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जहाँ इतिहास किताबों से आगे, दस्तावेज़ों से जुड़ता है।
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🚨बोधकार्य: हिमालय — चेतावनी जिसे हम सुन नहीं रहे ------------------

12 जनवरी 2026 को प्रकाशित BBC की एक रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि हिमालय में सर्दियों की बर्फ़ तेज़ी से घट रही है।

पिछले पाँच वर्षों में, 1980–2020 के औसत की तुलना में हिमालयी क्षेत्रों में सर्दियों की वर्षा और हिमपात लगातार कम हुआ है।

कई इलाक़ों में जहाँ इस समय पहाड़ों को बर्फ़ से ढका होना चाहिए था, वे नंगे और पथरीले दिखाई दे रहे हैं।

वैज्ञानिक इस स्थिति को “snow drought” कह रहे हैं।

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रिपोर्ट के अनुसार:

▪️उत्तर-पश्चिमी हिमालय में पिछले पाँच वर्षों में हिमपात लगभग 25% कम हुआ है

▪️2024–25 की सर्दी में बर्फ़ का टिके रहना (snow persistence) 23 वर्षों में सबसे कम रहा।

▪️हिमालय की बर्फ़ और ग्लेशियर भारत की 12 प्रमुख नदियों के कुल वार्षिक जल प्रवाह का लगभग एक-चौथाई हिस्सा देते हैं।
▪️इसका असर पीने के पानी, खेती, बिजली और जंगलों पर पड़ेगा।

▪️बर्फ़ और ग्लेशियर पहाड़ों को “सीमेंट” की तरह बाँधकर रखते हैं। इनके घटने से भूस्खलन, चट्टान गिरना और आपदाएँ बढ़ रही हैं।

▪️विशेषज्ञों के अनुसार, यह कोई एक साल की घटना नहीं, बल्कि लगातार चलता रुझान है।

यह अब कोई भविष्य की समस्या नहीं है, यह अभी घट रहा संकट है।

🧭 आपका बोधकार्य:

1️⃣ वैज्ञानिक चेतावनियाँ दशकों से सामने हैं, फिर भी हम क्यों नहीं चेतते? क्या सिर्फ तथ्यों को सामने रखने से काम बन जाएगा?

2⃣ आचार्य जी के क्लाइमेट चेंज पर वीडियो खोजें और साझा करें कि महाविनाश का स्तर क्या है और कैसे सच्चा अध्यात्म ही इसे ठीक कर सकता है

आर्टिकल लिंक:

https://www.bbc.com/news/articles/clyndv7zd20Ok

#AcharyaPrashant #DailyActivity
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🌕 लाला लाजपत राय.____


🔹लाला लाजपत राय का जन्म 28 जनवरी 1865 को पंजाब के मोगा ज़िले (अब पाकिस्तान में) हुआ। उनके पिता एक शिक्षित व्यक्ति थे और माता धार्मिक एवं अनुशासित। यही कारण था कि बचपन से ही उनमें नैतिक दृढ़ता, राष्ट्रप्रेम और आत्मसम्मान की भावना विकसित हुई।

🔹साइमन कमीशन और बलिदान
1928 में जब साइमन कमीशन भारत आया — जिसमें एक भी भारतीय सदस्य नहीं था — तो लाला लाजपत राय ने उसका शांतिपूर्ण विरोध किया।
उन्होंने नारा दिया:
“Simon Go Back!”
ब्रिटिश पुलिस ने इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर निर्मम लाठीचार्ज किया।
लाठीचार्ज में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने कहा:-
“मेरे शरीर पर पड़ी हर लाठी, ब्रिटिश साम्राज्य के ताबूत में एक कील साबित होगी।”
कुछ ही सप्ताह बाद, 17 नवंबर 1928 को उन्होंने राष्ट्र के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
इसलिए उन्हें इतिहास ने नाम दिया —
“पंजाब केसरी”
🔹उनकी रचनाएँ :-
1️⃣ Unhappy India (दुखी भारत)
👉 साइमन कमीशन और ब्रिटिश शोषण पर सटीक विश्लेषण
👉 आज के युवाओं को औपनिवेशिक मानसिकता समझने में मदद करती है
2️⃣ Young Indian
👉 भारतीय युवाओं के लिए चेतना का आह्वान
👉 आत्मसम्मान, साहस और राष्ट्रनिर्माण की प्रेरणा
3️⃣ The Problem of National Education
👉 शिक्षा का उद्देश्य क्या होना चाहिए — इसका स्पष्ट दर्शन
👉 आज की डिग्री-केन्द्रित शिक्षा पर प्रासंगिक प्रश्न
4️⃣ The Message of the Bhagavad Gita
👉 गीता को कर्म, साहस और नैतिक संघर्ष के ग्रंथ के रूप में प्रस्तुत किया
👉 युवाओं को कर्मयोग की सच्ची समझ देता है
👉आज उनकी जयंती पर सवाल यह नहीं कि
हमने उन्हें याद किया या नहीं,
सवाल यह है —
क्या हमने उनके जैसा साहस जिया?
🙏 पंजाब केसरी को नमन🙏🏻....

..,...........✍
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Gandhi ke Bramhacharya PrayogBy Shankar Sharan.pdf
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शुभ प्रभात

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आज के समय की सबसे बड़ी समस्या, इतिहास को ऐसे तोड़ मरोड़ के पेश किया गया है कि समझ ही नहीं आता कि सही क्या है गलत किया है , लेकिन ऐसी बहुत सी किताबें रही है जिनके बारे में हमें कम ही ज्ञात है लेकिन बहुत सी किताबें हमको वो इतिहास बताती है जो शायद अधिकतर अपनी किताबों में लिखने से बचते है

–George Orwell– Nineteen Eighty-Four
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तड़ित चालक का सिद्धांत (Principle of Lightering Thunder)




इस सिद्धांत का उद्भव सुरक्षा कपाट की अवधारणा के विपरीत हुआ। गोपाल कृष्ण गोखले के दस्तावेजों को इस सिद्धांत का आधार बनाया गया है। इस सिद्धांत के अनुसार, भारतीय बुद्धिजीवियों ने ह्यूम का उपयोग भारतीय हितों के लिये किया। ध्यातव्य है कि ब्रिटिश सरकार कांग्रेस जैसी अखिल भारतीय संस्था की स्थापना को संदेह की दृष्टि से देखती थी, किंतु एक सेवानिवृत्त ब्रिटिश अधिकारी के इस संस्था से जुड़ने के फलस्वरूप यह सरकारी कोपभाजन का शिकार होने से (प्रारंभिक अवस्था में) बच गई। इसी संदर्भ में प्रसिद्ध इतिहासकार
विपिन चंद्र के शब्दों में,

अगर ह्यूम और दूसरे अंग्रेज़ उदारवादियों ने कांग्रेस का इस्तेमाल 'सुरक्षा वॉल्व' के तौर पर करना भी चाहा हो तो कांग्रेस के नेताओं ने उनका साथ इस आशा से दिया था कि ये लोग कांग्रेस के लिये 'तड़ित चालक' जैसा काम करेंगे और आंदोलन पर गिरने वाली सरकारी दमन की बिजली से बचा सकेंगे। जैसा कि बाद में हालात गवाह है, इस मामले में कांग्रेस के नेताओं का अंदाज और उम्मीदें सही निकली।
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उदारवादी तथा उग्रवादी आंदोलन में अंतर
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महागोविंद रानाडे ने दादाभाई नौरोजी के धन निर्गम सिद्धांत को स्वीकार नहीं किया 📖✍️
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NET/JRF के लिए भारतीय इतिहास+ हिस्ट्रोग्राफी (MIX) क्विज चालु है..जुड़ने वाले लिंक पर क्लिक कर जुड़ सकते है।

Daily 2 क्विज।
Timing

2PM
8PM
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Forwarded from No Document No History (श्री.रामसिंग राजपूत ⛳)
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उत्तर वैदिक ग्रंथों में ही पहली बार भूमि दान के सन्दर्भ भी आते हैं, किन्तु इस काल में भूमिदान से जुड़े व्यवहार में उभयमुखता (दोहरपन) दिखता है। ऐतरेय ब्राह्मण में यह सुझाव दिया गया है कि राज्याभिषेक करने वाले ब्राह्मण को 1000 स्वर्ण के टुकड़े, एक बड़ा खेत और पर्याप्त गायों को दक्षिणा के रूप में दिया जान चाहिए, किन्तु इसी ग्रन्थ में एक अन्य स्थान पर कहा गया है कि एक बार जब राजा विश्वकर्मा भौवन ने अपन ब्राह्मण पुरोहित कश्यप को दक्षिणा के रूप में भूमि देने की इच्छा जतायी तब स्वयं धरती की देवी ने उसके सम प्रकट होकर कहा कि किसी भी परिस्थिति में धरती का दान नहीं किया जा सकता है। इसी प्रकार की एक औ कहानी शतपथ ब्राह्मण में भी सर्वमेध यज्ञ के सन्दर्भ में उद्धृत की गई है।

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छान्दोग्य उपनिषद् (7.1.2) में दी अध्ययन के विषयों की एक सूची के अनुसार, वेद, इतिहास, पुराण, ब्रह्मविद्या, व्याकरण, राशि (गणित) निधि (तिथिक्रम) वाकोवाक्य (भाषा और बोलियाँ), एकायन (नैतिक शास्त्र), खगोलशास्त्र सैन्य विज्ञान, विज्ञान, दैव (दिव्य ज्ञान) इत्यादि की चर्चा है।

सुमेलित करो टाइप में अच्छा क्वेश्चन बन सकता है।

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इतिहास की उपयोगी पुस्तकें ( UGC NET/ PGT/TGT/
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💐प्राचीन भारत– के सी श्रीवास्तव, पप्पू सिंह प्रजापत, सौरभ चौबे
💐मध्यकालीन भारत– सौरभ चौबे, पप्पू सिंह प्रजापत।
💐आधुनिक भारत– परीक्षा वाणी

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इतिहास की महत्त्वपूर्ण पुस्तकें (UGC NET/ PGT/TGT)

💐प्राचीन भारत–के सी श्रीवास्तव, पप्पू सिंह प्रजापत, सौरभ चौबे।
💐मध्यकालीन भारत–सौरभ चौबे, पप्पू सिंह प्रजापत।
💐आधुनिक भारत–परिक्षावाणी, अरविंद भास्कर।
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भारतीय नेपोलियन के नाम से मशहूर समुद्रगुप्त चंद्रगुप्त प्रथम का बेटा था और यह अपने आप को लिच्छवी दौहित्र  कहता था इसने दक्षिण के 12 राज्यों पर विजय हासिल की और इन्ही विजयो का वर्णन हरिषेण ने प्रयाग प्रशस्ति की 19वीं और 20वीं पंक्ति में किया है

समुद्रगुप्त ने अश्वमेध यज्ञ किया था और अपने सिक्कों पर यज्ञयुप उत्कीर्ण करवाया

चीनी स्रोतों से ज्ञात होता है कि समुद्रगुप्त के समय श्रीलंका के शासक मेघवर्मन ने बोधगया में एक विहार बनाने की अनुमति मांगी थी और उसने बौद्ध संघाराम नामक विहार का निर्माण करवाया था
प्रयाग प्रशस्ति में समुद्रगुप्त को कविराजा कहा गया है इसे धर्म प्राचीर भी कहा गया है

एरण अभिलेख में समुद्र उसको सभी राजाओं को हराने वाला कहा गया है सर्वराजोच्छेता , इसी में उल्लेख मिलता है कि समुद्रगुप्त प्रसन्न होने पर कुबेर तथा नाराज होने पर यह हमराज के समान था इस के अनुसार इसने दत्तादेवी से विवाह किया था

समुद्रगुप्त ने बौद्ध भिक्षु वसुबंधु को संरक्षण दिया था
इसने उत्तरी भारत के 9 राजाओं का समूल विनाश किया इसे प्रयाग प्रशस्ति की 21 वी पंक्ति में इसका उल्लेख मिलता है इसके लिए इसने प्रसभोद्धरण  की नीति अपनाई थी


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