पुराण प्रवचन
5.31K subscribers
8.21K photos
694 videos
64 files
434 links
हमारे पुराण ही हमारे धर्म के धरोहर है इसके ज्ञान को हमारे साथ पढ़ें और फैलाएं 🙏❤️
Download Telegram
परंपरा प्राप्त वेद के सायणभाष्य में विधवा पुनर्विवाह का समर्थन और विधवा के द्वारा प्रेतानुगमन का निषेध।

●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
    𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
🙏9
Forwarded from NEWSORA
This media is not supported in your browser
VIEW IN TELEGRAM
Thank you CJP
You Unite whole right wing from North to South east to west
Cricket to football
General to sc
All are united 🪷🪷

Follow @NewsoraNews
❤14
क्या शूद्र जन्मजात दास होने के लिए बाध्य हैं?

मनुस्मृति के मेधातिथि भाष्य में बोला गया है कि-
नैष दोषः।न तस्यौत्पत्तिकं दासत्वम्। इच्छाधीनत्वाद्धर्मार्थिनः।न हि तस्य दानाधानक्रिया युज्यते-क्रीतगृहजादिदासवत्। न तस्य नित्यं दास्यं किं तर्हि फलविशेषार्थिनः।ततश्चानिच्छतो न दास्यमस्ति।

अतो यदि शूद्रो विद्यमानधनः स्वातन्त्र्येण जीवेद्ब्राह्मणाद्यनपाश्रितो न जातु दुष्येत्
अर्थात् - इस आपत्ति में कोई दम नहीं है। क्योंकि उसके (शूद्रों के) मामले में 'दासता' जन्मजात नहीं है; यह पूरी तरह से उसकी स्वैच्छिक इच्छा है; वह पुण्य कमाने के उद्देश्य से ही इसका सहारा लेता है। इसके अलावा, ऐसे दास को न तो दिया जा सकता है और न ही बंधक रखा जा सकता है;

अतः जो दासता नहीं चाहता, उसके लिए दासता अनिवार्य नहीं है
इसलिए यदि किसी शूद्र के पास अपनी संपत्ति है और वह उसपर स्वतंत्र होकर जीवन यापन करता है, ब्राह्मणों और अन्य लोगों पर निर्भर होकर अपना भरण-पोषण नहीं करता है, तो वह कोई अपराध नहीं करता है।

●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
    𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
❤8
पुराण प्रवचन pinned «*पूरा वीडियो अवश्य देखें। PREMIERE JOIN ALL LIVE https://youtu.be/iQjnlHRQ3iQ?si=PX5q8cZQIcri__DD»
सोनिया गधी

पेंटर साहब इस्तीफा दो
😁14
Forwarded from NEWSORA
Irish newspaper

Ab kuch log bole gha foreign funding nhi ha rahi
Irish newspaper india ke west ma chale jaya toh ek country ne emergency laga dhi ha but try your best let's see what happens

Follow @NewsoraNews
💯1
कुषाण काल के श्री राम जी के प्राचीन सिक्के।

British Museum में संरक्षित यह मुद्रा 2nd Century AD में कुषाण राजा कनिष्क के पुत्र राजा हुविष्क के शासनकाल में प्रचलित किया गया था।

इसमें एक तरफ शासक के चित्र अंकित हैं जो कि हाथी पर सवार स्वयं राजा हुविष्क के है।
और सिक्के के दूसरे तरफ देवता रूपी स्वयं प्रभु श्री राम जी के चित्र अंकित किया गया है जिसमें उनको धनुष और वाण पकड़ते हुए अंकित किया गया है।

●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
    𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
🙏6❤2
Forwarded from Dharama_talks
महर्षि दयानंद सरस्वती जी के जीवन में भाँग सेवन का प्रसंग उठाते समय यह भी देखना चाहिए कि उन्होंने बाद में उस आदत का त्याग किया था।

किसी व्यक्ति के जीवन की पुरानी गलती बताना पर्याप्त नहीं है यह भी देखना चाहिए कि उसने उस गलती से क्या सीखा और अपने जीवन में क्या सुधार किया महर्षि जी के जीवन से यही सीख मिलती है कि सत्य की खोज में अपनी गलतियों को पहचानना और उन्हें छोड़ने का साहस रखना आवश्यक है।

इसलिए किसी भी महापुरुष के मूल्यांकन में उसके पूरे जीवन विचारों और आत्मसुधार को ध्यान में रखना चाहिए किसी एक प्रसंग के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय तथ्यों को पूरे संदर्भ में समझना चाहिए सत्य का पक्ष वही तर्क मजबूत करता है जो अधूरी जानकारी नहीं बल्कि संपूर्ण तथ्य प्रस्तुत करता है।

संदर्भ पुस्तक - जीवनचरित्र महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती

▬▬▬▬▬●🚩⚖️ 🚩●▬▬▬
     𝗝𝗢𝗜𝗡👉
@Dharama_talks
▬▬▬▬▬●🚩⚖️ 🚩●▬▬▬
❤10😁1
Dharama_talks
महर्षि दयानंद सरस्वती जी के जीवन में भाँग सेवन का प्रसंग उठाते समय यह भी देखना चाहिए कि उन्होंने बाद में उस आदत का त्याग किया था। किसी व्यक्ति के जीवन की पुरानी गलती बताना पर्याप्त नहीं है यह भी देखना चाहिए कि उसने उस गलती से क्या सीखा और अपने जीवन में क्या…
देखा जाए तो ऐतरेय ब्राह्मण के अनुसार ऋषि कवष ऐलूष को भी कभी यज्ञ सत्र से धक्के मार कर निकाला गया था क्यों कि वह एक जुआ खेलने वाले जुआरी थे।

पर क्या आगे उन्होंने ऋग्वेद के मंत्र दृष्टा ऋषि नहीं बने?

गलत आदतें कभी भी सही मनुष्यों के पथ में स्थायी प्रतिबन्धक नहीं होते।


ऋग्वेद (१०/३४/१३) -
अक्षैर्मा दीव्यः कृषिमित्कृषस्व वित्ते रमस्व बहु मन्यमानः ।
तत्र गावः कितव तत्र जाया तन्मे वि चष्टे सवितायमर्यः ॥

- हे जुआरी! पासों (जुए) से कभी मत खेलो। अपनी खेती करो और उस खेती से जो भी धन-धान्य प्राप्त हो, उसी में संतुष्ट रहो और उसे ही बहुत मानो। वहाँ (खेती में) तुम्हारी गायें हैं और वहीं तुम्हारी पत्नी है—यह बात मुझे सर्वप्रेरक, पूजनीय सविता देव (परमात्मा) ने बताई है।"
इस मंत्र का दर्शन करने वाले ऋषि खुद कवष ऐलूष थे पर परमात्मा के दिग्दर्शन से उन्होंने उस पाप आचरण का त्याग किया।
🙏3❤1
Media is too big
VIEW IN TELEGRAM
KV DEBATE VS MANOJ BHIMTAA😂


hahahaha 😂 10/10 debate


maja na aaya to unsubscribe kr denaa channel..aur agr majaa aaya to star bhej kr khushi jahir krnaa 😂
😁12
मौर्यकाल के शिलालेख में वैदिक देवता, वैदिक ऋषि और दिव्य धनुष के वर्णन।

अजगरा शिलालेख जो 3rd Century BCE के हैं उसमें आता है -
ऋषि अगस्त्य का नाम आया है जो वेदों के ऋषि थे।

वैदिक देवता इन्द्र का उनके पत्नी संबंधित नाम से वर्णन आया है "शचिपति" अर्थात् - इंद्राणी के पति इन्द्र।

गंधर्वों का भी इसमें नमस्कार है।

महाभारत के प्रसिद्ध पात्र सर्पगत नहुष का वर्णन है।

और साथ ही विष्णु जी के दिव्य धनुष "शार्ङ्ग" के भी वर्णन है।

●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
    𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
❤10
This media is not supported in your browser
VIEW IN TELEGRAM
योगी जी हमारे अगले वजीर ए आजम ❤️
💯13