बेख़ुदी ले गयी कहाँ हम को
देर से इंतज़ार है अपना
रोते फिरते हैं सारी सारी रात
अब यही रोज़गार है अपना
दे के दिल हम जो हो गए मजबूर
इस में क्या इख़्तियार है अपना
जिस को तुम आसमान कहते हो
सौ दिलों का ग़ुबार है अपना
~ मीर तक़ी मीर
#MirTaqiMir #Ghazal #Poetry
देर से इंतज़ार है अपना
रोते फिरते हैं सारी सारी रात
अब यही रोज़गार है अपना
दे के दिल हम जो हो गए मजबूर
इस में क्या इख़्तियार है अपना
जिस को तुम आसमान कहते हो
सौ दिलों का ग़ुबार है अपना
~ मीर तक़ी मीर
बेख़ुदी - बेख़बरी, आत्मविस्मृति
इख़्तियार - अधिकार, क़ाबू, प्रभुत्व
#MirTaqiMir #Ghazal #Poetry
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