अंडभूत जातक जिसका प्राचीन पुरातात्विक प्रमाण भी मिलता है उसमें उद्धृत बुद्ध के इस महावक्य जिसमें
यही पंक्ति ज्यों का त्यों कुणाल जातक में भी आया है -
- सभी नदियाँ टेढी है, सभी बनो में लकडी है। मौका मिलने पर सभी स्त्रियां पाप कर्म करती है।
और कुणाल जातक में तो अंडभूत जातक से दो कदम आगे जाके यह भी बोला गया है कि -
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सारे स्त्रियों को ही व्याभिचारिणी बोला गया है
यही पंक्ति ज्यों का त्यों कुणाल जातक में भी आया है -
सब्बा नदी वङ्कगता, सब्बे कट्ठमया वना, सब्बित्थियो करे पापं, लभमाना निवातके।
- सभी नदियाँ टेढी है, सभी बनो में लकडी है। मौका मिलने पर सभी स्त्रियां पाप कर्म करती है।
और कुणाल जातक में तो अंडभूत जातक से दो कदम आगे जाके यह भी बोला गया है कि -
यदि स्त्रियों को अवसर मिले, छिपा स्थान मिले अथवा वैसा एकान्त स्थान मिले, तो सभी स्त्रियाँ पाप करती हैं । कोई और न मिले तो लंगड़े लूले के साथ भी करती है।●▬▬▬▬🌼🌸🌼▬▬▬▬●
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पुराण प्रवचन
अंडभूत जातक जिसका प्राचीन पुरातात्विक प्रमाण भी मिलता है उसमें उद्धृत बुद्ध के इस महावक्य जिसमें सारे स्त्रियों को ही व्याभिचारिणी बोला गया है यही पंक्ति ज्यों का त्यों कुणाल जातक में भी आया है - सब्बा नदी वङ्कगता, सब्बे कट्ठमया वना, सब्बित्थियो करे पापं…
इसका मतलब अगर Prince बौद्ध के भिक्षुणी मां संघ से बाहर कहीं अकेली जाती है भीख मांगने तो अगर कोई लंगड़ा लूला भी मिल जाए तो वो भी मौका देख के चौका मार देती होगी😁
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गौमूत्रि धम्म कौन है ?
अक्सर भीमटे जो गौमूत्र को लेकर वैदिक धर्म पर अनेक कटाक्ष साधते हैं लेकिन
विनयपिटक ( महावग्ग, खंधक-1, चत्तारो निस्सया) में गौतम बुद्ध स्वयं भिक्षुओं को बताते हैं कि -
अर्थात् बौद्ध धर्म में गौमूत्र का औषधि के रूप में सेवन करना बौद्ध भिक्षुओं के लिए अपने जीवनपर्यंन्त तक का नियम है जिसको स्वयं बुद्ध ने ही भिक्षुओं के लिए बना के गए हैं।
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अक्सर भीमटे जो गौमूत्र को लेकर वैदिक धर्म पर अनेक कटाक्ष साधते हैं लेकिन
विनयपिटक ( महावग्ग, खंधक-1, चत्तारो निस्सया) में गौतम बुद्ध स्वयं भिक्षुओं को बताते हैं कि -
इस बौद्ध धम्म में दीक्षित होने के बाद कभी रोगी होने पर औषध के लिये प्रमुख रूप से गोमूत्र की औषध से ही जीवनपर्यन्त काम चलाना पड़ेगा।
अर्थात् बौद्ध धर्म में गौमूत्र का औषधि के रूप में सेवन करना बौद्ध भिक्षुओं के लिए अपने जीवनपर्यंन्त तक का नियम है जिसको स्वयं बुद्ध ने ही भिक्षुओं के लिए बना के गए हैं।
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क्या ऋषि दयानंद ने वेद भाष्य में बाल्य विवाह का समर्थन किया है?
एक मूर्ख भिखारी ऋग्वेद (१/१७९/१) पर दयानंद भाष्य में बाल्यावस्था में विवाह का आरोप लगा रहा।
जब की ऋग्वेद (१/१७९/१) के दयानंद जी के मूल संस्कृतभाष्य में आया है - "
ध्यान से देखें "बाल्यावस्था" नहीं लिखा है "बल्यावस्था" लिखा है जिसका अर्थ बल युक्त अवस्था जिसे यौवन कहा जाता है वो भी है।
और दूसरी बात खुद दयानंद जी ने ही यजुर्वेद (१९/४९) के भाष्य में लिखते है -
अर्थात् - बाल्यावस्था में विवाह का निषेध कर के सब का पालन करना चाहिए।
इसके पिछले मंत्र में यजुर्वेद (१९/४८) के भाष्य में भी लिखा है कि -
अर्थात्- सारे स्त्री पुरुष पूर्ण ब्रह्मचर्य और विद्या शिक्षा ग्रहण कर के स्वयंवर द्वारा विवाह करें।
निष्कर्ष - दयानंद जी ने बाल्यावस्था में विवाह का स्पष्ट निषेध किया है भाष्य में और स्वयंवर विवाह का समर्थन किया है।
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एक मूर्ख भिखारी ऋग्वेद (१/१७९/१) पर दयानंद भाष्य में बाल्यावस्था में विवाह का आरोप लगा रहा।
जब की ऋग्वेद (१/१७९/१) के दयानंद जी के मूल संस्कृतभाष्य में आया है - "
बल्यावस्थामारभ्य
ध्यान से देखें "बाल्यावस्था" नहीं लिखा है "बल्यावस्था" लिखा है जिसका अर्थ बल युक्त अवस्था जिसे यौवन कहा जाता है वो भी है।
और दूसरी बात खुद दयानंद जी ने ही यजुर्वेद (१९/४९) के भाष्य में लिखते है -
बाल्यावस्थायां विवाहनिषेधेन सर्वाः प्रजाः पालयन्तु
अर्थात् - बाल्यावस्था में विवाह का निषेध कर के सब का पालन करना चाहिए।
इसके पिछले मंत्र में यजुर्वेद (१९/४८) के भाष्य में भी लिखा है कि -
स्त्रीपुरुषाः पूर्णेन ब्रह्मचर्येण सर्वा विद्याशिक्षाः सङ्गृह्य परस्परं प्रीत्या स्वयंवरं विवाहं कृत्वा
अर्थात्- सारे स्त्री पुरुष पूर्ण ब्रह्मचर्य और विद्या शिक्षा ग्रहण कर के स्वयंवर द्वारा विवाह करें।
निष्कर्ष - दयानंद जी ने बाल्यावस्था में विवाह का स्पष्ट निषेध किया है भाष्य में और स्वयंवर विवाह का समर्थन किया है।
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यह ले बौद्ध भिखारी एक और प्रमाण
यजुर्वेद (१६/१६) स्वामी दयानंद भाष्य -
- बाल्यावस्था में विवाह कर व्यभिचार से अपनी आयु की हानि भी कभी न करें।
यहां दयानंद जी ने तो बाल्यावस्था में विवाह को व्यभिचार तक मान के उसका निषेध किया है उस से आयु की हानि होना भी माना है।
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यजुर्वेद (१६/१६) स्वामी दयानंद भाष्य -
न बाल्यावस्थायां विवाहेन व्यभिचारेण चायुर्हिंसनीयम्
- बाल्यावस्था में विवाह कर व्यभिचार से अपनी आयु की हानि भी कभी न करें।
यहां दयानंद जी ने तो बाल्यावस्था में विवाह को व्यभिचार तक मान के उसका निषेध किया है उस से आयु की हानि होना भी माना है।
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एक 44 दांत वाला सुअर का पिल्ला दयानन्द जी के हिंदी भाष्यानुवाद को उठा के दिखा रहा कि दयानन्द जी ने बाल्यावस्था में विवाहित माना है।
जब की ऋषि दयानन्द ने तो संस्कृत में है ऋग्वेद का भाष्य लिखे थे न कि हिन्दी में और उनके हिंदी भाष्यानुवाद भी बाद के पंडितों ने किया था।
दयानन्द जी ने संस्कृत भाष्य में बल्यावस्था लिखा है ऋग्वेद (१/१७९/१) में बाल्यावस्था नहीं।
उन्होंने जहां भी बाल्यावस्था की बात किया है अपने संस्कृत भाष्य में वहां उसका पूर्ण निषेध किया है।
इस से सिद्ध होता है ऋग्वेद (१/१७९/१) में बल्यावस्था का अभिप्राय बाल्यावस्था से नहीं अपितु बल युक्त अवस्था है जिसे बाद के हिन्दी पंडितों ने गलत अनुवाद कर दिया है
जब की ऋषि दयानन्द ने तो संस्कृत में है ऋग्वेद का भाष्य लिखे थे न कि हिन्दी में और उनके हिंदी भाष्यानुवाद भी बाद के पंडितों ने किया था।
दयानन्द जी ने संस्कृत भाष्य में बल्यावस्था लिखा है ऋग्वेद (१/१७९/१) में बाल्यावस्था नहीं।
उन्होंने जहां भी बाल्यावस्था की बात किया है अपने संस्कृत भाष्य में वहां उसका पूर्ण निषेध किया है।
इस से सिद्ध होता है ऋग्वेद (१/१७९/१) में बल्यावस्था का अभिप्राय बाल्यावस्था से नहीं अपितु बल युक्त अवस्था है जिसे बाद के हिन्दी पंडितों ने गलत अनुवाद कर दिया है
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Forwarded from 𝗩𝗘𝗗𝗜𝗖 𝗦𝗖𝗥𝗜𝗣𝗧𝗨𝗥𝗘
काबा 🕋 के पवित्र क़िबला का कपड़ा कारपेट बनाने के लिए किसी शेख ने Epstein को गिफ्ट किया था।
तुर्किए ने $ 200 मिलियन डॉलर में भूकंप प्रभावित हजारों बच्चे Epstein को बेंच दिए थे।
यही सच्चाई है क़ौम की, जिसके पीछे यहाँ के नकली भाग रहे हैं!
तुर्किए ने $ 200 मिलियन डॉलर में भूकंप प्रभावित हजारों बच्चे Epstein को बेंच दिए थे।
यही सच्चाई है क़ौम की, जिसके पीछे यहाँ के नकली भाग रहे हैं!
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पुराण प्रवचन
४४ दांत किसका होता है??
मेरा प्रश्न ये है कि इन दोनों को अलग अलग क्यों लिखा?🤔 दोनों तो एक ही है
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गौतम बुद्ध जी का क्या ही कहना जो खुद के मल मूत्र खाने का महान् कार्य किए थे 💀💀
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जब हम बौद्धों का पर्दाफाश करते हैं तो हमारे ही कुछ दोगले हिंदू बोलने लगते हैं कि बौद्ध तो बड़े प्यार देने वाला धम्म है आप नफरत क्यों फैला रहे हो😂😂
और जब बौद्ध राष्ट्र में इन्हीं के भगवानों के मूर्ति को तोड़ के टुकड़े टुकड़े करने के बाद वहां बुद्ध मूर्ति स्थापित किया जाता है तब यह कुछ दोगले हिंदू कुछ नहीं बोलेंगे।
क्यों कि इनके अनुसार तो बौद्ध धम्म प्यार मोहब्बत का मजहब है न 🤣🤣
और जब बौद्ध राष्ट्र में इन्हीं के भगवानों के मूर्ति को तोड़ के टुकड़े टुकड़े करने के बाद वहां बुद्ध मूर्ति स्थापित किया जाता है तब यह कुछ दोगले हिंदू कुछ नहीं बोलेंगे।
क्यों कि इनके अनुसार तो बौद्ध धम्म प्यार मोहब्बत का मजहब है न 🤣🤣
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Forwarded from पुराण प्रवचन
क्या याज्ञवल्क्य जी ने गौ मांस खाए थे?
गधों ने शतपथ ब्राह्मण(३/१/३/२१) पर आरोप लगाए हैं उसमें पूर्वपक्ष में जो गौ या बैल शब्द आया है कि इनको नहीं खाना चाहिए इसका अर्थ सायण जी ने कुछ इस प्रकार किया है -
आगे याज्ञवल्क्य जी ने जो अंसल भोजन खाने की बात बोलें है उसका तात्पर्य पूर्वपक्ष के अनुसार ही सायण ने कुछ इस प्रकार किया है-
अर्थात् याज्ञवल्क्य जी का पूर्वपक्ष के उत्तर में यह पक्ष रहा कि शरीर वर्धक अन्न और दूध भोजन होना चाहिए।
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𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
गधों ने शतपथ ब्राह्मण(३/१/३/२१) पर आरोप लगाए हैं उसमें पूर्वपक्ष में जो गौ या बैल शब्द आया है कि इनको नहीं खाना चाहिए इसका अर्थ सायण जी ने कुछ इस प्रकार किया है -
"धेनोः क्षीरादिकम्"अर्थात् यहां पूर्वपक्ष ने जिसको खाने से निषेध कर रहे वह गौ या बैल के मांस नहीं है और ध्यान रहे पूर्वपक्ष के अनुसार ही उत्तरपक्ष का अर्थ ग्रहण किया जाता है।
अर्थ- गौ शब्द से उस से संबंधित दुग्धादि उत्पाद
"अनडुहः सम्बन्धि कर्षणसाध्यमित्यर्थ"
अर्थ- बैलों से संबंधित उसकी सहायता से कृषि द्वारा उत्पन्न पदार्थों का ही अर्थ ग्रहण किया है।
आगे याज्ञवल्क्य जी ने जो अंसल भोजन खाने की बात बोलें है उसका तात्पर्य पूर्वपक्ष के अनुसार ही सायण ने कुछ इस प्रकार किया है-
"यस्मादुभयाशने शरीरम् 'अंसेलं भवति" (अंसलभोजनं)
अर्थात् - जिस भोजन से शरीर अंसल हो जाता है अंसल से यहां अर्थ बलवान है।
अर्थात् याज्ञवल्क्य जी का पूर्वपक्ष के उत्तर में यह पक्ष रहा कि शरीर वर्धक अन्न और दूध भोजन होना चाहिए।
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पुराण प्रवचन
Photo
याज्ञवल्क्य जी पर जो गौमांस खाने का आरोप यह बौद्ध भिखारी लगा रहा इसका पूरा खंडन हम बहुत पहले कर चुके हैं 😂😂
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Forwarded from पुराण प्रवचन
Did Rishi Yajnavalkya ate beef...pdf
1.6 MB
कुछ मूर्ख लोगों ने महर्षी याज्ञवल्क्य जी पर यह आरोप लगाया था की शतपथ ब्राह्मण में लिखा ही की महर्षी जी गौ मांस खाते थे।
इन गधों के इस निराधार आरोप का खण्डन पर हमारा यह PDF है इसमें हमने आचार्य सायण और अन्य व्याकरण आदि के मत से यह सिद्ध किया है की वहां गौ मांस का कोई वर्णन है ही नहीं।
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इन गधों के इस निराधार आरोप का खण्डन पर हमारा यह PDF है इसमें हमने आचार्य सायण और अन्य व्याकरण आदि के मत से यह सिद्ध किया है की वहां गौ मांस का कोई वर्णन है ही नहीं।
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सत्यार्थ प्रकाश 1875 ( जिसको दयानन्द जी जलाए ) पहला संस्कृण... सम्मुलास 7
👆 ये प्रमाण उन मूर्खो को जो दयानन्द जी को ईसाई और इस्लाम का एजेंट कहते
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बाईबल कुरान आदि मनुष्य कि बनाई हुई है ना कि ईश्वर कि...
वेद हि ईश्वरकृत है.. अन्य नहीं
👆 ये प्रमाण उन मूर्खो को जो दयानन्द जी को ईसाई और इस्लाम का एजेंट कहते
Credit - भारतीय अनार्य
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