पुराण प्रवचन
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हमारे पुराण ही हमारे धर्म के धरोहर है इसके ज्ञान को हमारे साथ पढ़ें और फैलाएं 🙏❤️
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पुराण प्रवचन
मेरे बेटा है तू मेरे आंग_ड से निकला बच्चा है तू जरा यहां मूल श्लोक में कहां युवाओं से तुलना वाक्य आया है वो दिखा दे जरा हम भी देखें ??
अब ये मूर्ख सातवलेकर का दिखा रहा अरे संस्कृत पाठ दोनों में एक ही है बेटा😂 इतनी सी बात नहीं समझ आती क्या?
पुराण प्रवचन
अब ये मूर्ख सातवलेकर का दिखा रहा अरे संस्कृत पाठ दोनों में एक ही है बेटा😂 इतनी सी बात नहीं समझ आती क्या?
गीता प्रेस हो चाहे सातवलेकर हो तू मूल श्लोक में दिखा कहां युवाओं से तुलना आया है बे?
क्या रुक्मिणी माता का श्री कृष्ण जी से विवाह ८ वर्ष के आयु में हुआ था ?

जान ने के लिए पूरा पोस्ट पढ़िए 🙏🙏


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    𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
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क्या अभिमन्यु जी छोटे बच्चे थे?

एक गधा अभिमन्यु के लिए बालक शब्द देख के बहुत नाच रहा है

लेकिन महाभारत के द्रोणपर्व में ही अभिमन्यु को कहा गया
तरुणस्त्वरुणप्रख्यः सौभद्रः

अर्थात् - युवा अवस्था तथा सूर्यके समान विख्यात शत्रु वीरनाशन सुभद्राकुमार अभिमन्यु।

इसी प्रकार उसी द्रोणपर्व में एक और श्लोक में आया है -
सौभद्रः पार्थानामग्रतो युवा

अर्थात् - यह युवा अवस्थावाला अभिमन्यु।

इसमें मूल श्लोक में भी अभिमन्यु के लिए "युवा" और "तरुण" जैसे शब्दों का स्पष्ट उपयोग हुआ है।

जो स्पष्ट सिद्ध करता है कि अभिमन्यु पूर्ण रूप से युवावस्था को प्राप्त थे युद्ध के समय भी।
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    𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
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पुराण प्रवचन
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क्यों बे चोचन बैंग अब तो तू लटक जा कुछ बोलने के लिए कुछ नहीं बचा तेरे पास

उत्तरा को बालिका बोल रहा था उसे हमने युवावस्था सिद्ध कर दिया और कल अभिमन्यु को शिशु बोल रहा था उसे भी आज युवावस्था सिद्ध करदी 😂😂
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ले और प्रमाण चाहिए अभिमन्यु के युवा होने का ?? 😂😂

ले देख और रंगी रोना कर

यहां भी अभिमन्यु जी को मूल श्लोक में ही युवा और तरुण कहा गया है।😁😁

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    𝗝𝗢𝗜𝗡👉 @PuranPravachan
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अबे चोटिये तुझे पढ़ना नहीं आता क्या बे

वहां लिखा है १६ से ७० वर्ष के अवस्था पर्यन्त मध्य अवस्था होता है।

और मध्य अवस्था के भी चार भेद है-
वृद्धि, यौवन, संपूर्णता और हानि।

१६-२० वर्ष को वृद्धि अवस्था कहते हैं ।

२०- ३० वर्ष तक यौवन अवस्था है।

३० -४० वर्ष तक संपूर्णता अवस्था है

४० - ७० वर्ष तक हानि की अवस्था है।

यहां १६ से २० तक प्रयाप्त यौवन कहा जा सकता है तथा २० - ३० वर्ष तक मध्य यौवनावस्था भी कहा जा सकता है।

वन गमन काल में जब सीता जी को श्यामा बोला गया तब भी वो १८ साल के थे उन्हें भी टीकाकारों ने मध्य यौवनावस्था ही माना है।
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पुराण प्रवचन
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ऋषि दयानंद ने यौवनत्व की सबसे निकृष्ट (कम) आयु यहीं मानी है क्योंकि यह बिल्कुल प्रारंभिक समय होता है । पर बौद्ध की छोटी बुद्धि में नहीं घुसेगा

पर इसका मतलब ये नहीं कि इस आयु का व्यक्ति युवा ही नहीं होगा😂
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यह मूर्ख गधा बोल रहा था कि मध्य अवस्था का मतलब ही बाल अवस्था होता है।

अबे चोटिये सुश्रुत ने ७० वर्ष और चरक ने ६० वर्ष के आयु को मध्य अवस्था में ही माना है 😂😂

तो क्या तू तेरे ७० या ६० साल के बाप को भी बालक बोलेगा बे चोटिए??

७० और ६० वर्ष का बुड्ढा भी क्या बाल अवस्था होता है क्या बे ?? 🤣🤣
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सोलह वर्ष से नीचे बाल अवस्था होता है 😭

- सुश्रुत संहिता


आजा बेटा तेरा भी मौज करवाता हूं

और रंगी रोना जारी रखना 😂
😂😁
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✨क्या सम्राट चन्द्रगुप्त 2 (विक्रमादित्य) का आचरण अनैतिक था? ऐतिहासिक उत्तर✨

शकों पर विजय प्राप्त करना व अपनी भाभी की मर्यादा की रक्षा करना चन्द्रगुप्त 2 (विक्रमादित्य) की प्रसिद्ध उपलब्धियों में गिना जाता है। किंतु इसके बाद उन्होंने अपने ज्येष्ठ भ्राता रामगुप्त की हत्या कर उसकी पत्नी ध्रुवादेवी से विवाह किया—इस घटना को लेकर अनेक विद्वान चन्द्रगुप्त के आचरण पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं।

मुजमल-उत-तवारीख़ के अनुसार, ध्रुवस्वामिनी ने स्वयंवर में चन्द्रगुप्त को चुना था, किंतु उसके ज्येष्ठ भाई रामगुप्त ने उसे उससे छीन लिया और उससे विवाह कर लिया।
चन्द्रगुप्त पहले से ही जनता में प्रिय था, जब उसने शक-आचार्य या शकराज का वध कर ध्रुवा को अपमान से बचाया, तो उसकी प्रतिष्ठा और बढ़ गई। इससे बड़ा भाई उससे ईर्ष्या करने लगा और उसके प्राणों के विरुद्ध षड्यंत्र रचने लगा।
अतः लेखक का निष्कर्ष है कि चन्द्रगुप्त द्वारा भाई का वध कर ध्रुवा से विवाह करना केवल अनैतिक कृत्य नहीं माना जा सकता, क्योंकि ध्रुवा ने मूल रूप से चन्द्रगुप्त को ही चुना था, पर उसे विवश होकर उसके भाई से विवाह करना पड़ा था।
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