर विशेष ध्यान दिया।
• लोकसभा अध्यक्ष: वे दो बार लोकसभा के अध्यक्ष बने—पहली बार 1967 से 1969 तक और दूसरी बार 1977 में। उनकी अध्यक्षता को सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए सराहा गया।
• राष्ट्रपति चुनाव: 1969 में, वे राष्ट्रपति पद के लिए कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार थे, लेकिन वी. वी. गिरि से हार गए। बाद में, 1977 में, वे जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में निर्विरोध राष्ट्रपति चुने गए।
राष्ट्रपति कार्यकाल (1977–1982)
राष्ट्रपति के रूप में, रेड्डी ने भारतीय संविधान के मूल्यों और राष्ट्रीय एकता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। उनके कार्यकाल के दौरान, उन्होंने राजनीतिक स्थिरता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
निधन और विरासत
नीलम संजीव रेड्डी का निधन 1 जून 1996 को बेंगलुरु में हुआ। उनकी स्मृति में, आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में एक क्रिकेट स्टेडियम का नाम उनके नाम पर रखा गया है ।
पुष्पेन्द्र कसाना
व्याख्याता (राजनीति विज्ञान)
✍🏻नीलम संजीव रेड्डी भारत के छठे राष्ट्रपति थे, जिन्होंने 25 जुलाई 1977 से 25 जुलाई 1982 तक इस पद पर कार्य किया। वे इस पद के लिए निर्विरोध चुने गए पहले व्यक्ति थे।
प्रारंभिक जीवन और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान
नीलम संजीव रेड्डी का जन्म 19 मई 1913 को आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के इल्लूर गांव में हुआ था। 1931 में, महात्मा गांधी के प्रभाव से प्रेरित होकर, उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए अपनी पढ़ाई छोड़ दी। वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहे और 1940 से 1945 के बीच कई बार जेल गए।
राजनीतिक करियर
• मुख्यमंत्री: 1956 में, वे आंध्र प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने। उन्होंने सिंचाई और कृषि विकास पर विशेष ध्यान दिया।
• लोकसभा अध्यक्ष: वे दो बार लोकसभा के अध्यक्ष बने—पहली बार 1967 से 1969 तक और दूसरी बार 1977 में। उनकी अध्यक्षता को सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए सराहा गया।
• राष्ट्रपति चुनाव: 1969 में, वे राष्ट्रपति पद के लिए कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार थे, लेकिन वी. वी. गिरि से हार गए। बाद में, 1977 में, वे जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में निर्विरोध राष्ट्रपति चुने गए।
राष्ट्रपति कार्यकाल (1977–1982)
राष्ट्रपति के रूप में, रेड्डी ने भारतीय संविधान के मूल्यों और राष्ट्रीय एकता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। उनके कार्यकाल के दौरान, उन्होंने राजनीतिक स्थिरता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
निधन और विरासत
नीलम संजीव रेड्डी का निधन 1 जून 1996 को बेंगलुरु में हुआ। उनकी स्मृति में, आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में एक क्रिकेट स्टेडियम का नाम उनके नाम पर रखा गया है ।
पुष्पेन्द्र कसाना
व्याख्याता (राजनीति विज्ञान)
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फोटोयुक्त मतदाता पहचान पत्र की शुरुआत चुनाव आयोग द्वारा कब से प्रारंभ की गई ?
Anonymous Quiz
13%
1991
30%
1992
34%
1993
23%
1994
👍17👏2❤1
‘ क्षेत्रवाद और भाषा के प्रश्न भारतीय राजनीति में इतने ज्वलंत प्रश्न रहे हैं और भारत के हाल के राजनीतिक इतिहास की घटनाओं के साथ इनका इतना गहरा संबंध रहा है कि प्रायः ऐसा लगता है कि यह राष्ट्रीय एकता की सम्पूर्ण समस्या है’ यह कथन किसका है ?
Anonymous Quiz
31%
रजनी कोठारी
33%
मॉरिस जोन्स
22%
योगेंद्र यादव
14%
सुभास पलसीकर
👍12❤5