Forwarded from कपिल सांख्ययोग अनुसन्धान केन्द्र (Kesharinandan)
VedSiddhantNirnay.pdf
31.5 MB
पुस्तक:- वेदसिद्धांतनिर्णय।
प्रथम संस्करण
पृष्ठ:- ७९
विषय:- हृदय में आत्मा का स्थान, यज्ञ, अभाव पदार्थ।
सम्पादक:- केशरीनन्दन
प्रकाशक:- कपिलसांख्ययोग अनुसन्धानकेन्द्र।
प्रथम संस्करण
पृष्ठ:- ७९
विषय:- हृदय में आत्मा का स्थान, यज्ञ, अभाव पदार्थ।
सम्पादक:- केशरीनन्दन
प्रकाशक:- कपिलसांख्ययोग अनुसन्धानकेन्द्र।
❤12😁1
कपिल सांख्ययोग अनुसन्धान केन्द्र
VedSiddhantNirnay.pdf
इसमें कुछ शब्दों की त्रुटि टाइपिंग के कारण अवश्य है उनको अगले संस्करण में शोध कर हटा दिया जायेगा
💯10❤1
Forwarded from पुराण प्रवचन
॥ ओ३म् ॥
निरुक्त ६/२८ मूल में भगवान शाक्लय का कोई दोष नहीं गिनाया है और नाही उनको गलत कहा है, मैं challenge करता हूं सभी अनार्यों को की मूल निरुक्त ६/२८ में दिखा देवे कि कहा गलत बोला है!
उसमें केवल भगवान यास्क ने इतना ही कहा है कि शाक्लय ने "वा" और "यः" पाठ भिन्न किया है, उसको "वायः" कर देने से अर्थ निकल आएगा! नाकी पदपाठ पर कोई प्रश्न किया है! क्योंकि निरुक्तकार का काम वेद का निर्वाचन करना है, सो कर दिया, पदपाठ में दोष कहा ही नहीं भगवान यास्क ने मूल निरुक्त में! भगवान यास्क का भाव यह है कि वेद को पदपाठ से तो आपने सुरक्षित कर दिया, बस अर्थ निकालने के लिए
अर्थात् स्वर अनुसार अर्थ कर दो! बस निरुक्तकार ने इतना ही कहा, यह असल rationality का प्रतीक है। यानी पाठ करने के लिए पदपाठ अनुसार "वा" और "यः" कर लो और अर्थ करने के लिए स्वरपाठ से direct "वायः" करके उसका अर्थ निकाल दो, that's it man! लेकिन शूद्रों में बुद्धि होती तो ऐसे समझाने की आवश्यकता कतये नहीं पड़ती। 🙏
निरुक्त ६/२८ मूल में भगवान शाक्लय का कोई दोष नहीं गिनाया है और नाही उनको गलत कहा है, मैं challenge करता हूं सभी अनार्यों को की मूल निरुक्त ६/२८ में दिखा देवे कि कहा गलत बोला है!
उसमें केवल भगवान यास्क ने इतना ही कहा है कि शाक्लय ने "वा" और "यः" पाठ भिन्न किया है, उसको "वायः" कर देने से अर्थ निकल आएगा! नाकी पदपाठ पर कोई प्रश्न किया है! क्योंकि निरुक्तकार का काम वेद का निर्वाचन करना है, सो कर दिया, पदपाठ में दोष कहा ही नहीं भगवान यास्क ने मूल निरुक्त में! भगवान यास्क का भाव यह है कि वेद को पदपाठ से तो आपने सुरक्षित कर दिया, बस अर्थ निकालने के लिए
"उदात्तं त्वेवमाख्यातमभविष्यत्"–निरुक्त
अर्थात् स्वर अनुसार अर्थ कर दो! बस निरुक्तकार ने इतना ही कहा, यह असल rationality का प्रतीक है। यानी पाठ करने के लिए पदपाठ अनुसार "वा" और "यः" कर लो और अर्थ करने के लिए स्वरपाठ से direct "वायः" करके उसका अर्थ निकाल दो, that's it man! लेकिन शूद्रों में बुद्धि होती तो ऐसे समझाने की आवश्यकता कतये नहीं पड़ती। 🙏
❤9
पुराण प्रवचन
॥ ओ३म् ॥ निरुक्त ६/२८ मूल में भगवान शाक्लय का कोई दोष नहीं गिनाया है और नाही उनको गलत कहा है, मैं challenge करता हूं सभी अनार्यों को की मूल निरुक्त ६/२८ में दिखा देवे कि कहा गलत बोला है! उसमें केवल भगवान यास्क ने इतना ही कहा है कि शाक्लय ने "वा" और "यः"…
अनपढ़ अद्वैति ऋषि shakal का नाम लेकर अपनी कूड़ा किताब को बचाने के लिए प्रयास कर रहे है पर वो अनपढ़ को क्या पता
💯7❤2🔥1
गौतम बुद्ध नंगे घुमा करते थे
त्रिपिटक (सूत्तपीटक, मज्झिम निकाय-12,महासीहनादसुत्त) में गौतम बुद्ध स्वयं बताते हैं कि -
अर्थात् गौतम बुद्ध खुद नंगे घुमा करते थे।
जो गौतम बुद्ध खुद नंगे घुमा करते थे वो विनयपीटक में भिक्षुणियों को उपदेश देते हैं कि स्तन और गुप्तांग संघ के भिक्षुओं को न दिखाएं 😂
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
त्रिपिटक (सूत्तपीटक, मज्झिम निकाय-12,महासीहनादसुत्त) में गौतम बुद्ध स्वयं बताते हैं कि -
मैंने परंपराओं की अवहेलना करते हुए नग्न अवस्था में रहा करता था।
अर्थात् गौतम बुद्ध खुद नंगे घुमा करते थे।
जो गौतम बुद्ध खुद नंगे घुमा करते थे वो विनयपीटक में भिक्षुणियों को उपदेश देते हैं कि स्तन और गुप्तांग संघ के भिक्षुओं को न दिखाएं 😂
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
😁7
मूलनिवासियों के द्वारा बुद्ध पर किया जाने वाला अत्याचार।
गौतम बुद्ध खुद त्रिपिटक ( मज़्जिम निकाय -१२) में बताते है कि -
मजे की बात यह है कि इन भीमटो के मुताबिक-
तो बुद्ध पर मूतने वाले थूकने वाले वह कौन लोग थे ?😢
यही मूलनिवासी ही थे जो बुद्ध जी पर मूत देते थे और आज दोष ब्राह्मणों को देते हैं कि ब्राह्मणों ने बौद्धों पर अत्याचार किया😢
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
गौतम बुद्ध खुद त्रिपिटक ( मज़्जिम निकाय -१२) में बताते है कि -
चरवाहे पास आकर मेरे ऊपर थूकते भी थे और मूतते भी थे।
मजे की बात यह है कि इन भीमटो के मुताबिक-
बुद्ध के काल में तो ब्राह्मण थे ही नहीं सब मूलनिवासी भरे पड़े थे भारत में और ब्राह्मण तो मुगलों के काल में विदेश से भारत आए
थे वेद लेके
तो बुद्ध पर मूतने वाले थूकने वाले वह कौन लोग थे ?😢
यही मूलनिवासी ही थे जो बुद्ध जी पर मूत देते थे और आज दोष ब्राह्मणों को देते हैं कि ब्राह्मणों ने बौद्धों पर अत्याचार किया😢
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
😁7
Forwarded from ࿗ HISTORY OF ARYAVART ࿗
यह चित्र मथुरा से प्राप्त तीसरी शताब्दी ईस्वी के एक व्यायाम पत्थर (वेट) का है। इस पत्थर पर एक नक्काशी बनी हुई है जिसमें भगवान कृष्ण को अश्व-दानव केसी का वध करते हुए दिखाया गया है। यह प्राचीन कलाकृति उस समय की पत्थर तराशने की कला और धार्मिक कहानियों के महत्व को दर्शाती है।
@history_of_aryavart join for more
Source- Vasudev Krishna & Mathura by Meenakshi Jain
@history_of_aryavart join for more
❤7🥰1
मौर्य वंश का मूल ऋषि मनु के सुर्य वंश ही था
१० वी शताब्दी के वघाली शिलालेख जिसमें एक मौर्य वंश के राजा गोविन्दराज मौर्य ने अपने मौर्य वंश के उत्पत्ति कुछ इस प्राकार वर्णन किया है -
इस पंक्ति में उन्होंने स्पष्ट सूर्य वंश और मनु जी के वंश से ही खुद के मौर्य वंश की उत्पत्ति का स्पष्ट उल्लेख किया है।
और इसी मनु जी के सूर्य वंश में ही राजा श्री राम जी का भी जन्म हुआ था।
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
१० वी शताब्दी के वघाली शिलालेख जिसमें एक मौर्य वंश के राजा गोविन्दराज मौर्य ने अपने मौर्य वंश के उत्पत्ति कुछ इस प्राकार वर्णन किया है -
सुतः कश्यपोभू -- तदनु मनुरभूत्तत्द्युतात्सूर्यवंश:। विख्यात: सर्वलोकेष्वमल नृपगुणैरन्वित:कीर्तिधर्मौर्म्मान्धातुर्भूमिपालात्स कलगुणनिधेन्मौर्य वंशो
इस पंक्ति में उन्होंने स्पष्ट सूर्य वंश और मनु जी के वंश से ही खुद के मौर्य वंश की उत्पत्ति का स्पष्ट उल्लेख किया है।
और इसी मनु जी के सूर्य वंश में ही राजा श्री राम जी का भी जन्म हुआ था।
Source - Epigraphia Indica, Vol. 2
by Burgess, Jas Ed, Page - 225
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
🔥7
अंडभूत जातक जिसका प्राचीन पुरातात्विक प्रमाण भी मिलता है उसमें उद्धृत बुद्ध के इस महावक्य जिसमें
यही पंक्ति ज्यों का त्यों कुणाल जातक में भी आया है -
- सभी नदियाँ टेढी है, सभी बनो में लकडी है। मौका मिलने पर सभी स्त्रियां पाप कर्म करती है।
और कुणाल जातक में तो अंडभूत जातक से दो कदम आगे जाके यह भी बोला गया है कि -
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
सारे स्त्रियों को ही व्याभिचारिणी बोला गया है
यही पंक्ति ज्यों का त्यों कुणाल जातक में भी आया है -
सब्बा नदी वङ्कगता, सब्बे कट्ठमया वना, सब्बित्थियो करे पापं, लभमाना निवातके।
- सभी नदियाँ टेढी है, सभी बनो में लकडी है। मौका मिलने पर सभी स्त्रियां पाप कर्म करती है।
और कुणाल जातक में तो अंडभूत जातक से दो कदम आगे जाके यह भी बोला गया है कि -
यदि स्त्रियों को अवसर मिले, छिपा स्थान मिले अथवा वैसा एकान्त स्थान मिले, तो सभी स्त्रियाँ पाप करती हैं । कोई और न मिले तो लंगड़े लूले के साथ भी करती है।●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
🔥7❤2
पुराण प्रवचन
अंडभूत जातक जिसका प्राचीन पुरातात्विक प्रमाण भी मिलता है उसमें उद्धृत बुद्ध के इस महावक्य जिसमें सारे स्त्रियों को ही व्याभिचारिणी बोला गया है यही पंक्ति ज्यों का त्यों कुणाल जातक में भी आया है - सब्बा नदी वङ्कगता, सब्बे कट्ठमया वना, सब्बित्थियो करे पापं…
इसका मतलब अगर Prince बौद्ध के भिक्षुणी मां संघ से बाहर कहीं अकेली जाती है भीख मांगने तो अगर कोई लंगड़ा लूला भी मिल जाए तो वो भी मौका देख के चौका मार देती होगी😁
💯6
गौमूत्रि धम्म कौन है ?
अक्सर भीमटे जो गौमूत्र को लेकर वैदिक धर्म पर अनेक कटाक्ष साधते हैं लेकिन
विनयपिटक ( महावग्ग, खंधक-1, चत्तारो निस्सया) में गौतम बुद्ध स्वयं भिक्षुओं को बताते हैं कि -
अर्थात् बौद्ध धर्म में गौमूत्र का औषधि के रूप में सेवन करना बौद्ध भिक्षुओं के लिए अपने जीवनपर्यंन्त तक का नियम है जिसको स्वयं बुद्ध ने ही भिक्षुओं के लिए बना के गए हैं।
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
अक्सर भीमटे जो गौमूत्र को लेकर वैदिक धर्म पर अनेक कटाक्ष साधते हैं लेकिन
विनयपिटक ( महावग्ग, खंधक-1, चत्तारो निस्सया) में गौतम बुद्ध स्वयं भिक्षुओं को बताते हैं कि -
इस बौद्ध धम्म में दीक्षित होने के बाद कभी रोगी होने पर औषध के लिये प्रमुख रूप से गोमूत्र की औषध से ही जीवनपर्यन्त काम चलाना पड़ेगा।
अर्थात् बौद्ध धर्म में गौमूत्र का औषधि के रूप में सेवन करना बौद्ध भिक्षुओं के लिए अपने जीवनपर्यंन्त तक का नियम है जिसको स्वयं बुद्ध ने ही भिक्षुओं के लिए बना के गए हैं।
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
😁8🔥3
क्या ऋषि दयानंद ने वेद भाष्य में बाल्य विवाह का समर्थन किया है?
एक मूर्ख भिखारी ऋग्वेद (१/१७९/१) पर दयानंद भाष्य में बाल्यावस्था में विवाह का आरोप लगा रहा।
जब की ऋग्वेद (१/१७९/१) के दयानंद जी के मूल संस्कृतभाष्य में आया है - "
ध्यान से देखें "बाल्यावस्था" नहीं लिखा है "बल्यावस्था" लिखा है जिसका अर्थ बल युक्त अवस्था जिसे यौवन कहा जाता है वो भी है।
और दूसरी बात खुद दयानंद जी ने ही यजुर्वेद (१९/४९) के भाष्य में लिखते है -
अर्थात् - बाल्यावस्था में विवाह का निषेध कर के सब का पालन करना चाहिए।
इसके पिछले मंत्र में यजुर्वेद (१९/४८) के भाष्य में भी लिखा है कि -
अर्थात्- सारे स्त्री पुरुष पूर्ण ब्रह्मचर्य और विद्या शिक्षा ग्रहण कर के स्वयंवर द्वारा विवाह करें।
निष्कर्ष - दयानंद जी ने बाल्यावस्था में विवाह का स्पष्ट निषेध किया है भाष्य में और स्वयंवर विवाह का समर्थन किया है।
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
एक मूर्ख भिखारी ऋग्वेद (१/१७९/१) पर दयानंद भाष्य में बाल्यावस्था में विवाह का आरोप लगा रहा।
जब की ऋग्वेद (१/१७९/१) के दयानंद जी के मूल संस्कृतभाष्य में आया है - "
बल्यावस्थामारभ्य
ध्यान से देखें "बाल्यावस्था" नहीं लिखा है "बल्यावस्था" लिखा है जिसका अर्थ बल युक्त अवस्था जिसे यौवन कहा जाता है वो भी है।
और दूसरी बात खुद दयानंद जी ने ही यजुर्वेद (१९/४९) के भाष्य में लिखते है -
बाल्यावस्थायां विवाहनिषेधेन सर्वाः प्रजाः पालयन्तु
अर्थात् - बाल्यावस्था में विवाह का निषेध कर के सब का पालन करना चाहिए।
इसके पिछले मंत्र में यजुर्वेद (१९/४८) के भाष्य में भी लिखा है कि -
स्त्रीपुरुषाः पूर्णेन ब्रह्मचर्येण सर्वा विद्याशिक्षाः सङ्गृह्य परस्परं प्रीत्या स्वयंवरं विवाहं कृत्वा
अर्थात्- सारे स्त्री पुरुष पूर्ण ब्रह्मचर्य और विद्या शिक्षा ग्रहण कर के स्वयंवर द्वारा विवाह करें।
निष्कर्ष - दयानंद जी ने बाल्यावस्था में विवाह का स्पष्ट निषेध किया है भाष्य में और स्वयंवर विवाह का समर्थन किया है।
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
💯7
यह ले बौद्ध भिखारी एक और प्रमाण
यजुर्वेद (१६/१६) स्वामी दयानंद भाष्य -
- बाल्यावस्था में विवाह कर व्यभिचार से अपनी आयु की हानि भी कभी न करें।
यहां दयानंद जी ने तो बाल्यावस्था में विवाह को व्यभिचार तक मान के उसका निषेध किया है उस से आयु की हानि होना भी माना है।
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
यजुर्वेद (१६/१६) स्वामी दयानंद भाष्य -
न बाल्यावस्थायां विवाहेन व्यभिचारेण चायुर्हिंसनीयम्
- बाल्यावस्था में विवाह कर व्यभिचार से अपनी आयु की हानि भी कभी न करें।
यहां दयानंद जी ने तो बाल्यावस्था में विवाह को व्यभिचार तक मान के उसका निषेध किया है उस से आयु की हानि होना भी माना है।
●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
🔥11❤1
एक 44 दांत वाला सुअर का पिल्ला दयानन्द जी के हिंदी भाष्यानुवाद को उठा के दिखा रहा कि दयानन्द जी ने बाल्यावस्था में विवाहित माना है।
जब की ऋषि दयानन्द ने तो संस्कृत में है ऋग्वेद का भाष्य लिखे थे न कि हिन्दी में और उनके हिंदी भाष्यानुवाद भी बाद के पंडितों ने किया था।
दयानन्द जी ने संस्कृत भाष्य में बल्यावस्था लिखा है ऋग्वेद (१/१७९/१) में बाल्यावस्था नहीं।
उन्होंने जहां भी बाल्यावस्था की बात किया है अपने संस्कृत भाष्य में वहां उसका पूर्ण निषेध किया है।
इस से सिद्ध होता है ऋग्वेद (१/१७९/१) में बल्यावस्था का अभिप्राय बाल्यावस्था से नहीं अपितु बल युक्त अवस्था है जिसे बाद के हिन्दी पंडितों ने गलत अनुवाद कर दिया है
जब की ऋषि दयानन्द ने तो संस्कृत में है ऋग्वेद का भाष्य लिखे थे न कि हिन्दी में और उनके हिंदी भाष्यानुवाद भी बाद के पंडितों ने किया था।
दयानन्द जी ने संस्कृत भाष्य में बल्यावस्था लिखा है ऋग्वेद (१/१७९/१) में बाल्यावस्था नहीं।
उन्होंने जहां भी बाल्यावस्था की बात किया है अपने संस्कृत भाष्य में वहां उसका पूर्ण निषेध किया है।
इस से सिद्ध होता है ऋग्वेद (१/१७९/१) में बल्यावस्था का अभिप्राय बाल्यावस्था से नहीं अपितु बल युक्त अवस्था है जिसे बाद के हिन्दी पंडितों ने गलत अनुवाद कर दिया है
🔥10
Forwarded from 𝗩𝗘𝗗𝗜𝗖 𝗦𝗖𝗥𝗜𝗣𝗧𝗨𝗥𝗘
काबा 🕋 के पवित्र क़िबला का कपड़ा कारपेट बनाने के लिए किसी शेख ने Epstein को गिफ्ट किया था।
तुर्किए ने $ 200 मिलियन डॉलर में भूकंप प्रभावित हजारों बच्चे Epstein को बेंच दिए थे।
यही सच्चाई है क़ौम की, जिसके पीछे यहाँ के नकली भाग रहे हैं!
तुर्किए ने $ 200 मिलियन डॉलर में भूकंप प्रभावित हजारों बच्चे Epstein को बेंच दिए थे।
यही सच्चाई है क़ौम की, जिसके पीछे यहाँ के नकली भाग रहे हैं!
😁11💯3