Forwarded from 𝗩𝗘𝗗𝗜𝗖 𝗦𝗖𝗥𝗜𝗣𝗧𝗨𝗥𝗘
आखिर ASHISH समाजी बोले तो पुराण प्रवचन चलाने वाले संचालक ने एक और को नास्तिक बना दिया 😭
💯5
𝗩𝗘𝗗𝗜𝗖 𝗦𝗖𝗥𝗜𝗣𝗧𝗨𝗥𝗘
आखिर ASHISH समाजी बोले तो पुराण प्रवचन चलाने वाले संचालक ने एक और को नास्तिक बना दिया 😭
देखो कोई बौद्ध नास्तिक अगर नास्तिक बने फिर भी मुझे ही दोष दिया जा रहा 😭
अब कोई नास्तिक अगर नास्तिक बन जाए तो मेरा क्या दोष
अब कोई नास्तिक अगर नास्तिक बन जाए तो मेरा क्या दोष
😁8
1800 वर्ष प्राचीन वैदिक यज्ञ और देवताओं का उल्लेख।
226AD के नान्दसा यूप अभिलेख में मिलता है-
यह यूप एक वैदिक यज्ञानुष्ठान का है जो कि है "एकषष्टिरात्र यज्ञ" इस यज्ञ के विषय में हमें समवेदीय ताण्ड्य महाब्राह्मण में उल्लेख मिलता है।
तथा इसमें "ब्रह्मा", "इन्द्र", "प्रजापति", "महर्षियों" और "विष्णु" का उल्लेख किया गया है।
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
226AD के नान्दसा यूप अभिलेख में मिलता है-
**यित्वैकषष्टिरात्त्रमितिसत्त्रम परिमित ब्रह्मेंद्रप्रजापतिसहर्षीविष्णूस्थानेषु
यह यूप एक वैदिक यज्ञानुष्ठान का है जो कि है "एकषष्टिरात्र यज्ञ" इस यज्ञ के विषय में हमें समवेदीय ताण्ड्य महाब्राह्मण में उल्लेख मिलता है।
तथा इसमें "ब्रह्मा", "इन्द्र", "प्रजापति", "महर्षियों" और "विष्णु" का उल्लेख किया गया है।
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
🙏7❤1🔥1
गधा साला चू#@या ....कह रहा है कि चरम चोचन मेरा औलाद की शूद्र मूर्ख होता है और अतिशूद्र महामूर्ख होते हैं गजब टोपाबाज़ आदमी है ये ....चूतिये 2 कौड़ी के लोमड़ी...दयानन्द सरस्वती जी जन्म से वर्ण ही नहीं मानते वो गुण और कर्म स्वभाव को ही महत्व देते हैं ना कि जन्म से...ये मूर्ख गजपुत्र समझ रहा है कि जन्मजात शूद्र महामूर्ख होता है.....सीधी बात है द्विज अगर मूर्ख होगा तो..वो शूद्र है ....मूर्ख इंसान जो होता है बे अक़्ल उसको शूद्र कहते हैं जन्मजात शूद्र अगर द्विज वाले काम या होशियार है तो वो तो द्विज है लेकिन जन्मजात द्विज होकर मूर्ख है उसको शूद्र कहा गया है ......जन्म से वर्ण मानते तो....तब बात होती ना जो हाथी की नाजायज़ औलाद गजपुत्र हो क्या समझेगा चू%या.....
🔥7😁2
पुराण प्रवचन
गधा साला चू#@या ....कह रहा है कि चरम चोचन मेरा औलाद की शूद्र मूर्ख होता है और अतिशूद्र महामूर्ख होते हैं गजब टोपाबाज़ आदमी है ये ....चूतिये 2 कौड़ी के लोमड़ी...दयानन्द सरस्वती जी जन्म से वर्ण ही नहीं मानते वो गुण और कर्म स्वभाव को ही महत्व देते हैं ना कि जन्म…
Nukilaa bans daal dunga tere gaan kaan mei
😁8
वर्ण भेद का आधार भिन्न भिन्न व्यवसाय या कर्तव्य होता है। इसलिए जो योग्य शूद्र कुल का ज्यक्ति हो उसे राज्य तत्काल ब्राह्मण आदि उच्च वर्ण दे सकता है और इसी प्रकार जो दुराचारी ब्राह्मण कुल का व्यक्ति हो उसे राज्य शूद्र वर्ण में तत्काल गिरा सकता है। इसी तरह क्षेत्रीय और वैश्यों का भी उन्होंने कर्तव्यों से ही वर्ण में तत्काल परिवर्तन मानते थे।
~ ऋषि दयानन्द जी
❤9
पुराण प्रवचन
वर्ण भेद का आधार भिन्न भिन्न व्यवसाय या कर्तव्य होता है। इसलिए जो योग्य शूद्र कुल का ज्यक्ति हो उसे राज्य तत्काल ब्राह्मण आदि उच्च वर्ण दे सकता है और इसी प्रकार जो दुराचारी ब्राह्मण कुल का व्यक्ति हो उसे राज्य शूद्र वर्ण में तत्काल गिरा सकता है। इसी तरह क्षेत्रीय…
जो दुराचारी ब्राह्मण हो उसे शूद्र और जो श्रेष्ठ बुद्धिमान् शूद्र हो उसको ब्राह्मण बनावे - यह बात स्वयं समाज के आधीन होनी चाहिये ।
~ ऋषि दयानन्द
~ ऋषि दयानन्द
❤9
क्या आतिथ्य में गौ हत्या होता है?
देवपाल जैसे 12 वी शताब्दी के आचार्य अपने लौगाक्षि गृहसूत्र के भाष्य में लिखता की -
अर्थात् - ओम कहते हुए गाय को छोड़ दो। छोड़ी गई गाय अपनी इच्छा से स्वतंत्र होकर घास खाए— ऐसा कहकर, उस छोड़ी गई गाय को देखते हुए पशु के रूप में बकरे अथवा पशु अंग वाले मांस के टुकड़े को प्रतिनिधि के रूप में रखे।
इसमें देवपाल द्वारा गौ को घास चरने के लिए छोड़ा जाना और उसको घास चरते हुए देख के बकरे के पशु अंग लेने की बात कहा है।
वैसे बता दूं देवपाल भी यहां गौ हिंसा नहीं मानते हां बकरे का पशु अंग की बात करते हैं।
वैसे पशु अंग वाले खंडन हमारे पास अन्य भी प्रमाण है जिसे हम आगे सिद्ध करेंगे।
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
देवपाल जैसे 12 वी शताब्दी के आचार्य अपने लौगाक्षि गृहसूत्र के भाष्य में लिखता की -
अर्हयिताह ओमित्यविचारितसिद्धं कृत्वा हे विशसितारः यूयं गामुत्सृजत। उत्सृष्टा सती स्वाच्छन्द्येन तृणान्यत्तु भक्षयतु इत्युक्त्वा तामुत्सृष्टां दृष्ट्वां पशुं छागं, पश्चङ्गं वा मांसखण्डं प्रतिनिदधीत
अर्थात् - ओम कहते हुए गाय को छोड़ दो। छोड़ी गई गाय अपनी इच्छा से स्वतंत्र होकर घास खाए— ऐसा कहकर, उस छोड़ी गई गाय को देखते हुए पशु के रूप में बकरे अथवा पशु अंग वाले मांस के टुकड़े को प्रतिनिधि के रूप में रखे।
इसमें देवपाल द्वारा गौ को घास चरने के लिए छोड़ा जाना और उसको घास चरते हुए देख के बकरे के पशु अंग लेने की बात कहा है।
वैसे बता दूं देवपाल भी यहां गौ हिंसा नहीं मानते हां बकरे का पशु अंग की बात करते हैं।
वैसे पशु अंग वाले खंडन हमारे पास अन्य भी प्रमाण है जिसे हम आगे सिद्ध करेंगे।
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
❤5
Bsdk ka anpadh tere gurn aur karam se toh arya samaji se pit ta hai
Trads ke according to tu haii hee....sala gadha chutiya itna hai ye gajputra itna chutiya....shayad hee koi hoye....padh padh bsdk ....kya likha hai ....ki shudra agar brahman par jis ang se "prahar" kare ....uska wo ang kaat dena chahye.....na ki chu lene Matra se
Sala betikot tabhi peet ta hai....😎🤣🤣🤣🤣sala gajputra 🤣....le sukkaramaddva kha ke aata hai kya🍖🍖
Ye sab dhamki hee hoti hai taaki koi ye sab karne ki soch bhi na sakee....wastav mei koi nahi deta itne kathor dand....bas dhamki hee kaafi hoti hai ...kisi ko darane ke liye
Trads ke according to tu haii hee....sala gadha chutiya itna hai ye gajputra itna chutiya....shayad hee koi hoye....padh padh bsdk ....kya likha hai ....ki shudra agar brahman par jis ang se "prahar" kare ....uska wo ang kaat dena chahye.....na ki chu lene Matra se
Sala betikot tabhi peet ta hai....😎🤣🤣🤣🤣sala gajputra 🤣....le sukkaramaddva kha ke aata hai kya🍖🍖
Ye sab dhamki hee hoti hai taaki koi ye sab karne ki soch bhi na sakee....wastav mei koi nahi deta itne kathor dand....bas dhamki hee kaafi hoti hai ...kisi ko darane ke liye
❤8