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अंग्रेज़ तो चले गए, पर आज़ादी कहाँ है‼️
आचार्य प्रशांत : अंग्रेज़ तो चले गए, पर आज़ादी कहाँ है? आज़ादी गहरी और पेचीदा चीज़ है। पहले भीतर से आज़ाद होना पड़ता है, फिर बाहर के दुश्मनों को खदेड़ा जा सकता है। अगर कोई बाहर वाला आके तुम पर शासन कर लेता है, इसका मतलब तुम पहले ख़ुद से हारे हुए आदमी हो। जो स्वयं को जीते हुए हैं, उन्हें बाहर से ग़ुलाम नहीं बनाया जा सकता। आज़ादी के लिए अध्यात्म ज़रूरी है क्योंकि अध्यात्म तुम्हें ख़ुद के प्रति विजेता बना देता है। जब तक हमारा राष्ट्रीय चित्त भ्रमित रहेगा, तब तक हम नहीं कह सकते कि हम स्वतंत्र हैं।
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पूरा लेख पढ़ें:
Link ⬇️
https://acharyaprashant.org/en/articles/angrez-to-chale-gae-par-azadi-kahan-hai-1_a5ed6de
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#AcharyaPrashant #IndependenceDay #15August #TrueFreedom #APArticle #Spirituality #FreedomFromWithin
आचार्य प्रशांत : अंग्रेज़ तो चले गए, पर आज़ादी कहाँ है? आज़ादी गहरी और पेचीदा चीज़ है। पहले भीतर से आज़ाद होना पड़ता है, फिर बाहर के दुश्मनों को खदेड़ा जा सकता है। अगर कोई बाहर वाला आके तुम पर शासन कर लेता है, इसका मतलब तुम पहले ख़ुद से हारे हुए आदमी हो। जो स्वयं को जीते हुए हैं, उन्हें बाहर से ग़ुलाम नहीं बनाया जा सकता। आज़ादी के लिए अध्यात्म ज़रूरी है क्योंकि अध्यात्म तुम्हें ख़ुद के प्रति विजेता बना देता है। जब तक हमारा राष्ट्रीय चित्त भ्रमित रहेगा, तब तक हम नहीं कह सकते कि हम स्वतंत्र हैं।
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अंग्रेज़ तो चले गए, पर आज़ादी कहाँ है?
जब तक हमारा राष्ट्रीय चित्त भ्रमित रहेगा, तब तक हम नहीं कह सकते कि हम समग्र रूप से स्वतंत्र हैं।
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