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जहाँ इतिहास किताबों से आगे, दस्तावेज़ों से जुड़ता है।
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संस्था/संगठन, स्थान ,संस्थापक स्थापना वर्ष
'कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी' की दो थीसिसें’

इसमें कहा गया कि कम्युनिस्ट नेता सोशलिस्ट पार्टी' एक-दूसरे के नज़दीक आयें। दोनों पार्टियों के नेताओं ने इस ज़रूरत को महसूस तिवारी, सोहन सिंह जोश, करम निदेश और विदेश की तेजी से बदलती परिस्थिति का तकाजा था कि कम्युनिस्ट पार्टी और 'कांग्रेस नेहरू ने उनके आंदोलन के साथ किया। उनके बीच गंभीर विचार-विमर्श शुरू हुआ जिसका परिणाम 'कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी' की दो थीसिसें हैं, और अंत में दोनों पार्टियों के बीच समझौता हुआ।

1–कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी' का दूसरा राष्ट्रीय सम्मेलन जनवरी 1936 में मेरठ में हुआ था। उस सम्मेलन में उसने जो दस्तावेज़ पास किया उसी का नाम 'मेरठ थीसिस' है। इस थीसिस में कहा गया था .
2–फैज़पुर थीसिस में कांग्रेस के रूपांतर और समाजवादी शक्तियों की मज़बूती के साथ-साथ वामपंथियों की एकता पर भी जोर दिया गया था : "ये शक्तियां दुर्भाग्यवश अब भी विभाजित हैं। पार्टी आरंभ से ही समाजवादी कतारों में एकता की समर्थक रही है। समाजवादी कतारों में एकता अथवा समझौते के अलावा यह जरूरी है कि वामपक्ष की शक्तियों को मज़बूत किया नाए और उसके नेताओं के बीच एक समझौता हो.

स्रोत– सोशलिस्ट मूवमेंट इन इंडिया 📖✍️

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इंग्लैंड इमिग्रेशन एक्ट'




1859 का अंतर्देशीय उत्प्रवास अधिनियम ब्रिटिश भारत में औपनिवेशिक सरकार द्वारा पारित किया गया था।
1859 के अंतर्देशीय उत्प्रवास अधिनियम के तहत, बागान श्रमिकों को बिना अनुमति के चाय बागानों को छोड़ने की अनुमति नहीं थी , और उन्हें शायद ही कभी ऐसी अनुमति दी जाती थी।
इससे श्रमिक प्रभावी रूप से चाय बागानों से ही बंधे रहे।


1859 के अंतर्देशीय उत्प्रवास अधिनियम ने असम में बागान श्रमिकों की आवाजाही की स्वतंत्रता को गंभीर रूप से प्रतिबंधित कर दिया।
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‘जयप्रकाश नारायण और समाजवाद ही क्यों?’
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गांधी जी और उनकी पत्नी का कॉफी का किस्सा–

कस्तूरबा को कॉफी बहुत पसंद थी। वे अपने प्रिय मेहमानों को कॉफी पिलातीं और स्वयं भी पीती थीं। गांधी ने इस पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया था, यद्यपि उनका स्वयं का विचार था कि चाय या कॉफी अच्छी चीज नहीं है। आश्रमवासी इससे अवगत थे। एक बार एक नये आश्रमवासी ने गांधी से जानना चाहा कि यदि चाय-कॉफी शरीर के लिए अनुचित है तो 'बा' क्यों पीती हैं? गांधी ने तुरन्त उत्तर दिया- "तुम्हें क्या पता कि 'बा' ने क्या-क्या नहीं छोड़ा है। उसकी यह आदत सिर्फ रह गई है। अब मैं उसे यह भी छोड़ देने को कहूँ, तो मुझ जैसा निर्दयी और कौन होगा।" कस्तूरबा को जब यह सब ज्ञात हुआ, तब उन्होंने कॉफी भी छोड़ दी और उसके बदले में तुलसी और काली मिर्च की चाय लेने लगीं। पति की इच्छा से ही देश की जनता के लिए उन्होंने अपना तन-मन-धन सर्वस्व समर्पित कर दिया था📖✍️
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ऐतिहासिक तथ्य 📖✍️
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भीमराव अंबेडकर : जीवन की प्रमुख घटनाएँ (कालक्रमानुसार)–


14 अप्रैल 1891
भीमराव अंबेडकर का जन्म महू (मध्यप्रदेश) में हुआ।

1900
सतारा (महाराष्ट्र) में प्राइमरी स्कूल में प्रवेश।


1907
एल्फिन्स्टन हाई स्कूल, बॉम्बे से मैट्रिक पास (अपने समाज के पहले छात्रों में शामिल)।


1912
बंबई विश्वविद्यालय से बी.ए. (Economics & Political Science) की डिग्री।


1913
कोलंबिया विश्वविद्यालय, न्यूयॉर्क में अध्ययन हेतु बारोडा राज्य की छात्रवृत्ति प्राप्त।
एम.ए. के लिए प्रवेश।

1915
कोलंबिया विश्वविद्यालय से एम.ए. (Economics)।


1916
“National Dividend of India – A Historic and Analytical Study” विषय पर पीएच.डी. का शोध प्रारंभ।
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) में अध्ययन शुरू (Law और Economics)।

1917
प्रथम विश्व युद्ध के कारण छात्रवृत्ति समाप्त — भारत लौटना पड़ा।

1920
पुनः इंग्लैंड गए; D.Sc (LSE) व Barrister-at-Law के अध्ययन हेतु।

1921
LSE से M.Sc (Economics)।

1923
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से D.Sc.
बैरिस्टर की उपाधि।


1924
बहिष्कृत हितकारिणी सभा की स्थापना (Depressed Classes Welfare League)।


1927
महाड़ सत्याग्रह और चवदार तालाब आंदोलन—सार्वजनिक जलस्रोतों पर अस्पृश्यों के अधिकार का आंदोलन।
मनुस्मृति दहन।

1930–1932
राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में भारतीय दलितों के प्रतिनिधि के रूप में भागीदारी।


1932
पुणे समझौता — गांधी और अंबेडकर के बीच आरक्षण संबंधी समझौता।


1935
“मैं हिंदू धर्म छोड़ूँगा।” — यवला बयान।
गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, मुंबई के प्रिंसिपल नियुक्त।


1936
Independent Labour Party (ILP) की स्थापना।
प्रसिद्ध पुस्तक "Annihilation of Caste" प्रकाशित।


1942
वायसराय की कार्यकारिणी परिषद में श्रममंत्री नियुक्त।

1946
संविधान सभा के सदस्य चुने गए।

29 अगस्त 1947
संविधान मसौदा समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष नियुक्त।

26 नवंबर 1949
भारत का संविधान स्वीकार किया गया।


26 जनवरी 1950
संविधान लागू — अंबेडकर “भारतीय संविधान के निर्माता” कहलाए।

1951
हिन्दू कोड बिल पास न होने से केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा।

1952
राज्यसभा के सदस्य निर्वाचित।


1954–55
बौद्ध धर्म की ओर झुकाव तेज। बौद्ध धर्म पर लेखन।

14 अक्टूबर 1956
नागपुर में बौद्ध धर्म दीक्षा — लाखों अनुयायियों को भी दीक्षा।

6 दिसंबर 1956
दिल्ली में निधन।

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बी. आर. नंदा — संतुलित आलोचना–

आलोचनात्मक तथ्य:
नंदा ने माना कि:
अनशन गांधी का प्रभावी नैतिक हथियार था।

लेकिन साथ ही लिखा:
यह हर स्थिति में उचित नहीं था
कभी-कभी यह सहयोगियों पर दबाव का साधन बन गया।

स्रोत: Gandhi and His Critics
— बी. आर. नंदा

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पूना पैक्ट (24 सितंबर 1932)

लगातार वार्ता के बाद महात्मा गांधी और डॉ. अंबेडकर के बीच समझौता हुआ, जिसे पूना पैक्ट कहा गया।

प्रमुख शर्तें

1. अलग निर्वाचक मंडल समाप्त कर दिए गए
2. उनके स्थान पर संयुक्त निर्वाचन (Joint Electorate) में आरक्षित सीटें दी गईं
3. केंद्रीय विधानमंडल में पहले 71 सीटें तय थीं बढ़ाकर 148 सीटें कर दी गईं
4. प्रांतीय विधानसभाओं में भी दलितों के लिए अनुपातिक आरक्षण सुनिश्चित किया गया

5. महत्व (Significance)

यह भारत में आरक्षण व्यवस्था की नींव बना
दलितों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिला
हिंदू समाज का औपचारिक विभाजन टल गया
गांधीजी का अनशन समाप्त हुआ।

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Forwarded from 𝗧𝗵𝗲 𝗚𝕐𝗮𝗻𝗱𝗮𝘆𝗻𝗶 𝗩αυLƚ••° (ȺղƚαႦყα ƚԋαƙυɾ .)
बहुत अच्छा राम सर और आकांक्षा mam
अगर इसी तरह से चर्चाएं हों तो हमें इतिहास की एक अच्छी समझ के साथ साथ
एक व्याहारिक ज्ञान भी मिल रहा है 💐❤️
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महात्मा_गांधी_एंड_हिज_अपोस्टल्स.pdf
10.6 MB
नाम - Mahatma gandhi and his apostles
लेखक - वेद मेहता
पृष्ठ - 280
भाषा - अंग्रेजी
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दलित का मतलब पहले पीड़ित, शोषित, दवा हुआ, खिन्न, उदास, टुकड़ा, खंडित, तोड़ना, कुचलना, दला हुआ, पिसा हुआ, मसला हुआ, रौंदा हुआ, विनष्ट हुआ करता था लेकिन अब अनुसूचित जाति को दलित बताया जाता है अब दलित शब्द पूर्णता जाति विशेष को बोला जाने लगा हजारों वर्षों तक अस्पृश्य या अछूत समझी जाने वाले उन तमाम शोषित जातियों के लिए सामूहिक रूप से प्रयुक्त होता है जो हिंदू धर्म शास्त्रों द्वारा हिंदू समाज व्यवस्था में सबसे निचले (चौथे) पायदान पर स्थित है |
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दलित का मतलब पहले पीड़ित, शोषित, दवा हुआ, खिन्न, उदास, टुकड़ा, खंडित, तोड़ना, कुचलना, दला हुआ, पिसा हुआ, मसला हुआ, रौंदा हुआ, विनष्ट हुआ करता था लेकिन अब अनुसूचित जाति को दलित बताया जाता है अब दलित शब्द पूर्णता जाति विशेष को बोला जाने लगा हजारों वर्षों तक…
Table of Content
महात्मा गांधी
दलित
गांधी और दलित
भारत में दलितों की स्थिति
महात्मा गांधी एवं बाबा साहब
दलित आंदोलनों की असफलता
दलित साहित्य और आदिवासी साहित्य
दलित उत्पीड़न
दलित स्त्री आंदोलन
दलितों की समस्या
दलित उपन्यास
दलित महिलाएं : अस्तित्व और अधिकार
महात्मा गांधी की हत्या
बाबासाहेब अंबेडकर के अनुसार दलित साहित्य
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Gandhi_Catalogue_en-gb_000-merged_compressed_en-gb.PDF
10.1 MB
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